एबीएन सेंट्रल डेस्क। संसद भवन परिसर में कांग्रेस संसदीय दल किए महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया जिसमें लोकसभा के प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, उन्होंने कहा कि मुझ पर मुकदमा करें, विशेषाधिकार प्रस्ताव लाओ, मैं किसानों के लिए लडूंगा।
जो भी ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीने या देश की खाद सुरक्षा को कमजोर करें, वह किसान विरोधी है। अन्नदाताओं के हितों से किसान विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।
उन्होंने उपस्थित सांसदों को दिशा निर्देश देते हुए कहा कि यह समझौता किसानों के लिए अन्यायपूर्ण है इसके लिए सांसदों से इसके खिलाफ मजबूती से खड़ा होने को कहा। इस बैठक में सांसद प्रियंका गांधी, लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत सहित अनेक सांसद शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगले सप्ताह की भारत यात्रा से पहले सरकार ने वायु सेना के लिए फ्रांस से अतिरिक्त बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान राफेल की दो दशक से भी अधिक समय से लटकी पड़ी खरीद के प्रस्ताव को गुरुवार को हरी झंडी दिखा दी।
रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 3.60 लाख करोड़ रुपये की लागत से राफेल लड़ाकू विमानों के साथ-साथ नौसेना के लिए आठ पी-8 आई टोही विमानों, मिसाइलों तथा स्यूडो सेटेलाइट की खरीद को भी मंजूरी दी गयी।
इन प्रस्तावों को आवश्यकता के आधार पर खरीद की मंजूरी दी गयी है। इन खरीद सौदों के पूरा होने से सशस्त्र बलों की युद्धक तैयारी तथा मारक क्षमता कई गुना बढ़ जायेगी।
उल्लेखनीय है कि रक्षा खरीद बोर्ड ने पिछले महीने ही करीब सवा तीन लाख करोड़ रुपये की लागत से फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद को मंजूरी दी थी। अभी वायु सेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं।
मंत्रालय ने बताया कि परिषद की बैठक में सेना के लिए टैंक रोधी सुरंगों (वैभव) और टी -72 टैंकों तथा इंफेन्ट्री के लिए युद्धक वाहनों की खरीद को भी मंजूरी दी गयी है।
टीम एबीएन, रांची। 2 फरवरी 2026 को देशभर में बड़े पैमाने पर हड़ताल और भारत बंद का आह्वान किया गया है। यह आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने मिलकर किया है। यूनियनों का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 30 करोड़ मजदूर और किसान भाग ले सकते हैं। हड़ताल का असर अलग-अलग राज्यों में अलग स्तर पर देखने को मिल सकता है।
सरकारी बैंक कर्मचारियों की कई यूनियनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है। इसमें रइक, बैंक आॅफ बड़ौदा और कऊइक जैसे बड़े बैंक शामिल हैं। बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण काउंटर सेवाएं, नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस जैसी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, एटीएम, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी।
कई राज्यों में बस और ट्रक यूनियनों ने भी बंद का समर्थन किया है। ओडिशा, केरल और असम जैसे राज्यों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कुछ स्थानों पर चक्का जाम की स्थिति भी बन सकती है। इससे लोगों को यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कुछ शहरों और कस्बों में व्यापारी संगठनों ने भी बंद का समर्थन किया है, जिससे बाजार और दुकानें बंद रह सकती हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) और कुछ सरकारी विभागों में कामकाज धीमा रहने की संभावना है।
अब तक स्कूलों को बंद करने का कोई देशव्यापी आदेश जारी नहीं हुआ है। हालांकि जिन राज्यों में बंद का ज्यादा असर हो सकता है, वहां स्थानीय प्रशासन एहतियातन स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला ले सकता है। चूंकि इस समय बोर्ड परीक्षाओं का दौर चल रहा है, इसलिए अधिकतर स्कूल खुले रहने की संभावना है। फिर भी छात्रों को परिवहन की समस्या के कारण परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी गयी है कि वे सुबह घर से निकलने से पहले स्कूल की ओर से जारी सूचना जरूर जांच लें।
आपातकालीन सेवाएं जैसे अस्पताल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहेंगे। एयरपोर्ट पर उड़ानें निर्धारित समय के अनुसार संचालित होंगी, लेकिन सड़क जाम की आशंका को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गयी है।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू किये गये नये लेबर कोड मजदूरों के हित में नहीं हैं। ये कोड पहले के 29 श्रम कानूनों की जगह लाये गये हैं। यूनियनों का आरोप है कि इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। वहीं किसान संगठनों ने कुछ अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का विरोध जताया है। इसके अलावा आंदोलनकारी मनरेगा योजना को मजबूत करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
हड़ताल के दिन घर से निकलने से पहले अपने शहर की स्थिति की जानकारी जरूर लें। जरूरी कामों को पहले निपटाने की कोशिश करें और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करें। यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय रखें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर-आधारित धोखाधड़ी से निपटना और इसके तंत्र को समाप्त करना विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आई4सी, राज्य पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग प्रणाली, आईटी मंत्रालय, आरबीआई और न्यायपालिका जैसे संस्थान सभी साइबर अपराध को रोकने और कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि जनवरी 2020 से 2025 तक आई4सी के रिपोर्टिंग पोर्टल का व्यापक उपयोग हुआ है।
30 नवंबर 2025 तक इसे 23 करोड़ से अधिक बार इस्तेमाल किया गया, जो इसकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। इसी अवधि में 82 लाख साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 1 लाख 84 हजार एफआईआर में परिवर्तित की गईं और अनेक मामलों का निराकरण भी हुआ।
उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने साइबर अपराध के खिलाफ काफी पहले ही एक व्यापक रणनीति अपनाई है, जिसमें रियल-टाइम रिपोर्टिंग, फॉरेंसिक लैब का नेटवर्क, क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, साइबर जागरूकता को समाज तक पहुंचाना और साइबर स्पेस में साइबर हाइजीन सुनिश्चित करना शामिल है।
इन सभी प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर हमें एक मजबूत और सुरक्षित तंत्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। गृह मंत्री ने कहा कि जनवरी 2019 में गृह मंत्रालय ने आई4सी की स्थापना की। आई4सी एक अद्भुत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में सफल रहा है।
विभिन्न एजेंसियों के बीच इसने बेहतर समन्वय स्थापित किया, आवश्यक साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर कई स्थानों पर खड़ा किया और साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाये हैं। उन्होंने सीबीआई और आई4सी को बधाई देते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें कई सरकारी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
गृह मंत्रालय स्वतंत्र रूप से योगदान दे रहा है और आई4सी, राज्य पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग प्रणाली, आईटी मंत्रालय, आरबीआई और न्यायपालिका जैसे संस्थान सभी साइबर अपराध को रोकने और कम करने के लिए प्रयासरत हैं। प्रत्येक एजेंसी की अपनी भूमिका और जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने बताया कि 11 साल पहले 25 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे, जो आज बढ़कर 100 करोड़ हो गए हैं। ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में भी 16 गुना वृद्धि होकर यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। 1 जीबी डेटा की कीमत में 97% की कमी आई है, जिससे कनेक्टिविटी और उपयोग में वृद्धि हुई है।
11 साल पहले 546 पंचायतें भारतनेट से जुड़ी थीं, जबकि आज 2 लाख पंचायतें इससे जुड़ चुकी हैं। यूपीआई लेन-देन के तहत वर्ष 2024 में 233 ट्रिलियन भारतीय रुपए मूल्य के 181 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्शन किये गये। दुनिया में हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहा है।
2024 में भुगतान प्रणाली के कुल 97% ट्रांजेक्शन डिजिटल थे और वॉल्यूम के हिसाब से 99% लेन-देन डिजिटल माध्यम से हुए। सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य भारत में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी के पैमाने, रुझानों और विकसित होते स्वरूप की साझा समझ विकसित करना था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप गुरुवार यानी 12 फरवरी 2026 को किसी जरूरी काम से बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बैंक ग्राहकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि क्या उस दिन बैंक खुले रहेंगे या बंद? देश की प्रमुख बैंक यूनियनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
हालांकि, तकनीकी रूप से यह कोई सरकारी छुट्टी नहीं है, लेकिन इसका असर आपकी बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 12 फरवरी को आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और हो सकती है।
सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को भेजे गए एक नोट में साफ किया है कि हड़ताल के कारण उनकी शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सीएम ममता बनर्जी ने अपनी कमर कस ली है। ममता बनर्जी ने बंगाल के लोगों के लिए बड़ा ऐलान किया है। ममता ने कहा है कि बंगाल में 10वीं पास बेरोजगार युवकों को 1500 रुपये और किसानों को 4000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार अब सीधे बैंक खातों में पैसा भेजेगी। ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि अब 1 कट्ठा जमीन रखने वाले छोटे किसानों को भी प्रति वर्ष 4000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी।
इसके साथ ही, खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली को पूरी तरह मुफ्त करने का निर्णय लिया गया है। दूसरी ओर युवाओं के लिए युवा साथी योजना के तहत 10वीं पास बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये का भत्ता दिया जायेगा। खास बात यह है कि यह लाभ अगस्त के बजाय अप्रैल महीने से ही लागू कर दिया जायेगा।
इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार 15 से 26 फरवरी तक पूरे बंगाल में विशेष कैंप आयोजित करेगी। कृषि, सिंचाई, बिजली और युवा कल्याण विभाग के ये कैंप सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेंगे, ताकि पात्र लोग अपना पंजीकरण करा सकें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही ट्रेड डील पर आखिरकार पिछले हफ्ते मुहर लग गयी। इस समझौते की जानकारी सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर साझा की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी पुष्टि की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि भारत पर लगने वाला टैरिफ अब 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद से ही यह सवाल उठने लगे कि यह डील किन शर्तों पर हुई और भारत ने बदले में क्या रियायतें दी हैं।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह एक ऐतिहासिक ट्रेड डील है, जिसमें भारत ने केवल चुनिंदा क्षेत्रों में ही अमेरिकी उत्पादों को अपने बाजार में प्रवेश दिया है। गोयल ने कहा कि कुछ अमेरिकी वस्तुओं को ड्यूटी-फ्री एक्सेस दिया गया है, लेकिन इस दौरान घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। उनके मुताबिक, यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा और 140 करोड़ लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इस डील के तहत कुछ अमेरिकी प्रोडक्ट्स को ड्यूटी-फ्री एक्सेस वाइन और स्पिरिट्स को सीमित एडजस्टमेंट के साथ राहत, कॉस्मेटिक्स सेक्टर को आंशिक रूप से खोला गया। कंप्यूटर और आईटी से जुड़े कुछ उत्पादों के आयात पर रियायत
मेडिकल उपकरणों जैसे फाइबरस्कोप और लैपरोस्कोप को प्राथमिकता शामिल है।
कृषि क्षेत्र पर भारत की सख्ती बरकरार
यानी शुरूआती आशंकाओं के विपरीत, भारत ने पूरे कृषि क्षेत्र को नहीं खोला है। अमेरिका से आने वाले किसी भी जेनेटिकली मोडिफाइड कृषि उत्पाद को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी है। इसके अलावा जिन फसलों का देश में भरपूर उत्पादन होता है, उन्हें टैरिफ छूट से बाहर रखा गया है।
इनमें शामिल हैं: मक्का, चावल, गेहूं मोटे अनाज, रागी केला, खट्टे फल काबुली चना, चीनी सोयाबीन और अन्य अनाज संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित भारत ने मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, एथनॉल और तंबाकू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भी इस समझौते से बाहर रखा है। इससे साफ है कि सरकार ने व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू किसानों और स्थानीय उद्योगों के संरक्षण को प्राथमिकता दी है।
इस ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में बड़े अवसर खुलेंगे। कई कृषि और बागवानी उत्पादों को जीरो टैरिफ के साथ अमेरिका में प्रवेश मिलेगा।
इनमें शामिल हैं: चाय, कॉफी, मसाले नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स सुपारी, चेस्टनट एवोकाडो, अमरूद, आम, कीवी पपीता, अनानास, मशरूम सब्जियों की जड़ें, जौ बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद तिल और खसखस निष्कर्ष जीरो टैरिफ सुविधा से भारतीय किसानों, बागवानी उत्पादकों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। साथ ही अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा या जारी रहेगा, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ही बात करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पोस्ट कर दावा किया था कि अमेरिका से डील के साथ ही भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इस पर भारत की ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया गया है।
हालांकि सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत अपने फैसले देश के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगा। इसमें कहा गया था कि उन गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं का मार्केट से तेल खरीदना जारी रखा जाएगा, जो सबसे अच्छा सौदा दे रहे हैं। मार्केट के अनुसार कीमतों को तय किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को अमेरिकी अर्थव्यस्था से कम टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जो अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक डील भारतीय किसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
अमेरिका हमारे पड़ोसी देशों वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत और चीन पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई ऐसी चीजें हैं, जो हमारे एक्सपोर्टर्स बिना किसी टैरिफ के अमेरिका भेज सकते हैं। इस दौरान उन्होंने स्मार्टफोन का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है, उन्हें इस डील के दायरे से बाहर रखा गया है। जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें, मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी, अमरंथ जैसे मोटे अनाज को कम टैरिफ पर भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फलों जैसे फलों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। ग्रीन टी, काबुली चना, मूंग, तिलहन, मूंगफली, माल्ट और माल्ट-आधारित उत्पादों, गैर-अल्कोहल पेय, स्टार्च, इथेनॉल, तंबाकू पर डील में कोई रियायत नहीं दी गई है। इस प्रकार भारतीय किसानों की रक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कृषि उत्पादों ऐसे भी हैं, जिन्हें अमेरिका निर्यात करेगा तो शून्य टैरिफ लगेगा। इसमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल का तेल, काजू और कई फल-सब्जियां हैं।
साथ ही उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसान विरोधी हैं। किसानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। ये लोग हैरान हैं कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के तहत कृषि उत्पादों पर रियायत नहीं दी गई है।
इसके अलावा उन्होंने डील पर सदन में चर्चा को लेकर कहा कि संसद में क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं, यह स्पीकर और चैयरमेन तय करेंगे। संसद में हर बात नहीं पढ़ी जा सकती। कुछ मामलों को सीधे देश के लोगों तक पहुंचाना होता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि व्यापारिक समझौते के कारण देश में खुशी की लहर है। देश के हर क्षेत्र में उत्साह है। ये डील हर सेक्टर्स के लिए फायदेमंद रहेगा।
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