एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के उत्तर दीनाजपुर के इस्लामपुर थाना क्षेत्र में देह व्यापार के एक अड्डे पर मारे गए छापे में पुलिस ने 17 नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया। इनमें से सबसे छोटी बच्ची 11 साल की है जबकि अन्य बच्चियों की उम्र 13 से 17 के बीच है। इनमें 13 लड़कियां बिहार की, तीन पश्चिम बंगाल की और एक असम की है।
सभी बच्चियों को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेज दिया गया, जहां काउंसलिंग के बाद उन्हें सुरक्षित आश्रय गृह भेज दिया गया। पुलिस ने ट्रैफिकिंग व पॉक्सो की धाराओं के तहत अड्डे के चार संचालकों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि कुछ आरोपी फरार हैं। छापे की यह कार्रवाई गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) और कोसी लोक मंच की सूचना और निशानदेही पर हुई।
ये दोनों ही संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी हैं। एवीए को उसके एक कार्यकर्ता ने इस अड्डे पर बड़े पैमाने पर देह व्यापार के धंधे में नाबालिग लड़कियों के इस्तेमाल और उनके शोषण की सूचना दी थी। इसके बाद एवीए और कोसी लोक मंच ने बंगाल और बिहार के कार्यकर्ताओं की एक साझा टीम गठित की जो दो महीने से लगातार इस अड्डे की निगरानी कर रही थी।
यहां लगभग 30 से 40 नाबालिगों की उपस्थिति की पुष्टि हो जाने के बाद टीम ने जिले के पुलिस अधीक्षक को इसकी सूचना दी। पुलिस अधीक्षक ने तत्परता से कार्रवाई की और पुलिस टीम ने एवीए और कोसी लोक मंच के साथ मिलकर पूरी तैयारी के साथ इस अड्डे पर छापा मा कर 17 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया।
संवेदनशील इलाका होने के मद्देनजर इस दौरान ड्रोन से भी निगरानी की गई लेकिन इसके बावजूद कुछ आरोपी बहुत सारी बच्चियों को लेकर फरार होने में कामयाब हो गए। शोषण की दास्तान सुनाते हुए मुक्त कराई गई बच्चियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें रोजाना 8 से 10 ग्राहकों को खुश करना पड़ता था और अड्डे के संचालक इसके एवज में उन्हें एक धेला भी नहीं देते थे।
बताते चलें कि सितंबर 2025 में भी एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की सूचना पर जिले में इसी तरह के देह व्यापार के एक अड्डे से पुलिस द्वारा नौ नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया था लेकिन आरोपियों ने थाने पर हमला बोल दिया और सभी बच्चियों को लेकर भागने में कामयाब रहे। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की प्रशंसा करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, इतनी बड़ी संख्या में वेश्यावृत्ति के अड्डे से नाबालिग लड़कियों का मिलना इस बात को दशार्ता है ट्रैफिकिंग गिरोहों की जड़ें कितनी गहरी और पहुंच कितनी व्यापक है।
ट्रैफिकिंग के जरिए 11-12 साल की लड़कियों को बिहार व असम से लाना व उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलना एक घिनौनी सच्चाई है और इससे निपटने के लिए सरकार व प्रशासन को अपनी पूरी ताकत व संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत है। इस कार्रवाई से साफ है कि पश्चिम बंगाल सरकार व पुलिस में बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति है। यह एक बड़ा बदलाव है। इस खबर से संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना ने पूरे समाज की भावनाओं और आस्था को गहरी ठेस पहुंचायी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाये, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पूरे हिंदू समाज से भी अपील की कि वह इस कठिन समय में धैर्य और संयम बनाये रखे, ताकि इस तरह की सभी साजिशों को विफल किया जा सके।
होसबाले ने एक्स पर एक बयान में कहा, अयोध्या स्थित श्रीराम लला मंदिर में रखे दानपात्रों से चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे समाज और रामभक्तों की भावनाओं तथा आस्था को गहरी ठेस पहुंचायी है। उन्होंने कहा, इस घटना से हम सभी बहुत दुखी और आक्रोशित हैं।
होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत पूरे हिंदू समाज की न्यास से स्वाभाविक ही अपेक्षा है कि वह इस अत्यंत निंदनीय घटना को असाधारण मामला मानते हुए मंदिर के प्रबंधन और संचालन में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाये। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाये, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। होसबाले ने कहा, इस संबंध में हमें अपेक्षा है कि मंदिर प्रबंधन और सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष तथा करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान के कारण पूरे हिंदू समाज की श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र है।
उन्होंने कहा, हमारा यह विश्वास है कि समुचित वित्तीय प्रबंधन, सुचारू संचालन के लिए पारदर्शी व्यवस्थाओं एवं शुद्धता और शुचिता से परिपूर्ण धार्मिकता से ओतप्रोत वातावरण के द्वारा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास हिन्दू समाज की आस्था एवं विश्वास को सुदृढ़ बनाए रखेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि की करफड के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी भरा मेल इसरो के चेयरमैन कार्यालय को एक ईमेल के जरिए प्राप्त हुआ है। पुलिस ने यह जानकारी साझा की है।
धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। एहतियात के तौर पर इसरो मुख्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है।
फिलहाल, पुलिस प्रशासन और बम निरोधक दस्ता मौके पर मौजूद है और पूरे मुख्यालय परिसर में सघन तलाशी अभियान और जांच-पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह ईमेल किस सर्वर या आईपी एड्रेस से भेजा गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित गबन के आरोपों को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह केवल धन या आभूषण की चोरी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा के साथ विश्वासघात का मामला है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि मुझे लगता है कि इस बार रावण दहन की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
रावण भी इस घटना पर शर्म से मर जाता। उसने माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां तो रक्षक ही भक्षक बन गये हैं। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जा रहा है और उसके बाद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा रही है।
उन्होंने पूछा कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है? देशवासियों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। यह गंभीर और दंडनीय अपराध है। सुखदेव भगत ने आगे कहा कि जिस प्रकार रावण का अंत उसके अहंकार के कारण हुआ था, उसी प्रकार जिन्होंने भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात किया है, उनके अहंकार का भी अंत निश्चित है।
उन्होंने कहा कि समय स्वयं उनका फैसला करेगा और न्याय अवश्य होगा। कांग्रेस सांसद के इस बयान के बाद कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित अलग-अलग समीक्षा बैठकों में झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की समीक्षा की।
केन्द्रीय मंत्री ने झारखंड की 3,245 किलोमीटर सड़कों की गुणवत्ता के साथ रखरखाव की समीक्षा की। झारखंड के साथ उत्तराखंड के 4,026 किलोमीटर राजमार्गों की भी जवाबदेही लेगी। यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गयी।
समीक्षा बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के वरिष्ठ अधिकारी तथा परियोजना ठेकेदार भी उपस्थित रहे।
समीक्षा के दौरान गडकरी ने रखरखाव कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, उच्चतम गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करने तथा टिकाऊ और कुशल राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए आधुनिक निर्माण तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने सभी हितधारकों को जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने और सड़क यात्रा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिये, ताकि प्रमुख राजमार्ग गलियारों पर निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को आगामी मानसून को देखते हुए प्रभावी जल निकासी व्यवस्था, ढलानों की सुरक्षा, निवारक रखरखाव तथा मजबूत त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र के साथ व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि समय पर हस्तक्षेप और समन्वित कार्रवाई से व्यवधानों को कम किया जा सकता है, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है तथा राष्ट्रीय राजमार्ग के बुनियादी ढांचे के दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस इंटक की 316 वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर जी संजीव रेड्डी के अध्यक्षता में हुई।
कार्यकारिणी की बैठक में पूरे देश के प्रतिनिधि शामिल हुए। कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद, राज्य के माननीय मंत्रीगण शामिल होकर श्रमिक नेताओं की हौसला अफजाई की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को 22 जून तक बंद करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर की गयी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। टेलीग्राम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने माना कि यह कदम 21 जून को होने वाली नीट-यूजी 2026 की पुनः परीक्षा से पहले किसी भी तरह के प्रश्नपत्र लीक को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने आदेश सुनाते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने की प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया। मामले की आपातकालीन स्थिति को देखते हुए, पीठ ने कारणों की जानकारी न दिए जाने के आधार पर दी गई चुनौती को खारिज कर दिया। न्यायालय ने माना कि केंद्र सरकार के पास इस धारा के तहत किसी भी प्लेटफॉर्म तक पहुंच को रोकने का अधिकार है।
टेलीग्राम ने तर्क दिया था कि उसने नीट से जुड़ी अवैध सामग्रियों के प्रसार को रोकने के लिए पहले ही कई सक्रिय कदम उठाए हैं, जिसमें 900 से अधिक लिंक हटाना शामिल है। प्लेटफॉर्म ने यह भी दलील दी कि वह इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री को फैलने से रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों का उपयोग करता है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने कहना था कि टेलीग्राम का तकनीकी ढांचा ऐसे स्वचालित खातों यानी बॉट्स के निर्माण और संचालन को आसान बनाता है, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के भारी मात्रा में सामग्री प्रसारित कर सकते हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जब किसी बॉट को बंद भी किया जाता है, तो वह आसानी से दूसरे चैनल पर उसकी नकल तैयार कर लेता है और उपयोगकर्ताओं को अपने आप दूसरे बॉट पर ले जाता है।
जिससे ऐसे मामलों पर रोक लगाना काफी कठिन हो जाता है। टेलीग्राम को अस्थायी रूप से बंद करने का यह आदेश राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिशों के बाद जारी किया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्चिम बंगाल से बड़े पैमाने पर लड़कियों व महिलाओं की ट्रैफिकिंग की रोकथाम के लिए काम कर रहे गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) व बितान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग, अवेयरनेस एंड नेटवर्किंग (बितान) ने रेलवे पुलिस फोर्स (आरपीएफ) की मदद से दो नाबालिग बहनों को एक महिला ट्रैफिकर के चंगुल से मुक्त कराया।
महिला 15 व 17 साल की इन दोनों बहनों को पूर्वांचल एक्सप्रेस ट्रेन से बिहार के सिवान ले जा रही थी जहां से इन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ले जाया जाना था। पूछताछ में पता चला कि इनमें से 15 साल की बच्ची को आर्केस्ट्रा में काम करने के एवज में मोटे पैसे का लालच दिया गया था जबकि बड़ी बहन को घरेलू सहायिका का काम दिलाने का आश्वासन दिया गया था। आरोपी प्रियंका मल्लिक को हिरासत में लेकर गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) आगे की कार्रवाई कर रही है। एवीए और बितान देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी हैं।
बचाई गई इन दोनों बच्चियों में बड़ी बहन ग्यारहवीं में पढ़ रही है जबकि छोटी बहन ने आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इनकी मां कोलकाता में घरों में काम करती है जबकि पिता संदेशखाली में खेती करते हैं और फिलहाल एक हफ्ते से किसी काम के लिए आंध्र प्रदेश गए हैं। गिरफ्तार आरोपी कोलकाता में इन बच्चियों की पड़ोसी थी और परिवार की खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए उसने बच्चियों को नौकरी दिलाने का लालच देकर कुशीनगर जाने के लिए उनकी मां को राजी कर लिया। हालांकि आरोपी ने बच्चियों की मां को इस बाबत कुछ भी नहीं बताया था कि वह उन्हें किस काम के लिए ले जा रही है।
रेलवे स्टेशन पर बच्चियों के साथ संदिग्ध हालात में दिखने पर एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन व बितान के कार्यकर्ताओं ने जब आरोपी से इन बच्चियों के बारे में पूछताछ की तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। बाद में उसने बताया कि वह इन बच्चियों को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तरया सुजान के ‘बंटी बबली रिकॉर्डिंग प्रोग्राम’ नाम के आर्केस्ट्रा में काम करने लिए ले जा रही थी जिसे बंटी यादव नाम का एक व्यक्ति चलाता है।
बच्चियों को आर्केस्ट्रा की आड़ में यौन शोषण के दलदल में फंसने से बचाने व आरोपी के खिलाफ कार्रवाई पर संतोष जताते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, पश्चिम बंगाल अर्से से ट्रैफिकिंग गिरोहों के निशाने पर है जो गरीब व मजबूर परिवारों की बेटियों को अच्छी नौकरी व मोटे पैसे का सब्जबाग दिखाते हैं और फिर उन्हें आर्केस्ट्रा में शोषण व वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल देते हैं। इस समस्या की अब और अनदेखी नहीं की जा सकती और बच्चियों को बचाने के लिए एकजुट कार्रवाई की जरूरत है। नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों व जागरूकता कार्यक्रमों से निश्चित रूप से प्रशासनिक चौकसी बढ़ी है व ट्रैफिकिंग की रोकथाम में रेलवे पुलिस फोर्स के प्रयास सराहनीय हैं।
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