एबीए सोशल डेस्क। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, उपमुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी जी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों। आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है।
महादेव का ये साक्षात्कार, ये सौन्दर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की ये आभा, कला, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेदमंत्रों का उच्चार, गर्भगृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सबके साथ-साथ सागर की लहरों का जयघोष, ऐसा लग रहा है, जैसे ये सृष्टि एक साथ बोल रही है- जय सोमनाथ! जय-जय सोमनाथ!
समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं कालस्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं। ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, यतो जायते पाल्यते येन विश्वं, तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्! आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं।
जो हलाहल को पीकर नीलकंठ हो गये, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है। ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है। दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में, मैं कितनी ही बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं। लेकिन, आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी।
अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था। तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे। प्रथम विध्वंस के 1000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल दो आयोजनों का हिस्सा भर नहीं, सिर्फ हिस्सा भर नहीं बने हैं, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिव जी ने मौका दिया है।
75 साल पहले, आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये कोई साधारण अवसर नहीं था। अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था। आजादी के समय, सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का आधुनिक स्वरूप गढ़ा था। तो साथ ही, सोमनाथ के पुनर्निर्माण से उन्होंने दुनिया को बताया था, भारत केवल आजाद नहीं हुआ है, भारत अपने प्राचीन गौरव को पुन: हासिल करने के मार्ग पर भी अब आगे बढ़ चुका है।
इसलिए, आज इस अवसर पर, मैं केवल 75 वर्षों की झांकी नहीं देख रहा हूं। मैं यहां देख रहा हूं, विनाश में सृजन के संकल्प को, जिसे सोमनाथ ने चरितार्थ किया है। मैं यहां देख रहा हूं, असत्य पर सत्य की विजय को, जिसे प्रभास-पाटन ने बार-बार जिया है। मैं यहां देख रहा हूं, हजारों वर्षों की आध्यात्मिक चेतना को, जिसने मानव मात्र के कल्याण की सीख समूचे विश्व को दी है। मैं यहां देख रहा हूं, भारत के उस अविनाशी स्वरूप को, जिसे सदियों के कुत्सित प्रयास भी न मिटा सके, न हरा सके।
और मैं यहां देख रहा हूं, सोमनाथ अमृत-महोत्सव, ये केवल अतीत का उत्सव नहीं है, ये अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है। मैं सभी देशवासियों को, दादा सोमनाथ के कोटि-कोटि भक्तों को इस महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई 1998, 1998, यानि आज के ही दिन, देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। देश ने 11 मई को पहले तीन परमाणु परीक्षण किये।
हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को, वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने रखा, दुनिया में तूफान आ गया। भारत, उसकी ये हैसियत, कौन होता है भारत, जो परमाणु परीक्षण करें और दुनिया की आंखें लाल हो गई, दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी। अनेक प्रकार के बंधन लग गए। आर्थिक संकट की संभावनाओं के रास्ते सारे के सारे बंद कर दिये गये। कोई भी हिल जाता। जब दुनिया भर की बड़ी-बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमण कर दे, तो आगे के रास्ते दिखते नहीं है।
लेकिन हम कोई और मिट्टी के बने हुए हैं। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था। लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण हुए, उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है। उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने ये दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती।
देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को आॅपरेशन शक्ति नाम दिया था। क्योंकि, शिव के साथ शक्ति की आराधना, ये हमारी परंपरा रही है। अर्धनारीश्वर शिव स्वयं भी शक्ति के साथ ही पूर्ण होते हैं। आपको याद होगा, जब देश का मिशन चंद्रयान सफल हुआ था, तब चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ, उस जगह का नाम भी हमने शिवशक्ति पॉइंट रखा है। क्योंकि, हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़ा है और शिव शक्ति से जुड़े हैं।
और ये कितना सुखद है कि चंद्रमा के नाम से ही इस ज्योतिर्लिंग को हम सोमनाथ कहते हैं। शिव और शक्ति की हमारी आराधना का जो विचार है, वो देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बने, आज हम ये संकल्प साकार होते देख रहे हैं। मैं इस अवसर पर, भगवान सोमनाथ के चरणों से सभी देशवासियों को आॅपरेशन शक्ति की वर्षगांठ की भी बधाई देता हूं।
जब मैं पिछली बार यहां आया था, तब मैंने कहा था- जिसके नाम में ही सोम अर्थात, अमृत जुड़ा हो, उसे नष्ट कौन कर सकता है? इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने कितने ही आक्रमण झेले। महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आये, लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया। वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे। बार-बार इस मंदिर को, इस ढांचे को तोड़ा गया। और ये बार-बार बनता रहा, हर बार उठ खड़ा होता रहा, क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था, हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है।
हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं। लेकिन, हम जानते हैं, उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है। और फिर तो, शिव तो सर्वात्मा हैं। इसलिए, अलग-अलग काल में, अलग-अलग जीवों की संकल्पशक्ति में शिव प्रकट होते रहे। राजा भोज, कभी राजा भीमदेव प्रथम, कभी राजा कुमारपाल, कभी राजा महीपाल प्रथम, तो कभी राव खंगार, ऐसे अनेक शिवभक्त समय-समय पर सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाते रहे।
लकुलीश और सोम शर्मा जैसे कितने मनीषी, उन्होंने प्रभास पाटन क्षेत्र की विरासत को संरक्षित किया, इसे शैव साधना और दर्शन का महान केंद्र बनाया। भाव बृहस्पति, पाशुपताचार्यों और अनेक विद्वानों ने इस तीर्थ की आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखा। विशालदेव और त्रिपुरांतक जैसे व्यक्तित्वों ने यहां की बौद्धिक चेतना को सुरक्षित रखने का पुनीत कार्य किया।
वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर जी, बड़ौदा के गायकवाड़, जाम साहब महाराजा दिग्विजय सिंह जी, ऐसी कितनी ही महान विभूतियां हैं, जो सोमनाथ की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करती थीं। मैं आज इस अवसर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, केएम मुंशी जी, ऐसी सभी ज्ञात-अज्ञात दिव्यात्माओं को भी श्रद्धा पूर्वक, आदर पूर्वक नमन करता हूं।
उनका स्मरण हमें ये प्रेरणा देता है कि हमें न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बल्कि इस जिम्मेदारी को आने वाली पीढ़ियों के हाथों में सौंपकर भी जाना है। हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। इतनी समृद्ध विरासत हमें मिली है। लेकिन, आप विडम्बना देखिये, हमने दशकों तक उसके महत्व को नहीं समझा।
दुनिया में ऐसे कितने ही उदाहरण हैं, जहां विदेशी हमलावरों ने राष्ट्रीय पहचान से जुड़े स्थलों को नष्ट किया। लेकिन, जब उस देश के लोगों को मौका मिला, सबने साथ आकर, अपनी पहचान को फिर से सहेजा, फिर से संवारा, पुन: प्रतिष्ठा की। लेकिन, हमारे यहां राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर भी राजनीति होती रही। सोमनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आजादी के बाद पहले दायित्वों में से एक था कि सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार करते।
इसलिए, सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी, उन्होंने इसके लिए इतने प्रयास किए। लेकिन, हम सब जानते हैं, उन्हें इसके लिए नेहरूजी द्वारा कितना विरोध झेलना पड़ा था। मैं आज इसके विस्तार में नहीं जाउंगा, लेकिन ये सरदार साहब की इच्छाशक्ति थी कि इतने विरोध के बावजूद सरदार साहब डिगे नहीं। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी हुआ और देश ने सदियों के कलंक को भी धो दिया। दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टिकरण जरूरी लगता है।
राममंदिर निर्माण जैसे अवसरों पर भी हमने देखा है, किस तरह राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है। इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा। हमें विकास और विरासत को साथ लेकर के आगे बढ़ना होगा। बीते वर्षों में मुझे सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ दादा की सेवा का जो अवसर मिला, इस मंदिर और क्षेत्र के विकास के लिए जो ऐतिहासिक काम हुए, उस परिवर्तन को आज हम सब प्रत्यक्ष देख रहे हैं।
लेकिन साथ ही, इस सेवा का मुझे व्यक्तिगत लाभ भी हुआ है। आज मुझे देश के सभी पवित्र तीर्थों के विकास का जो मौका मिल रहा है, ये भगवान सोमनाथ का ही कृपा प्रसाद है। आज काशी में सदियों बाद बाबा विश्वनाथ धाम का इतना भव्य विस्तार हुआ है। आज उज्जैन में महाकाल, महालोक के विशाल दर्शन भी हमें हो रहे हैं। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण भी हुआ है। जैसा मैंने पहले कहा, अयोध्या में 500 साल की प्रतीक्षा भी पूरी हुई है।
आज वहां भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हैं। ऐसे कितने ही पवित्र तीर्थ, पवित्र मठ, मंदिर और क्षेत्र, उनकी जो महिमा हमने पुराणों में सुनी है, आज वहाँ हमें उस समृद्ध परंपरा के दर्शन होने लगे हैं। और, ये इतना कुछ 10-12 साल के भीतर-भीतर हुआ है। हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की उपेक्षा देश के विकास में बड़ी बाधा रही है। क्योंकि, हमारे तीर्थ भारत की आध्यात्मिक-सामाजिक व्यवस्था के केंद्र तो हैं ही, वो देश की आर्थिक प्रगति के भी स्रोत रहे हैं।
आज आप देखिये, चारधाम महामार्ग परियोजना, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे परियोजना, करतारपुर कॉरिडोर, बौद्ध सर्किट का विकास, इनके जरिये देश में तीर्थ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है। आज सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट से सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। हजारों लोगों का जीवन इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। देश-दुनिया के कोने-कोने से जो लोग यहाँ आते हैं, वो गुजरात के बाकी हिस्सों में भी जाते हैं। इससे प्रदेश और देश में प्रगति के नयेद्वार खुलते हैं।
हमारी आस्था हमें जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है। क्योंकि, हम मानते हैं- सर्वं खल्विदं ब्रह्म! अर्थात, सृष्टि का हर एक घटक, ये संपूर्ण प्रकृति भी ईश्वर का ही स्वरूप है। इसलिए, हमारी आस्था नदियों में भी है, वृक्षों में भी है। हम जंगलों को भी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। हम पर्वतों में भी पवित्रता का भाव रखते हैं। और, आज जब दुनिया प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रही है, हमें हमारी इस शक्ति को भी पहचानना होगा। हमें हमारे तीर्थों और मंदिरों के विकास के साथ-साथ उनकी गरिमा के लिए जागरूक होना होगा।
हम ऐसा जीवन अपनाएं, जिससे प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हो। साथ ही, हम हमारे पुण्य स्थलों को पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण के रूप में विकसित करें। हमें इन संकल्पों को अपनी आस्था से जोड़कर जीना होगा। जब नयी पीढ़ियां अपने इतिहास, अपनी आस्था और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ती हैं, तब राष्ट्र का आत्मबल और मजबूत होता है। आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें हमारी इस सांस्कृतिक निरंतरता की भी बहुत बड़ी भूमिका है।
आधुनिक और विरासत, आधुनिकता हो या विरासत हो, भारत में इसे कोई अलग नहीं कर सकता, भारत में एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, ये साथ-साथ आगे बढ़ने वाली शक्तियां हैं, एक दूसरे में प्राण पूरने वाली शक्तियां है। सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वो अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। जब हम अपनी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ उनके हाथों में सुपुर्द करें। 75 वर्ष पहले, जब ये पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में, 75 वर्ष पहले प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तब भारत ने एक नई चेतना यात्रा शुरू की थी।
आज, 75 वर्ष बाद, वही यात्रा और अधिक व्यापक रूप में हमारे सामने है। हमें इसे नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। हमारे संकल्पों को पूरा करने में दादा सोमनाथ का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे, यही प्रार्थना है। एक बार फिर सभी देशवासियों को, विरासत में विश्वास करने वाले हर नागरिक को, आप सभी को इस अवसर की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये जय सोमनाथ. जय सोमनाथ.. हर-हर महादेव...
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया भर के तेल बाजारों में हलचल मचा दी है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और कंपनियों से अपील की है कि जहां तक संभव हो, वर्क-फ्रॉम-होम और वर्चुअल मीटिंग्स के कल्चर को फिर से अपनाया जाये। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई घर से काम करने से भारत का ईंधन बिल कम हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मामला सिर्फ कर्मचारियों की सहूलियत या दफ्तर की उत्पादकता तक सीमित नहीं है। इसके तार सीधे तौर पर देश की तेल पर निर्भरता, विदेशी मुद्रा भंडार और घर के बिजली बिल से जुड़े हुए हैं। सुनने में तो यह सीधा लगता है कि दफ्तर कम जाएंगे तो पेट्रोल-डीजल कम जलेगा, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। जब कोई कर्मचारी घर से काम करता है, तो ऊर्जा का बोझ सड़कों और दफ्तरों से शिफ्ट होकर घरों पर आ जाता है।
दिल्ली के थिंक टैंक टेरी में बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के निदेशक आलेख्य दत्ता ने इस पर अहम राय दी है। उन्होंने बताया कि हाइब्रिड वर्क मॉडल भारत के ईंधन संरक्षण लक्ष्यों को मजबूती दे सकता है, खासकर बड़े महानगरों में। उनके मुताबिक, हाइब्रिड काम करने से उन शहरों में ईंधन की बचत होगी जहां ट्रैफिक जाम की वजह से निजी गाड़ियां घंटों सड़क पर खड़ी रहती हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए पीक आवर्स के दौरान अगर सड़कों पर भीड़ कम होती है, तो इससे तेल की मांग में कमी आएगी और शहरों में प्रदूषण भी कम होगा।
ईंधन की खपत और आवाजाही के बीच के संबंध को समझने के लिए हमें कोविड-19 लॉकडाउन के दौर को देखना होगा। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2020 में भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत अप्रैल 2019 के मुकाबले 45.8 प्रतिशत गिर गयी थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सड़कें सूनी थीं और औद्योगिक गतिविधियां ठप थीं।
हालांकि, कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के एमडी प्रतीक वैद्य आगाह करते हैं कि हमें लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को ईंधन बचाने का मॉडल नहीं मानना चाहिए। उनके अनुसार, सही तरीका यह है कि हम समझदारी से हाइब्रिड मॉडल अपनायें, गैर-जरूरी यात्राएं कम करें और फिजिकल मीटिंग्स की जगह वीडियो कॉल का सहारा लें। घबराहट में सब कुछ बंद करना इसका समाधान नहीं है।
वर्क फ्रोम होम से होने वाली बचत इस बात पर निर्भर करती है कि कर्मचारी दफ्तर कैसे पहुंचता है। सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है जो लंबी दूरी तय करने के लिए खुद की पेट्रोल कार, डीजल टैक्सी या टू-व्हीलर का इस्तेमाल करते हैं। इसके विपरीत, जो लोग मेट्रो, बस या साइकिल से दफ्तर जाते हैं, उनके घर से काम करने पर ईंधन की बचत बहुत मामूली होती है।
बेंगलुरु, गुरुग्राम, नोएडा, हैदराबाद, पुणे, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में, जहां दफ्तरों के बड़े कॉरिडोर हैं और लंबी दूरी तय करना मजबूरी है, वहां वर्क फ्रोम होम ईंधन की मांग में बड़ी गिरावट ला सकता है। प्रतीक वैद्य का कहना है कि पेट्रोल की बिक्री मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों और निजी कारों पर टिकी है, और ये दोनों ही आॅफिस जाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। उनके मुताबिक, सिर्फ घर से काम करना काफी नहीं है, बल्कि कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना भी इस रणनीति का हिस्सा होना चाहिए।
हाइब्रिड मॉडल की सबसे बड़ी पेचीदगी यह है कि यह ऊर्जा की खपत को खत्म नहीं करता, बल्कि उसकी जगह बदल देता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (कएअ) के 2020 के अनुमान के मुताबिक, एक दिन घर से काम करने पर घर की बिजली की खपत 7% से 23% तक बढ़ सकती है। भारत के संदर्भ में, जहां गर्मी का मौसम लंबा होता है, घर पर रहने का मतलब है ज्यादा देर तक एसी, कूलर और पंखों का चलना। इसके अलावा लैपटॉप, वाई-फाई राउटर और लाइटिंग का खर्च भी जुड़ जाता है।
यानी मुमकिन है कि एक कर्मचारी पेट्रोल का पैसा तो बचा ले, लेकिन महीने के अंत में उसका बिजली का बिल बढ़ जाये। आलेख्य दत्ता कहते हैं कि हालांकि घरों में बिजली का उपयोग बढ़ेगा, लेकिन लंबी अवधि में यह घाटे का सौदा नहीं है। इसका कारण यह है कि पेट्रोल तो हमें विदेश से खरीदना पड़ता है, लेकिन बिजली हम अपने देश में सौर ऊर्जा या अन्य घरेलू स्रोतों से पैदा कर सकते हैं।
एक और पेंच दफ्तरों की बिजली खपत को लेकर है। अगर किसी दफ्तर के कुछ कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं और कुछ दफ्तर आ रहे हैं, तो कंपनी की बिजली में कोई खास कमी नहीं आती। लिफ्ट, एयर कंडीशनिंग, कैफेटेरिया और सुरक्षा सिस्टम को लगभग उसी क्षमता पर चलाना पड़ता है।
प्रतीक वैद्य के अनुसार, बचत तभी सार्थक होगी जब हाइब्रिड मॉडल को व्यवस्थित किया जाए।
उदाहरण के लिए, अगर पूरी टीम या पूरा विभाग एक साथ तय दिनों पर घर से काम करे, तो उस हिस्से की लाइटें और एसी बंद किए जा सकते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी और उकक के 2024 के एक अध्ययन में भी यह बात सामने आयी है कि हाइब्रिड मॉडल से कंपनियों को किराये और यात्रा के खर्च में बचत हुई है, हालांकि टीम वर्क और संवाद में कमी जैसी चिंताएं भी बनी हुई हैं।
फिलहाल सरकार ने साफ किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। मंत्रालयों की एक बैठक के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जनता को घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है।
लेकिन एक्सपर्ट का यही कहना है कि कुल मिलाकर, घर से काम करना भारत के ईंधन बिल को कम करने में मदद तो कर सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां और कर्मचारी इसे कितनी समझदारी से लागू करते हैं। अगर इसे सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि शहरों की आबोहवा को भी बेहतर बनायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को साफ किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि ग्लोबल लेवल पर जारी उथल-पुथल और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच नागरिकों को ऊर्जा बचाने की दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
पश्चिम एशिया के हालात को लेकर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके बावजूद भारत की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति सामने नहीं आयी है।
उन्होंने बताया कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। पिछले तीन दिनों में 1 करोड़ 14 लाख बुकिंग के मुकाबले 1 करोड़ 26 लाख एलपीजी सिलेंडर घरों तक पहुंचाये गये वहीं कमर्शियल एलपीजी की बिक्री 17 हजार टन से अधिक रही, जबकि आॅटो एलपीजी की बिक्री 762 टन से ज्यादा दर्ज की गयी।
सरकार ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाने और सप्लाई सुचारू बनाये रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील भी दोहरायी गयी।
सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि जहां संभव हो वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, कारपूलिंग अपनायें, माल ढुलाई के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दें, ताकि ऊर्जा की बचत की जा सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल बहुत संयम से करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इम्पोर्टेड फ्यूल पर निर्भरता कम करने से भारत को चल रहे युद्ध के असर को कम करने में मदद मिलेगी।
तेलंगाना में लगभग 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रो प्रोडक्ट्स का समझदारी से इस्तेमाल अब एक राष्ट्रीय जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हमने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंस अपनाए और ऐसे कई सिस्टम बनाए। हमें इनकी आदत भी हो गई थी। आज समय की जरूरत है कि हम उन तरीकों को फिर से शुरू करें, क्योंकि यह देश के हित में होगा, और हमें उन्हें एक बार फिर प्राथमिकता देनी चाहिए।
पीएम ने कहा कि मौजूदा हालात में, हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर भी बहुत जोर देना चाहिए, क्योंकि दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल बहुत महंगे हो गए हैं, इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम फ्यूल बचाएं और इस तरह पेट्रोल और डीजल खरीदने पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाएं।
पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल डीजल गैस और खाद के दाम बहुत बढ़ गए हैं। नागरिकों पर बोझ ना पड़े इसके लिए सरकार सारा बोझ अपने कंधे पर ले चुकी है। जब सप्लाई चेन पर संकट गहरा जाए तो कितना भी करें संकट तो आ ही जाता है। देश पर सकंट आएगा तो एकजुट होकर हमें लड़ना होगा।
अपने कर्तव्यों को निभाना भी देश भक्ति है। अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए संकल्प लेना होगा। बड़ा संकल्प है- तेल का संयम से इस्तेमाल करना होगा। जिन शहरों में जहां मेट्रो है। वहां तय करें कि मेट्रो का हम इस्तेमाल करें। कार में जाना ही जरूरी है तो कार पुलिंग करें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि राज्य में व्याप्त भय का माहौल समाप्त हो गया और लोगों में भरोसा कायम हुआ। मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के एक दिन बाद शुभेंदु अपने गृह नगर पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी पहुंचे थे, जहां समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था।
शुभेंदु ने कोलकाता के लिए रवाना होते समय ये बातें कहीं। उन्होंने कोलकाता रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, भय का माहौल समाप्त हुआ, भरोसा कायम हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आश्वासन दिया है। पश्चिम बंगाल आशा और विश्वास के माहौल में सभी हितधारकों की भागीदारी से प्रगति करेगा।
शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेने और पूरे दिन सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद अधिकारी देर रात कालीघाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर कांथी के लिए रवाना हुए। उनका काफिला देर रात करीब दो बजे कांथी स्थित उनके आवास शांतिकुंज पहुंचा लेकिन देर रात होने के बावजूद शाम से ही इलाके में समर्थकों का जनसैलाब उमड़ा हुआ था।
जैसे ही उनका वाहन इलाके में पहुंचा समर्थकों ने उनके स्वागत में नारे बुलंद किए और उन पर फूलों की बारिश की। भारी भीड़ के कारण काफिले की रफ्तार धीमी हो गयी, जिसके बाद अधिकारी वाहन से बाहर आए और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया। इस स्वागत से भावुक दिखे मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर लोगों से घर लौटने की अपील करते हुए कहा, अब बहुत देर हो चुकी है, कृपया अपने घर लौट जायें।
पूरा माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आ रहा था। स्थानीय लोग अपने माटी के बेटे के राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का जश्न मना रहे थे। घर पहुंचने के बाद अधिकारी ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद भी लिया। उनके पिता शिशिर अधिकारी और मां गायत्री अधिकारी देर रात तक उनके स्वागत के लिए जागते रहे।
स्थानीय निवासियों और बचपन के परिचितों ने अधिकारी को दृढ़ निश्चयी और संकल्पवान बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सफलता के पीछे उनकी मजबूत इच्छाशक्ति तथा निरंतर प्रयास रहे हैं। सुबह से ही पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर समेत राज्य के अन्य जिलों से लोगों की लंबी कतार उनके कांथी स्थित आवास के बाहर देखी गई। पुलिस और सुरक्षा बल भीड़ को नियंत्रित करने में लगे थे। अधिकतर लोग हाथों में फूल और गुलदस्ते लेकर पहुंचे थे। राधारानी दास नामक महिला ने कहा, मैं नंदकुमार इलाके से आयी हूं।
दादा (शुभेंदु) के मुख्यमंत्री बनने से मैं बेहद खुश हूं। वह बहुत सरल स्वभाव के हैं। जब भी हमारे इलाके में आते थे, मुझसे बात जरूर करते थे। वह बहुत विनम्र इंसान हैं। वहीं, दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर निवासी बिजय नस्कर ने कहा कि वह सुबह से अधिकारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, मैं सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं हूं, लेकिन भाजपा का समर्थक हूं।
मैं दादा को बधाई देना चाहता हूं और यह भी बताना चाहता हूं कि भाजपा की जीत ने हम जैसे लाखों लोगों को अन्याय के खिलाफ बिना डर के अपनी आवाज उठाने और किसी भी अत्याचार तथा दबंगई के खिलाफ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की प्रेरणा दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कांथी स्थित मुख्यमंत्री के आवास के सामने कोई अवरोधक नहीं लगाया जाएगा, ताकि लोगों को असुविधा न हो। वहां तैनात केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।
अधिकारी के परिवार के एक सदस्य ने कहा, हम नहीं चाहते कि यहां अवरोधक लगाए जाएं, जिससे लोगों, हमारे पड़ोसियों, आगंतुकों या भवन के सामने से गुजरने वालों को परेशानी हो। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के आवासों के बाहर लगाए गए अवरोधक चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ दिन बाद हटा दिये गये थे। यह फैसला मौजूदा सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (कोलकाता)। भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने वाले भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी बंगाल में पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बन गये हैं। शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। उनके साथ पांच अन्य विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलायी गयी। जिन्होंने शपथ ली उनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदीराम टुड्डू और नीशीथ प्रमाणिक शामिल हैं।
ऐतिहासिक और भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अध्यक्ष नितिन नवीन, सम्राट चौधरी, योगी आदित्यनाथ समेत 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री पहुंचे थे। राज्य में आजादी के बाद पहली बार भाजपा की सरकार के गठन के साथ राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हुआ है और तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्ष के शासन का अंत हो गया।
छह सदस्यीय कैबिनेट में एक मुख्यमंत्री और पांच मंत्री शामिल किये गये हैं। कैबिनेट में एक महिला और एक आदिवासी को जगह मिली है। पांच मंत्रियों के चयन में सामाजिक सामंजस्य दिखता है। शपथ लेने वाले मंत्रियों में खुदीराम टुडू भी शामिल थे। दिलीप-अग्निमित्र के बाद उनके नाम की घोषणा की गयी। आदिवासी नेता ने पूरे देश के नेताओं के सामने शपथ ली। उन्होंने बेहद अनौपचारिक तरीके से शपथ ग्रहण किया। भाजपा ने जंगलमहल के प्रतिनिधि और रानीबांध से विधायक को पूर्णकालिक मंत्री बना दिया।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पीएम मोदी मंच पर घुटनों के बल बैठे और बंगाल के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को दंडवत प्रमाण किया। इसके साथ ही पीएम ने 98 वर्ष के भाजपा के बुजुर्ग नेता माखनलाल सरकार के पैर छुए। शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। 1952 के कश्मीर आंदोलन के दौरान माखनलाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ तिरंगा फहराने गये थे।
पीएम और नये सीएम ने गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर को नमन किया। समारोह में मंच पर गुरुदेव टैगौर की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किये। पीएम मोदी ने ग्राउंड की एंट्री से मंच तक रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ समिक भट्टाचार्य और शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। बंगाली कैलेंडर के मुताबिक पोचिसे बोइशाख के दिन (9 मई) गुरुदेव की 165वीं जयंती है। भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती और पीएम मोदी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बातचीत करते हुए नजर आये।
शुभेंदु ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में कहा कि पश्चिम बंगाल में अब सोनार बांग्ला के नये दौर की आधिकारिक शुरुआत हो रही है। उन्होंने शपथ के बाद पीएम मोदी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुनर्निर्माण का संकल्प लेते हुए कहा कि भाजपा सरकार राज्य की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। सुब्रत गुप्ता को सीएम का सलाहकार बनाया गया है। वे चुनाव में विशेष पर्यवेक्षक थे। शुभेंदु कैबिनेट में संघ का प्रभाव दिखा। कैबिनेट में महिला और आदिवासी के साथ मतुआ को भी जगह मिली।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ये दिन और तारीख पश्चिम बंगाल के लिए यादगार बन गयी। आजादी के बाद ये पहला मौका है जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। राजधानी कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। नयी सरकार बनने के साथ ही राज्य में शुभेंदु युग की शुरुआत हो गयी। इस यादगार पल की गवाह बंगाल की जनता बनी। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत कई नेताओं ने शिरकत की।
कार्यक्रम में एनडीए शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। यूपी के सीएम योगी, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी समेत कई सीएम कार्यक्रम में पहुंचे। इसके साथ ही कई सांसद और विधायक भी शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल को अपना नया सीएम मिल गया है। BJP की बैठक शुभेंदु अधिकारी के नाम पर फाइनल मुहर लग गई।
यानि की शुभेंदु बंगाल के नए सीएम होंगे। कल सुबह 11 बजे शुभेंदु इस पद के लिए शपथ ग्रहण के लिए ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहुंचेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि अमित शाह और मोहन चरण माझी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई है।
नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह, पीएम मोदी सहित कई राज्यों के बड़े नेता पहुंचेंगे। कल यानि की 9 मई का दिन काफी खास रहने वाला है क्योंकि इस दिन रवींद्र जयंती मनाई जाती है।
इसी के साथ ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शपथ ग्रहण में दो नए डिप्टी सीएम की घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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