देश

View All
Published / 2026-03-25 21:10:54
हरीश राणा के 13 साल की दर्द भरी जंग खत्म...

  • हरीश राणा के 13 साल की दर्द भरी जंग खत्म...
  • नम आंखों से हरीश राणा को दी गई अंतिम विदाई, ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इच्छा मृत्यु के बाद बुधवार को हरीश राणा को अंतिम विदाई दी गयी। दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद उनका एम्स में निधन हुआ था। 

अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश का अंतिम संस्कार सुबह 9 बजे हुआ। सोसायटीवासी भी दुख की इस घड़ी में हमेशा राणा परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।

हरीश के दुनिया को अलविदा कहने की सूचना मिलते ही सोसायटी में सन्नाटा पसर गया। हर कोई हरीश राणा और उनके परिवार की बहादुरी की चर्चा करते दिखाई दिया। बुधवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोसायटी से काफी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे। परिवार ने पूरे सम्मान के साथ हरीश का अंतिम संस्कार कर दिया है।

Published / 2026-03-23 23:19:26
भारत में हाई स्पीड की असली चुनौतियां

  • भारत में हाई स्पीड की असली चुनौतियां
  • भारत में 350 किमी प्रति घंटे की स्पीड का सपना, लेकिन क्या हैं असली चुनौतियां
  • जब दिल्ली से लखनऊ और हैदराबाद से बेंगुलरु का ट्रेन से सफर तय होगा महज दो घंटे में, क्या होगी स्पीड

एबीएन सेंट्रल डेस्क। क्या जल्दी ही वह समय आने वाला है जब दिल्ली से लखनऊ तक का ट्रेन का सफर महज दो घंटे में तय होगा? या फिर दिल्ली से बेंगलुरु में भी इतना समय लगेगा। कुछ महानगरों के बीच की अभी चार-पांच घंटे की दूरी क्या महज 45 मिनट में तय हो जायेगी। सैद्धांतिक तौर पर इन सवालों का जवाब है हां, ऐसा हो सकता है और इस पर काम भी चल रहा है। लेकिन इस हां से पहले अनेक किंतु-परंतु हैं।

लंबी दूरी को ट्रेन के सफर से महज कुछ घंटों में तय करने को लेकर बहुत पहले से तैयारियां चल रही हैं। खासतौर पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में जापान दौरे पर गये थे। तब कहा गया था कि भारत में भी बुलेट ट्रेन चलेंगी। जापान में बुलेट ट्रेन तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी चलती हैं। उसके बाद यहां कई रूटों को इसके लिए चिन्हित भी किया और तब से इस परियोजना पर काम चल रहा है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक मेड-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए 2024 में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को 2027 तक 250 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली दो बुलेट ट्रेन को विकसित करने का ठेका दिया था। हाल ही में मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया कि भारत में निर्मित पहली दो बुलेट ट्रेनें 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले रेल कॉरिडोर पर चलेंगी। इनका नाम बी28 है।
रेल कॉरिडोर का पहला चरण सूरत से वापी तक 97 किलोमीटर का खंड अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। 

जापान इंटरनेशनल को-आॅपरेशन एजेंसी की वित्तीय सहायता से इस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें जापानी सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जापान में निर्मित 320 किमी/घंटा की गति वाली बुलेट ट्रेनें चलायी जायेंगी। अगर इस परियोजना को रफ्तार मिलेगी तो एक समय ऐसा भी आयेगा जब चंडीगढ़ से दिल्ली तक का सफर महज एक घंटे में पूरा कर लेंगे। हालांकि ऐसा होना अभी दूर की कौड़ी है।

अभी क्या चर्चा है

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान रेलवे से जुड़े विभिन्न सवालों का जवाब दिया। इसी में उन्होंने बुलेट ट्रेन की प्रगति के बारे में भी बताया। बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति के बारे में वैष्णव ने कहा कि हमने इसके पहले सेक्शन को 2027 तक कमीशन करने का लक्ष्य रखा है।

कहां-कहां हैं शुरूआती परियोजनाएं

बुलेट ट्रेन परियोजना पर विस्तार से जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अहमदाबाद से मुंबई प्रोजेक्ट की बहुत अच्छी प्रगति है। रेल मंत्री ने ने रेल लाइन बिछाए जाने से लेकर गार्डर और नदियों पर बने ब्रिज तक के आंकड़े बताये। रेल मंत्री ने साथ ही यह भी बताया कि कोलकाता मेट्रो की अंडर वाटर टनल की तर्ज पर पहली अंडर सी टनल बनायी जा रही है।

यहां गौर हो कि जल परिवहन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी अनेक परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अब बुलेट ट्रेन का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि पहली परियोजना पर काम चल रहा है। सब कुछ सामान्य रहा तो ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।
यहां गौर करने योग्य है कि इस बजट में सात नयी बुलेट ट्रेन का भी ऐलान किया गया। 

रेल मंत्री के मुताबिक इन ट्रेन परियोजनाओं के पूरे होने पर बुलेट ट्रेन नेटवर्क करीब चार हजार किलोमीटर का हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ट्रेन के चलने से दिल्ली से वाराणसी साढ़े तीन घंटे, दिल्ली से लखनऊ दो घंटे में, वाराणसी से पटना एक घंटे से भी कम समय में पहुंच जायेंगे। यही नहीं, मुंबई से पुणे मात्र पौन घंटे में पहुंच जायेंगे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुणे से हैदराबाद दो घंटे की यात्रा रहेगी। हैदराबाद से बेंगलुरु दो घंटे, बेंगलुरु से चन्नई भी सवा घंटे की यात्रा रह जायेगी।

लेकिन विशेषज्ञों को क्यों है आपत्ति

इस बीच, बुलेट ट्रेन को लेकर विशेषज्ञों ने रेल मंत्रालय को आगाह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रोटोटाइप परीक्षण बहुत जरूरी है। बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले कॉरिडोर पर काम के समापन की सराहना करते हुए भी उत्पादन बढ़ाने के निर्णय पर आपत्ति जतायी है। एजेंसी की खबर के मुताबिक रेलवे बोर्ड के पूर्व इंजीनियरिंग सदस्य सुबोध जैन ने कहा, ह्यअगर आप भारत में लोकोमोटिव निर्माण के इतिहास पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि हमने पहले लोकोमोटिव आयात किये, फिर तकनीक को यहां स्थानांतरित कराया और अपना उत्पादन शुरू किया। 

अब तक, हमने स्वदेशी रूप से 180 किमी प्रति घंटे की चलने की क्षमता वाले लोकोमोटिव विकसित किए हैं। इसलिए, 250 किमी प्रति घंटे की ट्रेन के लिए प्रोटोटाइप का व्यवहार्यता परीक्षण अनिवार्य है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का उत्पादन शुरू करने से पहले हमें 250 किमी प्रति घंटे या 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन का प्रूफ-आॅफ-कॉन्सेप्ट परीक्षण करना होगा। अब देखना होगा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कब और क्या रंग लाती है।

पहले चरण में स्वदेशी धीरे-धीरे बढ़ेगी स्पीड

केंद्रीय रेल मंत्रालय ने पिछले दिनों संसदीय समिति के समक्ष कहा कि जापान निर्मित ट्रेनों को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों के कारण मंत्रालय ने पहले चरण में 250 किमी/घंटा की गति क्षमता वाली स्वदेशी ट्रेनों को विकसित करने का निर्णय लिया, जिसे बाद में 320 या 350 किमी/घंटा तक उन्नत किया जायेगा। अधिकारियों ने चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जापान ने अपने पहले के प्रस्ताव बी 5 शिंकानसेन ट्रेन के बजाय अधिक उन्नत बी 10 शिंकानसेन ट्रेन का प्रस्ताव रखा। बी5 का उत्पादन वर्तमान में जापान में बंद हो चुका है।

Published / 2026-03-22 21:45:49
भारत में ही विश्व की शांति का लीडर बनने की क्षमता : सुखदेव भगत

  • भारत बनेगा शांति का लीडर? सुखदेव भगत का बड़ा वैश्विक संदेश, कहा
  • युद्ध से सिर्फ तबाही! कूटनीति ही आखिरी रास्ता, भारत को आगे आना होगा

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। वैश्विक मंच पर बढ़ते तनाव और मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच भारत की भूमिका को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि अब दुनिया को सिर्फ मूकदर्शक बने रहने की बजाय सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जहां कहीं भी मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, वहां कड़ी निगरानी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सभी प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जी7 देशों से लेकर यूनाइटेड नेशन (यूएन) तक, सभी को जिम्मेदारी के साथ स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। 

सुखदेव भगत ने युद्ध की नीति पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि युद्ध कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उनके अनुसार, युद्ध केवल विनाश, अस्थिरता और मानवीय संकट को जन्म देता है, जबकि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता हैं।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक समस्याओं का हल बातचीत और आपसी समझ से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का ईरान से लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहा है। सबसे बड़ी चीज की तकरीबन 80 प्रतिशत इंधन उक्त इलाकों से प्राप्त की जाती है। बड़ी संख्या में भारतीय लोग वहां से जीवन यापन करते हैं। 

श्री भगत ने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश हमेशा से शांति का दूत रहा है और आज के समय में उसे आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापना की पहल करनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत के पास वह नैतिक शक्ति और कूटनीतिक क्षमता है, जिसके जरिए वह दुनिया को संघर्ष से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सुखदेव भगत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में उनका यह संदेश न सिर्फ भारत की विदेश नीति बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Published / 2026-03-19 21:03:54
गैस संकट का असर : सवा लाख लोगों ने लिया पीएनजी का नया कनेक्शन

5600 एलपीजी से पीएनजी कनेक्शन पर आये 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर पाइप के जरिये गैस आपूर्ति के लिए पीएनजी कनेक्शन लेने की सरकार की अपील का असर हुआ है और पिछले दो सप्ताह में लोगों ने लगभग सवा लाख नये पीएनजी घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन लिये हैं जबकि तीन दिनों में 5600 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी छोड़कर पीएनजी कनेक्शन लिया है। सरकार ने एलपीजी के स्रोत में विविधता लाने के लिए अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया है और अन्य देशों के साथ भी बातचीत की जा रही है। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गुरुवार को अंतर मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि एलपीजी की स्थिति पश्चिम एशिया में अभी भी चल रहे युद्ध के कारण चिंताजनक बनी हुई है लेकिन किसी भी वितरक केंद्र पर गैस सिलेंडर की कमी नहीं है। 

आनलाइन बुकिंग 94 प्रतिशत तक बढ़ गयी है और 83 प्रतिशत रिफिल आपूर्ति वितरण प्रमाणीकरण के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि घबराहट में की जाने वाली बुकिंग में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि बुधवार को लगभग 57 लाख रिफिल बुकिंग की गयी और सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य है। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की स्थिति और रिफाइनरी संचालन सामान्य है। खुदरा पंपों पर किसी प्रकार की कमी की सूचना नहीं है और सभी खुदरा केंद्र सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं। घरेलू पाइप प्राकृतिक गैस और परिवहन हेतु संपीड़ित प्राकृतिक गैस की 100 प्रतिशत आपूर्ति बिना किसी कटौती के सुनिश्चित की गयी है। 

संयुक्त सचिव ने कहा कि सरकार की उपभोक्ताओं से अधिक से अधिक पीएनजी कनेक्शन लेने तथा एलपीजी से पीएनजी पर आने की अपील का असर हुआ है और पिछले दो सप्ताह में लगभग सवा लाख नये घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन प्रदान किये गये हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन दिनों में 5600 से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन में स्थानांतरित हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी के संबंध में लगभग 17 राज्य सरकारों ने आवंटन आदेश जारी किये हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति दी गई है। इसके अतिरिक्त, लगभग 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अतिरिक्त केरोसिन आवंटन के आदेश जारी किये हैं। 

अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें भी प्राप्त हो रही हैं और सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पुन: पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई करने और कानून के तहत उल्लंघन पर कठोर दंड देने को कहा है। 

उन्होंने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं तथा 25 में जिला स्तरीय निगरानी समितियां बनायी गयी हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में छापेमारी जारी है। कल लगभग 6000 छापे मारे गये। 

उत्तर प्रदेश में लगभग 1100 छापे, लगभग 1000 सिलेंडर जब्त, 17 प्राथमिकी दर्ज और एक गिरफ्तारी हुई। मध्य प्रदेश में 1632 छापे और लगभग 2500 सिलेंडर जब्त किये गये। तेलंगाना में लगभग 1000 छापे और 2300 सिलेंडर जब्त किये गये। तेल विपणन कंपनियां भी सक्रिय हैं और कल लगभग 2000 खुदरा केंद्रों तथा वितरक केंद्रों का निरीक्षण किया गया।

श्रीमती शर्मा ने कहा कि सरकार ने घरेलू एलपीजी और पीएनजी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। साथ ही केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों की भी व्यवस्था की गयी है। पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य सरकारों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को इन वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति देने की सलाह दी है। कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और अन्य इकाइयों को राज्यों को अधिक मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं। 

पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़े सभी संस्थानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। सरकार सभी स्तरों पर घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की तरह अब एलपीजी आयात के स्रोतों में भी विविधता लायी जा रही है। इसके तहत अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया गया है।

Published / 2026-03-18 20:43:00
देशभर में बनेंगे 100 नये विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क

भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत बनेंगे 100 नये विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 33,660 करोड़ रुपये की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) को मंजूरी प्रदान कर दी। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसके तहत देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का निर्माण किया जायेगा जिससे विनिर्माण को गति मिलेगी। 

उन्होंने बताया कि हर औद्योगिक पार्क 100 एकड़ से 1,000 एकड़ के क्षेत्रफल में होगा। पूर्वोत्तर राज्यों और पर्वतीय इलाकों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ की सीमा रखी गयी है। केंद्र सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देगी जिससे पार्कों के अंदर सड़कें, भूमिगत यूटिलिटी सुविधाएं, नाली, साझा ट्रीटमेंट संयंत्र और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा प्रशासनिक तंत्र तैयार किये जायेंगे। 

साथ ही निवेशकों के लिए फैक्ट्री शेड, जांच प्रयोगशालाएं और वेयरहाउस भी पहले से तैयार होंगे। श्रमिकों के रहने के लिए घर और अन्य सहायक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, परियोजना लागत के 25 प्रतिशत तक की केंद्रीय मदद बाह्य बुनियादी ढांचों के लिए दी जायेगी। 

श्री वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीतियों में स्थिरता, प्रतिभा भंडार और डिजाइनिंग की क्षमता के दम पर भारत विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन कर उभरा है। प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों से आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया को समर्थन मिलेगा और विशेषकर युवा वर्ग को काफी लाभ होगा। उन्हें विनिर्माण सेक्टर में रोजगार के अवसर मिलेंगे और आने वाले समय में देश को बहुत फायदा होगा। 

उन्होंने बताया कि यह छह साल का कार्यक्रम होगा। राज्य सरकारों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और निजी डेवलपरों के साथ मिलकर कुल 34,000 एकड़ में निवेश के लिए तैयार क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य है। औद्योगिक पार्क के विकास के लिए शहरों का चयन चैलेंज के आधार पर किया जायेगा। 

योजना से विनिर्माण कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को लाभ की उम्मीद है। विनिर्माण गतिविधियां बढ़ने से कामगार, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता, सेवा क्षेत्र की कंपनियां और स्थानीय लोग भी लाभान्वित होंगे।

Published / 2026-03-17 21:23:13
2047 तक महाराष्ट्र के सारे वाहन हो जायेंगे इलेक्ट्रिक!

  • इलेक्ट्रिक बनेगा महाराष्ट्र! 2037 तक बसें, 2047 तक सभी वाहन होंगे ईवी 
  • प्लान के अनुसार 2047 तक महाराष्ट्र के सभी वाहन इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें निजी और कमर्शियल दोनों वाहनों को ईवी में शिफ्ट करने पर जोर दिया जायेगा। 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बड़ा विजन तैयार किया गया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधान परिषद में कहा कि आने वाले वर्षों में राज्य परिवहन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होने की दिशा में बढ़ेगा। 

इस योजना के तहत एमएसआरटीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम) के मौजूदा बस बेड़े को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जायेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के बेड़े की सभी बसें 2037 तक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में तब्दील हो जायेंगी। 

सरनाइक ने कहा कि ऐसा लक्ष्य रखा जा रहा है जिसके तहत महाराष्ट्र में चलने वाले सभी वाहन 2047 तक ईवी कर दिये जायेंगे। इस दिशा में एक कदम के रूप में एमएसआरटीसी की योजना 2037 तक अपने बेड़े में सभी इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की है। 

सरनाइक ने बताया कि एमएसआरटीसी के बेड़े में वर्तमान में 22,000 बसें हैं। इसमें 800 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं और 2037 तक एमएसआरटीसी के बेड़े की सभी बसें इलेक्ट्रिक हो जायेंगी। यह चरणबद्ध तरीके से किया जायेगा। 

एमएसआरटीसी राज्य का पहला परिवहन निगम होगा जो अपने पूरे बेड़े को इलेक्ट्रिक रूप में परिवर्तित करेगा। सरकार सिर्फ बसों तक सीमित नहीं है। प्लान के अनुसार 2047 तक महाराष्ट्र के सभी वाहन इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें निजी और कमर्शियल दोनों वाहनों को ईवी में शिफ्ट करने पर जोर दिया जायेगा। 

ये पहले भारत में ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार रेंज की चिंता को दूर करने के लिए राज्य के हर राजमार्ग पर प्रति 25 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना बना रही है। साथ ही हाइवे और शरहों में तेजी से नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। 

सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 के अनुसार, अटल सेतु, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग का उपयोग करने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल शुल्क से 100 प्रतिशत की छूट दी जाती है। ईवी खरीदने वाले नागरिकों को सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी दी जा रही है ताकि शुरुआती लागत को कम किया जा सके।

Published / 2026-03-16 18:19:47
अब डेयरी उद्योग पर दिखने लगा गैस संकट का असर

गैस संकट का असर डेयरी उद्योग पर, दूध की सप्लाई पर मंडराया खतरा, 10 दिन का बचा पैकिंग स्टॉक 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते ऊर्जा संकट का असर अब डेयरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के कई डेयरी संचालकों ने चेतावनी दी है कि एलपीजी की कमी के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। 

दूध को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक निश्चित तापमान पर गर्म यानी पाश्चुरीकरण करना जरूरी होता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। गैस की अनियमित सप्लाई के कारण खासतौर पर छोटी और मध्यम स्तर की डेयरियों के लिए दूध को खराब होने से बचाना मुश्किल होता जा रहा है। 

पैकेजिंग मटेरियल की भी कमी 

डेयरी उद्योग के सामने एक और बड़ी समस्या दूध के पैकेट और कार्टन की कमी बनकर सामने आयी है। दूध के पैकेट बनाने वाली फैक्ट्रियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन धीमा हो गया है। 

गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के अनुसार फिलहाल उनके पास पैकेजिंग सामग्री का स्टॉक सिर्फ करीब 10 दिनों के लिए बचा है। अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो दूध की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। चेंबूर स्थित सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी कहा कि अगर अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो डेयरी उद्योग बड़े संकट में फंस सकता है। 

होटल-रेस्टोरेंट से मांग घटी 

गैस की कमी का असर दूध की मांग पर भी पड़ रहा है। होटल और रेस्टोरेंट खुद एलपीजी संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्होंने दूध के आॅर्डर कम कर दिये हैं। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के मुताबिक हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े आॅर्डर रद्द हो गये। छोटे डेयरी संचालकों के पास स्टोरेज की सुविधा सीमित है, इसलिए वे दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं। 

बड़ी डेयरियों पर फिलहाल कम असर 

राहत की बात यह है कि बड़ी डेयरी कंपनियों पर फिलहाल इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। अमूल के एमडी जयेन मेहता के अनुसार उनकी करीब 80% गैस जरूरतें पूरी हो रही हैं, जबकि बाकी जरूरतें डीजल और अन्य ईंधनों से पूरी की जा रही हैं। इसी तरह मदर डेयरी भी अपने प्रोसेसिंग सेंटर्स पर पीएनजी और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे फिलहाल उनकी दूध सप्लाई सामान्य बनी हुई है।

Published / 2026-03-16 09:02:23
UGC को लेकर अब दरकने लगा भाजपा का सवर्ण वोट बैंक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 8 मार्च उत्तराखंड वाली रैली अब खुलेआम बीजेपी के चेहरे पर तमाचा मार चुकी है। अमित शाह स्टेज पर खड़े होकर बड़े जोश में भारत माता की जय का नारा लगवाने की कोशिश कर रहे थे, जैसे हर बार की तरह भीड़ ताली बजाकर जय चिल्ला देगी। भीड़ ने भारत माता की जय तो बोला लेकिन क्या हुआ? पूरी भीड़ ने एक साथ गरज कर जवाब दिया – UGC एक्ट वापस लो! UGC वापस लो!

शाह बार-बार कोशिश करते रहे – अरे भाई, उत्तराखंड वालों की आवाज़ क्या हो गई?  हल्की-सी धमकी-भरी टोन में चुप करवाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने साफ मना कर दिया। नारे नहीं रुके, बल्कि और तेज़ हो गए। मिला UGC रोल बैक का गुस्सा भरा जवाब। 

यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है – यह सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) का पहला बड़ा, खुला विद्रोह है बीजेपी के खिलाफ। सालों से वोट बैंक समझकर आरक्षण, कोटा, अब UGC के नए नियमों (2026) में इक्विटी कमेटी बनवाकर OBC/SC/ST को पावर देने की कोशिश की, तो जनरल कैटेगरी के लोग अब चुप नहीं बैठे। वे कह रहे हैं – मेरिट मारो मत, हमें बांटो मत, फाल्स केस से बचाओ!

देशभर में आग लग चुकी है – UP में सिर मुंडवाए जा रहे हैं, ब्लड से चिट्ठी लिखी जा रही है PM को, BJP के ही लोकल लीडर इस्तीफे दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया, लेकिन गुस्सा थम नहीं रहा। उत्तराखंड में अमित शाह के सामने जनता ने साफ बोल दिया – तुम्हारी सबका साथ वाली बात अब नहीं चलेगी, UGC काला कानून है, वापस लो!

Page 2 of 331

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse