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Published / 2021-09-08 09:38:22
ऐतिहासिक कदम: अब महिलाएं भी होंगी NDA में भर्ती , SC के आदेश के बाद केंद्र का बड़ा फैसला

एबीएन डेस्क। केंद्र ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि सशस्त्र बलों ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में महिलाओं की भर्ती करने का फैसला किया है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ को बताया कि सरकार के साथ ही सशस्त्र बलों के उच्च स्तर पर फैसला लिया गया है कि एनडीए के जरिए स्थायी कमीशन के लिए महिलाओं की भी भर्ती की जाएगी। भाटी ने हलफनामे के जरिए जानकारी देने के लिए न्यायालय की अनुमति मांगी। न्यायालय ने कहा कि वह समय-समय पर प्राधिकारियों को खुद इसे करने के लिए प्रेरित करता रहा है और उसका मानना है कि वे इसे करने के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं। पीठ ने कहा, ऐसी राय है कि जब कुछ नहीं होता तो अदालत आगे आती है। आपको आश्वस्त कर दूं कि अदालत को हस्तक्षेप करने में खुशी नहीं होती और हम चाहेंगे कि सशस्त्र बल खुद यह करें। वे देश के सम्मानित बल हैं लेकिन लैंगिक समानता पर उन्हें और करने की आवश्यकता है और कभी-कभी प्रतिरोध अच्छा साबित नहीं होता। सुधार एक दिन में नहीं होते, हम इससे अवगत हैं पीठ ने कहा, मैं खुश हूं कि सशस्त्र बलों के प्रमुख ने एक सकारात्मक फैसला लिया है। रिकॉर्ड में रखिए, हम मामले पर सुनवाई करेंगे। हम इस रुख से खुश हैं। हमें अगले हफ्ते मामले पर सुनवाई करने दीजिए। सुधार एक दिन में नहीं होते। हम इससे अवगत हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि ऐसा विचार पहले ही चल रहा था लेकिन वह केवल शुरुआती स्तर पर था। मामले पर सुनवाई के लिए दो हफ्ते बाद की तारीख तय की गयी है। उच्चतम न्यायालय वकील कुश कालरा की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इस याचिका में प्रतिष्ठित एनडीए में लैंगिक आधार पर योग्य महिलाओं को भर्ती नहीं करने का मुद्दा उठाते हुये इसे समानता के मौलिक अधिकार का कथित तौर पर उल्लंघन बताया गया था।

Published / 2021-09-08 08:12:10
कैबिनेट बैठक: इन क्षेत्रों को मिल सकती है राहत, किसानों के लिए हो सकता है बड़ा एलान

एबीएन डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की अहम बैठक हो रही है। इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार इस में दूरसंचार और टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए राहत पैकेज पर एलान हो सकता है। इतना ही नहीं, किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। बैठक में रबी फसलों की मिनिमम सपोर्ट प्राइस में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है। दूरसंचार क्षेत्र के लिए राहत पैकेज संभव : केंद्र सरकार टेलीकॉम उद्योग के लिए एक लंबी अवधि के राहत पैकेज पर काम कर रही है। बता दें कि देश में कुछ टेलीकॉम कंपनियां इस समय वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। जानकारी के अनुसार इसमें एजीआर बकाया को फिर से परिभाषित किया जा सकता है और गैर संचार वस्तुओं को बाहर करने की योजना शामिल हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र के लिए राहत पैकेज का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास भेजा भी जा चुका है। बता दें कि देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का भारी एजीआर बकाया है। टेक्सटाइल सेक्टर को भी मिल सकती है राहत : टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) स्कीम की घोषणा हो सकती है। मालूम हो कि कपड़ा मंत्रालय ने उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन या पीएलआई योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने सुस्त पड़ी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने या पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई में 10,680 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की थी। सरकार इन पैसों से परिधान को बढ़ावा देने, रोजगार और निर्यात क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का मुख्य फोकस मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) के तहत 40 प्रोडक्ट श्रेणियों और तकनीकी वस्त्रों के तहत 10 उत्पाद श्रेणियों पर होगा। पीएलआई योजना के लागू होने से ग्रीनफील्ड (नई कंपनियां स्थापित की जा रही हैं) और ब्राउनफील्ड (कंपनियां जो पहले से ही परिचालन में हैं) में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

Published / 2021-09-03 07:08:21
यूपी में डेंगू और वायरल बुखार का कहर, केवल फिरोजाबाद में 75 ने तोड़ा दम

उत्तर प्रदेश। कोरोना के बाद अब डेंगू और वायरल बुखार यूपी में कहर बरपा रहा है। अब तक 100 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। केवल फिरोजाबाद में 75 लोग इस बीमारी से दम तोड़ चुके हैं। गुरुवार को 4 मासूम समेत 14 लोगों की मौत हो गई। जिसमें फिरोजाबाद में 11, मैनपुरी में दो और मथुरा का एक मरीज शामिल है। डेंगू और वायरल बुखार के बढ़ते प्रकोप को देखते हुये प्रशासन अलर्ट है। लापरवाही बरतने के आरोप में तीन डॉक्‍टर नप गये। डीएम चंद्रविजय सिंह ने पीएचसी सैलई के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ गिरीश श्रीवास्तव, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ सौरभ प्रकाश और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. रुचि यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। कानपुर में भी डेंगू और वायरल फीवर से सात दिन में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से पांच रोगियों की बीते 24 घंटे में जान गई है। इनमें दो बच्चे शामिल हैं। इस बीमारी में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स गिरकर 30 हजार आ जा रहा है। साथ ही सांस तंत्र फेल होने जैसे लक्षण मिल रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी इसे विचित्र बुखार कह रहे हैं। दरअसल यह स्क्रब टाइफस बीमारी है। दिल्ली में कराई गई जांच में रोगियों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। वहां जांच की व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इसे नजरअंदाज कर रहा है।

Published / 2021-09-03 07:03:07
तेजस एक्सप्रेस में चड्ढी-बनियान में घूम रहे थे जदयू विधायक, यात्रियों ने टोका तो करने लगे मारपीट

पटना। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक गोपाल मंडल ने एक बेहद शर्मनाक हरकत की है, जिसके चलते वे एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। राजेन्द्र नगर (पटना) से नई दिल्ली को जाने वाली 02309 तेजस राजधानी एक्सप्रेस में गोपाल मंडल यात्रा कर रहे थे। इस दौरान वे कपड़े उतारकर चड्ढी-बनियान में घूमते दिखे। गोपाल मंडल को इस तरह देखकर कोच में मौजूद दूसरे यात्री ने आपत्ति जताई और उन्हें कपड़े पहनने के लिए कहा। लेकिन जेडीयू विधायक नहीं माने और उस यात्री के साथ गाली-गलौज करने लगे। विवाद बढ़ता देख वहां मौजूद आरपीएफ की टीम ने मामले को शांत करने की कोशिश की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक आरपीएफ़ जवान ने बताया कि यह घटना दिलदारनगर स्टेशन के पास हुई। दरअसल, गोपाल मंडल तेजस राजधानी एक्सप्रेस के A-1 कोच में सफर कर रहे थे। उसी कोच में जहानाबाद के रहने वाले प्रहलाद पासवान अपने परिवार के साथ नई दिल्ली जा रहे थे। तभी उन्होंने जेडीयू विधायक को कपड़े उतारकर चड्ढी-बनियान में घूमते देखा। गोपाल चड्ढी-बनियान में टॉयलेट गए थे, जिसके बाद प्रहलाद ने आपत्ति जताई और महिला यात्री साथ में होने का हवाला दिया। आरोप है कि विरोध के बाद विधायक गुस्से में आ गए और सहयात्री को गाली देते हुए मारपीट करने पर उतारू हो गए। विधायक के साथ तीन लोग सफर कर रहे थे। यात्रियों के साथ कहासुनी होने पर साथ आए लोग उन्हें समझाने लगे। इसी बीच मौके पर पहुंचे टीटीई ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत करवाया। वहीं इसके बाद वहां मौजूद आरपीएफ़ की टीम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन की रेल पुलिस से विधायक की शिकायत की, इसपर आरपीएफ ने उनका कोच बदल दिया। हालांकि बाद में न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए गोपाल मंडल ने कहा, वास्तविक में हम चड्ढी-बनियान में थे, क्योंकि जैसे ही ट्रेन में चढ़े, मेरा पेट खराब हो गया। मैं जो बोलता हूं सच बोलता हूं। झूठ मैं बोलता नहीं हूं। झूठ बोलने से मुझे फांसी नहीं लग जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रहलाद ने विधायक के खिलाफ इस मामले में किसी प्रकार की लिखित शिकायत नहीं की है, जिसके बाद ट्रेन वहां से आगे लिए निकल गई।

Published / 2021-09-02 16:51:14
IIT-Jee Exam : दिल्ली, महाराष्ट्र और झारखंड के 20 ठिकानों पर सीबीआई रेड

नई दिल्ली। आईआईटी-जेईई (मेन्स) परीक्षा के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई ने आज देशभर के 20 स्थानों पर छापेमारी की। देश की शीर्ष जांच एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आज एफिनिटी एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर जेईई (मेन्स) परीक्षा के आयोजन में कथित अनियमितताओं के लिए मामला दर्ज किया। सीबीआई ने गुरुवार को देश भर में 20 स्थानों पर छापेमारी की। शीर्ष जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने छापेमारी से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तलाशी दिल्ली-एनसीआर, पुणे, जमशेदपुर सहित विभिन्न शहरों में फैली हुई है। सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने कहा कि सीबीआई ने संस्थान, उसके निदेशकों, उनके दलालों/सहयोगियों और परीक्षा केंद्र पर तैनात कर्मचारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा, एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों, तीन कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों (नाली) सहित अन्य के खिलाफ एक सितंबर, 2021 को मामला दर्ज किया गया था।

Published / 2021-09-02 04:06:41
कोरोना : स्कूल खोलने के पक्ष में एम्स डायरेक्टर गुलेरिया

एबीएन डेस्क। देश में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से तेज हो गए हैं। इसी महीने तीसरी लहर आने की आशंका है। इधर राष्ट्रीय राजधानी में 1 सितंबर से बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए गए हैं, लेकिन बच्चों के लिए देश में अभी तक टीका उपलब्ध नहीं है। सरकार के इस फैसले ने विशेषज्ञों, छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बहस शुरू कर दी है कि बिना वैक्सीनेट बच्चे स्कूल कैसे जा सकते हैं। इस सबके बीच एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में सभी बच्चों को टीकाकरण करने में नौ महीने तक का समय लगेगा, ऐसे में लंबे समय तक बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। बच्चों के विकास के लिए स्कूल खुलना जरूरी है। क्योंकि बच्चों के लिए शारीरिक संपर्क अहम है। स्कूलों को खोलने पर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि उन जगहों पर स्कूल खुल सकते हैं जहां पर कोरोना के मामले कम हैं। एम्स डायरेक्टर गुलेरिया ने बताया कि सभी बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा नहीं होती और ना ही वह माहौल रहता है, ऐसे में स्कूल खोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि करीब-कीरब स्कूलों में सभी टीचरों को वैक्सीन लग चुकी है, वहां की हालत सबसे ज्यादा अनुकूल है। उन्होंने तमाम टीचरोंस स्टाफ से अपील की है कि वे खुद आगे आकर टीका लगवाएं । डॉ गुलेरिया ने स्कूल प्रशासन से लंच ब्रेक और अन्य किसी भी समय भीड़ नहीं जुटने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसका हमें पूरा ख्याल रखना होगा कि बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं या नहीं। तीसरी लहर से निपटने की तैयारी जोरों पर : वहीं, तीसरी लहर के दौरान बच्चों को चपेट में आने पर डॉ गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना के मद्देनजर बच्चों के वॉर्ड बनाने और अन्य मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए हर जिले में तैयारी जोरों पर है। बता दें कि मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डॉ नरेश त्रेहान ने कहा था कि कोरोना से अगर बच्चे बीमार पड़े तो हमारे अस्पताल उन्हें संभाल नहीं पाएंगे, क्योंकि हमारे पास अभी तक उतनी सुविधा नहीं है।

Published / 2021-08-31 09:28:20
अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिकी सेना ने छोड़ दिया

एबीएन डेस्क। आखिरकार देर रात को अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिकी सेना ने छोड़ दिया और जाते-जाते अफगानिस्तान को आठ लाख एक हज़ार इक्कीस ऐसे हथियार मुहैया करा दिए जिस पर हक्कानी नेटवर्क, अल-कायदा और आईएस समेत तमाम आतंकी संगठनों की नजरें लग गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है इन हथियारों को पाने की होड़ में अफगानिस्तान की धरती खून से लाल होने वाली है। शायद यही वजह है कि कभी अल-कायदा के मुखिया ओसामा बिन लादेन के शार्प शूटर रहे डॉक्टर अमीन उल हक समेत कई आतंकियों की तालिबान में बीती शाम से एंट्री शुरू हो चुकी है। शुरुआत से ही इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि अमेरिका जब अफगानिस्तान की जमीन छोड़ेगा तो उसके हथियार और गोला बारूद का इस्तेमाल कौन करेगा। जाहिर सी बात है जब सत्ता तालिबान को मिली है तो इन हथियारों का इस्तेमाल भी तालिबान ही करेगा। लेकिन विशेषज्ञों की राय में ऐसा मुश्किल लगता है। रक्षा मामलों के जानकार और खुफिया विभाग में कभी अपनी सेवाएं दे चुके एसएन शर्मा कहते है कि दरअसल तालिबान खुद इस वक्त बिखरा हुआ है। उसे सत्ता तो अमेरिका की शह पर अफगानिस्तान में मिल गई, लेकिन उसकी सत्ता में सेंध लगाने के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन घात लगाए बैठे हुए हैं। दरअसल ये संगठन अफगानिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए ही उत्सुक नहीं है बल्कि उनकी नजरें लाखों की संख्या में मौजूद हथियारों पर कब्जा जमाने की लगी हुई है, जो अमेरिका जाते-जाते अफगानिस्तान को सौंप गया है। रक्षा विशेषज्ञ शर्मा कहते हैं कि तालिबान भी इसमें शुरुआत से ही गच्चा खाता हुआ नजर आ रहा है। उनके मुताबिक तालिबान ने जिस तरीके से काबुल समेत कई शहरों की सुरक्षा का जिम्मा हक्कानी को दिया उससे हक्कानी नेटवर्क के पास अमेरिकी हथियार और गोला-बारूद तक पहुंच के सारे अधिकार मिल गए। वे कहते हैं जब हक्कानी नेटवर्क के पास हथियारों को इस्तेमाल करने के अधिकार हैं तो एक नजरिए से यह माना जाए कि इन हथियारों की अधिकांश संख्या पर हक्कानी नेटवर्क का कब्जा हो गया है। उनका कहना है कि यहीं से सबसे घातक खेल शुरू होने वाला है। क्योंकि जो हथियार हक्कानी नेटवर्क के पास होंगे उनकी पहुंच हक्कानी नेटवर्क के सबसे चहेते आतंकी संगठन आईएस खोरासन को भी होगी। आईएस खोरासन के पास पहुंचने वाले हथियारों का इस्तेमाल तालिबान के खिलाफ यानी अफगानिस्तान में होगा या नहीं इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं ले सकता। शर्मा के मुताबिक आतंकियों का खेल यहीं से शुरू होगा। क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पहले से मौजूद अल-कायदा कभी यह नहीं चाहेगा कि फ्री में मिलने वाले लाखों की संख्या में हथियारों और गोला बारूद का इस्तेमाल सिर्फ तालिबान, हक्कानी या आईएस करें। इसके लिए खतरनाक साज़िशें अभी से अफगानिस्तान की जमीन पर शुरू हो गई है। अलकायदा के शार्प शूटर और कभी ओसामा बिन लादेन के दाहिने हाथ रहे अमीन उल हक ने शाम को काबुल में एंट्री। जिस तरीके से अमीन उल हक का काबुल में एंट्री के वक्त स्वागत किया गया उससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि अलकायदा और तालिबान के रिश्ते कैसे हैं। क्योंकि ओसामा बिन लादेन के दाहिने हाथ रहे हक के स्वागत ने तालिबान के लड़ाको के साथ-साथ हक्कानी नेटवर्क की सुरक्षा का पूरा घेरा उसके साथ था। तालिबानी लड़ाके हक के साथ न सिर्फ सेल्फी ले रहे थे बल्कि फोटो भी खिंचवा रहे थे। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ शर्मा कहते हैं कि अमीन उल हक का अफगानिस्तान की जमीन पर आने का मतलब साफ तौर से अलकायदा का फिर से सिर उठाना ही है। वे कहते हैं कि अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ते ही यहां की लगती हुई सरहदों वाले मुल्कों से आतंकवाद की फसल बोई जानी शुरू हो जाएगी। हक्कानी नेटवर्क, आईएस खोरासन, अलकायदा और पाकिस्तान तालिबान के आतंकवादी घात लगाकर तालिबान को मिले अमेरिकी हथियारों को हड़पने के जुगाड़ में लगे हुए हैं। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है जिस तरीके से अमेरिका ने अफगानिस्तान को सब कुछ संयमित तरीके से चलाने की नसीहत दी है वह एक बहुत बड़ा संदेश है। खुफिया विभाग में काफी लंबे वक्त तक मध्य एशिया के देशों में रहकर अपनी सेवाएं देने वाले एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी बताते हैं कि अमेरिका ने अफगानिस्तान को जो नसीहत दी है दरअसल वह दूर से ही सही लेकिन बताती है कि तालिबान को सत्ता चलाने के लिए पूरी ताकत अमेरिका देता रहेगा। कहने को तो अमेरिका ने काबुल से अपना दूतावास शिफ्ट कर लिया है लेकिन कतर से रहकर अफगानिस्तान में होने वाली हर हलचल पर नजर रखेगा। दरअसल अफगानिस्तान में सत्ता बदलने से लेकर तालिबान को सत्ता हासिल होने तक की पूरी रणनीति दोहा की जमीन पर तैयार की गई है। इसलिए यह जमीन अफगानिस्तान की निगरानी के लिए सबसे मुफीद भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के ऊपर अफगानिस्तान की जमीन छोड़ने का दबाव तो जरूर था लेकिन दूर से बैठ कर उसकी मॉनिटरिंग करना और हस्तक्षेप करना उसकी न सिर्फ मजबूरी होगी बल्कि जरूरत भी होगी। विशेषज्ञों का कहना है की अमेरिका ने अपने करोड़ों डॉलर के अपने रक्षा उपकरणों को ऐसे ही अफगानिस्तान में नहीं छोड़ दिया। इसके पीछे बहुत से राज हैं। अमेरिका ने अफगानिस्तान में लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई को देखने वाले दूसरे नंबर के सबसे बड़े अधिकारी को दोहा मैं तैनात भी कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है काबुल और कतर के अमेरिकी दूतावास का कनेक्शन बना रहे इसीलिए पेंटागन के रणनीतिकारों की पूरी टीम इसकी निगरानी भी कर रही है।

Published / 2021-08-28 09:14:18
कोरोना : गृह मंत्रालय ने राज्यों को किया अलर्ट

एबीएन डेस्क। केंद्र ने शनिवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि आगामी त्योहारी सीजन के दौरान कोई बड़ी भीड़ एकत्र न हो और जरूरत पड़ने पर कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए स्थानीय प्रतिबंध लगाने को भी कहा। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने जारी कोविड-19 दिशा-निर्देशों को एक और महीने के लिए 30 सितंबर तक बढ़ाते हुए कहा कि कुछ राज्यों में दिख रहे स्थानीय प्रसार को छोड़कर, वैश्विक महामारी की समूची स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर काफी हद तक स्थिर दिखती है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे गए एक जैसे पत्रों में कहा कि कुछ जिलों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या और उच्च संक्रमण दर चिंता का विषय बनी हुई है। पत्र में उन्होंने कहा, संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को, अपने जिलों में उच्च संक्रमण दर को देखते हुए, सक्रिय रूप से रोकथाम के उपाय करने चाहिए ताकि मामलों में वृद्धि को प्रभावी ढंग से रोका जा सके और प्रसार को रोका जा सके। उन्होंने कहा, संभावित वृद्धि की चेतावनी के संकेतों को जल्दी पहचानना और प्रसार को रोकने के लिए उचित उपाय करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्थानीय दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी, जैसा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 25 अप्रैल और 28 जून की सलाह में उल्लेख किया गया है। गृह सचिव ने उन्हें आगामी त्योहारों के सीजन में बड़ी सभाओं से बचने के लिए उपयुक्त उपाय करने की सलाह दी और यदि आवश्यक हो, तो ऐसी सभाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रतिबंध लागू करें। उन्होंने कहा कि सभी भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। सचिव ने कहा कि कोविड-19 के प्रभावी प्रबंधन के लिए पांच-स्तरीय रणनीति - जांच-संक्रमितों के संपर्कों की पहचान-उपचार-टीकाकरण और कोविड उपयुक्त व्यवहार के पालन पर ध्यान दिए रहने की आवश्यकता है।

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