एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने चीन के मुद्दे पर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद नहीं चल रही है, जबकि वह इस विषय पर सदन में बोलना चाहते थे। दुबे ने विपक्ष और उसके नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतना कमजोर विपक्ष और लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा जैसा नेता उन्होंने लोकतंत्र में पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि नासमझी को घमंड में बदलकर विपक्ष लगातार बयानबाजी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सवाल चीन का है और पूरी दुनिया जानती है कि चीन पहले भारत का पड़ोसी नहीं था। उस समय नेपाल, भूटान और तिब्बत तीन बफर स्टेट थे। 1950 में तिब्बत पर चीन का नियंत्रण स्थापित होने के बाद चीन भारत का पड़ोसी बना। दुबे ने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में चीन ने लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जिसमें अक्साई चिन शामिल है, पर कब्जा कर लिया। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद भी कई सवाल अनुत्तरित रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि 1969 में तत्कालीन सरकार के गृहमंत्री विद्याचरण शुक्ला ने संसद में कहा था कि चीन ने 1962 के बाद किस तरह अपने जासूसों को दूतावास के जरिए सक्रिय किया और भारत में आर्थिक तथा वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी पर भी तीखी टिप्पणी की। बाद में राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए दुबे ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है। उनका कहना था कि यदि इस विषय पर चर्चा होती है तो कई बातें सामने आ जाएंगी।
टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की अंतरराष्ट्रीय शाखा मारवाड़ी युवा मंच अबू धाबी एवं दुबई (यूएई) ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए संकट की घड़ी में भारतीयों को सुरक्षित भारत भेजने का सराहनीय कार्य किया है।
प्रांतीय अध्यक्ष विशाल पाड़िया ने बताया कि मध्य एशिया में बने युद्ध जैसे हालात के बीच कई भारतीय नागरिक वहाँ फँस गए थे। ऐसी कठिन परिस्थिति में दुबई एवं अबू धाबी शाखा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया। उनके प्रयासों से फुजैरह से मुंबई तक चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था कर लगभग 180 भारतीयों को सुरक्षित भारत भेजा गया, जो मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण है।
मारवाड़ी युवा मंच अबू धाबी के अध्यक्ष श्री आनंद गुप्ता ने मोबाइल पर बातचीत के दौरान बताया कि राहत कार्य में विभिन्न देशों की शाखाएँ लगातार सहयोग कर रही हैं। ओमान शाखा द्वारा प्रभावित लोगों के लिए निःशुल्क रहने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं द्वारा भी निःशुल्क भोजन एवं आवास की व्यवस्था की जा रही है, जिसमें मंच के सदस्य सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। इस पूरे राहत कार्य में लगभग 25 से अधिक स्वयंसेवक 24 घंटे सेवा में जुटे हुए हैं और लोगों को एक-दूसरे से संपर्क कराने सहित हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।
प्रांतीय संयोजक, सूचना जनसंपर्क प्रचार-प्रसार अमित शर्मा ने सहायता के लिए संपर्क नंबर भी साझा किये हैं। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है :
मंच के उमेश गर्ग (कन्वीनर, इंटरनेशनल फोरम) एवं हेमंत शाह (वाइस चेयरमैन, इंटरनेशनल फोरम) ने इस मानवीय पहल के लिए दुबई से रवींद्र अग्रवाल, अबूधाबी से आनंद गुप्ता (अध्यक्ष) एवं हिमांशु अग्रवाल, ओमान से बसंत बगारिया एवं अनुराग अग्रवाल, सऊदी अरब से लक्ष्मण सिंह परमार, बहरीन से विनीत मारू, कुवैत से आदित्य तथा कतर से शेखर अग्रवाल सहित पूरी टीम को हृदय से बधाई एवं साधुवाद दिया। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय संयोजक, सूचना जनसंपर्क प्रचार-प्रसार अमित शर्मा ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब राज्यपाल C. V. Ananda Bose ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली में मौजूद रहते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया। इस्तीफा देने के बाद बोस ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि उन्होंने राज्यपाल के तौर पर लंबा समय काम किया है और अब अपने अगले कदमों पर विचार कर रहे हैं।
बोस को 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति तब हुई थी जब पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति बने थे। करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल के दौरान बोस कई बार राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर खुलकर बोलते रहे। इस दौरान राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह खबर उनके लिए आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले केंद्र सरकार की ओर से राजनीतिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि राज्य के संवैधानिक पदों से जुड़े फैसलों में राज्य सरकार से सलाह ली जानी चाहिए, ताकि संघीय ढांचे की भावना बनी रहे।
आर.एन. रवि को मिला अंतरिम प्रभार
राज्यपाल के इस्तीफे के बाद फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल R. N. Ravi को पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
रवि पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने सीबीआई व खुफिया एजेंसियों में भी काम किया है। तमिलनाडु में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी राज्य सरकार के साथ कई मुद्दों पर टकराव की खबरें सामने आती रही हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल की सराहना करते हुए इसे राज्य के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। यह तारीफ ऐसे समय आई जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने नामांकन दाखिल किये। शाह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास की कई पहलों को गति मिली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाएं लोगों तक पहुंचीं।
उन्होंने कहा, नीतीश कुमार का कार्यकाल बिहार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। उनका जीवन और राजनीतिक यात्रा भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त रही है। नीतीश कुमार के राज्यसभा में नामांकन के साथ ही वे एक लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय राजनीति में लौट रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, नीतीश कुमार अब राज्यसभा के सांसद के रूप में दिल्ली लौट रहे हैं। उन्हें और एनडीए के सभी साथी सांसदों ने हार्दिक स्वागत किया। एनडीए के अन्य उम्मीदवारों में भाजपा अध्यक्ष Nitin Nabin, RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, भाजपा के शिवेश कुमार और JD(U) के राम नाथ ठाकुर भी शामिल हैं।
नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन पर विपक्षी दलों ने आशंकाएं जताई हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह कदम भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे नीतीश कुमार के प्रभाव को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले ही देखा था कि नीतीश कुमार की शक्ति घट रही है और एनडीए की चुनावी रणनीतियों से उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
नीतीश कुमार ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में ईमानदारी और भ्रष्टाचार मुक्त छवि बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका जीवन पूरी तरह से निष्पक्ष रहा है। नामांकन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और बिहार के विकास और जनता के साथ सहयोग जारी रखने का संदेश दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने तथा रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए भारत-कनाड़ा रक्षा संवाद शुरू करने का निर्णय लिया है।
दोनों देशों ने आर्थिक क्षेत्र में सहयोग को पुख्ता करने पर भी सहमति व्यक्त की है। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कूटनीति और बातचीत से मुद्दों के समाधान पर जोर दिया है। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौती माना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की चार दिन की यात्रा पर आये कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ सोमवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कनाडा और भारत का लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास है और दोनों देश विविधता को पूरी तरह मान्यता देते हैं।
उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई हमारा साझा विजन है जो हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने इस साझा विजन को आगे बढ़ाने और अपनी साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंंने कहा कि हमने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
दोनों देशों ने आर्थिक संभावनाओंं को पूरा फायदा उठाने के लिए व्यापक आर्थिक सहयोग साझेदारी को जल्द ही अंतिम रूप देने का भी निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कनाडा के पेंशन फंडों ने भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश किया है जिससे भारत की विकास यात्रा में उनके गहरे विश्वास का पता चलता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बहरीन के किंग और सऊदी के क्राउन प्रिंस को फोन किया। दोनों के बीच पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने आज दो अहम फोन कॉल किये। टेलीफोन पर उन्होंने बहरीन के किंग और सऊदी के क्राउन प्रिंस के साथ ईरान और इस्राइल के बीच टकराव समेत कई मुद्दों पर बातचीत की।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने पहले बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा से बात की। उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री- मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से भी बात की। पीएम मोदी ने इन दोनों देशों पर हुए हमलों की निंदा की और यहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों की सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर भी चर्चा की।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक भी बुलायी थी। पीएम मोदी ने विदेश मंत्री डॉ जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की मौजूदगी में खाड़ी देशों की स्थिति और पश्चिम एशिया में बमबारी के बाद उपजे तनाव की समीक्षा की। इस बैठक से इतर भारत ने कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी के साथ भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान हादसे, अनहोनी घटनाओं अथवा सामान के नुकसान या चोरी आदि के मामलों में क्षतिपूर्ति के दावों के लिए इलेक्ट्रानिक सुविधा मिलेगी जिससे कोई यात्री ऐसे किसी भी मामले में रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आसीटी) के समक्ष कहीं से भी दावा कर सकेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को यहां भारतीय रेलवे की प्रमुख योजना 52 हफ्तों में 52 सुधार के तहत सुधार संख्या तीन और चार क्रमश: रेलटेक नीति और रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आसीटी) को पूरी तरह से डिजिटाइजेशन की करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि ई- आरसीटी प्रणाली रेलवे दावा न्यायाधिकरण को पूरी तरह से कम्प्यूटर आधारित और डिजिट बनाएगी। यह देश में कहीं से भी तेज गति, ज्यादा पारदर्शी और आम लोगों के पहुंच योग्य बनाकर दावा फाइल करने, प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय लेने की गति को बदल देगी।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में देश भर में 23 आरसीटी पीठ हैं और दावा फाइल करना अभी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, खासकर उन यात्रियों के लिए जो किसी घटना के समय दूसरे राज्यों में यात्रा कर रहे हों। दावा फाइल करने के लिए सही क्षेत्राधिकार तय करना अक्सर एक बड़ा मुद्दा बन जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान भारत से डर गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बढ़ते सुरक्षा खतरों के मद्देनजर प्रांतीय मरियम नवाज सरकार ने एक बहुत सख्त कदम उठाया है। अगले 30 दिनों तक पूरे प्रांत में खुले आसमान के नीचे किसी भी तरह के ड्रोन उड़ाने पर तत्काल और पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंजाब के गृह विभाग ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाये रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1898 की धारा 144 /6 के तहत एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि बिना किसी पूर्व अनुमति के आउटडोर ड्रोन के इस्तेमाल पर अगले एक महीने तक पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। यह आदेश जारी होने की तारीख से लागू हो गया है।
प्रशासन का कहना है कि उन्हें ऐसी विश्वसनीय खुफिया रिपोर्ट्स मिली थीं कि बेकाबू और बिना नियमों के उड़ने वाले मानवरहित हवाई वाहनों यानि ड्रोन से आम जनता, महत्वपूर्ण इमारतों और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है। सरकार ने चेतावनी दी है कि आसमान में ड्रोन की इस तरह की अनियमित गतिविधियों से सरकारी कामकाज में बाधा आ सकती है और प्रांत का शांतिपूर्ण माहौल बिगड़ सकता है।
हालांकि, इस प्रतिबंध में कुछ रियायतें भी दी गई हैं। सरकार की अधिसूचना के अनुसार, किसी विवाह समारोह, बंद हॉल या मार्की (टेंट) के अंदर इंडोर कवरेज के लिए छोटे ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस, आर्मी) द्वारा सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन इस पाबंदी के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। यह अहम फैसला तब लिया गया है जब हाल ही में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने एक विशेष एंटी-ड्रोन यूनिट बनाने की मंजूरी दी थी। इस यूनिट का मुख्य काम किसी भी संभावित आतंकी खतरे से निपटना और प्रांत के मुख्य निकास व प्रवेश मार्गों पर डिजिटल स्कैनर लगाना है।
इस कड़े फैसले पर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद और निगरानी के बदलते हाई-टेक तरीकों को देखते हुए यह एक बहुत ही जरूरी कदम था। खुले आसमान में अज्ञात ड्रोन्स की बढ़ती संख्या सुरक्षाबलों के लिए हमेशा से सिरदर्द रही है, इसलिए यह बैन संभावित खतरों को टालने में मदद करेगा।
प्रांतीय पुलिस और सभी स्थानीय थानों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। खुफिया एजेंसियां अब ड्रोन गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही हैं। चेतावनी दी गयी है कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस आदेश का उल्लंघन करते हुए पायी जायेगी, उसके खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन के तहत सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।
बहरहाल, सुरक्षा के लिहाज से यह फैसला भले ही अहम हो, लेकिन इसका सीधा असर व्यावसायिक वीडियोग्राफर्स, ट्रैवल व्लॉगर्स, और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी आउटडोर शूटिंग के लिए मुख्य रूप से ड्रोन कैमरों पर निर्भर रहते हैं। 30 दिनों की इस रोक से इन पेशों से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है और उनके कई बड़े प्रोजेक्ट्स अटक सकते हैं।
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