अब एआई करेगा दिल की जांच

 

  • AI से होगी दिल की जांच, समय से पहले चलेगा हार्टअटैक के खतरे का पता; IIT धनबाद के प्रोफेसर ने बनाई ऐसी तकनीक

एबीएन हेल्थ डेस्क। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के वैज्ञानिकों ने इकोपल्स नामक एक ऐसी आधुनिक तकनीक विकसित की है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दिल की जांच को बेहद आसान बना देगी।

यह तकनीक कम खर्च में हृदय रोगों की सटीक पहचान कर देगी। आज के दौर में हृदय रोग एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं लेकिन झारखंड के आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 

कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर एसीएस राव ने इकोपल्स नामक एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वर्चुअल रियलिटी (VR) का ऐसा संगम है जो दिल की बीमारियों की जांच को न केवल तेज बनाएगा बल्कि उसे और भी अधिक सटीक और पारदर्शी बना देगा। 

ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी

भारत जैसे विशाल देश में जहां ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञों की भारी कमी है वहां यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। इकोपल्स की मदद से दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात सामान्य डॉक्टर भी विशेषज्ञ स्तर की जांच कर सकेंगे। यह तकनीक जटिल मेडिकल डेटा को इतना सरल बना देती है कि कोई भी स्वास्थ्यकर्मी जीवनरक्षक निर्णय तुरंत ले सकता है।

राष्ट्रीय समर्थन और भविष्य का विजन
प्रोफेसर राव के इस नवाचार की महत्ता को देखते हुए अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) ने इस प्रोजेक्ट के लिए 47 लाख रुपये की फंडिंग मंजूर की है। प्रोफेसर राव का मुख्य उद्देश्य मेडिकल इमेजिंग को डॉक्टर-फ्रेंडली बनाना है ताकि इलाज की प्रक्रिया पारदर्शी हो सके।

यह इनोवेशन न केवल भारत में हृदय रोगों के बोझ को कम करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिकित्सा जगत में भारत का मान बढ़ाएगा। आने वाले समय में यह तकनीक स्वास्थ्य सेवा को हर नागरिक के लिए सुलभ और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।

क्या है इकोपल्स और यह कैसे काम करती है?

आमतौर पर इकोकार्डियोग्राफी की रिपोर्ट्स को समझना और उनका विश्लेषण करना काफी जटिल होता है। इकोपल्स तकनीक इस डेटा का स्वचालित तरीके से विश्लेषण करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका स्व-निरीक्षित लर्निंग मॉडल है।

यह बिना किसी पूर्व डेटा के भी हृदय की पंपिंग क्षमता और छिपे हुए पैटर्न्स को तुरंत पकड़ लेती है। इसके जरिए डॉक्टर दिल की धड़कनों को वर्चुअल रियलिटी में 3D रूप में देख सकेंगे जिससे बीमारी की गहराई को समझना आसान हो जाएगा।

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