भारत में ओरल कैंसर की सबसे बड़ी वजह तंबाकू : डॉ सचेंदर पाल सिंह

 

भारत में ओरल कैंसर का बढ़ता बोझ, तंबाकू सेवन सबसे बड़ी वजह : डॉ. सचेंदर पाल सिंह 

रांची प्रेस क्लब में ओरल कैंसर जागरूकता संवाद एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित 

टीम एबीएन, रांची। तंबाकू छोड़ने के लिए किसी भविष्य की तारीख का इंतजार मत कीजिए। निर्णय आज और अभी लीजिए। तंबाकू की कोई भी मात्रा और कोई भी रूप सुरक्षित नहीं है। यह बात टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन की इकाई रांची कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के कंसल्टेंट सर्जन ऑन्कोलॉजी (हेड एंड नेक) डॉ. सचेंदर पाल सिंह ने शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित ओरल कैंसर जागरूकता संवाद कार्यक्रम में कही।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत दुनिया में ओरल कैंसर के सबसे बड़े बोझ वाले देशों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का व्यापक सेवन है, विशेषकर खैनी, गुटखा, जर्दा तथा अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पाद। उन्होंने बताया कि देश में बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और अब इसकी चपेट में किशोर एवं युवा वर्ग भी तेजी से आ रहा है।

रांची में स्कूली विद्यार्थियों के बीच किए गए एक सर्वे का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग आठ प्रतिशत विद्यार्थियों ने किसी न किसी रूप में तंबाकू का प्रयोग किया था। इनमें अधिकांश की शुरुआत 10 से 15 वर्ष की आयु के बीच हुई थी। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक स्थिति है क्योंकि ओरल कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि अधिकांश मामलों में इसकी शुरुआत किशोरावस्था या युवावस्था में शुरू हुई तंबाकू की आदत से होती है।

उन्होंने कहा कि तंबाकू किसी भी रूप में सुरक्षित नहीं है। तंबाकू में मौजूद अनेक कैंसरकारी रसायन शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे समय के साथ कैंसर विकसित हो सकता है। डॉ. सिंह ने बताया कि तंबाकू और शराब का संयुक्त सेवन ओरल, गले तथा भोजन नली के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। विभिन्न अध्ययनों में यह जोखिम सामान्य व्यक्ति की तुलना में 15 से 30 गुना तक अधिक पाया गया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि ओरल कैंसर की पहचान यदि शुरुआती अवस्था में हो जाए तो इसका इलाज अपेक्षाकृत सरल, कम तकलीफदेह और अधिक सफल होता है। दुर्भाग्यवश, जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में जटिल सर्जरी, जबड़े या जीभ के हिस्से को हटाने तथा उन्नत पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। रांची कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में आधुनिक हेड एंड नेक कैंसर सर्जरी तथा उन्नत पुनर्निर्माण सुविधाओं के माध्यम से ऐसे मरीजों का उपचार किया जा रहा है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि मुंह का कोई भी छाला जो दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो, सफेद या लाल धब्बे, मुंह कम खुलना, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या गर्दन में गांठ जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि तंबाकू छोड़ने के केवल 20 मिनट बाद ही शरीर में सकारात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं और समय के साथ हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी तथा कैंसर का खतरा भी कम होने लगता है।

संवाद कार्यक्रम के साथ रांची कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र की ओर से निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं ओरल, सर्वाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर जांच शिविर का भी आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने कराया, जबकि संचालन कार्यकारिणी सदस्य सौरभ शुक्ला ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य ने किया। इस मौके पर कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, कार्यकारिणी सदस्य अशोक गोप, चंदन वर्मा, अमित सिंह, विजय गोप, संजय सुमन, राजन बॉबी, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद झा, कुंदन कृतज्ञ, भारत भूषण प्रसाद, वेदप्रकाश, करबी दत्ता, पंकज कुमार साव, मृदुला जी बड़ी संख्या में पत्रकार और उनके परिजन मौजूद रहे।

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