कलमकार खुशबू बरनवाल सीपी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण

 

टीम एबीएन, रांची। खुशबू बरनवाल सीपी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण सह कृति चर्चा प्रेस क्लब मोराबादी रांची में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम दो सत्र में चला। पहले सत्र में पुस्तक लोकार्पण के साथ कृति चर्चा हुई और दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।  पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि  केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ थे। विशिष्ट अतिथियों में राज्यसभा सांसद महुआ मांझी थी। 

डॉ पंपा सेन विश्वास और अनिता रश्मि भी विशिष्ट अतिथि रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची विश्वविद्यालय  हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर अशोक प्रियदर्शी ने किया।  मुख्य अतिथि ने अपनी अनुपस्थिति में शुभकामनाएं वीडियो से दिये। उन्होंने कहा- ऐसी साहित्यिक गतिविधियों द्वारा हिंदी का प्रचार-प्रसार होता है। खुशबू सीपी की साहित्यिक यात्रा भविष्य में उज्जवल हो ऐसी शुभकामनाएं देता हूं। 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंत्रोच्चारण रेणु झा रेणुका ने किया। सुमधुर सरस्वती वंदना डॉ सुरिन्दर कौर नीलम ने खुशबू की पुस्तक सुगंधित सोपान से गाकर भाव विभोर कर दिया। उसके बाद  देशना खुशराज के द्वारा  स्वागत वंदना भरतनाट्यम और कथक नृत्य की प्रस्तुति से सभी दर्शकगण आह्लादित हो गये। 

महुआ माजी के कर कमलों द्वारा तीनों पुस्तकों  का  विमोचन हुआ। खुशबू बरनवाल सीपी की तीनों पुस्तकें तीन भिन्न-भिन्न विधाओं में है। सुगंधित सोपान छंद बद्ध काव्य संग्रह है। सीपी छंदालय, लेखनी छंद की ओर... पुस्तक में छंद के विधि विधान के साथ उदाहरण स्वरूप छन्द बद्ध रचनाएं हैं। जो नवांकुरों और पाठकों के लिए छन्द सीखने की ओर मार्ग प्रशस्त करता है। 

तीसरी पुस्तक कलछी और कलम जो गद्य विधा में लघुकथा संग्रह है। यह पुस्तक उन गृहिणियों को समर्पित है जो कलछी के साथ-साथ कलम की जिम्मेदारी को भी हृदय से निभाती हैं। महुआ माजी ने कहा लेखिका जब मुझे विशिष्ट अतिथि के लिए आमंत्रित कर रही थी तो मैं उनकी पुस्तकों के बारे में पूछी तब उन्होंने बताया कि वह छंदबद्ध काव्य संग्रह लेकर आयी हैं तो मैं प्रभावित हुई। 

मुझे अपना वह समय याद आया जब मैं छन्द सूत्र सीखने का प्रयास कर रही थी मैं सीख नहीं पायी। फिर मेरी विधा बदल गयी और मैं उपन्यासकार व साहित्यकार बन गयी। उनकी पुस्तक नवांकुरों को छंद सीखने का माध्यम बनेगी। तीनों पुस्तकों की परिचर्चा के लिए डॉ राजश्री जयंती, चारुमित्रा, नितेश मिश्र, कामेश्वर कुमार कामेश, पूनम वर्मा, रंजना वर्मा उन्मुक्त ने अपने वक्तव्य दिये। 

वरिष्ठ साहित्यकार अनिता रश्मि ने लेखिका की लगन शीलता, सृजनशीलता और सीखने की चाह को सराहा। वहीं डॉ पंपा सेन विश्वास ने लेखिका के प्रयासों को सराहाते हुए कहा छंद पर रचनाएं कम हो रही हैं और वर्तमान समय में छन्दबद्ध काव्य संग्रह आना खुद में साहित्य जगत के लिए पुरस्कार है। छन्द का सबसे बड़ा उदाहरण हमारा हृदय स्पंदन है। घड़ी की टिक- टिक है। 

वरिष्ठ साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी ने सभी गृहिणियों की सृजन शीलता को नमन किया और उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यदि गृहिणियां अपना कुछ समय सृजन करने में बिताती हैं तो साहित्य जगत को समृद्ध करने में कोई रुकावट नहीं आयेगी। इस कार्यक्रम का सफल संचालन सुप्रसिद्ध लेखक राजीव थेपड़ा से हुआ। तीनों पुस्तकों का आवरण पृष्ठ देशना खुशराज ने बनाया जिसे राज्यसभा सांसद  महुआ माजी  ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 

रियांशी कलछी और कलम पुस्तक में उत्कृष्ट चित्रकारी के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह था कि सभी साहित्यिक पुरोधाओं को  कलछी-कलम और गीता देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन इस कार्यक्रम के आयोजक रजनीश बरनवाल ने किया। इस कार्यक्रम के साक्षी बने- प्रशांत कर्ण, नंदिनी प्रणय, रेनू बाला धार, उर्मिला सिंहा, सोनल थेपड़ा, पुष्पा सहाय, रजनी शर्मा चंदा, ऋतुराज वर्षा, विभा वर्मा, कल्पना, किरण, अनिल गुड्डू, सरोज गर्ग, मनीषा सहाय, कल्पना केसर, सुजाता  जागृति, रिम्मी वर्मा डीआर आकांक्षा चौधरी इत्यादि उपस्थित थे। 

दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन किया गया। जिसमें श्रोताओं के बीच पांच कवियों (नरेश बंका, पंकज धरोहर, सदानंद यादव, सूरज श्रीवास्तव, रंजन वर्णवाल ने काव्य पाठ कर सभी श्रोताओं को हंसा कर लोट-पोट कर दिया तो कभी मंत्र मुग्ध। इस कार्यक्रम का संचालन खुशबू बरनवाल सीपी ने किया। इसमें श्रोता के रूप में बरनवाल बंधु आमंत्रित थे। 

इस कार्यक्रम को बरनवाल सेवा ट्रस्ट, रांची के अध्यक्ष टीपी बरनवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभी बरनवाल बंधुओं को सम्मानित किया गया। इसमें बरनवाल महिला समिति, रांची की अध्यक्ष पूर्णिमा बरनवाल ने कलछी और कलम पुस्तक सशक्त महिला के नाम बताया। 

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