टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड के पिरी में पूर्वी भारत के सबसे बड़े उदधिक्रमण संकटमोचन हनुमान धाम का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। करीब 8 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहे इस भव्य धाम में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ 108 फीट ऊंची हनुमान जी की विराट प्रतिमा स्थापित की जानी है। इसी धाम के प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी रांची में संकटमोचन रथ यात्रा निकाली गयी।
रथ यात्रा सुबह 7.30 बजे अरगोड़ा स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुई और कडरू, चुटिया होते हुए हिनू चौक स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। इस शोभायात्रा में शहर के कई डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षाविद और व्यवसायी भी शामिल हुए।
शोभायात्रा के दौरान कडरू स्थित हज हाउस के पास सांप्रदायिक सौहार्द्र का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को माला पहनाकर, चुनरी और अंगवस्त्र भेंट कर तथा अल्पाहार की व्यवस्था कर आपसी भाईचारे और एकता का सशक्त संदेश दिया गया।
इसके बाद रथ कडरू हनुमान मंदिर पहुंचा, जहां मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। कडरू से रथ चुटिया स्थित राम मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां समिति की ओर से पानी, ठंडे पेय, फल और मिठाइयों से स्वागत किया गया। दिनभर चली इस यात्रा का समापन महावीर मंडल न्यास में हुआ, जहां रथ में शामिल श्रद्धालुओं का लस्सी और फल से सत्कार किया गया।
निर्माणाधीन संकटमोचन धाम को एक समग्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में फैल रहे इस धाम में एक एकड़ क्षेत्र में अशोक वाटिका विकसित की जा रही है, जहां 108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होगी। इसके साथ ही 20 हजार वर्ग फीट के विशाल प्लेटफॉर्म पर राम दरबार, शिव परिवार और संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
परिसर में दशरथ कुंड, सीता रसोई, महर्षि वशिष्ठ आश्रम, महर्षि विश्वामित्र आश्रम और माता शबरी आश्रम जैसे पौराणिक स्थलों की स्थापना की जा रही है, जबकि 20 हजार वर्ग फीट का महर्षि वाल्मीकि सभागार भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा यहां सनातन साहित्य के लिए एक विशाल पुस्तकालय भी प्रस्तावित है।
रथ यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा संकल्पित मिट्टी और अक्षत एकत्र किये जा रहे हैं, जिन्हें धाम की नींव में स्थापित किया जायेगा। आयोजकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य के लोगों की आस्था इस निर्माण से सीधे जुड़ सकेगी और यह धाम भविष्य में धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
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