एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा प्रांत से तिलैया विहार के क्रम में परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर जी महाराज का आगमन झारखंड की राजधानी रांची में हुआ। प्रात: 6 बजे बिरसा चौक से हरमू रोड किशोर गंज के रास्ते भुइयां टोली से विहार होकर लगभग 8.30 बजे मुनिश्री अपर बाजार जैन मंदिर पहुंचे रास्ते में जगह-जगह पर भक्तों ने उनका पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगुवानी की।
मंदिर पहुंचने के उपरांत धर्म सभा हुई धर्म सभा में मुनी श्री ने प्रवचन में कहा कि जो उत्साह पिछले प्रवास में रांची वासियों में था वहीं उत्साह आज भी बरकरार है बल्कि उससे भी ज्यादा उत्साह देखने को मिला। अंतरंग का इनका उत्साह बता रहा है कि यहां के लोग निस्वार्थ साधु की सेवा वैयावृत्ति में निपुण है अग्रणी है।
इनका पुण्य है कि साधु स्वयं ही चातुर्मास को आतुर रहते हैं निश्चित मानकर चलना पुण्य के नियोग से संसार में सामान्य सी वस्तु भी प्राप्त नहीं हो सकती। आपने महान पुण्य किया है कि आपको सहज ही यह सौभाग्य मिल रहा है कि आगामी चातुर्मास रांची में ही जन्मे मुनि श्री 108 ज्ञेय सागर जी महाराज का हो रहा है जिन धर्म का प्राप्त होना, देव शास्त्र की भक्ति प्राप्त होना सहज है। परंतु देव शास्त्र के साथ-साथ गुरु का समागम मिलना दुर्लभ है।
गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती इसलिए गुरु का स्थान अग्रणी है एवं सर्वोत्तम है इसलिए अरिहंत को सर्वप्रथम स्थान मिला है। ग्रंथ पद्मपुराण की कुछ बातें बताई और ऐसी ही कई ज्ञानवर्धक बातें मुनिश्री ने कहीं। सभा का संचालन मंत्री जीतेंद्र छाबड़ा ने किया, और बाहर से आए अतिथियों का स्वागत किया।
सभा में पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, छीतरमल गंगवाल, नरेंद्र पांड्या, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, पदम गोधा, कैलाश बड़जात्या स्मिता पांड्या, वर्तमान कार्यकरिणी के सदस्यों एवं बाहर से आये खूंटी और झुमरीतिलैया के अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
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