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Published / 2026-02-05 21:23:23
छत्तीसगढ़ : 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने किया सरेंडर

  • छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पूना मर्जेम अभियान और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर करने वाले नक्सलियों में आठ महिलाएं भी शामिल हैं। सभी को सहायता राशि देकर पुनर्वास किया जायेगा।

एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने गुरुवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं। 

ये सभी माओवादी संगठन के साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े थे। इन्होंने बस्तर पुलिस की पूना मर्जेम (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। 

इनमें सोमडू मड़काम (42) डिविजनल कमेटी मेंबर और कटेकल्याण एरिया कमेटी प्रभारी, हुंगी कुंजाम (19) और पायकी कुंजाम (22) शामिल हैं, जो अलग अलग यूनिट के पार्टी मेंबर थे। इन तीनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा तीन अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, एक पर दो लाख रुपये और पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। 

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने एक एके 47 रायफल, दो सेल्फ लोडिंग रायफल (एसएलआर), 250 जिलेटिन स्टिक, 400 डेटोनेटर, बारूद से भरा एक प्लास्टिक ड्रम और कॉर्डेक्स वायर का एक बंडल भी पुलिस को सौंपा। अधिकारी ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल 5- 50 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी और सरकार की नीति के तहत उनका पुनर्वास किया जायेगा। 

2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने मुख्यधारा में की वापसी 

पुलिस के अनुसार, बीजापुर जिले में एक जनवरी 2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है, जबकि 1,163 गिरफ्तार हुए और अलग अलग मुठभेड़ों में 231 मारे गये। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि माओवादी संगठन तेजी से अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित होने, सड़क संपर्क बेहतर होने, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच से संगठन का आधार क्षेत्र लगातार सिमट रहा है। 

उन्होंने शेष नक्सली कैडरों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता केवल विनाश, पीड़ा और अंधकार की ओर ले जाता है, जबकि पूना मर्जेम अभियान शांति, सम्मानजनक जीवन और सकारात्मक भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। सुरक्षित भविष्य और नये जीवन के निर्माण की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है। 

इस आत्मसमर्पण के साथ ही इस वर्ष अब तक राज्य में 220 से अधिक नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। 15 जनवरी को बीजापुर जिले में ही 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि पिछले वर्ष राज्य में 1,500 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया था। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया है।

Published / 2026-02-03 22:43:06
5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके से हिली बंगाल की धरती

  • कोलकाता में महसूस किए गए भूकंप के झटके
  • म्यांमार में था केंद्र, 5.9 आंकी गई तीव्रता

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र म्यांमार में बताया जा रहा है। रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 आंकी गई है। 

अभी तक किसी की मौत या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। म्यांमार में भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 10 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है।

नेशनल सेंटर ऑफ़ सीस्मोलॉजी (NCS) के एक बयान के अनुसार, यह घटना सोमवार को सुबह करीब 3.30 बजे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 4.6 तीव्रता के भूकंप के एक दिन बाद हुई है। NCS के बयान के अनुसार भूकंप का अक्षांश 9.03 उत्तर और देशांतर 92.78 पूर्व बताया गया है।

Published / 2026-02-03 21:18:38
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द बयान जल्द : पीयूष गोयल

  • ट्रेड डील की डिटेल्स फाइनल स्टेज में; भारत-अमेरिका जल्द जारी करेंगे बयान : पीयूष गोयल 
  • भारतीय मसालों का जायका होगा तेज, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा 
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का स्वागत किया, कहा- मेड इन इंडिया को मिली बड़ी राहत 
  • अमेरिकी टैरिफ कटौती से रत्न, आभूषण और कपड़ा सेक्टर को बढ़ावा, रूसी तेल से तुरंत दूरी मुश्किल 
  • रेटिंग एजेंसी ने कहा, कम टैरिफ रत्न, आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए पॉजिटिव होगी, जो टॉप निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि ज्यादातर भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ रेट में कटौती रत्न, आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए पॉजिटिव है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय सामानों पर जवाबी टैरिफ को मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी पर लायेगा। 

भारत का वस्तु निर्यात बढ़ने की संभावना 

मूडीज ने एक बयान में कहा कि यह व्यापार समझौता अमेरिका को होने वाले भारत के वस्तु निर्यात की वृद्धि को फिर से एक्टिव करेगा। भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा वस्तु निर्यात बाजार बना हुआ है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, कम टैरिफ रत्न, आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए पॉजिटिव होगी, जो टॉप निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं। 

हालांकि, दवा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, जो अन्य दो प्रमुख निर्यात क्षेत्र हैं, उन्हें अमेरिका द्वारा लगाये गये 50 फीसदी के हाई टैरिफ से पहले ही छूट दी गयी थी और इसलिए शुल्क में इस कटौती से उनके प्रभावित होने की संभावना नहीं है। 

रूसी तेल से दूरी तुरंत संभव नहीं 

मूडीज ने यह भी कहा कि भले ही भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी है, लेकिन इसकी संभावना कम है कि वह तुरंत खरीद पूरी तरह बंद कर देगा, क्योंकि ऐसा करना भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बाधक हो सकता है। मूडीज ने कहा, पूरी तरह से गैर-रूसी तेल की ओर स्थानांतरित होने से अन्य जगहों पर सप्लाई कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है।

Published / 2026-02-03 18:09:39
देशहित के साथ समझौता कर रहे पीएम मोदी : राहुल गांधी

एबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए कहा है कि पैसा देकर उनकी जो छवि बनायी गयी थी, वह टूट रही है। इसलिए श्री मोदी ने डर कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते तथा अन्य मामले में देश के हितों के साथ समझौता कर लिया है। 

श्री गांधी ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस सांसदों के साथ मकर द्वार पर पार्टी के आठ सांसदों-हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पाडोले, एस वेंकटेशन और डीन कुरियाकोस के लोकसभा से निलंबन और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन करने के बाद पत्रकारों से कहा कि विपक्ष के नेता को संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है और यह इसलिए हो रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री ने भारत के हितों के साथ समझौता कर देश को बेच दिया है।

Published / 2026-02-03 18:04:10
अमेरिका से टैरिफ डील में किसानहित से कोई समझौता नहीं!

किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं हुआ... टैरिफ डील पर सरकार के सूत्रों ने साफ की पूरी बात 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को लेकर संसद के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार के सूत्रों ने साफ किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। 

किसानों से जुड़े कृषि और डेयरी जैसे सभी संवेदनशील सेक्टर पहले की तरह पूरी तरह संरक्षित रहेंगे। सरकारी सूत्रों ने कहा कि विपक्ष का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है और यह समझौता भारत के आर्थिक हितों तथा निर्यात क्षमता को मजबूत करने वाला है। 

  1. भारतीय किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं। 
  2. संवेदनशील डेयरी और कृषि क्षेत्रों की रक्षा की जायेगी। 
  3. भारत ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा, बाजार मूल्य इसका निर्धारण करेंगे। 
  4. भारत प्रतिबंधित संस्थाओं से ऊर्जा खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। 
  5. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर की ओर 5 गुना बढ़ेगा। 
  6. नये व्यापार समझौते से भारी आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। 

कच्चे तेल की खरीद पर भी सरकार ने दी सफाई 

सूत्रों ने बताया कि भारत पहले की तरह ही दुनिया के उन देशों से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां से खरीदने पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। वेनेजुएला पर जब पाबंदी थी, भारत ने वहां से तेल नहीं खरीदा। अब पाबंदी हट चुकी है, इसलिए बाजार भाव (रेट) के आधार पर खरीद जारी रहेगी। 

विपक्ष ने लगाया किसानों के हितों से समझौते का आरोप 

संसद भवन के बाहर विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ टैरिफ डील में किसानों के हितों से समझौता किया गया है। सरकार ने किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल दिया है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार संसद में डील की सभी शर्तों को पेश करे और यह स्पष्ट करे कि इसका कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 

पीयूष गोयल टैरिफ डील के बारे में संसद में समझायेंगे 

इस पर सरकार का कहना है कि कृषि डेयरी सेक्टर को किसी भी तरह का खतरा नहीं। संवेदनशील श्रेणियां पहले जैसी संरक्षित रहेंगी। यह डील भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करेगी।

Published / 2026-02-02 21:16:43
दलाई लामा को पहली बार ग्रैमी अवार्ड

आडियो बुक श्रेणी में धमाका, दलाई लामा ने पहली बार जीता ग्रैमी अवार्ड 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के प्रतिष्ठित संगीत पुरस्कार 68वें ग्रैमी अवॉर्ड समारोह में रविवार को दलाई लामा ने आडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई (स्टोरीटेलिंग) रिकॉर्डिंग श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीता। यह दलाई लामा का पहला ग्रैमी पुरस्कार है। उन्होंने इस श्रेणी में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश केतनजी ब्राउन जैक्सन को पीछे छोड़ा। के-पॉप डेमन हंटर्स फिल्म के गीत गोल्डन ने दृश्य मीडिया के लिए लिखे गये सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार जीता। 

यह पहला मौका है जब किसी के-पॉप कलाकार/समूह ने ग्रैमी जीता। गीतकारों ने पुरस्कार लेते समय अंग्रेजी और कोरियाई दोनों भाषाओं में अपना भाषण दिया। संगीत फिल्म का पुरस्कार म्यूजिक फॉर जॉन विलियम्स को मिला और इसी के साथ निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने अपना पहला ग्रैमी जीता और वह आधिकारिक रूप से ईजीओटी (एमी, ग्रैमी, टोनी और आस्कर जीतने वाले कलाकार) बन गये। मुख्य समारोह से पहले होने वाला प्रारंभिक पुरस्कार समारोह लॉस एंजिलिस शहर के पीकॉक थिएटर में आयोजित किया गया। इस दौरान 86 ग्रैमी पुरस्कार दिये जाने हैं। 

समारोह में कई कलाकारों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की आव्रजन नीति के खिलाफ आवाज उठायी। अमेरिकी गायक शाबूजी ने भावुक होकर कहा कि प्रवासियों ने इस देश को बनाया है। अमेरिकी गायक ग्लोरिया एस्टेफन ने भी मौजूदा राजनीतिक हालात पर चिंता जतायी। मुख्य समारोह की मेजबानी हास्य कलाकार ट्रेवर नोआ करेंगे। 2026 के ग्रैमी नामांकनों में केंड्रिक लैमर नौ नामांकनों के साथ सबसे आगे हैं, जबकि लेडी गागा, जैक एंटोनॉफ और अन्य बड़े नाम भी दौड़ में शामिल हैं।

Published / 2026-02-01 23:12:14
आम बजट 2026 से जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा

  • आम बजट 2026 से जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा
  • देश का 9वां बजट पेश... जानिए क्या सस्ता और क्या हुआ महंगा?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। यह मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर उनका लगातार नौवां बजट रहा। अपने बजट भाषण में उन्होंने कस्टम ड्यूटी से जुड़ी कई अहम घोषणाएं कीं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। कुछ वस्तुएं सस्ती होंगी, जबकि कुछ चीजों की कीमत बढ़ सकती है।

कस्टम ड्यूटी में क्यों किया गया बदलाव

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार का फोकस उन वस्तुओं को बढ़ावा देना है, जिनका निर्माण देश में होता है। इसी उद्देश्य से भारत में बनने वाले उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला लिया गया है। इससे घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लेदर और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर के निर्यात को ड्यूटी फ्री किया जा रहा है। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में भी बेसिक कस्टम ड्यूटी में राहत दी जाएगी, जिससे स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

ये चीजें होंगी सस्ती

बजट घोषणाओं के बाद कई रोजमर्रा और टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं : कपड़े और टेक्सटाइल उत्पाद, लेदर और चमड़े से बने आइटम, सिंथेटिक फुटवियर, कैंसर और डायबिटीज की 17 जरूरी दवाएं (ड्यूटी फ्री), लिथियम-आयन सेल, मोबाइल फोन की बैटरियां, सोलर ग्लास, मिक्स्ड गैस सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, माइक्रोवेव ओवन, विमानों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन, विदेश यात्रा से जुड़ी कुछ लागत, इन वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी घटने से आने वाले समय में इनके दाम कम होने की संभावना है।

इन सेक्टर्स में बढ़ सकती है महंगाई

वहीं कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं, जहां कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे इन चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शराब, स्क्रैप, खनिज और उनसे जुड़े उत्पाद।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

कुल मिलाकर बजट 2026 में सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और हेल्थ सेक्टर को राहत देने की कोशिश की है। वहीं, कुछ सेक्टर्स में ड्यूटी बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने और आयात को नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर बाजार और आम उपभोक्ताओं पर साफ दिखाई देगा।

Published / 2026-02-01 21:20:14
सीतारमण का ऐलान- मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज पर अब नहीं लगेगा टैक्स

वित्त मंत्री द्वारा बजट 2026 में मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज को इनकम टैक्स और टीडीएस से पूरी तरह फ्री करने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। इसमें एक ऐसा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जो सड़क हादसों के शिकार लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है। अब मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) से मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स बिल्कुल नहीं लगेगा।

साथ ही इस ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जायेगा। वित्त मंत्री ने भाषण में कहा, मैं प्रस्ताव दे रही हूं कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिये गये ब्याज को इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। इस ब्याज पर कोई टीडीएस भी नहीं लगेगा। यह छूट अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी। 

क्यों लिया गया यह फैसला? 

बजट में साफ लिखा है कि मोटर वाहन दुर्घटना में घायल हुए लोग और उनके परिवार पहले से ही बहुत परेशान होते हैं। ऐसे में मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाना उनकी मुश्किलें और बढ़ा देता है। इसलिए अब इस ब्याज को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया जायेगा। चाहे ब्याज की रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अब उस पर कोई टैक्स नहीं कटेगा। 

पुराने नियम क्या थे? 

पहले एमएसीटी से मिलने वाले मुआवजे पर ब्याज को इनकम माना जाता था और उस पर टैक्स लगता था। टीडीएस के मामले में अगर एक साल में ब्याज 50,000 रुपये से कम होता था तो कोई कटौती नहीं होती थी। लेकिन इससे ज्यादा होने पर टीडीएस कट जाता था। अब यह पूरी सीमा खत्म हो गई है। यानी छोटी हो या बड़ी, ब्याज की कोई भी राशि हो, अब टीडीएस नहीं कटेगा। 

कोर्ट में लंबित था मामला 

यह मुद्दा काफी समय से अदालतों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल विचाराधीन है कि क्या एमएसीटी के ब्याज पर टीडीएस लगना चाहिए। 2024 में कोर्ट ने केंद्र और इनकम टैक्स विभाग से इस पर अपनी राय मांगी थी। 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच हो कि कितने लोगों के मुआवजे से टीडीएस काटा गया और वह पैसा रिफंड के रूप में पड़ा है क्योंकि कई लोग टैक्स स्लैब में ही नहीं आते। 

बंबई हाई कोर्ट ने भी एक फैसले में कहा था कि क्लेम दाखिल होने से लेकर अवॉर्ड या अपील तक का ब्याज इनकम नहीं है, इसलिए उस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। इस प्रस्ताव से उन हजारों परिवारों को फायदा होगा जो सालों इंतजार के बाद मुआवजा पाते हैं और उसमें जुड़ा ब्याज भी टैक्स की वजह से कम हो जाता था।

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