एबीएन एडिटोरियल डेस्क। 2014 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से मोदीजी के कार्यकाल में भारत दुनिया के मंच में एक दूरदर्शी खिलाड़ी/ Proactive Player के स्वरूप में स्थान बनाया है। आज की तिथि में डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग, नितिनयाहू, अयातुल्ला मोजतबा ख़ामेनेई से उनके बीच तनाव एवं विवाद के रहते मोदी जी सबसे बात कर सकते हैं।
रस से बात कर सकते हैं तो यूक्रेन से भी उनकी बात होती है। भारत की छवि उन्होंने एक विश्वसनीय देश के रूप में स्थापित करने की सफलता प्राप्त की है। दुनिया के कई देशों में अपने यहां के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान से मोदीजी को सम्मानित किया है।
अभी हाल में ही मोदी जी ने सबसे लंबे निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया है, जो 144 करोड़ जनता के मध्य उनकी लोकप्रियता को सिद्ध करता है। मोदीजी का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास, और सब का प्रयास उनकी गारंटी को जनसामान्य का विश्वासपात्र बनाया है।
मोदी की आयु 75 वर्ष की हो चुकी है। प्रधानमंत्री रहते हुए पिछले 12 वर्षों में वे कभी थके हुए दिखाई नहीं दिए, उन्होंने कभी छुट्टी नहीं ली और दुनिया के प्रतिस्पर्धा में आशा एवं आत्मविश्वास से नित्य नए-नए मिल के पत्थरों को स्थापित करते जा रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टि से भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को उन्होंने सशक्त बनाया है परिणाम यह है कि आज देश के 20 राज्यों से अधिक राज्य में डबल इंजन की सरकार चल रही है। परिवारवादी क्षेत्रीय दलों के अधिकांश नेता मोदीजी की कार्य पद्धति और विश्वसनीयता से प्रभावित होकर उनके साथ काम करने की इच्छा रखते हुए उनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
भारत में लोकतंत्र के संविधान में मोदीजी की गहरी आस्था है, राष्ट्र प्रथम उनकी भावनाओं में प्रवाहित है और उनका व्यक्तिगत जीवन अत्यंत सधा एवं कसा हुआ है; और यही वे मूल कारक हैं जिसके आधारशिला पर मोदी जी का व्यक्तित्व खड़ा हुआ है। (लेखक स्वतन्त्र स्तंभकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
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