एबीएन सोशल डेस्क। रांची झारखंड की राजधानी रांची आज आध्यात्मिक उल्लास और धर्ममय वातावरण से सराबोर हो उठी, जब परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी महाराज ससंघ का नगर में भव्य एवं मंगल प्रवेश हुआ। आचार्यश्री के आगमन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक अगवानी कर जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।
प्रात: 6 बजे महावीर भवन बरियातू से विहार कर 8 बजे वासुपूज्य जिनालय में मंगल प्रवेश के बाद बाईसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री नेमीनाथ भगवान का निर्वाण दिवस मनाया गया तत्पश्चात जैन मन्दिर अपर बाजार में 8.30 बजे मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर एवं पादप्रक्षालन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। नगर में धर्म, संयम और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया।
इस अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने अपने मंगल संदेश में कहा कि मनुष्य का वास्तविक उत्थान आत्मचिंतन, संयम, सदाचार और करुणा से ही संभव है। उन्होंने सभी से जीवन में अहिंसा, सत्य, क्षमा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और आचरण को श्रेष्ठ बनाना ही सच्ची साधना है।
रांची के जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में आगामी दिनों चतुर्मास रांची में होना है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन, स्वाध्याय एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न होंगे, जिनमें समाज के साथ-साथ सभी धर्मप्रेमी नागरिकों को सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।
मंगल प्रवेश में जैन समाज के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवाओ तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्यश्री के सान्निध्य को रांची के लिए सौभाग्य बताते हुए उनके मंगलमय प्रवास से धर्म एवं संस्कारों के व्यापक प्रसार की कामना की। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
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