टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा श्री नरसिंह जयंती का पावन उत्सव श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री नरसिंह देव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात:कालीन पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच भगवान श्री नरसिंह देव की विशेष पूजा की गयी। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु के चौथे अवतार श्री नरसिंह देव का स्मरण करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सामूहिक रूप से मंत्रोच्चार, जयकारों और भजन-कीर्तन से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। मौके पर मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करायी।
उन्होंने भगवान श्री नरसिंह जी की पावन कथा का श्रवण कराया, जिसमें भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान द्वारा धर्म की रक्षा हेतु प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का संहार करने की महिमा का वर्णन किया गया। अरविंद पांडे द्वारा भगवान को विधिवत भोग भी अर्पित किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल, फल एवं नैवेद्य अर्पित कर मंगल कामनाएं कीं। इसके पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया।
घंटियों की ध्वनि और नरसिंह भगवान की जय के उद्घोष से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। कार्यक्रम का एक अन्य विशेष आकर्षण श्री राधा रानी का अलौकिक एवं आकर्षक श्रृंगार रहा। उन्हें सुंदर पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से सुसज्जित किया गया, जिससे मंदिर की दिव्यता और भव्यता और बढ़ गयी। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा से श्री राधा रानी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने श्री नरसिंह जयंती के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह पर्व सत्य, धर्म और भक्ति की विजय का प्रतीक है।
भगवान नरसिंह ने यह संदेश दिया कि जब-जब अधर्म बढ़ेगा, तब-तब ईश्वर धर्म की रक्षा हेतु अवतरित होंगे। यह दिवस भक्त प्रह्लाद जैसी अटूट श्रद्धा और विश्वास की प्रेरणा देता है। संजय सर्राफ ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
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