एबीएन एडिटोरियल डेस्क। अगर हर इंसान आत्मविश्वासी होता तो दुनिया कितनी आसान होती। पर अफसोस, बॉडी शेमिंग आज लाखों लोगों के लिए एक दर्दनाक हकीकत है। यह न सिर्फ आत्मविश्वास तोड़ती है, बल्कि इंसान को बिना वजह खुद पर शर्मिंदा कर देती है। जबकि सच यह है कि हर तरह की बॉडी शेप को गर्व से अपनाया जा सकता है।
आमतौर पर माना जाता है कि बॉडी शेमिंग का शिकार सिर्फ ओवरवेट लोग होते हैं। लेकिन हकीकत में, जो भी व्यक्ति मॉडल जैसी कद-काठी का नहीं है, उसे निशाना बनाया जाता है। रंग, कद, दुबलापन, चेहरा, यहाँ तक कि सफल अभिनेता और मॉडल भी तानों से नहीं बच पाते क्योंकि उनका पेशा ही शरीर से जुड़ा है।
बॉडी शेमिंग दो तरह की होती है। पहली, सीधी और कठोर व्यक्तिगत टिप्पणी। दूसरी, समाज और मीडिया द्वारा फैलाया गया वह ज़हर जहाँ परफेक्ट बॉडी को ही सुंदर माना जाता है। इसका नतीजा होता है डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर, आत्म-सम्मान में कमी और कई बार तो किशोरों द्वारा आत्महत्या तक। अध्ययनों के अनुसार, बॉडी शेमिंग गहरा मनोवैज्ञानिक आघात पहुंचाती है। कई लोग न खाने और फिर ओवर-ईटिंग के चक्र में फंस जाते हैं। वे खुद को आईने में आलोचनात्मक नज़र से देखते हैं।
हर व्यक्ति एक खास शरीर के साथ पैदा होता है और उसे बदलने की ज़रूरत नहीं है। बॉडी शेमिंग तब शुरू होती है जब हम खुद को स्वीकार नहीं करते। याद रखें, ईश्वर की हर रचना सुंदर है। कभी-कभी माता-पिता भी अनजाने में बच्चों को नियंत्रित करने के लिए शरीर पर टिप्पणी कर देते हैं। ज़रूरत है खुद पर गर्व करने की। जब हम अपनी बॉडी की इज़्ज़त करेंगे, तो बुलीज़ के ताने बेअसर हो जाएंगे। अपनी पहचान पर गर्व कीजिए, क्योंकि आप जैसे हैं, वैसे ही खूबसूरत हैं।
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