प्रभु की कृपा पाने के लिए मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक : चैतन्य मीरा

 

  • भक्ति और उल्लास के बीच गूंजा कृष्ण जन्मोत्सव
  • भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में उमड़ा श्रद्धा का सागर
  • प्रभु की कृपा पाने के लिए मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक : चैतन्य मीरा

टीम एबीएन, रांची । सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन न्यास मंडल एवं रघुनंदन टिबरेवाल, ऋषि टिबरेवाल परिवार के संयुक्त तत्वाधान में पोद्दार धर्मशाला, चुटिया रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर परम पूज्य गुरु मां चैतन्य मीरा ने कथा का प्रारंभ भगवान भोलेनाथ की महिमा के वर्णन से किया।

उन्होंने अपने प्रवचन में भगवान शिव की सरलता और करुणा का उल्लेख करते हुए बताया कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि वे अपने भक्तों की थोड़ी सी प्रार्थना पर भी तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने रावण और स्वर्ण लंका का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव ने कुबेर द्वारा निर्मित सोने की लंका भी रावण को दक्षिणा में दे दी थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रभु की कृपा पाने के लिए मन का निर्मल होना अत्यंत आवश्यक है।

 इसी संदर्भ में उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई- निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा- का भावार्थ समझाते हुए कहा कि भगवान केवल निष्कपट और शुद्ध हृदय वाले भक्तों को ही स्वीकार करते हैं।कथा के दौरान मां चैतन्य मीरा ने जीवन में “सुनीति” और “सुरुचि” के अंतर को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि सुनीति का मार्ग प्रारंभ में कठिन अवश्य लगता है, लेकिन उसका फल स्थायी और कल्याणकारी होता है। वहीं, सुरुचि का मार्ग शीघ्र सुख तो देता है, किंतु उसका प्रभाव अल्पकालिक होता है। 

इस संदर्भ में उन्होंने ध्रुव महाराज की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि ध्रुव ने सुनीति का मार्ग अपनाया, प्रारंभ में कष्ट सहा, लेकिन अंततः उन्हें भगवान का साक्षात्कार प्राप्त हुआ।कथा के उत्तरार्ध में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। मां चैतन्य मीरा ने बताया कि कंस जैसे अत्याचारी का अंत करने, पृथ्वी का भार कम करने तथा ऋषि-मुनियों के संताप को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने वासुदेव और माता देवकी के घर जन्म लिया। 

उन्होंने वासुदेव द्वारा बालक कृष्ण को यमुना नदी पार कर नंद बाबा और यशोदा मैया के पास पहुंचाने की लीला का सजीव चित्रण किया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भावविभोर हो उठा। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पंडाल ब्रजधाम में परिवर्तित हो गया हो और सभी श्रद्धालु ब्रजवासी बनकर इस दिव्य आनंद में सराबोर हो रहे हों।

कथा के दौरान मनमोहक झांकियों और सजीव चित्रण ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की बहनों तथा सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन की महिला समिति के सदस्यों को सम्मानित किया गया।

इस पावन अवसर पर फतेहचंद अग्रवाल, प्रकाश मोदी, राधेश्याम अग्रवाल, कमल कुमार अग्रवाल, प्रदीप मोदी, सांवरमल अग्रवाल, केशु अग्रवाल, मुकेश साबू, जितेंद्र कुमार, सुभाष पोद्दार, मुरारी टिबरेवाल, दीपक अग्रवाल, पंकज, कमल, अनमोल, पुलकित, रेखा अग्रवाल, अनु पोद्दार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्तिमय वातावरण और उत्साह का विशेष संचार देखने को मिला।

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