टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड चित्रांश विचार मंच द्वारा प्रकाशित चित्रांश मंजूषा-3 स्मारिका का भव्य विमोचन समारोह आज पलाश ऑडिटोरियम, वन भवन, डोरंडा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर साहित्य, कला एवं संस्कृति के विविध आयामों का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में 12 वर्षीय बाल कलाकार अबीर दयाल सत्संगी ने अपने मधुर स्वर में सांसों की माला भजन की प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान चित्रांश मंच के योगदान एवं समाज में उसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। कहा गया कि मंच का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को प्रोत्साहित करना है, जो दूसरों के दुख को अपना समझते हैं, सच्चाई एवं सेवा के मार्ग पर चलते हैं और समाज में भलाई का वातावरण स्थापित करते हैं, वही सच्चे अर्थों में “चित्रांश” कहलाते हैं।
झारखण्ड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष सह पत्रिका संपादक राजीव सहाय ने कहा कि चित्रांश मंजूषा-3 केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, संस्कारों और सृजनशीलता का दस्तावेज है। हमारा प्रयास है कि मंच के माध्यम से साहित्य, कला और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। आज का यह आयोजन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें कलाकारों एवं साहित्यकारों ने अपनी प्रतिभा से इसे सफल बनाया है। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों, साहित्यकारों एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में सांसद (राज्यसभा) दीपक प्रकाश, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंच के सदस्य डॉ राघव शरण, प्रेमचंद श्रीवास्तव, अध्यक्ष संजय पीपरवाल , सचिव प्रखर जयपुरियार, पंकज पियूष, आनंद श्रीवास्तव, दिवाकर, कोषाध्यक्ष साकेत बिहारी शरण, उपाध्यक्ष साकेत शरण ने मुख्य भूमिका निभाई। मंच संचालन श्वेता सिन्हा ने किया। इस अवसर पर काफी संख्या में मंच के सदस्य एवं शहर के गणमान्य उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखण्ड चित्रांश विचार मंच के उपाध्यक्ष राजीव सहाय ने दी।
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