धनबाद : एसएनएमएमसीएच में लापरवाही की जांच और कार्रवाई की मांग

 

शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच), धनबाद में अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एवं निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर कहा कि शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच), धनबाद की स्वास्थ्य व्यवस्था दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। अस्पताल में आये दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों में भय और असंतोष का वातावरण है। हाल ही में अस्पताल के एक वार्ड की छत का प्लास्टर गिरने से कुछ मरीज घायल हो गये। 

सौभाग्यवश कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, किंतु यह घटना अस्पताल भवन के रख-रखाव एवं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। राज्य सरकार द्वारा अस्पताल के रखरखाव एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई जाती है, इसके बावजूद अस्पताल परिसर में साफ-सफाई, रखरखाव एवं मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। 

इसके अतिरिक्त, मरीजों एवं उनके परिजनों द्वारा लगातार यह शिकायत की जाती रही है कि रात्रि के समय विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं रहती, जिससे गंभीर मरीजों के उपचार में विलंब होता है और कई बार उनकी जान भी खतरे में पड़ जाती है। यदि इन शिकायतों में सत्यता पाई जाती है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। 

साथ ही अस्पताल के अधीक्षक डॉ डीके गिंदोरिया के संबंध में भी विभिन्न प्रकार की शिकायतें एवं आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इनके लापरवाही से रात्रि में कोई भी डाक्टर नहीं रहने से मरिजो की जान चली जाती है, क्योंकि जुनियर नर्स के भरोसे पर रात्रि में अस्पताल चल रही है।

चर्चा है कि जबकि डॉक्टर डीके गिदोरिया जब एक सरकारी अधीक्षक हैं, तो यह अपना प्राइवेट नर्सिंग होम (जिसका नाम शक्ति नर्सिंग होम अस्पताल, जोड़ाफाटक, धनबाद है) डीके गिंदोरिया अस्पताल में कम और अपने नर्सिंग होम पर जायदा ध्यान देते हैं। आखिर एक सरकारी अस्पताल के अधीक्षक होने के बाद वो खुद प्राइवेट नर्सिंग होम कैसे चला सकते हैं? आखिर इनके उपर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? 

यह पिछले कई दशकों से धनबाद के सरकारी अस्पताल में जमे हुए हैं। अंत में रत्नेश कुमार ने सरकार से अनुरोध कित ही की इन सभी आरोपों एवं शिकायतों की भी निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करायी जाये तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता अथवा लापरवाही पायी जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। 

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