गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को

 

गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा,ज्ञान और संस्कार का महापर्व : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई दिन बुधवार को मनायी जायेगी। यह दिन ज्ञान, संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और गुरु के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। 

भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का संकलन, अठारह पुराणों की रचना तथा महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना कर मानव समाज को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। 

देशभर के आश्रमों, गुरुकुलों, विद्यालयों और धार्मिक संस्थानों में महर्षि वेदव्यास तथा अपने-अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत प्रतीक है। जीवन में शिक्षक, माता-पिता, आध्यात्मिक गुरु तथा वे सभी व्यक्ति गुरु के समान हैं, जो हमें सही मार्ग दिखाते हैं। 

गुरु व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, उसमें नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं तथा उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य ज्ञान, विवेक, अनुशासन और सफलता प्राप्त करता है। इस पर्व का प्रमुख उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है और सच्चा ज्ञान केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है। 

गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन, आत्मशुद्धि तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का भी अवसर प्रदान करती है। इस दिन अनेक श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, सत्संग, ध्यान, योग, भजन-कीर्तन तथा सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। आज के आधुनिक और तकनीकी युग में भी गुरु का महत्व पहले की तरह ही बना हुआ है। 

शिक्षा, विज्ञान, कला, साहित्य, समाज और आध्यात्मिक जीवन-हर क्षेत्र में गुरु का मार्गदर्शन सफलता की आधारशिला है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान करते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में कहा गया है-गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर:। 

गुरु पूर्णिमा हमें यह प्रेरणा देती है कि हम अपने गुरुओं के प्रति सदैव सम्मान, आस्था और कृतज्ञता बनाये रखें तथा उनके बताए आदर्शों और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। यही इस पावन पर्व का वास्तविक महत्व और संदेश है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse