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Published / 2026-05-15 23:25:52
48 घंटे में कई चीजें हुईं महंगी, बिगड़ा घर का बजट

  • जनता पर महंगाई का चौतरफा अटैक, 48 घंटे में कई चीजें महंगी, घर का बिगड़ा बजट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते 48 घंटों में सोना-चांदी, दूध, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे जनता पर महंगाई का चौतरफा अटैक देखने को मिल रहा है।

सोने-चांदी में उछाल 

सबसे पहले सरकार द्वारा सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद इनके दामों में तेज उछाल आया। बाजार में सोना करीब 11,000 रुपए और चांदी 22,000 रुपए तक महंगी हो गई। इससे ज्वेलरी खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा।

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी 

इसके बाद दूध कंपनियों ने भी कीमतों में इजाफा कर दिया। अमूल और मदर डेयरी ने पैकेज्ड दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। नई दरें 14 मई से लागू हो चुकी हैं।

पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम

इसी बीच तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी। 

नई कीमतें 15 मई से लागू हुई हैं। बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत अन्य बड़े शहरों में भी ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है।

CNG हुई महंगी 

महंगाई का असर सीएनजी पर भी पड़ा है। दिल्ली और मुंबई में सीएनजी की कीमतें 2 रुपए प्रति किलो तक बढ़ा दी गई हैं। दिल्ली में अब सीएनजी 79.09 रुपए प्रति किलो, जबकि मुंबई में 84 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। 

लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में महंगाई को लेकर चिंता और गहरा सकती है।

Published / 2026-05-15 21:43:53
भारत-यूएई के बीच पेट्रोल-एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता

इस $5 बिलियन की डील के बाद क्या जनता को मिलेगी राहत? 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी की यूएई यात्रा ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। 5 अरब डॉलर के निवेश और नये तेल समझौतों के साथ भारत ने न सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि भविष्य के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की है। 

दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा भारत के लिए बहुत राहत भरी साबित हुई है। 

आपको बता दें कि अपनी पांच देशों की यात्रा के दौरान अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया।  इस दौरे का सबसे बड़ा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच तेल और निवेश को लेकर कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। 

ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक समझौते 

पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच हुई बातचीत में भारत की तेल जरूरतों को पूरा करने पर खास जोर दिया गया। दोनों देशों ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) और एलपीजी की सप्लाई को लेकर एक बड़ा समझौता किया है।  

इसके अलावा भारत की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क भी तैयार किया गया है। समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए वाडीनार में एक शिप रिपेयर क्लस्टर बनाने पर भी सहमति बनी है, जिससे जहाजों की मरम्मत भारत में ही हो सकेगी। 

$5 बिलियन का भारी निवेश 

इस यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग सेक्टर में होने वाला निवेश है। यूएई ने भारतीय प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है।  

ये भारी राशि भारत के विकास कार्यों को तेजी देगी। साथ ही इसी साल जनवरी में हुआ 3 अरब डॉलर का एलपीजी सौदा भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

भारत की तैयारी 

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता है। तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन को बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।  

वर्तमान में भारत के पास 69 दिनों का कच्चा तेल और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। पीएम मोदी ने जनता से भी अपील की है कि वे संकट के इस समय में गैर-जरूरी खर्चों से बचें और ईंधन का उपयोग समझदारी से करें।

Published / 2026-05-14 22:08:18
सूरत की कपड़ा फैक्टरी से मुक्त कराये गये 91 नन्हें बाल मजदूर, सबसे छोटा महज 7 साल का

एबीएन सोशल डेस्क। सरकार, प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की छापे की एक साझा कार्रवाई में ट्रैफिकिंग के जरिये लाये गये और सूरत की एक कपड़ा फैक्टरी में मामूली पैसों पर खटाये जा रहे  91 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया। मुक्त कराये गये इन बच्चों की उम्र सात से 14 के बीच है।

हालांकि भनक लगते ही सभी ट्रैफिकर और फैक्टरी मालिक मौके से फरार हो गये। मुक्त कराये गये बच्चों में से ज्यादातर राजस्थान के जनजातीय इलाकों के हैं जबकि तीन उत्तर प्रदेश के और एक-एक बच्चे झारखंड व बिहार के हैं। इन सभी को बाल कल्याण समिति, सूरत के समक्ष पेश किया गया और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।    

गायत्री सेवा संस्थान (जीएसएस) की छानबीन के आधार पर हुई छापे की इस कार्रवाई में जीएसएस सहित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, राजस्थान के 22 पुलिस अफसरों, सूरत के पूना थाने के अफसरों के साथ नागरिक समाज संगठन एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) भी शामिल था। एवीए और जीएसएस देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के काम कर रहे 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी हैं। 

गायत्री सेवा संस्थान महीने भर से सूरत की इस कपड़ा फैक्टरी की निगरानी कर रहा था और छानबीन में यहां बड़ी संख्या में बाल मजदूरों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद उसने एनसीपीसीआर को इसकी जानकारी दी। मुक्त कराए बच्चों ने फिर पुलिस को सुराग दिए और उन्हें उन जगहों का पता बताया जहां बाल मजदूरी करायी जा रही थी। 

गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने बताया, ह्लबच्चे हमें एक इमारत के पास ले गये जो बाहर से बंद थी। लेकिन उन्होंने बताया कि अंदर बच्चे काम कर रहे हैं। हम जब अंदर गये तो पाया कि वहां सात साल तक के बच्चों से काम कराया जा रहा था। सभी बच्चे घबराए हुए और बदहवासी की हालत में थे और 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद थके हुए थे। 

डॉ. पंड्या ने बताया कि अंदर जाने के बाद वे बच्चों की बदहाली देखकर दंग रह गये। आठ साल के एक बच्चे के पास पहनने को शर्ट तक नहीं थी। वह दूसरे बच्चों के पीछे छिप गया और उनसे पूछ रहा था कि क्या कोई थोड़ी देर के लिए अपनी शर्ट उसे दे सकता है। उन्होंने पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि पुलिस और सभी हितधारकों की त्वरित कार्रवाई और मामले को गंभीरता से लेने के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को मुक्त करा पाना संभव हो पाया।  

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इन बाल दुव्यार्पारियों और फैक्टरी मालिकों ने संदेह से बचने के लिए तमाम तरीके अपना रखे थे। छोटे बच्चों को बिल्कुल सुबह यहां लाया जाता था और फिर इमारत के दरवाजे बाहर से बंद कर दिये जाते थे। शाम को सात बजे काम की शिफ्ट खत्म हो जाने के बाद ही दरवाजे खोले जाते थे।  

इन सभी बच्चों को आस-पास की कालोनियों में बहुत ही दयनीय और अमानवीय हालत में रखा जाता था। एक छोटे से कमरे में 10 से 12 बच्चे रहते थे जहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था। पूछताछ के दौरान कुछ बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता को पता था कि उन्हें मजदूरी के लिए यहां लाया गया है। 

उधर, ज्यादातर छोटे बच्चों ने बताया कि उन्हें घुमाने के नाम पर यहां लाया गया था और उन्हें कतई अंदाजा नहीं था कि यहां उनसे मजदूरी करायी जायेगी। यह भी पता चला कि कुछ बच्चे इन कपड़ा इकाइयों में तीन-चार साल से काम कर रहे थे जबकि बाकियों को हाल ही में यहां लाया गया था। मुक्त कराये गये बच्चों में आठ और दस साल के दो भाई भी थे जिन्हें राजस्थान के उदयपुर जिले से लाया गया था। 

ट्रैफिकिंग गिरोहों और बाल मजदूरी के तार मजबूती से जुड़े होने को रेखांकित करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, इस छापे से यह तथ्य स्थापित हो जाता है कि ट्रैफिकिंग गिरोह कितने संगठित हैं और उनकी जड़ें कितनी गहरी हैं। खास तौर से जनजातीय इलाकों और संवेदनशील परिवारों के बच्चों को झूठे वादों के जाल में फंसा कर ऐसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेल दिया जाता है जहां वे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं और अपना बचपन खो बैठते हैं। 

यह मामला एक बार फिर अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत बनाने, बाल मजदूरी की मांग व आपूर्ति पर नजर बनाये रखने, बच्चों का शोषण करने वाले नियोक्ताओं और शोषण में शामिल सभी बिचौलियों की धरपकड़ और उनकी जवाबदेही तय करने की तत्काल जरूरत को साबित करता है। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

Published / 2026-05-13 21:52:18
स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी कीमत : आरबीआई गवर्नर

  • स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी कीमत : आरबीआई गवर्नर
  • आरबीआई गवर्नर ने चेताया, स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तय

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। ज्यूरिख में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और स्विस नेशनल बैंक की ओर से आयोजित 12वें उच्च-स्तरीय सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक अहम बयान दिया है। 

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जो भारी उछाल आया है, उसका बोझ अब तक सरकार उठा रही है। लेकिन, अगर यह वैश्विक व्यवधान लंबे समय तक खिंचता है, तो आम उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद, भारत सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है। इसके लिए सरकार ने अपनी तरफ से ड्यूटी कम करने और गैस जैसी कुछ नियंत्रित कीमतों में मामूली वृद्धि करने जैसे कदम उठाए हैं। 

आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले 75 दिनों से अधिक समय से जारी इस संकट के कारण मौजूदा स्थिति को अनिश्चित काल तक बनाए रखना संभव नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह केवल समय की बात है कि सरकार इन बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देगी। 

हालांकि, उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि महामारी के दौरान 9.2 प्रतिशत तक पहुंच चुके राजकोषीय घाटे को सरकार ने राजकोषीय विवेक का पालन करते हुए करीब 4.3 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक कम कर लिया है।

पश्चिम एशिया पर भारत की गहरी आर्थिक निर्भरता

पश्चिम एशिया का क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। आरबीआई गवर्नर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत के कुल आयात और निर्यात का छठा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। 

इसके अलावा, भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली रकम) का 40 प्रतिशत, उर्वरक आयात का 40 प्रतिशत और गैस आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है।

इस उच्च निर्भरता के कारण, मध्य पूर्व में किसी भी तरह का तनाव या भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर एक बड़ा जोखिम पैदा करती है। 

महंगाई का जोखिम और नीतिगत चुनौतियां

आपूर्ति शृंखला में आने वाले इन झटकों का सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है। भारत के लिए यह जोखिम इसलिए भी अधिक है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 40 प्रतिशत है। गवर्नर ने यह स्वीकार किया कि आपूर्ति पक्ष के बड़े झटकों से निपटने के लिए केवल मौद्रिक नीति पर्याप्त नहीं हो सकती है। 

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीति निर्माताओं को मजबूत और सतर्क रवैया अपनाना चाहिए। यदि आपूर्ति में व्यवधान का असर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैलने लगता है और महंगाई व्यापक रूप लेने लगती है, तो नीति निर्माताओं को अनिवार्य रूप से हस्तक्षेप करना होगा।

आरबीआई गवर्नर का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक संकटों से भारत पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता। सरकार ने अब तक आम जनता को महंगाई की सीधी मार से बचाने का प्रयास किया है।

लेकिन पश्चिम एशिया की अनिश्चितता लंबी खिंचने पर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में वृद्धि एक अपरिहार्य कदम बन सकता है। ऐसे जटिल माहौल में, आरबीआई को घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अपनी मौद्रिक नीति को बेहद लचीला और चुस्त बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

Published / 2026-05-13 21:52:10
स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी कीमत : आरबीआई गवर्नर

  • स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की बढ़ेगी कीमत : आरबीआई गवर्नर
  • आरबीआई गवर्नर ने चेताया, स्थिति न सुधरी तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तय

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। ज्यूरिख में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और स्विस नेशनल बैंक की ओर से आयोजित 12वें उच्च-स्तरीय सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक अहम बयान दिया है। 

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जो भारी उछाल आया है, उसका बोझ अब तक सरकार उठा रही है। लेकिन, अगर यह वैश्विक व्यवधान लंबे समय तक खिंचता है, तो आम उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद, भारत सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है। इसके लिए सरकार ने अपनी तरफ से ड्यूटी कम करने और गैस जैसी कुछ नियंत्रित कीमतों में मामूली वृद्धि करने जैसे कदम उठाए हैं। 

आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले 75 दिनों से अधिक समय से जारी इस संकट के कारण मौजूदा स्थिति को अनिश्चित काल तक बनाए रखना संभव नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह केवल समय की बात है कि सरकार इन बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देगी। 

हालांकि, उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि महामारी के दौरान 9.2 प्रतिशत तक पहुंच चुके राजकोषीय घाटे को सरकार ने राजकोषीय विवेक का पालन करते हुए करीब 4.3 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक कम कर लिया है।

पश्चिम एशिया पर भारत की गहरी आर्थिक निर्भरता

पश्चिम एशिया का क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। आरबीआई गवर्नर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत के कुल आयात और निर्यात का छठा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। 

इसके अलावा, भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली रकम) का 40 प्रतिशत, उर्वरक आयात का 40 प्रतिशत और गैस आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है।

इस उच्च निर्भरता के कारण, मध्य पूर्व में किसी भी तरह का तनाव या भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर एक बड़ा जोखिम पैदा करती है। 

महंगाई का जोखिम और नीतिगत चुनौतियां

आपूर्ति शृंखला में आने वाले इन झटकों का सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है। भारत के लिए यह जोखिम इसलिए भी अधिक है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी अभी भी लगभग 40 प्रतिशत है। गवर्नर ने यह स्वीकार किया कि आपूर्ति पक्ष के बड़े झटकों से निपटने के लिए केवल मौद्रिक नीति पर्याप्त नहीं हो सकती है। 

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीति निर्माताओं को मजबूत और सतर्क रवैया अपनाना चाहिए। यदि आपूर्ति में व्यवधान का असर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैलने लगता है और महंगाई व्यापक रूप लेने लगती है, तो नीति निर्माताओं को अनिवार्य रूप से हस्तक्षेप करना होगा।

आरबीआई गवर्नर का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक संकटों से भारत पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता। सरकार ने अब तक आम जनता को महंगाई की सीधी मार से बचाने का प्रयास किया है।

लेकिन पश्चिम एशिया की अनिश्चितता लंबी खिंचने पर घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में वृद्धि एक अपरिहार्य कदम बन सकता है। ऐसे जटिल माहौल में, आरबीआई को घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अपनी मौद्रिक नीति को बेहद लचीला और चुस्त बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

Published / 2026-05-12 22:01:09
देशभर में अप्रैल में 3.48% पर पहुंची महंगाई दर

खाने-पीने की चीजों ने बिगाड़ा बजट 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर हल्का झटका लगा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गयी है और यह बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। इससे पिछले महीने यानी मार्च में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत पर था। 

इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों, विशेषकर रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की कीमतों में आया उछाल है। हालांकि, अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात यह है कि समग्र महंगाई दर अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के लक्ष्य के काफी नीचे है। 

अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोगों के रसोई का बजट मुख्य रूप से बिगड़ा है। खाद्य महंगाई दर मार्च के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.20 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। इसमें ग्रामीण इलाकों की खाद्य महंगाई दर शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ी है।  

महंगाई का असर केवल राशन तक सीमित नहीं है। अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा महंगाई पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की श्रेणी में देखी गयी, जिसने 17.66 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की। इसके विपरीत, ईंधन से जुड़ी कीमतों में नरमी के कारण ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर -0.01 प्रतिशत पर लगभग सपाट रही, जिससे माल ढुलाई और यात्रा लागत में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई। 

महंगाई दर में मामूली वृद्धि हुई है, फिर भी सरकार और आरबीआई के लिए स्थिति नियंत्रण में है। भारत ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के पांच वर्षों के लिए अपनी खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य 4 प्रतिशत (2% से 6% के दायरे में) पर बरकरार रखा है। 

एक सर्वे में खुदरा महंगाई के 3.8 प्रतिशत तक जाने का अनुमान जताया गया था, ऐसे में मौजूदा 3.48 प्रतिशत का आंकड़ा अनुमानों से काफी बेहतर है। हालांकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण भविष्य में ऊर्जा और खाद्य लागत बढ़ने का जो जोखिम पैदा हुआ है, उस पर आगामी मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक की पैनी नजर रहेगी। 

Published / 2026-05-12 20:12:13
बंगाल में मारवाड़ी समाज की बढ़ी प्रतिष्ठा

सम्मेलन पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, महामंत्री विनोद कुमार जैन तथा संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मनोज कुमार अग्रवाल (आईएएस) को पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

सम्मेलन के पदाधिकारियों ने कहा कि मनोज कुमार अग्रवाल की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि न केवल मारवाड़ी समाज के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह समाज की मेहनत, संस्कार, ईमानदारी एवं उच्च मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल भी है। उन्होंने कहा कि समाज के लोग आज शिक्षा, प्रशासन, व्यापार, राजनीति एवं सामाजिक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और कार्यकुशलता से देशभर में विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मनोज कुमार अग्रवाल अपने अनुभव, कुशल प्रशासनिक क्षमता एवं दूरदर्शी सोच से पश्चिम बंगाल के विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को नई दिशा प्रदान करेंगे। सम्मेलन पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी नियुक्ति युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी। 

पदाधिकारियों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों की शानदार जीत पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायक प्रदीप लोधा, अजय पोद्दार, विजय ओझा, पीयूष कनोडिया, भारत झावर तथा सुकान बगड़ी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पदाधिकारियों ने कहा कि लोकतंत्र में समाज की सक्रिय भागीदारी राष्ट्र निर्माण को सशक्त बनाती है। समाज के प्रतिनिधियों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी सिद्ध होगी तथा सामाजिक एकता और सेवा भाव को और अधिक मजबूत करेगी।

Published / 2026-05-11 20:58:55
जय सोमनाथ. जय सोमनाथ.. हर-हर महादेव...

एबीए सोशल डेस्क। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, उपमुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी जी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों। आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है। 

महादेव का ये साक्षात्कार, ये सौन्दर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की ये आभा, कला, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेदमंत्रों का उच्चार, गर्भगृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सबके साथ-साथ सागर की लहरों का जयघोष, ऐसा लग रहा है, जैसे ये सृष्टि एक साथ बोल रही है- जय सोमनाथ! जय-जय सोमनाथ! 

समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं कालस्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं। ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, यतो जायते पाल्यते येन विश्वं, तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्! आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। 

जो हलाहल को पीकर नीलकंठ हो गये, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है। ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है। दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में, मैं कितनी ही बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं। लेकिन, आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी। 

अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था। तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे। प्रथम विध्वंस के 1000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल दो आयोजनों का हिस्सा भर नहीं, सिर्फ हिस्सा भर नहीं बने हैं, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिव जी ने मौका दिया है। 

75 साल पहले, आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये कोई साधारण अवसर नहीं था। अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था। आजादी के समय, सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का आधुनिक स्वरूप गढ़ा था। तो साथ ही, सोमनाथ के पुनर्निर्माण से उन्होंने दुनिया को बताया था, भारत केवल आजाद नहीं हुआ है, भारत अपने प्राचीन गौरव को पुन: हासिल करने के मार्ग पर भी अब आगे बढ़ चुका है। 

इसलिए, आज इस अवसर पर, मैं केवल 75 वर्षों की झांकी नहीं देख रहा हूं। मैं यहां देख रहा हूं, विनाश में सृजन के संकल्प को, जिसे सोमनाथ ने चरितार्थ किया है। मैं यहां देख रहा हूं, असत्य पर सत्य की विजय को, जिसे प्रभास-पाटन ने बार-बार जिया है। मैं यहां देख रहा हूं, हजारों वर्षों की आध्यात्मिक चेतना को, जिसने मानव मात्र के कल्याण की सीख समूचे विश्व को दी है। मैं यहां देख रहा हूं, भारत के उस अविनाशी स्वरूप को, जिसे सदियों के कुत्सित प्रयास भी न मिटा सके, न हरा सके। 

और मैं यहां देख रहा हूं, सोमनाथ अमृत-महोत्सव, ये केवल अतीत का उत्सव नहीं है, ये अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। मैं सभी देशवासियों को, दादा सोमनाथ के कोटि-कोटि भक्तों को इस महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई 1998, 1998, यानि आज के ही दिन, देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। देश ने 11 मई को पहले तीन परमाणु परीक्षण किये। 

हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को, वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने रखा, दुनिया में तूफान आ गया। भारत, उसकी ये हैसियत, कौन होता है भारत, जो परमाणु परीक्षण करें और दुनिया की आंखें लाल हो गई, दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी। अनेक प्रकार के बंधन लग गए। आर्थिक संकट की संभावनाओं के रास्ते सारे के सारे बंद कर दिये गये। कोई भी हिल जाता। जब दुनिया भर की बड़ी-बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमण कर दे, तो आगे के रास्ते दिखते नहीं है। 

लेकिन हम कोई और मिट्टी के बने हुए हैं। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था। लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण हुए, उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने ये दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती। 

देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को आॅपरेशन शक्ति नाम दिया था। क्योंकि, शिव के साथ शक्ति की आराधना, ये हमारी परंपरा रही है। अर्धनारीश्वर शिव स्वयं भी शक्ति के साथ ही पूर्ण होते हैं। आपको याद होगा, जब देश का मिशन चंद्रयान सफल हुआ था, तब चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ, उस जगह का नाम भी हमने शिवशक्ति पॉइंट रखा है। क्योंकि, हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़ा है और शिव शक्ति से जुड़े हैं। 

और ये कितना सुखद है कि चंद्रमा के नाम से ही इस ज्योतिर्लिंग को हम सोमनाथ कहते हैं। शिव और शक्ति की हमारी आराधना का जो विचार है, वो देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बने, आज हम ये संकल्प साकार होते देख रहे हैं। मैं इस अवसर पर, भगवान सोमनाथ के चरणों से सभी देशवासियों को आॅपरेशन शक्ति की वर्षगांठ की भी बधाई देता हूं। 

जब मैं पिछली बार यहां आया था, तब मैंने कहा था- जिसके नाम में ही सोम अर्थात, अमृत जुड़ा हो, उसे नष्ट कौन कर सकता है? इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने कितने ही आक्रमण झेले। महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आये, लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया। वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे। बार-बार इस मंदिर को, इस ढांचे को तोड़ा गया। और ये बार-बार बनता रहा, हर बार उठ खड़ा होता रहा, क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था, हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है। 

हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं। लेकिन, हम जानते हैं, उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है। और फिर तो, शिव तो सर्वात्मा हैं। इसलिए, अलग-अलग काल में, अलग-अलग जीवों की संकल्पशक्ति में शिव प्रकट होते रहे। राजा भोज, कभी राजा भीमदेव प्रथम, कभी राजा कुमारपाल, कभी राजा महीपाल प्रथम, तो कभी राव खंगार, ऐसे अनेक शिवभक्त समय-समय पर सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाते रहे। 

लकुलीश और सोम शर्मा जैसे कितने मनीषी, उन्होंने प्रभास पाटन क्षेत्र की विरासत को संरक्षित किया,  इसे शैव साधना और दर्शन का महान केंद्र बनाया। भाव बृहस्पति, पाशुपताचार्यों और अनेक विद्वानों ने इस तीर्थ की आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखा। विशालदेव और त्रिपुरांतक जैसे व्यक्तित्वों ने यहां की बौद्धिक चेतना को सुरक्षित रखने का पुनीत कार्य किया। 

वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर जी, बड़ौदा के गायकवाड़, जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जी, ऐसी कितनी ही महान विभूतियां हैं, जो सोमनाथ की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करती थीं। मैं आज इस अवसर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, केएम मुंशी जी, ऐसी सभी ज्ञात-अज्ञात दिव्यात्माओं को भी श्रद्धा पूर्वक, आदर पूर्वक नमन करता हूं। 

उनका स्मरण हमें ये प्रेरणा देता है कि हमें न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बल्कि इस जिम्मेदारी को आने वाली पीढ़ियों के हाथों में सौंपकर भी जाना है। हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। इतनी समृद्ध विरासत हमें मिली है। लेकिन, आप विडम्बना देखिये, हमने दशकों तक उसके महत्व को नहीं समझा। 

दुनिया में ऐसे कितने ही उदाहरण हैं, जहां विदेशी हमलावरों ने राष्ट्रीय पहचान से जुड़े स्थलों को नष्ट किया। लेकिन, जब उस देश के लोगों को मौका मिला, सबने साथ आकर, अपनी पहचान को फिर से सहेजा, फिर से संवारा, पुन: प्रतिष्ठा की। लेकिन, हमारे यहां राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर भी राजनीति होती रही। सोमनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आजादी के बाद पहले दायित्वों में से एक था कि सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार करते। 

इसलिए, सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी, उन्होंने इसके लिए इतने प्रयास किए। लेकिन, हम सब जानते हैं, उन्हें इसके लिए नेहरूजी द्वारा कितना विरोध झेलना पड़ा था। मैं आज इसके विस्तार में नहीं जाउंगा, लेकिन ये सरदार साहब की इच्छाशक्ति थी कि इतने विरोध के बावजूद सरदार साहब डिगे नहीं। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी हुआ और देश ने सदियों के कलंक को भी धो दिया। दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टिकरण जरूरी लगता है। 

राममंदिर निर्माण जैसे अवसरों पर भी हमने देखा है, किस तरह राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है। इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा। हमें विकास और विरासत को साथ लेकर के आगे बढ़ना होगा। बीते वर्षों में मुझे सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ दादा की सेवा का जो अवसर मिला, इस मंदिर और क्षेत्र के विकास के लिए जो ऐतिहासिक काम हुए, उस परिवर्तन को आज हम सब प्रत्यक्ष देख रहे हैं। 

लेकिन साथ ही, इस सेवा का मुझे व्यक्तिगत लाभ भी हुआ है। आज मुझे देश के सभी पवित्र तीर्थों के विकास का जो मौका मिल रहा है, ये भगवान सोमनाथ का ही कृपा प्रसाद है। आज काशी में सदियों बाद बाबा विश्वनाथ धाम का इतना भव्य विस्तार हुआ है। आज उज्जैन में महाकाल, महालोक के विशाल दर्शन भी हमें हो रहे हैं। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण भी हुआ है। जैसा मैंने पहले कहा, अयोध्या में 500 साल की प्रतीक्षा भी पूरी हुई है।

आज वहां भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हैं। ऐसे कितने ही पवित्र तीर्थ, पवित्र मठ, मंदिर और क्षेत्र, उनकी जो महिमा हमने पुराणों में सुनी है, आज वहाँ हमें उस समृद्ध परंपरा के दर्शन होने लगे हैं। और, ये इतना कुछ 10-12 साल के भीतर-भीतर हुआ है। हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की उपेक्षा देश के विकास में बड़ी बाधा रही है। क्योंकि, हमारे तीर्थ भारत की आध्यात्मिक-सामाजिक व्यवस्था के केंद्र तो हैं ही, वो देश की आर्थिक प्रगति के भी स्रोत रहे हैं। 

आज आप देखिये, चारधाम महामार्ग परियोजना, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजना, करतारपुर कॉरिडोर, बौद्ध सर्किट का विकास, इनके जरिये देश में तीर्थ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। आज सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट से सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। हजारों लोगों का जीवन इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। देश-दुनिया के कोने-कोने से जो लोग यहाँ आते हैं, वो गुजरात के बाकी हिस्सों में भी जाते हैं। इससे प्रदेश और देश में प्रगति के नयेद्वार खुलते हैं। 

हमारी आस्था हमें जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है। क्योंकि, हम मानते हैं- सर्वं खल्विदं ब्रह्म! अर्थात, सृष्टि का हर एक घटक, ये संपूर्ण प्रकृति भी ईश्वर का ही स्वरूप है। इसलिए, हमारी आस्था नदियों में भी है, वृक्षों में भी है। हम जंगलों को भी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। हम पर्वतों में भी पवित्रता का भाव रखते हैं। और, आज जब दुनिया प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रही है, हमें हमारी इस शक्ति को भी पहचानना होगा। हमें हमारे तीर्थों और मंदिरों के विकास के साथ-साथ उनकी गरिमा के लिए जागरूक होना होगा।

हम ऐसा जीवन अपनाएं, जिससे प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हो। साथ ही, हम हमारे पुण्य स्थलों को पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण के रूप में विकसित करें। हमें इन संकल्पों को अपनी आस्था से जोड़कर जीना होगा। जब नयी पीढ़ियां अपने इतिहास, अपनी आस्था और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ती हैं, तब राष्ट्र का आत्मबल और मजबूत होता है। आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी इस सांस्कृतिक निरंतरता की भी बहुत बड़ी भूमिका है। 

आधुनिक और विरासत, आधुनिकता हो या विरासत हो, भारत में इसे कोई अलग नहीं कर सकता, भारत में  एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, ये साथ-साथ आगे बढ़ने वाली शक्तियां हैं, एक दूसरे में प्राण पूरने वाली शक्तियां है। सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वो अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। जब हम अपनी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ उनके हाथों में सुपुर्द करें। 75 वर्ष पहले, जब ये पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में, 75 वर्ष पहले प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तब भारत ने एक नई चेतना यात्रा शुरू की थी। 

आज, 75 वर्ष बाद, वही यात्रा और अधिक व्यापक रूप में हमारे सामने है। हमें इसे नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। हमारे संकल्पों को पूरा करने में दादा सोमनाथ का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे, यही प्रार्थना है। एक बार फिर सभी देशवासियों को, विरासत में विश्वास करने वाले हर नागरिक को, आप सभी को इस अवसर की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये जय सोमनाथ. जय सोमनाथ.. हर-हर महादेव... 

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