टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हीटवेव के बीच लोगों को पानी के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि सरकार की कई योजनाएं जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
रांची समेत कई शहरों में नगर निगम द्वारा वाटर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह व्यवस्था फेल साबित हो रही है। जल जीवन मिशन के तहत बिछायी गयी पाइपलाइनें कई जगहों पर केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गयी हैं।
शहरों में लगाए गए डीप बोरिंग भी बड़ी संख्या में खराब पड़े हैं। नामकुम प्रखंड के टुंगरीटोली में ग्रामीण आज भी चुआ से पानी भरने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और गंभीर बनी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगाये गये सोलर जलमीनार, सोलर पंप और हजारों हैंडपंप खराब पड़े हैं। कई गांवों में लोग नदी, झरना और कुएं के सहारे प्यास बुझा रहे हैं।
चाईबासा में 2554 सोलर आधारित जल योजनाओं में से 245 योजनाएं खराब पायी गयी हैं। कहीं पंप धंस गए हैं तो कहीं बोरिंग फेल हो चुकी है। इसके कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुमका के पहाड़िया टोला में दो सोलर टंकियों में से एक पूरी तरह बंद पड़ी है, जबकि पांचों चापाकल वर्षों से खराब हैं। यहां करीब 50 आदिवासी परिवार एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
घाटशिला के बृंदावानपुर गांव में एक साल से खराब पड़ी सोलर जलमीनार के कारण ग्रामीण गंभीर जल संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में 52 हजार से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। विभाग मिस्त्रियों की कमी और तकनीकी समस्याओं का हवाला दे रहा है, लेकिन भीषण गर्मी में आम जनता भगवान भरोसे नजर आ रही है।
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