टीम एबीएन, रांची। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां इंसान बाहर से मुस्कुराता हुआ दिखता है, वहीं भीतर कहीं न कहीं थकान, भय, अकेलापन और बेचैनी भी चुपचाप अपना घर बना लेते हैं। ऐसे समय में मन को सुकून, आत्मा को स्पर्श और जीवन को एक नयी दिशा देने के उद्देश्य से हरि ओम स्माइल्स की संस्थापिका डॉ. मोनिका सिंघल कल 27 मई, बुधवार को रांची के स्वर्णभूमि हॉल में आयोजित विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम रूबरू में उपस्थित होंगी।
करीब तीन घंटे तक चलने वाले इस आत्मिक संवाद में डॉ. मोनिका सिंघल सरल, सहज और हृदयस्पर्शी शब्दों में यह साझा करेंगी कि कैसे मनुष्य आडंबर और दिखावे से दूर रहकर जीवन के छोटे-छोटे पलों में भी आनंद को महसूस कर सकता है।
कार्यक्रम में भय से विश्वास की ओर, और स्वयं से आत्मा तक की यात्रा को समझाने का प्रयास किया जायेगा, ताकि व्यक्ति अपने भीतर छिपी शांति और शक्ति से पुन: जुड़ सके। ना कोई तन से अपंग रहे और ना कोई मन से अपंग रहे, इसी भाव को अपना मूलमंत्र बनाकर डॉ. मोनिका सिंघल देश-विदेश में अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा दे चुकी हैं।
अब रांचीवासियों को भी उनके सान्निध्य में कुछ पल बिताने और तनाव, उलझनों तथा मानसिक थकान से दूर आत्मिक शांति का अनुभव करने का अवसर प्राप्त होने जा रहा है। यह कार्यक्रम केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि स्वयं से मिलने और जीवन को नये दृष्टिकोण से महसूस करने की एक भावपूर्ण यात्रा होगा।
उपरोक्त कार्यक्रम 27 मई को सायं 4:30 बजे से सायं 7 बजे तक डंगराटोली स्थित स्वर्णभूमि के सभागार में होगा। प्रवेश नि:शुल्क रहेगा समय से 30 मिनट पूर्व ईस्ट मित्रो सहित परिवार के लोग आकर अपना स्थान अवश्य ग्रहण कर ले। आज उनका सायं रांचीआगमन हुआ एयरपोर्ट पर काफी संख्या में उपस्थित लोगों ने उनको बुके और अंग वस्त्र देकर उनका अभिनंदन और स्वागत किया।
एयरपोर्ट से सभी सदस्यों के संग डॉ मोनिका सिंघल डोरंडा के कल्पतरु वृक्ष के पास पहुंचकर उनके दर्शन किये और उनका पूजा भी किया साथ ही आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर विकास अग्रवाल, अमित शर्मा, रोहित शारडा सहित हरि ओम स्माइल्स, रांची परिवार काफी संख्या में सदस्य मौजूद थे। उक्त जानकारी हरि ओम स्माइल्स रांची परिवार के पदधारियों ने दी है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। लोयाबाद वार्ड संख्या 8 अंतर्गत एकड़ा बासुदेवपुर कोलियरी क्षेत्र के जंगलों में कचरा डंपिंग एवं प्लास्टिक जलाने के मामले को लेकर अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने धनबाद के उपायुक्त को पत्र लिखकर अविलंब कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि रेंकी कंपनी के ठेकेदार द्वारा धनबाद नगर निगम क्षेत्र का कचरा बड़े पैमाने पर जंगलों में डंप किया जा रहा है। वहीं प्लास्टिक एवं अन्य कचरे में खुलेआम आग लगाने से पूरे क्षेत्र में गंभीर प्रदूषण फैल रहा है। लगातार उठ रहे जहरीले धुएं और दुर्गंध से आसपास के ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन, त्वचा रोग समेत कई बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कचरे से उपयोगी सामान निकालकर बेच दिया जाता है, जबकि शेष प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट को जला दिया जाता है, जिससे जहरीला धुआं निकलता रहता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नियमों के अनुसार सूखा एवं गीला कचरा अलग-अलग कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण एवं रीसाइक्लिंग किया जाना अनिवार्य है, लेकिन यहां सभी प्रकार के कचरे को एक साथ फेंककर जलाया जा रहा है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद खतरनाक है। साथ ही जंगलों में रहने वाले जीव-जंतुओं एवं पक्षियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
रत्नेश कुमार ने उपायुक्त से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा क्षेत्र में सुरक्षित एवं वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। इस पत्र की प्रतिलिपि धनबाद महापौर संजीव सिंह एवं नगर आयुक्त को भी भेजी गयी है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। आगामी 30 मई को आयोजित होने वाले इंटक के महाधिवेशन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यूनियन के अध्यक्ष निशीथ जायसवाल ने एक बयान जारी कर कहा कि यह महाधिवेशन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभर के मजदूरों की आवाज को एक मंच पर लाने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित होगा।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पूर्व सांसद सह यूनियन के महासचिव धीरज प्रसाद साहू जी के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से इंटक के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी, श्रमिक नेता एवं सामाजिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। निशीथ जायसवाल ने कहा कि इंटक हमेशा से मजदूर हितों की लड़ाई मजबूती के साथ लड़ती रही है और यह महाधिवेशन उसी संघर्ष एवं एकता की भावना को और सशक्त करेगा।
उन्होंने कहा, आज देशभर में मजदूर वर्ग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सभी श्रमिक संगठनों एवं मजदूर नेताओं का एक मंच पर आना आवश्यक है। 30 मई का यह महाधिवेशन मजदूरों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा को लेकर एक नयी दिशा तय करेगा।
उन्होंने बताया कि महाधिवेशन में श्रमिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जायेगी। विशेष रूप से खनन क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा, रोजगार की स्थिरता, श्रम कानूनों के पालन, मजदूरों के सामाजिक एवं आर्थिक अधिकारों तथा संगठन की मजबूती को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि मजदूरों की समस्याओं को सरकार और प्रबंधन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए संगठन को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महाधिवेशन को लेकर मजदूरों एवं यूनियन कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बैठकें और जनसंपर्क अभियान चलाये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में मजदूर, यूनियन प्रतिनिधि एवं समर्थक इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह महाधिवेशन केवल लोहरदगा या झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के श्रमिक आंदोलन को नयी ऊर्जा देने का कार्य करेगा।
देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले इंटक नेताओं की उपस्थिति मजदूर एकता को और मजबूत करेगी। अंत में निशीथ जायसवाल ने सभी मजदूरों, यूनियन सदस्यों एवं आम लोगों से 30 मई के महाधिवेशन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की अपील की।
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, ओजस्वी साहित्यकार एवं कवि विनायक दामोदर सावरकर की जयंती प्रतिवर्ष 28 मई को मनायी जाती है।
उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वीर सावरकर केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के लेखक, इतिहासकार, कवि, समाज सुधारक और दूरदर्शी विचारक भी थे।
उनकी जयंती राष्ट्रप्रेम, त्याग, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा देने वाला दिवस माना जाता है।वीर सावरकर ने कम उम्र में ही देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का मार्ग चुन लिया था। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध युवाओं में क्रांतिकारी चेतना जागृत करने के लिए अभिनव भारत संगठन की स्थापना की। बाद में वे इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तक-1857 का स्वातंत्र्य समर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नयी दिशा दी। अंग्रेज सरकार ने इस पुस्तक को प्रतिबंधित कर दिया था, क्योंकि इसमें 1857 की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया गया था।वीर सावरकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्हें अंग्रेजों ने दो-दो आजीवन कारावास की कठोर सजा देकर अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल भेज दिया था।
वहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी अपने राष्ट्रभक्ति के संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक कविताएं और लेख लिखे, जिन्हें साथी कैदी याद करके बाहर तक पहुंचाते थे। उनकी लेखनी में राष्ट्रप्रेम, आत्मबल और सामाजिक जागरण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
वीर सावरकर जयंती मनाने का उद्देश्य नयी पीढ़ी को देशभक्ति, साहस, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। उन्होंने जाति-पांति और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया तथा हिंदू समाज में एकता पर बल दिया। वे शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
इस जयंती का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि वीर सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक और क्रांतिकारी दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान की। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी लेखनी को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाया। उनकी कविताएं और लेख आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित करते हैं।
आज आवश्यकता है कि वीर सावरकर के जीवन, संघर्ष, साहित्य और राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सद्भाव और आत्मगौरव की भावना को मजबूत किया जाये। वीर सावरकर जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रेरणादायी पर्व है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 25 5 2025 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में बुंडू प्रखंड कार्यालय में एक दिवसीय विधिक जागरूकता सह रक्तदान शिविर का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के राज्य प्रभारी राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में लगाया गया।
इस शिविर के मुख्य अतिथि राकेश रौशन, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हंश हेंब्रम, अंचल अधिकारी, बुंडू प्रखंड एवं रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम में आए हुए लोगों के बीच विधिक जागरूकता एवं सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना एवं एवं उनकी समस्याओं को सही पटल पर रखकर त्वरित निष्पादन करवाना है।
इस शिविर में उपस्थित प्रखंड की ग्रामीण जनता को विधिक एवं सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के पैनल अधिवक्ता राजेश कुमार सिन्हा के द्वारा दी गई एवं काफी संख्या में ग्रामीणों के द्वारा मुकदमों से संबंधित आवेदन, अबुआ आवास, राशन कार्ड, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, भूमि विवाद से संबंधित आवेदन इस शिविर में आगे की कार्यवाही के लिए जमा किये।
इसके साथ ही सदर अस्पताल से रक्त संग्रहण दल रविन्द्र कुमार के नेतृत्व में इस शिविर में उपस्थित थे, जिन्होंने इस रक्तदान शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के सदस्यों के द्वारा दिये गये रक्त का संग्रहण किया।
सचिव एवं अंचलाधिकारी ने रक्तदाताओं के बीच बिस्कुट, पानी एवं जूस का वितरण किया। सचिव ने शिविर में आये आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही करने एवं सबको सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त करने की बात कही। सचिव को रितेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रुद्राक्ष का पौधा देकर इस शिविर में आने के लिए अपने संगठन की ओर से आभार व्यक्त किया। राज्य प्रभारी राजेश सिंह ने पैनल अधिवक्ता राजेश सिन्हा एवं सीओ, हंस हेंब्रम को भी पौधा देकर सम्मानित किया।
इस शिविर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के बुंडू प्रखंड प्रभारी चौधरी महतो, राम सिंह, जागेश्वर, मुन्ना लाल, जगरनाथ मुंडा, बगराए मुंडा, बिकेस्वर महतो, सदर अस्पताल से रविन्द्र कुमार एवं काफी संख्या में ग्रामीणों का इस एक दिवसीय विधिक जागरूकता एवं रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सराहनीय सहयोग रहा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मश्री से सम्मानित सिमोन बाबा से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान सांसद ने सिमोन बाबा का कुशलक्षेम जाना और उनके स्वस्थ एवं दीघार्यु जीवन की कामना की।
मुलाकात के दौरान सांसद भगत ने कहा कि सिमोन बाबा को जल संरक्षण और जंगल बचाने के लिए बचाने के उनके असाधारण कार्यों के लिए 2016 में पद्म श्री से इन्हें सम्मानित किया गया था।
झारखंड का जल पुरुष भी इन्हें कहा जाता है। 1960 के दशक से ही इन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के पारंपरिक तरीका इस्तेमाल करते हुए कहीं कुएं, तालाब और बांध बनायें। इससे इलाके में जलस्तर में काफी सुधार हुआ और किसानों को काफी फायदा हुआ।
उन्होंने स्थानीय लोग को संगठित करके हजारों पेड़ लगाए और वनों की कटाई रोकने के लिए कड़े सामाजिक नियम भी बनाये थे। पद्मश्री सम्मान उनके नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक है। हम सबके लिए वे प्रेरणास्रोत हैं। बाबा का आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा समाज को नई दिशा देता रहा है।
सांसद ने कहा कि सिमोन बाबा जैसे व्यक्तित्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके अनुभवों से नई पीढ़ी को सीखना चाहिए।
पद्मश्री सिमोन बाबा ने सांसद सुखदेव भगत को आशीर्वाद देते हुए लोहरदगा क्षेत्र के विकास और आदिवासी हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि यदि जमीन से जुड़कर काम करें तो समाज का भला निश्चित है। मौके पर मांडरविधानसभा सांसद प्रतिनिधि, बेडो प्रखंड सांसद प्रतिनिधि एवं अनेक कांग्रेस जन उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। खुशबू बरनवाल सीपी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण सह कृति चर्चा प्रेस क्लब मोराबादी रांची में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम दो सत्र में चला। पहले सत्र में पुस्तक लोकार्पण के साथ कृति चर्चा हुई और दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पुस्तक लोकार्पण के मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ थे। विशिष्ट अतिथियों में राज्यसभा सांसद महुआ मांझी थी।
डॉ पंपा सेन विश्वास और अनिता रश्मि भी विशिष्ट अतिथि रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर अशोक प्रियदर्शी ने किया। मुख्य अतिथि ने अपनी अनुपस्थिति में शुभकामनाएं वीडियो से दिये। उन्होंने कहा- ऐसी साहित्यिक गतिविधियों द्वारा हिंदी का प्रचार-प्रसार होता है। खुशबू सीपी की साहित्यिक यात्रा भविष्य में उज्जवल हो ऐसी शुभकामनाएं देता हूं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंत्रोच्चारण रेणु झा रेणुका ने किया। सुमधुर सरस्वती वंदना डॉ सुरिन्दर कौर नीलम ने खुशबू की पुस्तक सुगंधित सोपान से गाकर भाव विभोर कर दिया। उसके बाद देशना खुशराज के द्वारा स्वागत वंदना भरतनाट्यम और कथक नृत्य की प्रस्तुति से सभी दर्शकगण आह्लादित हो गये।
महुआ माजी के कर कमलों द्वारा तीनों पुस्तकों का विमोचन हुआ। खुशबू बरनवाल सीपी की तीनों पुस्तकें तीन भिन्न-भिन्न विधाओं में है। सुगंधित सोपान छंद बद्ध काव्य संग्रह है। सीपी छंदालय, लेखनी छंद की ओर... पुस्तक में छंद के विधि विधान के साथ उदाहरण स्वरूप छन्द बद्ध रचनाएं हैं। जो नवांकुरों और पाठकों के लिए छन्द सीखने की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।
तीसरी पुस्तक कलछी और कलम जो गद्य विधा में लघुकथा संग्रह है। यह पुस्तक उन गृहिणियों को समर्पित है जो कलछी के साथ-साथ कलम की जिम्मेदारी को भी हृदय से निभाती हैं। महुआ माजी ने कहा लेखिका जब मुझे विशिष्ट अतिथि के लिए आमंत्रित कर रही थी तो मैं उनकी पुस्तकों के बारे में पूछी तब उन्होंने बताया कि वह छंदबद्ध काव्य संग्रह लेकर आयी हैं तो मैं प्रभावित हुई।
मुझे अपना वह समय याद आया जब मैं छन्द सूत्र सीखने का प्रयास कर रही थी मैं सीख नहीं पायी। फिर मेरी विधा बदल गयी और मैं उपन्यासकार व साहित्यकार बन गयी। उनकी पुस्तक नवांकुरों को छंद सीखने का माध्यम बनेगी। तीनों पुस्तकों की परिचर्चा के लिए डॉ राजश्री जयंती, चारुमित्रा, नितेश मिश्र, कामेश्वर कुमार कामेश, पूनम वर्मा, रंजना वर्मा उन्मुक्त ने अपने वक्तव्य दिये।
वरिष्ठ साहित्यकार अनिता रश्मि ने लेखिका की लगन शीलता, सृजनशीलता और सीखने की चाह को सराहा। वहीं डॉ पंपा सेन विश्वास ने लेखिका के प्रयासों को सराहाते हुए कहा छंद पर रचनाएं कम हो रही हैं और वर्तमान समय में छन्दबद्ध काव्य संग्रह आना खुद में साहित्य जगत के लिए पुरस्कार है। छन्द का सबसे बड़ा उदाहरण हमारा हृदय स्पंदन है। घड़ी की टिक- टिक है।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी ने सभी गृहिणियों की सृजन शीलता को नमन किया और उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यदि गृहिणियां अपना कुछ समय सृजन करने में बिताती हैं तो साहित्य जगत को समृद्ध करने में कोई रुकावट नहीं आयेगी। इस कार्यक्रम का सफल संचालन सुप्रसिद्ध लेखक राजीव थेपड़ा से हुआ। तीनों पुस्तकों का आवरण पृष्ठ देशना खुशराज ने बनाया जिसे राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
रियांशी कलछी और कलम पुस्तक में उत्कृष्ट चित्रकारी के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह था कि सभी साहित्यिक पुरोधाओं को कलछी-कलम और गीता देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन इस कार्यक्रम के आयोजक रजनीश बरनवाल ने किया। इस कार्यक्रम के साक्षी बने- प्रशांत कर्ण, नंदिनी प्रणय, रेनू बाला धार, उर्मिला सिंहा, सोनल थेपड़ा, पुष्पा सहाय, रजनी शर्मा चंदा, ऋतुराज वर्षा, विभा वर्मा, कल्पना, किरण, अनिल गुड्डू, सरोज गर्ग, मनीषा सहाय, कल्पना केसर, सुजाता जागृति, रिम्मी वर्मा डीआर आकांक्षा चौधरी इत्यादि उपस्थित थे।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन किया गया। जिसमें श्रोताओं के बीच पांच कवियों (नरेश बंका, पंकज धरोहर, सदानंद यादव, सूरज श्रीवास्तव, रंजन वर्णवाल ने काव्य पाठ कर सभी श्रोताओं को हंसा कर लोट-पोट कर दिया तो कभी मंत्र मुग्ध। इस कार्यक्रम का संचालन खुशबू बरनवाल सीपी ने किया। इसमें श्रोता के रूप में बरनवाल बंधु आमंत्रित थे।
इस कार्यक्रम को बरनवाल सेवा ट्रस्ट, रांची के अध्यक्ष टीपी बरनवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभी बरनवाल बंधुओं को सम्मानित किया गया। इसमें बरनवाल महिला समिति, रांची की अध्यक्ष पूर्णिमा बरनवाल ने कलछी और कलम पुस्तक सशक्त महिला के नाम बताया।
टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में सोमवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में छात्रों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ताला बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक छात्र-प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
बाद में कुलपति, प्रॉक्टर एवं परीक्षा नियंत्रक मौके पर पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर प्रशासनिक भवन का ताला खुलवाया।
छात्रों की मुख्य मांग नई शिक्षा नीति (ठएढ-2020) के तहत सेशन 2023-27 के छात्रों को हो रही परेशानियों को लेकर थी।
छात्रों का आरोप है कि वर्ष 2023 में नामांकन के समय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी कि वे चार वर्षीय पाठ्यक्रम एवं ठएढ के नए नियमों के अंतर्गत अध्ययन करेंगे। साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि प्रत्येक वर्ष दो सेमेस्टर की परीक्षाओं को मिलाकर 75 प्रतिशत पेपर पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा छात्रों को ईयर बैक का सामना करना पड़ेगा।
छात्र नेताओं ने कहा कि कई छात्र वर्तमान में सेमेस्टर-5 तक पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी तक सेमेस्टर-1 से सेमेस्टर- 4 तक की अंकपत्र उन्हें उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे में छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जबकि उनका शैक्षणिक सत्र वर्ष 2027 में समाप्त होने वाला है।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों को एनईपी का एक्सपेरिमेंट छात्र बताते हुए समस्याओं को सहने की बात कही। छात्र नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना एवं छात्र विरोधी बयान बताया। काफी देर तक चली वार्ता और छात्रों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेशन 2023-27 के सेमेस्टर-5 के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर सहमति जतायी। इसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया।
छात्र नेताओं ने इसे छात्र एकता और संघर्ष की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश सचिव राजेश सिंह, अनुष्का सिंह, शिवम सिंह, राज दुबे, योगेश महतो, बिट्टू वर्मा, रोशन नायक एवं रवि ने किया।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse