Moonquake: NASA ने खोला रहस्य
एबीएन नॉलेज डेस्क। जब भी हम भूकंप की बात करते हैं तो हमारा ध्यान धरती पर आता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांद पर भी भूकंप आता है? जी हां, चांद की सतह पर भी कंपन महसूस किए गए हैं जिन्हें मूनक्वेक (Moonquake) कहा जाता है। यह एक बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है जिसे NASA ने अपोलो मिशनों के दौरान खोजा और सिद्ध किया।
पहली बार कब पता चला चांद पर भूकंप आता है?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने साल 1969 से 1977 के बीच चलाए गए Apollo मिशन के दौरान चांद पर विशेष यंत्र यानी सीस्मोमीटर (Seismometer) लगाया था। इस उपकरण ने चांद की सतह पर कंपन दर्ज किए जिससे पता चला कि वहां भी भूकंप आते हैं। यह पूरी तरह वैज्ञानिकों के लिए एक नया और हैरान करने वाला विषय था।
चांद पर भूकंप क्यों आता है?
चांद पर भूकंप आने के कई कारण हो सकते हैं। NASA के अनुसार, मुख्य रूप से चार कारण बताए गए हैं:
- पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण खींचतान (Deep Moonquakes) : चांद और पृथ्वी के बीच गुरुत्व बल काम करता है। जब पृथ्वी की खिंचतान ज्यादा होती है तब चांद के भीतर गहराई में हलचल होती है जिससे गहरे मूनक्वेक्स आते हैं।
- सतह पर दरारें और खिंचाव (Shallow Moonquakes) : चांद की सतह में दरारें या टूट-फूट भी भूकंप का कारण बनती हैं। यह हलचल सतही स्तर पर होती है पर इसका प्रभाव काफी तेज़ होता है।
- तापमान में भारी बदलाव (Thermal Moonquakes) : चांद पर दिन और रात के बीच तापमान का अंतर सैकड़ों डिग्री का होता है। इस बदलाव से सतह में तनाव बनता है जो भूकंप का कारण बनता है।
- उल्का पिंडों की टक्कर (Meteorite Impacts) : जब कोई उल्कापिंड चांद से टकराता है तो इससे भी वहां भूकंप जैसे झटके महसूस होते हैं।
चांद पर भूकंप कितनी देर तक रहता है?
- धरती की तुलना में चांद पर आने वाले भूकंप थोड़े अलग होते हैं। यहां पर:
- कंपन अक्सर कम तीव्रता के होते हैं
- लेकिन उनकी एनर्जी ज्यादा देर तक बनी रहती है
- कुछ मूनक्वेक 10 मिनट तक चल सकते हैं
- कई बार सतह पर दरारें पड़ जाती हैं और कुछ टुकड़े अपनी जगह से खिसक जाते हैं