एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस साल जनवरी में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई थी। राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी, इनमें से 66 हस्तियों को आज सम्मानित किया जा रहा है।
इस साल की सूची के मुताबिक कुल पांच लोगों को पद्म विभूषण, 13 विभूतियों को पद्म भूषण और 113 लोगों को पद्म श्री से नवाजा जायेगा। पद्म विभूषण सम्मान 2026 में सबसे पहले दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) को प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने ग्रहण किया।
कला, समाज सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान सहित कई क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली हस्तियों को हर वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। पद्म विभूषण असाधारण सेवा, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए है। पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस पर होती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। खाड़ी देश में चल रहे युद्ध का असर लगातार भारत में भी देखने को मिल रहा है। भारत में इस युद्ध के वजह से पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
आज तकड़े सुबह भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, बताया जा रहा है कि फिर एक बार पेट्रोल और डीजलके दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है। बीते दस दिनों में यह चौथी बार है जब फ्यूल प्राइस में बढ़ोतरी हुई है। इस बार पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपए और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
देश की राजधानी दिल्ली में डीजल की कीमत बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत बढ़कर 102.12 रुपये हो गई है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद झारखण्ड में भी यह महंगा हो गया है। राँची में अब पेट्रोल की कीमत 105.24 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल की कीमत 100.37 रुपये हो गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरों के बीच इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने स्पष्ट किया है कि पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी तरह का व्यापक संकट नहीं है। कंपनी ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में देखी जा रही अस्थायी कमी स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन और मौसमी खपत बढ़ने का नतीजा है, न कि देशव्यापी सप्लाई समस्या।
आईओसी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर बढ़ी हुई मांग का कारण फसल कटाई के समय डीजल की खपत में मौसमी वृद्धि, अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले निजी पेट्रोल पंपों से ग्राहकों का सरकारी क्षेत्र के पंपों की तरफ स्थानांतरण और थोक ईंधन की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप वृद्धि के कारण संस्थागत खरीद में बढ़ोतरी है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक से 22 मई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की बिक्री लगभग 18 प्रतिशत बढ़ी जो मांग में निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि को दर्शाता है, जिसे वह देशभर में पूरा कर रही है।
आईओसी ने कहा, हम ग्राहकों और आम जनता को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। कुछ खुदरा केंद्रों पर देखी जा रही स्थिति अत्यंत स्थानीय और अस्थायी है, जो स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन तथा चुनिंदा क्षेत्रों में बिक्री प्रवृत्ति के पुनर्संतुलन के कारण उत्पन्न हुई है।
बयान के मुताबिक, आईओसी के 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में बहुत ही कम जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर भंडार और आपूर्ति सामान्य एवं पर्याप्त बनी हुई है।
आईओसी ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां देशभर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाये हुए हैं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पन्न इन सीमित बाधाओं को दूर करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। आईओसी ने कहा, मांग में इस निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि के बावजूद इंडियन आॅयल देशभर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रही है।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से घबराकर खरीदारी से बचने की अपील करते हुए निर्बाध ईंधन उपलब्धता बनाये रखने की प्रतिबद्धता दोहरायी। बयान में कहा गया, इंडियन आॅयल अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार एवं आपूर्ति बनाये हुए है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क । भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महिला दल ने पहली बार एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई कर इतिहास रच दिया है। यह दल 19 अप्रैल को आईटीबीपी के दिल्ली स्थित मुख्यालय से रवाना हुआ था। इसमें 11 महिला पर्वतारोहियों सहित कुल 14 महिला सदस्य सम्मिलित थे।
आईटीबीपी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत एवं नेपाल में चरणबद्ध प्रशिक्षण के बाद सभी 11 महिला पर्वतारोहियों ने नेपाल की ओर से साउथ कोल रुट से सफलतापूर्वक एवरेस्ट शिखर की चोटी पर चढ़ाई की। दल ने 21 मई की रात 12:52 पर चोटी पर भारतीय ध्वज फहराया।
पर्वतारोही दल ने 8,848 मीटर ऊँचे इस शिखर पर पहंचने के इस चुनौतीपूर्ण अभियान में कम ऑक्सीजन, तेज बर्फीली हवाओं, मुश्किल मौसम एवं कठिन रास्तों के बीच साहस, धैर्य, समन्वय एवं मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।
यह अभियान न केवल महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक है, बल्कि इसके दौरान स्वच्छ हिमालय– ग्लेशियर बचाओ अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियाँ भी संचालित की गयी हैं।
गौरतलब है कि आईटीबीपी अब तक 232 पर्वतारोहण अभियान सफलतापूर्वक संचालित कर चुका है, जिनमें माउंट एवरेस्ट पर पाँच सफल आरोहण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त आईटीबीपी के पर्वतारोही दल विश्व की आठ-हज़ार मीटर की ऊंचाई वाली 14 चोटियों में से छह प्रमुख चोटियों माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, ल्होत्से, धौलागिरी एवं मानस्लु पर भी सफल आरोहण कर चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने से देश में प्रदूषण कम होगा और डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता घटेगी। इसके साथ ही ईंधन आयात पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। पॉलिसी मेकर्स अब पैसेंजर ईवी से आगे बढ़कर कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, क्योंकि भारी वाहनों से उत्सर्जन का स्तर काफी ज्यादा होता है।
बता दें यह हाई-लेवल बैठक नयी दिल्ली के जीपीक्यूए-3 में आयोजित की गयी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने की। मंत्रालय का कहना है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य ईवी बसों और ट्रकों की फाइनेंसिंग से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को समझना और समाधान तलाशना था।
इस बैठक में कई बड़े सरकारी और निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। जैसे स्टेट बैंक आॅफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, एचएडीएफसी बैंक आदि। इसके अलावा कई ट्रांसपोर्ट और बस आॅपरेटर्स एसोसिएशंस ने भी हिस्सा लिया, जिनमें अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस, बस आॅपरेटर परिसंघ और भारत कर्नाटक बस आॅपरेटर संघ जैसे संगठन शामिल थे।
निजी ट्रांसपोर्ट आॅपरेटर्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की शुरुआती कीमत अभी भी काफी ज्यादा है। ऐसे में कई आॅपरेटर्स के लिए बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान नहीं है। बैंक भी हाई-कॉस्ट इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स पर लोन देते समय जोखिम को लेकर सतर्क रहते हैं। इसी वजह से सरकार अब नये फाइनेंस मॉडल्स पर काम कर रही है।
रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार निजी सेक्टर में ईवी बसों और ट्रकों को तेजी से अपनाने के लिए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के इंसेंटिव्स पर विचार कर रही है। अगर यह योजना लागू होती है, तो भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल मार्केट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
भारत तेजी से ग्रीन मोबिलिटी की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय में ट्रांसपोर्ट कंपनियों के खर्च को कम करने में भी मदद कर सकते हैं। सरकार की नयी रणनीति से आने वाले समय में सड़कों पर ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स दिखाई दे सकते हैं, जिससे भारत का एश् इकोसिस्टम और मजबूत होगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति के महाराष्ट्र दौरे के दौरान, हमें पिछले दिन मुंबई स्थित डब्बावाला इंटरनेशनल एक्सपीरियंस सेंटर का दौरा करने का अवसर मिला। मुंबई के उन डब्बावालों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिलना अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और समयबद्ध सेवा के माध्यम से लगभग 135 वर्षों से वैश्विक पहचान बनायी है।
लगभग 5,000 या उससे अधिक डब्बावाला, पूरी तरह से मानवीय प्रक्रिया के माध्यम से, प्रतिदिन लाखों लोगों तक घर का बना भोजन पहुंचाते हैं। उनके अद्भुत प्रबंधन कौशल, कोडिंग प्रणाली और अपने कार्य के प्रति समर्पण ने उन्हें विश्वव्यापी पहचान दिलायी है और उनका नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
यह एक्सपीरियंस सेंटर डब्बावालों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, परंपरा और नवाचार के अद्भुत संगम का एक जीवंत उदाहरण है। डब्बावालों के 135 वर्षों के इस सफर को आधुनिक तकनीक और वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से बेहद खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस तरह के मॉडल समाज में श्रम, संगठनात्मक क्षमता और सामूहिक कार्य संस्कृति को प्रेरित करते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों में ट्रेनों में आग लगने की जो घटनाएं सामने आयी हैं, वे कोई सामान्य तकनीकी खराबी या महज हादसा नहीं थीं, बल्कि उनके पीछे असामाजिक तत्वों की साजिश थी। इस बात का खुलासा खुद रेल मंत्रालय ने किया है। मंगलवार को हावड़ा स्टेशन पर खड़ी हावड़ा-रक्सौल मिथिला एक्सप्रेस के जनरल कोच में लगी आग की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को ट्रेन के टॉयलेट से पेट्रोल में भीगा हुआ एक अधजला कपड़ा बरामद हुआ है, जो सीधे तौर पर सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।
मंगलवार को पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर हावड़ा से रक्सौल जाने वाली मिथिला एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13021) प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी और कुछ ही पलों में उसे रक्सौल के लिए रवाना होना था। ट्रेन के जनरल कोच में यात्री अपनी सीटों पर बैठ चुके थे कि तभी अचानक एलएस सेकंड क्लास कोच के टॉयलेट से धुएं का काला गुबार निकलने लगा। देखते ही देखते बोगी में धुआं फैल गया और यात्रियों का दम घुटने लगा। ट्रेन के भीतर अचानक लगी आग और धुएं को देखकर यात्रियों में चीख-पुकार मच गयी और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गयी। अपनी जान बचाने के लिए यात्री खिड़कियों और दरवाजों से कूद-कूदकर प्लेटफॉर्म की तरफ भागने लगे।
ट्रेन में आग लगने और यात्रियों में मची भगदड़ की भनक लगते ही रेलवे सुरक्षा बल के जवान, जीआरपी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर दौड़ पड़े। रेलवे के सतर्क कर्मचारियों ने बिना वक्त गंवाये दो फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल किया और टॉयलेट में धधक रही आग को पूरी तरह बुझा दिया। कर्मचारियों की इस त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ के कारण एक बहुत बड़ा रेल हादसा होने से टल गया और किसी भी यात्री के हताहत होने की खबर नहीं आयी।
आग बुझने के बाद जब आरपीएफ और सुरक्षा एजेंसियों ने बोगी के टॉयलेट एरिया की सघन तलाशी ली, तो वहां से एक ऐसा सबूत मिला जिसने रेलवे अधिकारियों को सन्न कर दिया। जांच टीम को टॉयलेट के कोने से पेट्रोल में पूरी तरह डूबा हुआ एक अधजला कपड़ा मिला। इसी कपड़े में आग लगाकर पूरी बोगी को स्वाहा करने की कोशिश की गयी थी।
रेल मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान के मुताबिक, गहन जांच में यह साफ हो गया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में ट्रेनों को निशाना बनाने के लिए एक ही खतरनाक पैटर्न पर काम किया जा रहा है। जांचकर्ताओं ने नोट किया कि मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12431) के बी-1 कोच में जो भीषण आग लगी थी, उसकी शुरुआत भी सुबह करीब 5:15 बजे इसी तरह बोगी के टॉयलेट से हुई थी, जिसमें 68 यात्रियों की जान बाल-बाल बची थी।
इसके अलावा, राजस्थान के कोटा में भी राजधानी एक्सप्रेस के टॉयलेट से ही आग की लपटें उठनी शुरू हुई थीं। वहीं राजस्थान के ही अमरपुरा स्टेशन के पास एक संदिग्ध शख्स द्वारा ट्रेन के बेडरोल (लेनिन) में आग लगाने का प्रयास पकड़ा गया था। बिहार के सासाराम स्टेशन पर भी खड़ी एक खाली बोगी में बिना किसी पावर जनरेटर या शॉर्ट सर्किट के अचानक आग भड़क उठी थी, जिसके पीछे किसी बाहरी तत्व द्वारा जलती हुई वस्तु या केमिकल फेंकने की प्रबल आशंका जतायी जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (लखनऊ)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। कभी पिछड़ेपन और विकास की धीमी रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाला यूपी आज एक्सप्रेसवे स्टेट के रूप में नयी पहचान बना चुका है। गत 09 वर्षों में यूपी में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क 1900 किलोमीटर से अधिक हो गया है।
यह आर्थिक बदलाव की नई कहानी को दर्शा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। गाजीपुर से दिल्ली तक का सफर अब लगभग 10 घंटे में सिमट गया है। मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे ने यात्रा समय को लगभग आधा कर दिया है।
योगी सरकार ने खुद को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक विकास का मजबूत मॉडल तैयार किया है। सरकार सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के ट्रिपल-एस मॉडल के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे विभिन्न औद्योगिक पार्क और क्लस्टर विकसित कर रही है।
जो आने वाले समय में प्रदेश में औद्योगिक विकास की नयी इबारत लिखेंगे, जिससे लाखों नये रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आज डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रीढ़ बन चुका है। झांसी और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना को भी इन एक्सप्रेसवे का बड़ा लाभ मिला है। कन्नौज का इत्र, कानपुर का चर्म उद्योग और पूर्वांचल के हस्तशिल्प अब तेज परिवहन व्यवस्था के जरिए राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक आसानी से पहुंच रहे हैं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि एक्सप्रेसवे का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। संपर्क मार्गों और ग्रामीण सड़कों के जरिए छोटे कस्बों और गांवों को भी इससे जोड़ा गया है।
किसान अब अपने कृषि और दुग्ध उत्पाद कम समय में शहरों तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद करीब 36 लाख करोड़ रुपये हो गया है। लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव यूपी को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
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