टीम एबीएन, गुमला। उपायुक्त गुमला शिशिर कुमार सिन्हा ने उप विकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी को साथ लेकर आज बिशुनपुर प्रखंड के सेरका एवं चिरोडीह पंचायतों में विशेष केंद्रीय सहायता मद से संचालित सौर्य आधारित माइक्रोलिफ्ट सिंचाई योजना की गुणवत्ता, कार्यशीलता तथा उपयोगिता की जांच कर आवश्यक दिशा- निर्देश दिए। उपायुक्त ने सेरका पंचायत स्थित कुल्हवार नदी पर संचालित सौर आधारित माइक्रोलिफ्ट सिंचाई योजना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में योजनांतर्गत कार्य संतोषजनक पाया गया। कार्यस्थल पर 02 सौर आधारित लाईट भी क्रियाशील पाए गए। उपायुक्त ने योजना का अधिकाधिक लाभ वहां के किसानों को दिलाने का निर्देश दिया। उन्होंने इस योजना से आसपास के खेती युक्त भूमि को भी हरा-भरा बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उपायुक्त ने ग्रामीणों से वातार्लाप कर लोगों के सामूहिक समस्याओं की जानकारी प्राप्त की। जिसपर ग्रामीणों द्वारा विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता बताई गई। उपायुक्त ने सेरका पंचायत के ग्रामों में 15 वीं वित्त आयोग मद अंतर्गत विद्युत सुविधा बहाल करने का आश्वासन दिया। उपायुक्त ने चिरोडीह पंचायत स्थित देवगानी ग्राम में कोयल नदी पर विशेष केंद्रीय सहायता मद अंतर्गत संचालित सौर आधारित माईक्रोलिफ्ट सिंचाई योजना का निरीक्षण किया। इंटेक वेल के जांच के क्रम में इंटेक वेल के निर्माण कार्य की गुणवत्ता असंतोषजनक पाई गई। इसपर उपायुक्त ने इंटेक वेल के पारापेट को ऊंचा करने के साथ-साथ कार्य में सुधार लाने का निर्देश कनीय अभियंता को दिया। इसके साथ ही उन्होंने इंटेक वेल को अच्छे से ढंकने पर भी जोर दिया। निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त शिशिर कुमार सिन्हा सहित उप विकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी, अंचल अधिकारी बिशुनपुर धनंजय पाठक, जिला योजना पदाधिकारी सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी विभूति कुमार सिंह, जिला अभियंता जिला परिषद तारणी प्रसाद मुखिया, सहायक अभियंता जिला परिषद ए रहमान सहित, कनीय अभियंता, सेरका पंचायत के मुखिया व अन्य मौजूद थे।
बेरमो/ललपनिया। गुरुवार को मुरुबन्दा स्थित आवास में गोमिया क्षेत्र के लोकप्रिय पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद से हजारी पंचायत के खुदगड्डा गांव के युवाओं ने मुलाकात की। इस दौरान युवाओं ने पूर्व विधायक के समक्ष अपनी पीड़ा से अवगत कराया। और उन्हें बताया कि खुदगड्डा में ओएनजीसी गैस उत्सर्जन से संबंधित अपने कार्य में स्थानीय शिक्षित युवाओं की अनदेखी कर बाहर के लोगों से काम करवा रही है। जबकि हम लोग यहां के रैयत हैं और अपनी जमीन ओएनजीसी को दिया है। हम सभी पढ़े लिखे हैं लेकिन हमें रोजगार नहीं दिया जा रहा है। इससे हमलोग आहत और आक्रोश भी है। युवाओं ने पूर्व विधायक से इस दिशा में शीघ्र पहल करते हुए ओएनजीसी प्रबंधन से बात कर रोजगार दिलाने का आग्रह किया है। युवाओं के पीड़ा सुनने बाद पूर्व विधायक योगेंद्र प्रसाद ने मिलने आए सभी युवाओं को भरोसा दिया है कि ओएनजीसी की मनमानी अब नहीं चलने देंगें। स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना ही होगा और हक भी बनता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे इस दिशा में सार्थक प्रयास करेंगे।
टीम एबीएन, हजारीबाग। जिले में विधि व्यवस्था को लेकर उपायुक्त आदित्य कुमार आनंद एवं पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चौथे ने पुलिस सभी थाना प्रभारियों, प्रखंड और अंचलाधिकारियों के साथ बैठक की है। समाहरणालय सभागार में संयुक्त रूप से हुई इस बैठक में जिले में अपराधियों पर नकेल कैसे कसा जाए इस पर रणनीति बनाई गई। पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उपायुक्त ने कहा कि विगत दो सालों से कोविड महामारी के कारण जिले में लॉ एण्ड आर्डर की नियमित बैठक नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि छिट-पुट वारदातों से जिले के छवि धूमिल होती है। इसलिए यह जरूरी है कि अपराधियों पर नकेल कसी जाय। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के स्थिति पूर्व के मुकाबले अब सामान्य है। इसलिए पुलिस प्रशासन विधि व्यवस्था को लेकर नये सिरे से रणनीति के तहत कार्य करे। उन्होंने सीसीए प्रस्ताव के तहत नामित अपराधियों पर निगरानी रखते हुए ऐसे व्यक्तियों के गतिविधियों पर नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश सभी थाना प्रभारियों को दिया। बैठक में उपायुक्त आदित्य कुमार आनंद ने आने वाले त्योहारों से संबंधित फीडबैक प्राप्त करते हुए पुलिसिया चौकसी बढ़ाने, नियमित निगरानी, सूचना तंत्र, वाहनों की चेकिंग, रोड सुरक्षा, संवेदनशील जगहों को चिन्हित करते हुए चौकसी बढ़ाने, सहित विधि व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सतर्कता एवं सक्रियता को लेकर व्यापक निर्देश दिया। पुलिस कप्तान मनोज रतन चौथे ने कहा कि जिले में कई सक्रिय गैंग जेल में और कई बेल पर बाहर हैं। उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर बनाये रखने की आवश्कयता है। पुलिस मुस्तैदी के साथ कार्य कर रही हैं हमें और सतर्क व चाक चौबंद रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त लोगों के पकड़े जाने पर छः महीने की हवालात में रखने की कानूनी इजाजत मिली हुई है इसलिए इस ओर विशेष कार्य करें। उन्होंने इंटर स्टेट बार्डर क्षेत्रों पर गश्ती और निगरानी को सख्त करने की बात कही।
टीम एबीएन, चाईबासा। पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी थाना क्षेत्र में अहले सुबह पुलिस जवानों और पीएलएफआई उग्रवादी दिनेश गोप के दस्ते के बीच मुठभेड़ हुई है। यह मुठभेड़ सिदमा-टेमना पहाड़ी क्षेत्र के जंगलों में हुई है। पुलिस के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान यह मुठभेड़ हुई। पश्चिम सिंहभूम पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा ने बताया कि सुबह पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप के दस्ते के साथ मुठभेड़ हुई है। दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई है। पुलिस को भारी पड़ता देख पीएलएफआई सदस्य भाग खड़े हुए हैं। पुलिस सर्च कर रही है। इस दौरान दैनिक उपयोग की सामग्री मिली है।
एबीएन डेस्क ( डाॅ कोरनेलियुस मिंज)। पसंगी के बेसे हीदकाबे हो बूढ़ी जाड़ में बूढ़ा के बचाबे देख तो कनकनी कैसन, कहियो नइ भेलैं तैसन काठी झूरीक तीहा ना भूलाबे हो समय, माहौल, परिस्थिति और अवसर के अनुरूप तत्क्षण रचना करने में पारंगत पांडेय दुर्गानाथ राय नागपुरी के सशक्त हस्ताक्षर हैं। गीत-कविता रचने में उनका कोई शानी नहीं है। वे एक ऐसे पुष्प हैं जिनकी उपस्थिति सबके मन में खुशबू भर देती है। मल्लिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत में ठीक ही लिखा है - “फूल मरै, पै मरै न बासू" यह पंक्ति पांडेय दुर्गानाथ राय पर पूरी तरह सटीक बैठती है। वे आज भी नागपुरी साहित्य जगत में पुष्प सुंगध बिखेर हैं। “मनुष्य-मनुष्य में है अंतर कोई हीरा कोई कंकर। व्यक्ति अपने कार्यों से हीरा या कंकर अर्थात श्रेष्ठ या भ्रष्ट बन जाता है। पांडेय दुर्गानाथ राय नागपुरी साहित्य एवं झारखंडी कला संस्कृति जगत के हीरा हैं। फादर पीटर शांति नवरंगी की पंक्ति पांडेय दुर्गानाथ राय के व्यक्तित्व पर विचार क्रम में सहज ही सामने आ जाती है- ”जग में पाकर नर अवतार, करो शुभ काम विचार । जिससे पाओ सुख अभिराम, जग में रहे तुम्हारा नाम।। वस्तुतः हर व्यक्ति का जन्म किसी न किसी उद्देश्य की सिद्धि के लिए हुआ है। जिसे पांडेय दुर्गानाथ राय ने भलीभांति सिद्ध किया। नागपुरी मधुर साहित्य है। इस अमूल्य धरोहर की रक्षा करने, इसे सजाने, संवारने, विकसित करने, इसके भंडार को भरने एवं प्रकाशित करने में जिन मनीषियों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है, उनमें एक अग्रणी पुरूष पांडेय दुर्गानाथ राय भी हैं। वे नागपुरी साहित्य सेवक, साधक और मार्गदर्शक थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी विराट व्यक्तित्व वाले ऐसी शख्सियत बिरले ही मिलते हैं। वे सिर्फ साहित्य साधक और साहित्य सेवी ही नहीं थे, बल्कि समाजसेवी और कला के भी साधक थे। ऐसे वरदान पुरूष का जन्म पांच जनवरी 1910 ई. को मांडर प्रखंड अंतर्गत सकरा गाँव मंे हुआ था। उन्होंने प्राइमरी तक की पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद सकरा गांव एवं आस-पास के बच्चों को पढ़ाने लगे। तत्पश्चात उनकी नियुक्ति गाँव के सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद हुई। लगभग 30 वर्षों तक शिक्षण कार्य किये। वे मुखिया भी निर्विरोध चुने जाते थे। उनके विरूद्ध कोई भी नामांकन नहीं करता था। शिक्षक और मुखिया का पद बखूबी संभालते थे। आकाशवाणी राँची में योगदान देने के बाद मुखिया के पद पर कार्य करते रहे। आकाशवाणी में उनकी नियुक्ति 1958 ई. में बतौर वादक के पद पर हुई थी, लेकिन लेखन में पारंगत होने के कारण रेडियो के लिए रचनाएं भी करते थे। वे कुशल वक्ता थे। कार्यक्रम प्रस्तुति का अंदाज बेहद खूबसूरत और आकर्षक था। जिस कारण वे देहाती दुनिया (अभी हमारी दुनिया) कार्यक्रम में सीबू भाई के नाम से भाग लेते थे। आकाशवाणी में काम करते हुए उन्होंने नागपुरी में कई गीत, कविता, हास्य व्यंग्य रचनाएं, कथा आदि लिखा। वे झूमर गीत गाने में उस्ताद थे। उनका लिखा और गाया गया एक लोकप्रिय झूमर गीत इस प्रकार है - हायरे हायरे देहाती गांवे दुख भारी, ए भाई सेहों में गरीबी हय लाचारी, देहाती .... नहीं मिले काम काज, रिन के बढ़त बाज चलय सूद महावारी, ए भाई, बाकी जे पड़े मालगुजारी दूध घी छोड़ू बात भागे जोगे मिले भात।। साग पात तरकारी, ए भाई जखंय नित कलवा बियारी।। वे छऊ नृत्य के कुशल नर्तक थे। अपने गाँव सकरा में मंडा पूजा प्रारंभ कराया था, जिसमें छऊ नृत्य का आयोजन करते थे। घोड़ा नाच में पारंगत थे। बाराती पक्ष हो या सराती पक्ष मुखौटा लगाकर नकली दाढ़ी, मूँछ, बाँह में चाँवर, पैर में घुँघरू बाँधे अपने पारंपरागत लकड़ी बाँध से बनाये गये घोड़े पर सवार होकर आकर्षक घोड़ा नाच करते थे। पहले शादी विवाह में घोड़ा नाच अवश्य होता था। एक बार की बात है। एक जगह शादी में सराती और नेवथरिया आये थे। घोड़ा नाच के लिए तैयारी पूरी की गयी। फिर पांडेय दुर्गानाथ राय की खोज होने लगी, लेकिन वे नहीं मिले। जब मेरघेरइ के सराती पंक्ति में घोड़ा नाच होने लगा तो पांडेय दुर्गानाथ राय अचानक एक छोटे से टटू में बैठ कर उसे नचुवाने लगे। सिर में मेंजूर झालर लगाये, गोगल्स पहनें और नकली दाढ़ी मूँछ लगाकर। उनकी ये अवस्था देखकर लोग हँस-हँस के लोट पोट हो गये। पांडेय दुर्गानाथ राय कहानी लेखन करते थे। रेडियो के लिए कई नागपुरी कहानियां लिखीं। जिनमें संघइत, संगत से गुन होत है संगत से गुन जात है, बीगो बाप, बुइझ गेली, फतींगा पांड़े की चतुराई, बुधू से बुधनागर, चुटकुला बात से, नोन्हा बनिया की कहानी, कंजूस आउर मक्खी चूस आदि शामिल हैं। संघइत कहानी में शराब के दुष्प्रभाव का चित्रण है। इसी तरह बुइझ गेली कहानी बचत योजना पर केंद्रित है। रेडियो में काम करने के कारण कई रेडियो नाटक और रूपक भी लिखे। नाटकों में पहलवान, जय मंगल गौंझू घरे छठी, डहरू डहर देखालक, अकिल से सब कुछ, रेडियो रूपक में गहना नइ पिंधब, कतारी रोपबे करब, पाछे नइ रहब, तिलक दहेज, ग्राम सपराई, जितिया कइसन मनाली, सीबू भाई से भेंट आदि प्रमुख हैं। पहलवान नाटक में स्वच्छता को महत्व दिया गया है। चूहों से नुकसान संगीत रूपक भी बहुत लोकप्रिय हुआ था। परिवार कल्याण पर कई रेडियो नाटक लिखे। बड़े परिवार में अभाव को दर्शाने के लिए एक प्रसंग का गीत भी दिया गया है - छउवे पुता सब मिलके... चैदह झन खवइया... कतनो धान उपजेला... का होइ पांचे छव महीना में... सिराय जायला, तबसे वोहे कीन... के खायक। उनकी कुछ रचनाएं इस प्रकार हैं - रात्रि पाठशाला खुलल सगरे गे सजनी... चलु संगी नांव तो लिखाब... केउ ना रहु ठेपा धारी गे सजनी... चलु संगी नांव लिखाब। परिवार नियोजन से संबंधित गीत - कहू कहू हाल चाल काले इसन हाल... दादा मोतीलाल चेपो काले भेलैं दुइयो गाल... कतना सुंदर काया रहे तो मोटाल... दादा मोतीलाल अब तो भेल खोखोढ़ाल... दुर्गानाथ कहैं आगे करली न ख्याल... बुचू हीरालाल छोटे परिवार खुशहाल। बचत पर गीत - खरच करबैं कम, पान-बीड़ी एकदम छोड़ी देबैं ए भाई, रेडियो से सुनली उपाई। कचे काचा जामा करी, रूपीया जखने पुरी धरी आबैं ए भाई बूंद -बूंदे तालाब भरी जाई। कविता निर्गुण - सुगा हायरे हायरे तोंय तो सुगा उड़ी जाबे रूपू उड़ी जाबे न जानी कखन डेना, फहराबे तोंय तो सुगा। छोंड़ी के हजारों काम, रटीले खूब राम राम तोंय तो सुगा धरम निशान कुछ छोड़ी देबे तोंय तो सुगा पांडेय दुर्गानाथ राय बहुप्रतिभा संपन्न साहित्यकार और कलाकार थे। उन्होंने नागपुरी के अलावे हिंदी, बंगला और संस्कृत में भी रचनाएं कीं। उनकी एक गीत पुस्तक मधुकुंज छपी है। जिसमें उनकी 27 गीत संकलित हैं। इस पुस्तक का प्रकाशन आकाशवाणी रांची के पूर्व उदघोषक प्रमोद कुमार राय के प्रयास 1984 ई. में हुआ था। अभी उनकी दर्जनों नागपुरी गीत, कविताएं, नाटक, कथा, हास्य व्यंग्य रचनाएं अप्रकाशित हैं। उनकी प्रत्येक रचनाओं को संकलित कर यदि प्रकाशित किया जाये तो यह नगपुरी साहित्य के लिए धरोहर साबित होगा। ऐसे कुशल एवं बेजोड़ कवि, गायक, गीतकार, संगीतकार, कलाकार पांडेय दुर्गानाथ राय 11 नवबंर 1988 को चिर निद्रा में सो गये, लेकिन उनकी रचना नागपुरी साहित्य जगत में आज भी खुशबू बिखेर रही है। (लेखक गोस्सनर काॅलेज रांची में नागपुरी विभाग के प्रोफेसर हैं।)
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कोरोना संक्रमण की गति धीमी हो गई है। बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज रिकवर हो रहे हैं। जिससे झारखंड में कोरोना एक्टिव केस की संख्या घट कर चार हजार से भी नीचे पहुंच गई है। राज्य में 2 फरवरी को 50,216 सैंपल की जांच की गई, जिसमें 601 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं 1189 कोरोना संक्रमित ठीक भी हुए हैं। बुधवार, 2 फरवरी को 1189 कोरोना मरीजों के रिकवर होने से झारखंड में एक्टिव केस की संख्या 3781 बची है। वहीं, 3 लोगों की कोरोना से मौत भी हुई है। बुधवार को कोरोना से मरने वालों में रांची से 1 और सरायकेला से 2 लोग हैं। राज्य में करीब हर रोज कोरोना से लोगों की जान जा रही है, जिससे झारखंड में कोरोना से मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 5306 पर पहुंच गया है। राज्य में बुधवार, 2 फरवरी को 24 में से 22 जिलों में कोरोना के नए केस मिले हैं। पाकुड़ और जामताड़ा ऐसे दो जिले रहे, जहां 2 फरवरी को कोरोना के कोई केस नहीं मिले हैं। 2 फरवरी 2022 को जहां-जहां नए केस मिले हैं उसमें सबसे ज्यादा, 214 नए केस जमशेदपुर में मिले हैं। जिसके बाद रांची में 177 नए कोरोना संक्रमित की पहचान हुई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को जमशेदपुर में 214, रांची में 177, सिमडेगा में 36, लातेहार में 32, धनबाद में 24, कोडरमा में 20, बोकारो में 19, पश्चिमी सिंहभूम 16, पलामू में 12, देवघर और खूंटी में 9, दुमका और गोड्डा में 7, गुमला में 6, चतरा में 4, गिरिडीह में 3, हजारीबाग, गढ़वा और सरायकेला खरसावां में 2-2 और लोहरदगा, रामगढ़ और साहिबगंज में 1-1 नए केस कोरोना के मिले हैं।
टीम एबीएन, लोहरदगा। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक सुखदेव भगत के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के उपरांत बुधवार को लोहरदगा कांग्रेस मुख्यालय राजेंद्र भवन में जिला कांग्रेस परिवार द्वारा स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।जिसमे सुखदेव भगत अपने समर्थकों के साथ स्वागत समारोह में शामिल हुए इससे पूर्व सुखदेव भगत की आवास से सैकड़ों समर्थकों द्वारा मोटरसाइकिल जुलूस निकाला गया जो मुख्य मार्ग होते हुए कांग्रेस मुख्यालय राजेंद्र भवन पहुंचा जहां पर जमकर आतिशबाजी किया गया व मिठाइयां बांटी गई। वहीं अनेक स्थानों में सुखदेव भगत का भव्य स्वागत किया गया। मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक सुखदेव भगत ने कहा कि भाजपा में शामिल होना उनका परिस्थितिजन्य निर्णय गलत था जिसे सुधारने का अवसर मिला है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी का हृदय बहुत विशाल है। एक परिवार की तरह माफ किए मुझपर विश्वास किए और पार्टी में शामिल करवाया। श्री भगत ने कहा कि उनके डीएनए में पीढ़ी दर पीढ़ी कांग्रेस है। कांग्रेस से जाने के बाद पता चला था कि उन्होंने क्या खोया उन्हें आत्मग्लानि हुई। इसे दूर कर लोहरदगा में संगठन को धारदार बनाना है। झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है जनता को कांग्रेस से काफी उम्मीद है। लोहरदगा के विधायक डॉ रामेश्वर उरांव सुबे के मंत्री है और हमारे बड़े भाई धीरज प्रसाद साहू राज्सभा सांसद है। उनके साथ संयुक्त रूप से मिलकर सरकार की योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक को मिले उसके लिए सार्थक प्रयास किया जाएगा। श्री भगत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिनका वे हकदार है प्रशासनिक अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार करें और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान दें। श्री भगत ने कहा कि डॉ रामेश्वर उरांव, धीरज प्रसाद साहू के साथ मिलकर गांव-गांव तक संगठन को मजबूत किया जाएगा। स्वागत समारोह में आए सभी कांग्रेसीजन का श्री भगत ने तहे दिल से उनका आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा और कार्यकर्ताओं में स्वभाविक खुशी थी। कार्यक्रम का संचालन कांग्रेस नेता आलोक कुमार साहू ने किया। मौके पर शहादत हुसैन, लाल धनंजय नाथ शाहदेव, जिला परिषद के उपाध्यक्ष जफर खान, नगर परिषद के उपाध्यक्ष रऊफ अंसारी, मोहन दुबे, कार्तिक कुजूर, साजिद अहमद चंगू, णाल अभिषेक, शाहिद अहमद बेलू, मनोज भगत, फुलदेव उरांव, हाजी अलीम अंसारी, सुरेश राम, विजय चौहान लाल, शनीचरवा उरांव, विकास शाहदेव, अनवर अंसारी, सत्यजीत सिंह, किशोर उरांव, ताहिर अंसारी, राजू कुरैशी, मनान खान, नूर मोहम्मद, धनंजय काश्यकार, मुन्ना पाठक, संजय सिंह, उदय केसरी, कुदुस दबंग, रंजन उराव, इम्तियाज अंसारी, रफीक अंसारी, लाल पप्पू शाहदेव, अनमोल भगत, मुर्तुजा खलीफा, रिजवान अंसारी ,दया उरांव, राजू टाना भगत, मोइन अंसारी, तजमुल अंसारी, यूनुस खान, शमशेर अंसारी, प्रमोद पासवान, संदीप उरांव, रोशन, मनोज भगत, देवनाथ उरांव, राजकुमार उरांव, गोवर्धन राम, सीताराम पासवान, अक्षय सहदेव, चैंपियन सहदेव, माजिद चौधरी, एजाज अहमद, सुरेश उरांव, अबुल अंसारी, जावेद अहमद, मुन्ना खान, इरशाद आलम, संतोष गोप, तारीक अंसारी, रफीक अंसारी, नीरज सिंह, सतीश रमेश, सैयद राज, सैयद सेफ, बिहारी उरांव सहित अनेक कांग्रेसीजन उपस्थित थे।
टीम एबीएन, लोहरदगा। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद उरांव ने कहा प्रेस बयान जारी करते हुए कहा है कि हेमन्त सोरेन सरकार झारखण्ड में भाषा- संस्कृति पर अतिक्रमण कर रहा है। झारखण्ड के आदिवासियों-मूलवासियों हेमन्त सोरेन को झारखण्ड के बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए, माइन्स-मिनरल पर अधिकार दिलाने, ठेकेदारी में सरलीकरण करते हुए 1 रुपये में लाइसेन्स बनाकर काम दिलाने, जल- जंगल - जमीन की सुरक्षा के लिए लिए बड़ा जनादेश दिया। 2 साल बीत गया एक तरफ हेमन्त सरकार कोरोना का बहाना बनाती है और दूसरे तरफ हर जिले में जमीन की लूट हो रही है, जेपीएससी घोटाला हो रहा है, ट्रांसफर- पोस्टिंग की गोरख धंधा चल रहा है। अब तो हद ये हो गई की जिस हेमन्त सोरेन को झारखण्ड की अवाम ने भरोसा और विश्वास किया। वहीं आज झारखण्ड की भाषा-संस्कृति पर अतिक्रमण कर रही है, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । अरविंद उरांव ने कहा है की झारखण्ड की माटी और भाषा-संस्कृति को हमलोगों को मिलकर बचाना है किसी भी सूरतेहाल में झारखण्ड में भोजपुरी, मगही, अंगिका, मैथिली जैसे बाहरी भाषाओं को झारखण्ड में मान्यता देना हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अरविंद उरांव सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि झारखण्डवासियों के हक एवं अधिकार के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम 13 फरवरी को सरना भवन, नगड़ा टोली रांची में होगा तथा झखरा कुंबा, वीर शिवाजी चौक लोहरदगा में 5 फरवरी 2022 , समय - 1 बजे सभी आदिवासी सामाजिक/ धार्मिक अगुवा गणों, युवा साथियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में झारखण्ड की भाषा-संस्कृति पर हेमन्त सरकार द्वारा अतिक्रमण पर ठोस रणनीति बनाई जाएगी और सम्पूर्ण झारखण्ड में भयानक आन्दोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी ।
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