- पीएम मोदी और नारी शक्ति वंदन अधिनियम...
त्रिवेणी दास
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारतीय महिलाएं स्वभाव से ही ममता, करुणा तथा त्याग की प्रतिमूर्ति होती हैं। परिवार एवं समाज के निर्माण के लिए वे स्वयं को तिल-तिल खपा देने की साहस रखती हैं।
इस समय देश का संसद 3 दिवसीय विशेष सत्र में महिलाओं के लिए संसद एवं विधानसभाओं में 33% आरक्षण के युगांतरकारी विधेयक पर चर्चा कर रही है, जो विकसित भारत को साकार करने के लिए क्रांतिकारी निर्णय के रूप में स्थापित होने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने संबोधन में कहा कि महिला आरक्षण के विरोध को देश याद रखेगा और विरोधियों को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
महिलाओं को आरक्षण देने के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्य के लिए परिसीमन की कार्यवाही आवश्यक है। किसी भी राज्य के साथ परिसीमन करते समय कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और उसके वर्तमान सीटों के आवंटन में 50% की वृद्धि की जाएगी, जिससे महिलाओं को सरलता से आरक्षण का लाभ मिल पाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि हम देश के महिलाओं को उनका अधिकार दे रहे हैं, यह उनके ऊपर एहसान करने जैसा कोई कृत्य नहीं है। दशकों तक महिलाओं के अधिकारों को रोका गया है।
अब तकनीकी बहानेबाजी से रोकने की क्रिया को पुनः दोहराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे देश की जागरूक नारी अब बर्दाश्त नहीं करेगी। आज शुक्रवार को संध्या विधेयकों के ऊपर मतदान होना है। देखना दिलचस्प होगा कि नारी का वंदनीय होना कितना महत्वपूर्ण है।