टीम एबीएन, रांची । झारखंड की जेल व्यवस्था गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। यहां भी कर्मचारियों की भारी कमी है। राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में भी कर्मियों की कमी बनी हुई है। जबकि यहां वीवीआईपी से लेकर नामी अपराधी तक सजा काट रहे हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की प्रिजन स्टैटिस्टिक्स ऑफ इंडिया 2024 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य की जेलों में स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 63 प्रतिशत पद खाली हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण जेल प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 32 जेलों में कुल 2,721 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्ष 2024 में केवल 1,008 कर्मचारी ही कार्यरत पाए गए। यानी 1,713 पद रिक्त हैं। स्थिति यह है कि एक जेलकर्मी को औसतन तीन कर्मचारियों का काम संभालना पड़ रहा है।
जेल अधिकारियों पर भी काम का अत्यधिक दबाव है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 816 जेल अधिकारी औसतन 19 कैदियों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी का असर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर साफ दिखाई दे रहा है।
राज्य की जेलों में बंद 16,201 कैदियों के लिए केवल 81 मेडिकल स्टाफ मौजूद हैं। ऐसे में कैदियों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
जेलर और सहायक जेलर के पदों में भी भारी कमी सामने आई है। 29 स्वीकृत जेलर पदों के मुकाबले केवल 6 जेलर कार्यरत हैं, जबकि 67 सहायक जेलर पदों में भी सिर्फ 6 अधिकारी तैनात हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टाफ की कमी का सीधा असर जेलों में चलने वाली सुधारात्मक गतिविधियों पर पड़ रहा है। कैदियों की शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। रिपोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ताओं और मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति की जरूरत भी बताई गई है।
इस मामले पर झारखंड हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। अदालत ने राज्य सरकार से जेलों में खाली पदों और लंबित नियुक्तियों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सरकार ने कोर्ट को बताया था कि सहायक जेलर, वार्डन और मेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
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