युद्ध के बीच दोहरी टेंशन झेल रहा है ईरान!

 

45 दिन से दुनिया से कटा देश, समुद्र में भी बढ़ा तनाव 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान में पिछले 45 दिनों से इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हैं। साइबर निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, देश में नियर ब्लैआउट की स्थिति है और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी 1,056 घंटे से अधिक समय से बाधित है। यह इंटरनेट बंदी उस समय शुरू हुई थी जब यूनाईटेट स्टेट्स और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किये थे। इसके बाद से ईरानी सरकार ने बाहरी डिजिटल संपर्क पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी है। 

इससे पहले भी जनवरी में सरकार ने देशभर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई हफ्तों तक इंटरनेट बंद किया था। मौजूदा ब्लैकआउट ने आम नागरिकों को दुनिया से लगभग काट दिया है। इंटरनेट संकट के साथ-साथ क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ता जा रहा है। ईरान ने यूनाईटेट स्टेट्स की उस योजना का कड़ा विरोध किया है, जिसमें उसके बंदरगाहों पर नाकेबंदी की बात कही गयी है। 

ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि पर्सियन गल्फ और गल्फ आफ ओमान में सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं। अगर ईरान के बंदरगाह असुरक्षित हुए, तो क्षेत्र के अन्य बंदरगाह भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। ईरान ने स्ट्रेट आफ हॉर्मूज पर नियंत्रण बनाये रखने की बात कही है। उसने कहा कि दुश्मन देशों से जुड़े जहाजों को गुजरने नहीं दिया जायेगा व अन्य जहाजों को नियमों के अनुसार अनुमति दी जायेगी। 

ईरान ने अमेरिका के कदम को गैरकानूनी बताते हुए इसे समुद्री डकैती जैसा बताया है। वहीं यूनाईटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू करेगा। 

हालांकि, उसने कहा है कि अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही को रोका नहीं जायेगा। ईरान इस समय दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ डिजिटल ब्लैकआउट और दूसरी तरफ बढ़ता सैन्य व समुद्री तनाव। यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

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