समाज और देश के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम

 

हजरत इमाम हसन और इमाम हुसैन का शानदार इतिहास इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है : मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी 

टीम एबीएन, रांची। आॅल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए उलमा के केंद्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना और मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी ने अपने संदेश में कहा है कि दुनिया में ऐतिहासिक क्रांति लाने में मोहसिन-ए-इंसानियत हजरत मोहम्मद (सल्ल.) ने बेमिसा इतिहास रचा है। आपने अपनी जवानी के दौर में मक्का वालों के बीच ऐसा पवित्र जीवन व्यतीत किया कि पूरा मक्का शहर आपकी अमानत और ईमानदारी का कायल हो गया।

आपने अल-अमीन (विश्वसनीय) बनकर अमानत की हिफाजत करने और हकदार को उसका हक वापस लौटाने की जो महान मिसाल पेश की  उससे पूरी दुनिया हैरान है। मुफ्ती साहब ने बताया कि आपने कभी किसी की अमानत में खयानत (धोखा) नहीं की। मक्का वालों ने आपको अस-सादिक यानी हर हाल में सच बोलने वाला पाया। एक बेहतर इंसान बनने और कामयाबी हासिल करने के लिए ये गुण अनिवार्य और जरूरी हैं। 

इनके बिना कोई भी व्यक्ति एक सफल समाज या विकसित देश का निर्माण नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा कि आपने अपने दोनों नवासों (इमाम हसन और इमाम हुसैन) को बचपन में जो प्यार और स्नेह दिया, वह अपने आप में बेमिसाल है। एक मौके पर आपने अपने साथियों (सहाबा) से फरमाया कि ये दोनों दुनिया में मेरे दो फूल हैं।

हुजूर ने दोनों की शिक्षा और पालन-पोषण पर विशेष ध्यान दिया और दुनिया वालों के सामने यह व्यावहारिक आदर्श पेश किया कि बच्चों को अच्छे शिष्टाचार और शानदार चरित्र का स्वामी कैसे बनाया जाता है। मुफ्ती कासमी ने अफसोस जताते हुए कहा कि इमाम हसन और इमाम हुसैन का जो सकारात्मक किरदार इतिहास में मौजूद है।

आम लोग उससे पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। जिस तरह हजरत मोहम्मद ने सुलह हुदैबिया के अवसर पर दुनिया वालों को शांति का आईना दिखाया और मक्का व मदीना वालों को सुलह पर राजी करके दोनों पक्षों के बीच युद्ध का खतरा खत्म कर दिया, वह आज के शासकों के लिए एक बेहतरीन नमूना और मार्गदर्शक है। 

उन्होंने मौजूदा वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया के शासक एक-दूसरे के देश को कमजोर करने और उनके संसाधनों पर कब्जा करने में लगे हुए हैं। हजारों बेगुनाह इंसानों की जानें जा रही हैं, लेकिन वैश्विक शासक मूक दर्शक बने हुए हैं, मानो दुनिया से इंसानियत मर चुकी है। 

अंत में उन्होंने कहा कि रसूल के नवासे हजरत इमाम हसन ने मुसलमानों के बीच एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करने और उन्हें आपसी खून-खराबे से बचाने के लिए अपनी खिलाफत (शासन) से हटने की घोषणा की और बिना किसी शर्त के हुकूमत हजरत अमीर मुआविया को सौंप दी। हमें इतिहास की इन महान घटनाओं से सबक लेना चाहिए और दुनिया में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए हमेशा अपने अंदर कुर्बानी का जज्बा जिंदा रखना चाहिए।

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