एबीएन डेस्क, रांची। हिंदपीढ़ी के लाह फैक्ट्री रोड में अपराधियों ने मोजाहिद आलम की उसके घर के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी। वह लाह फैक्ट्री रोड में रहता था। घटना शनिवार रात नौ बजे की है। घटना के बाद पुलिस ने एक आरोपी शाहीद लंगड़ा को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरा आरोपी राजा फरार है। घटना के विरोध में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। आरोपी के भट्टी चौक स्थित घर में तोड़फोड़ की। इसके बाद घर में आग लगा दी। इसमें शाहिद का घर पूरी तरह से जल गया। सूचना पर पुलिस पहुंची। दमकल को बुलाया गया और आग बुझाई गयी। मौके पर तैनात पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया। जानकारी के अनुसार मुजाहिद ने आरोपी राजा और उसके भाई शाहीद लंगड़ा को घर के पास से हटने को कहा था। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। इसके बाद राजा ने मुजाहिद को गोली मार दी। मुजाहिद को परिजन अंजुमन अस्पताल ले गये, जहां से रिम्स रेफर कर दिया गया। रिम्स में पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों ने मृतक से शराब पीने के लिए 200 रुपये मांग रहे थे। पैसे नहीं देने पर उन्होंने गोली चला दी थी।
एबीएन डेस्क। चक्रवाती तूफान जवाद के प्रभाव से झारखंड में ठंड बढ़ गई। तूफान के कारण राज्य के कई इलाकों में सात डिग्री तक तापमान गिर गया है। सबसे ज्यादा असर कोल्हान और आसपास के इलाके में पड़ा, जहां शनिवार को दिनभर बारिश होती रही। इस बीच, मौसम के मिजाज के देखते हुए एलेप्पी समेत तीन ट्रेनों को शनिवार को रद्द कर दिया गया। तूफान के कारण शनिवार को राज्य के अधिकांश हिस्से में दिनभर बादल छाए रहे। रांची समेत कुछ स्थानों पर दिनभर धुंध की स्थिति बनी रही। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा का बहाव होता रहा, इसके कारण ज्यादा ठंड महसूस हुआ। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि कोल्हान इलाके में दिनभर रिमझिम बारिश हुई। सिमडेगा में भी बूंदाबांदी होती रही। जमशेदपुर में शाम साढ़े पांच बजे तक 0.7 मिमी बारिश रिकार्ड हुई। तूफान की वजह से सूबे में रविवार को भी कहीं-कहीं बारिश होगी और हवा चलेगी। छह दिसम्बर को भी दक्षिणी भाग में हल्की बारिश संभव है। सात दिसंबर से तूफान का असर कम होगा और आसमान धीरे-धीरे साफ हो जाएगा। इसके बाद पश्चिम से ठंड हवा का बहाव होगा और राज्य में लोग ठंड महसूस करेंगे।
रांची। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने पेट्रोल पंप संचालकों के हड़ताल पर जाने की घोषणा पर कहा कि राज्य सरकार की ढुल मूल रवैया के कारण आज आम जनता के साथ-साथ पेट्रोल पंप संचालक परेशान हैं। राज्य सरकार और उसमें शामिल दल झामुमो, कांग्रेस और राजद के पेट्रोल डीजल की कीमत घटाने की दिशा में दोहरा चरित्र उजागर हुआ है। इस सरकार में खाने के दांत और हैं और दिखाने के और। कल तक पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर हाय तौबा मचाने वाली पार्टियों को आज लगता है सांप सूंघ गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करके जनता को बड़ी राहत दी है, फिर ऐसे में अब झारखंड सरकार की भी जिम्मेवारी बनती है कि वह वैट घटाकर आम लोगों को राहत दे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जनहित में पेट्रोल से 5 रुपया और डीजल से 10 रुपया की कीमत की कटौती करते हुए जनता को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित एवं अन्य राज्यों ने भी अपने हिस्सा की दर को कम कर आम जनता को राहत पहुंचाया है।
रांची। एचईसी प्रबंधन यथाशीघ्र हम मजदूरों का 6 माह का वेतन एकमुश्त भुक्तान करे। साथ ही एचईसी मजदूर संघ केंद्र सरकार से मांग करती है कि एचईसी के प्रभारी सीएमडी नलिन सिंघल का सेवा विस्तार को अविलंब वापस लिया जाए और स्थाई सीएमडी दिया जाए। एचईसी में सभी कर्मचारियों का 6 महीना से वेतन बकाया है लेकिन यहां पर प्रबंधन एक तरफ कहती है कि पैसा नहीं है दूसरी तरफ वेतन ना देकर अपने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को बैक डोर से वेतन के बदले एडवांस पेमेंट देकर एक बार फिर मजदूरों के हित के साथ खिलवाड़ किया है। यहां प्रबंधन को एडवांस पेमेंट के जगह, सीधा वेतन देना चाहिए। यही सब गलत नीतियों के कारण मजदूर मजबूर होकर आंदोलन करने के लिए बाध्य हुआ है। यह आंदोलन हम सब मजदूरों का है, एचईसी मजदूर संघ(इटर) मजदूरों के साथ है। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुनील कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
रांची। भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर एक महान योद्धा, नायक, विद्वान, एक मनीषी दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाजसेवी, संविधान के शिल्पकार और धैर्यवान व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश के कल्याण कामना में लगा दिया। उनका जीवन पूरे मानव जाति के लिए समर्पित रहा। वे विश्व भर के दलित, शोषित, वंचित और उपेक्षित सब के लिए आशा की किरण थे। वे सिर्फ दलितों के मसीहा ही नहीं थे, वे हर अमानवीय घटना के खिलाफ आवाज उठाने वाले महापुरुष थे। हर शोषित ,पीड़ित दबे- कुचले की आवाज थे। उन्हें सिर्फ भारत की सीमाओं में बांधना ठीक नहीं होगा। मानवता में जिनको भी विश्वास है, उन सब के लिए वे मानवीय मूल्यों के रखवाले थे। उक्त बातें भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुनीता सिंह ने कही। वह बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस की तैयारी को लेकर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। 6 दिसंबर को भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस है और उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए हम सबके मन में हमेशा एक सवाल उठता रहा है कि आजादी के इतने वर्षों बाद और उनके निधन के 60 वर्षों बाद तक देश की सत्ता में सबसे अधिक वर्षों तक काबिज कांग्रेस पार्टी ने ऐसे महान पुरुष की याद में कुछ भी क्यों नहीं किया? हम जानते हैं, इसका जवाब कांग्रेस के पास नहीं है। यह बात सत्य है कि बाबा साहब अपने जीते जी सामाजिक छुआछूत के शिकार थे और मरने के बाद भी राजनीतिक छुआछूत के शिकार हुए। ठीक इसके विपरीत हम सबों को मोदी सरकार को धन्यवाद देना चाहिए कि 2014 में मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही बाबा साहब अंबेडकर के कामों को, उनके विचारों को, सहेजने, समेटने और विश्व पटल पर लाने का काम लगातार कर रही है। 14 अप्रैल 21 को बाबा के जीवन पर आधारित 4 किताबों का विमोचन करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक गरीब मां का बेटा, अति पिछड़े समाज से आने वाला व्यक्ति, आज देश का प्रधानमंत्री है, तो यह बाबा साहब की देन है। बाबा का जन्म मध्यप्रदेश के महू में शुभेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की 14 वीं संतान के रूप में हुआ था। यह सच है कि देश में सरदार वलभ्भ भाई पटेल जी ने राजनीतिक बिखराव को समेटते हुए राजनीतिक एकीकरण का काम किया था, तो भीमराव अंबेडकर जी ने राजनीतिक संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक एकीकरण का बीड़ा उठाया था। लेकिन इन दोनों ही महापुरुषों को उनके मान-सम्मान से वंचित रखा गया। मोदी सरकार ने बाबा साहब से जुड़ी पंचतीर्थ के वर्षों -वर्षों से लंबित पुराने फाइलों को निकालकर उस काम को पूरा करके दिखाया। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को इतना मान सम्मान और श्रद्धांजलि किसी दूसरी सरकार ने नहीं दी, जो मोदी सरकार ने दी है। मोदी सरकार द्वारा भारतीय इतिहास में बाबा साहब को वह दर्जा देने की कोशिश की जा रही है, जिसके वे हकदार थे। उनकी याद में पंचतीर्थ का निर्माण किया गया। उनका जन्म स्थल मध्य प्रदेश के मऊ में बीजेपी की सरकार ने भव्य स्मारक बनाया। लंदन जहां उन्होंने शिक्षा पाई थी, उस जगह को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया। मुंबई में इंदु मिल की जगह पर एक भव्य स्मारक बनाया गया। नागपुर में भी उनकी याद में स्मारक बनाया गया। 14 अप्रैल 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में उनके स्मारक के उद्घाटन के समय कहा कि यह स्थान, यह तीर्थ सिर्फ ईंट और गारे की इमारत पर नहीं है, बल्कि जीवंत संस्थाएं हैं। विचार के सबसे बड़े संस्थान हैं। इमारत भव्य भी है और इमारत दिव्य भी है। मोदी सरकार की पहल पर 125 सालों में पहली बार यूनाइटेड नेशन में उनकी जन्म जयंती मनाई गई। पहली बार दुनिया के 102 देशों में उनकी जयंती मनाई गई। और पहली बार देश की संसद में बाबा साहब पर दो दिवसीय चर्चा हुई। जनधन खातों की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश बाबासाहेब आंबेडकर के कदमों पर चलते हुए तेजी से गरीब, वंचित, शोषित, पीड़ित सभी के जीवन में बदलाव ला रहा है। बाबा साहब की जयंती पर पी एम द्वारा देश के लिए स्वास्थ्य योजना में से एक आयुष्मान भारत योजना को लांच किया गया।बाबा साहब की 126 जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा नागपुर में भीम ऐप को आधार कार्ड से जोड़कर लांच किया गया। मोदी सरकार ने दलितों के अधिकार के लिए बनाए गए कानून को और भी मजबूत बनाया।और अत्याचार को रोकने के लिए कानून को और भी सख्त किया। शिक्षित बनो, संगठित बनो, और संघर्ष करो - बाबा साहब का नारा 21 वीं शताब्दी के लिए भी मुख्य बातें हैं ।समाज के आखिरी छोर पर बैठे लोगों को शिक्षित करना है, जो अभी भी वंचित है। 100% साक्षरता को हमें देश में प्राप्त करना है और इसके लिए मोदी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रमिकों के श्रम के 12- 14 घंटे को कम कर 8 घंटे करने में बड़ी भूमिका निभाई। लेबर लॉ की फाउंडेशन के रचयिता बाबा साहब थे ।भारत की संघीय ढांचा को मजबूत करने के लिए उन्होंने एक स्वतंत्र फाइनेंस कमीशन की रचना की। लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव की गारंटी के लिए इलेक्शन कमिशन की व्यवस्था दी। महिलाओं को ससक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाएं। दुनिया के धनवान देश, प्रगतिशील देश, लोकतंत्र की दुहाई देने का मोनोपोली रखने वाला देशों में भी महिलाओं को 50 -50 सालों तक मताधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन एक दलित मां के कोख से पैदा हुए बेटा ने भारत में संविधान के पहले दिन से ही भारत की महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया। महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए हिंदू कोड बिल को लाया ।महिलाओं को कोयले की खान में काम करने से मुक्ति दिलायी। बाबा साहब ने संपत्ति में महिलाओं के अधिकार की बात उठायी।और जब उस समय की तत्कालीन सरकार ने इसे नहीं माना तो उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया। आजादी की लड़ाई में हमारे लाखों करोड़ों स्वाधीनता सेनानियों ने समरस समावेशी भारत का सपना देखा था। उन सपनों को पूरा करने की शुरूआत बाबा साहब ने देश को संविधान देकर की थी। बाबा साहब ने भारत देश की बीमारी को पकड़ा और उसका सही उपचार किया ।बाबा के विचार आज भी हमारे लिए अनुकरणीय हैं और हमेशा रहेगा। अपने एक वक्तव्य में पी एम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अगर मार्टिन लूथर किंग की चर्चा दुनिया करती है तो उन्हें बाबा साहब को याद करने के लिए भी मजबूर कर देगा। पूरी दुनिया बाबा साहब को जाने, समझे, उनके विचारों, आदर्शों से प्रेरणा लेकर उनके महान राष्ट्र के सपना को पूरा करने के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी ।बाबा साहब ने जो कहा, वह जी करके दिखाया और जीवन पर्यन्त सामाजिक असमानता को दूर कर सामाजिक न्याय के लिए काम करते रहें।
रांची। आगमन का शाब्दिक अर्थ है आना। ख्रीस्तीयों के जीवन में आगमन काल एक महत्वपूर्ण अवधि होने के साथ विशेष मायने रखता है। इसकी शुरूआत प्रति वर्ष ठीक ख्रीस्त राजा पर्व के बाद के रविवार से होती है। आगमन के प्रथम रविवार से ही ख्रीस्तीय विश्वासी नए पूजन वर्ष में प्रवेश करते है। जिसका समापन ख्रीस्त राजा पर्व के साथ होता है। वास्तव में आगमन काल ख्रीस्त जयंती महापर्व की आध्यात्मिक तैयारी का है। मसीही विश्वासियों के लिए ख्रीस्त जयंती महोत्सव की सामाजिक व आध्यात्मिक दोनों तैयारी की अवधि है आगमन काल। उक्त बातें रांची के आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो एसजे के सचिव फादर सुशील टोप्पो ने कही। आगमन काल के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आगमन काल में 16 दिसंबर से 24 दिसंबर वह खास अवधि होती है जिसमें मसीही येसु मसीह के आगमन पर मनन-चिंतन करते हुए उनके स्वागतार्थ आध्यात्मिक तैयारी करते है। चार सप्ताह के इस आगमन काल का समापन 25 दिसम्बर को सोल्लास येसु ख्रीस्त का जन्मोत्सव मनाकर किया जाता है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि सामाजिक व आध्यात्मिक ये दोनों क्रिसमस की तैयारी के दो पक्ष है। सामाजिक तैयारी के तहत लोग ख्रीस्त के आगमन पर बतौर उनके स्वागत अपने घर-द्वार की साफ-सफाई, कर उसका रंग रोगन करता हैं। इसके साथ ही घर को हर संभव तरीके से सुसज्जित किया जाता है ताकि उनका घर बालक येसु के लिए अनुकूल चरनी बने। वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक तैयारी के तहत प्रत्येक मसीही मन, वचन और कर्म की शुद्धता से येसु के आगमन की बाट जोहता है। इसके लिए विश्वासी अंत:करण की शुद्धि में बढ़ते हुए विश्वास, भरोसा और प्रेम से अपने हृदय को सजाते संवारते है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि हमारी माता कलीसिया आगमन की अवधि में आध्यात्मिक तैयारी हेतु आमंत्रित करती है। यही वजह है किआगमन काल की अवधि में परिवार हो या समुदाय, पल्ली हो या धर्मप्रांत किसी भी तरह के बड़े-बड़े कार्यक्रर्मों आयोजन नहीं किया जाता है। जैसे विवाह, प्रीतिभोज, पार्टिया,सम्मलेन आदि वर्जित है। इसमें ख्रीस्त विश्वासी अपना समय गरीबों और जरुरत मंदों की सेवा में, प्रार्थना में, रिट्रीट में, अपने जीवन का आत्मंथन करने में तथा हर नजरिए से अपने जीवन को ख्रीस्तीय मूल्यों के साथ बेहतर बनाने में, मिस्सा पूजा में शामिल होने, पाप स्वीकार संस्कार ग्रहण करने तथा परोपकार कार्य करने में बिताते है। फादर सुशील टोप्पो ने बताया कि क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारी हमें उस रहस्यात्मक घटना का स्मरण कराती है जिसमें शाश्वत ईश्वर का पुत्र, प्रतिज्ञात मसीह और मानवजाति के मुक्तिदाता शरीर धारण करता है। मानव जाति के इतिहास में यह महानतम, अनुपम और अद्वितीय घटना है। अकल्पनीय वरदान और अपार आनन्द का कारण है। आगमन का काल मसीहियों को यह स्मरण कराता है कि वे पापी हैं और वे अपने आप पाप से उबर नहीं सकते है इसके लिए सभी एक मुक्तिदाता के लिए तरसते है। एक मुक्तिदाता की आशा करते है। साथ ही मुक्तिदाता के आगमन के लिए अनुनय-विनय करते है। उन्होंने कहा कि मसीही विश्वास के अनुसार ईश्वर ने हमें इतना प्यार किया कि उसने अपने एकलौते पुत्र को इस संसार को दे दिया ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे उसका सर्वनाश न हो, बल्कि उसे अनन्त जीवन प्राप्त हो। आगमन काल में चार रविवार हैं। जिसमें हमारी कलीसिया क्रमश: चार बिन्दुओं आशा, शांति, आनंद और प्रेम पर ध्यान केंद्रित करती है। प्रत्येक विश्वासी इन्ही मूल बातों पर मनन करते हुए प्रभु के जन्म (क्रिसमस) की तैयारी करते है। उन्होंने बताया कि प्रभु का आगमन हमें याद दिलाता है कि जब हम प्रार्थना के लिए एकत्रित होते है तो हमारे प्रभु विराजते है। जब पवित्र धर्मग्रंथ बाईबल का पाठ करते है तो प्रभु वचन सुनते हैं। हमारे दिलों में प्रभु का आगमन होता है। जब जब हम पवित्र मिस्सा, पवित्र बलिदान में भाग लेते है, तब तब हमारे जीवन में प्रभु का आगमन होता है।
रांची। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने आज धनबाद पहुंचने पर बीसीसीएल के कुसुंडा क्षेत्र के कोयला खदानों मे व्यू पॉइंट से कोयला खनन कार्यों का जायजा लिया। साथ ही खनन कार्यों मे प्रयुक्त होने वाली तीन भारी वाहनों का उद्घाटन भी किया। मौके पर राज्यपाल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने विदेशों में भी अंडरग्राउंड माइनिंग देखी है। काफी दिनों से ओपन कास्ट माइनिंग देखने की इच्छा थी। आज धनबाद पहुंचने पर ओपन कास्ट माइनिंग में कोयला खनन कार्यों के साथ-साथ यहां की व्यवस्था एवं प्रबंधन इत्यादि का जायजा लिया। मौके पर उपायुक्त संदीप सिंह, एसएसपी संजीव कुमार, बीसीसीएल के सीएमडी सहित जिला प्रशासन एवं बीसीसीएल के अधिकारी उपस्थित रहे। इससे पूर्व धनबाद परिसदन पहुंचने पर उपायुक्त सिंह एवं एसएसपी कुमार ने राज्यपाल का स्वागत किया। धनबाद परिसदन में उन्हें गार्ड आफ आनर दिया गया।
रांची। झारखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने आज रेल मंत्री को चिट्ठी लिखकर हटिया से पुणे के हडपसर बीच एक अतिरिक्त रेल सेवा शुरू करने की मांग की है। ज्ञात हो कि हटिया से पुणे के बीच एक द्विसाप्ताहिक रेल सेवा पहले से मौजूद है जो अपनी पूरी क्षमता से परिचालित होती है। आईआरटीटीसी 2020 की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ है कि हडपसर से हटिया के बीच एक साप्ताहिक सुपरफास्ट ट्रेन का परिचालन हो। पोद्दार ने रेल मंत्री से इस बात का उल्लेख किया है कि पुणे जानेवाले यात्रियों की संख्या झारखण्ड में बहुत है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन के परिचालन से इन दोनों शहरों के बीच द्दढ़ वाणिज्यिक सम्पर्क स्थापित होंगे एवं रेलवे के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
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