एबीएन सोशल डेस्क। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम अध्यक्ष जगदंबा मां की स्मृति दिवस के पूर्व सप्ताह पर चौधरी बगान, हरमू रोड रांची में स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान में कार्यक्रम किया गया।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए चिन्मय मिशन के सचिव प्रमोद कुमार ने कहा कि जगदंबा सरस्वती ने 14 वर्ष की छोटी आयु में अपना जीवन संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के साथ जन कल्याण व विश्व सेवा में लगाया। जिसके फलस्वरूप आज संस्थान के हजारों सेवा केंद्र मानव के कल्याण एवं जीवन में चरित्र निर्माण का कार्य कर रहे हैं। ब्रह्मा बाबा ने हमें जो शांति का मार्ग दिखाया उस पर हमें चलने का प्रयास करना चाहिए।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा कि जगदंबा सरस्वती के जीवन में ऐसा चमत्कार था कि हर आस्तिक-नास्तिक, विरोधी, श्रद्धालु उनका साक्षात्कार होने पर ऐसा अनुभव करता था कि रूहानी नाते से वे उनकी मां हैं। उनका प्यार, उनकी मधुरता, उनकी पवित्रता, उनके ज्ञान की गहराई और उनका तपस्वी जीवन हर एक को प्रभावित करता था।
विश्ववासिनी नंदन पांडेय, पूर्व प्रोफेसर रांची विश्वविद्यालय ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान और शक्तियों की चेतन्य दिव्य मूर्ति मातेश्वरी श्री जगदंबा, कर्मयोग की ज्ञान-गंगा बहाकर आध्यात्मिक क्षेत्र में पुरुष वर्चस्व के मिथक तोड़कर यह संदेश देने में सफल रही कि आध्यात्मिक पुरुषार्थ और साधना के लिए त्याग, तपस्या और आत्म-अनुभूति ही यथार्थ सत्य है।
कार्यक्रम में उपस्थित मनवीर कौर, काउंसलर ने कहा कि जगदम्बा सरस्वती ने मातृ शक्ति के हाथ में इस भारत को पुन: स्वर्ग बनाने का ध्वज दिया है। हमें मातेश्वरी के समान आज्ञाकारी, वफादार एवं फरमानबरदार बनना है। उनके द्वारा बतायी गयी अनमोल शिक्षा को जीवन में उतारना है।
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने संदेश में कहा कि मातेश्वरी जी ने राजयोग की साधना और सहनशीलता से सारे संसार के सामने धर्म के सत्य मर्म को स्पष्ट किया कि आत्म-अनुभूति और परमात्म-अनुभूति से ही सत्य धर्म की स्थापना होती है, नारियों को पर्दे से ढककर नहीं।
उन्होंने अपने दिव्य व्यक्तित्व के चुंबकीय आकर्षण से हजारों नारियों को स्वयं परमपिता परमात्मा द्वारा इस सृष्टि के परिवर्तन के महान कार्य के लिए निमित्त बनाकर नव-सृजन की राह दिखायी। सभा में उपस्थित सभी भाई-बहनों ने मम्मा के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। साथ ही गाइडेड मेडिटेशन के द्वारा राजयोग का अभ्यास भी किया गया। उक्त जानकारी केंद्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।
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