एबीएन सेंट्रल डेस्क। चारा घोटाला में सजायाफ्ता और पूर्व सांसद आरके राणा का निधन हो गया है। पूर्व सांसद रबींद्र कुमार राणा का दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। उन्हें एक दिन पहले मंगलवार को रिम्स रांची से एयर एंबुलेंस के जरिए एम्स ले जाया गया था। उन्होंने अपराह्न लगभग साढ़े तीन बजे आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि आरके राणा की मृत्यु मल्टी ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई है। 15 मार्च को रांची के होटवार जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद राणा को रांची स्थित रिम्स में दाखिल कराया गया था। यहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। मेडिकल बोर्ड ने उनकी बिगड़ती स्थिति को देख उन्हें मंगलवार को एम्स के लिए रेफर किया था। आरके राणा 14वीं लोकसभा में बिहार के खगड़िया संसदीय क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल की ओर से सांसद रह चुके थे। वह बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके थे। आरके राणा को रांची के डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में अदालत ने 21 फरवरी को दोषी ठहराया था। उन्हें पांच साल की कैद और 60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी गई थी। इसी मामले में लालू प्रसाद यादव को भी पांच साल की सजा हुई है। इसके पहले देवघर कोषागार से 89 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में भी उन्हें सजा हो चुकी थी।
टीम एबीएन, पटना। बिहार के तीन जिलों में अलग-अलग जगहों पर 30 लोगों की मौत शनिवार और रविवार को संदिग्ध हालात में हो गई। उल्टी, दस्त और पेटदर्द के लक्षण सबमें पाये गये। मृतकों में 17 भागलपुर जिले के, 11 बांका जिले के और दो मधेपुरा जिले के हैं। बीमार चल रहे कुछ लोगों के आंख की रोशनी भी कम हो गयी है। भागलपुर में दो मृतकों के परिजनों ने बताया कि शराब पीने के बाद मौत हुई है। हालांकि प्रशासन इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। भागलपुर शहरी क्षेत्र के साहेबगंज में गुस्साए लोगों ने रविवार सुबह हंगामा किया और चार घंटे तक सड़क को जाम रखा। भागलपुर में होली के मौके पर शराब पीने से सभी की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। शराब से मौतों की चर्चा के बाद डीएम और एसएसपी रविवार शाम विश्वविद्यालय थाना पहुंचे। पुलिस ने कई इलाकों में शराब को लेकर छापेमारी शुरू कर दी है। कई लोगों को हिरासत लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले सुबज सात बजे मृतकों के परिजन मुआवजा तथा शराब के धंधे से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सड़क पर बैठ गए। चार घंटे बाद पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के समझाने के बाद लोग सड़क से हटे। भागलपुर शहरी क्षेत्र में पांच लोगों के अलावा, नारायणपुर में चार, गोराडीह में तीन, कजरैली में तीन, नवगछिया के परबत्ता में एक और शाहकुंड में एक व्यक्ति की मौत हुई है। मृतकों में रेलकर्मी और पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। भागलपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि मौत के कारणों का पता लगाने के लिए दो शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। कई परिवार वालों ने बीमारी से मौत की बात लिखकर दी है। अन्य परिवारों से संपर्क किया जा रहा है। शराब का धंधा करने वालों के विरुद्ध छापेमारी की जा रही है।
टीम एबीएन, पटना। बिहार में भी अगले कुछ महीने बुलडोजर चर्चा में रहने वाला है। बिहार के सभी जिलों में अप्रैल से जून तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलेगा। इस दौरान सरकार जमीन पर किये गये अतिक्रमण को मुक्त कराने के लिए सरकार बुलडोजर चलाएगी। भूमि सुधार व राजस्व मंत्री राम सूरत कुमार ने कहा कि राज्य के सभी शहरों में अप्रैल से जून तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलेगा। इस दौरान सरकार जमीन पर किये गये अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर भी चलेगा। इसके साथ ही उन्होंने सदन में यह भी कहा कि सभी सदस्यों से आग्रह है कि जब कार्रवाई शुरू हो तो अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए किसी प्रकार की पैरवी मत कीजिएगा। किसी की नहीं चलेगी पैरवी : मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की पैरवी नहीं चलेगी। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई अप्रैल से जून तक चलेगी। चूंकि इस दौरान बारिश नहीं होती है। ऐसे में हटाने में किसी प्रकार की परेशानी भी नहीं होगी। बिहार विधानमंडल का बजट सत्र मार्च तक चलेगा। इसके बाद अप्रैल से अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में 10-10 लाख का फंड भी जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन-जिन स्थानों पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है, अब सरकार उन जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराएगी। अभियान के दौरान जिन जमीनों पर अतिक्रमण पाया जाएगा उन्हें ध्वस्त किया जाएगा। सभी विभाग अपने जमीनों की कराए पैमाइश : मंत्री राम सूरत कुमार विधान परिषद में डॉ संजीव कुमार सिंह के तारांकित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। संजीव कुमार सिंह ने सभी शिक्षण संस्थानों के जमीन का डिजिटल ब्योरा बनाने की मांग की थी। जिसके जवाब में भूमि सुधार व राजस्व मंत्री ने कहा कि सभी विभागों को कहा गया है कि वह अपनी जमीन की जमाबंदी करा लें। साथ ही अतिक्रमण हो तो उसकी सूचना दें। पैमाइश कराकर सरकार बुल्डोजर चलाकर अतिक्रमण हटाएगी सरकारी कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय होगी। इसके साथ ही मंत्री ने कहा कि अतिक्रमण हटाने में सरकारी कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय होगी। सरकारी भूमि के संरक्षण में शिथिलता या फिर लापरवाही बरतने वाले राजस्व अधिकारियों और कर्मियों को चिह्नित कर विभागीय एवं अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। जिन कर्मियों की कर्तव्यहीनता के चलते सरकार को क्षति पहुंचेगी, उनसे उक्त सरकारी भूमि के समतुल्य राशि की वसूली होगी।
टीम एबीएन, पटना। बिहार बोर्ड यानी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बुधवार को कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार बोर्ड ने 19 दिन में रिजल्ट जारी कर रिकॉर्ड बनाया है। बोर्ड के अनुसार, आधुनिक तकनीक से परीक्षा प्रणाली में काफी बदलाव किया गया है और इसी का नतीजा है कि 13,25,749 विद्यार्थियों का रिजल्ट महज 19 दिन के भीतर प्रकाशित हो गया। यह समिति के इतिहास का सबसे तेज रिजल्ट है और पूरे देश में एक रिकॉर्ड भी है। इंटरमीडिएट की ये परीक्षा 14 फरवरी, 2022 को खत्म हुई थी और 26 फरवरी से मूल्यांकन शुरू हुआ था। 13,25,749 विद्यार्थियों की करीब 70 लाख कॉपियों और करीब 70 लाख ओएमआर शीट की जांच करते हुए रिकॉर्ड 19 दिनों में रिजल्ट घोषित किया गया है, जो पूरे देश में एक रिकॉर्ड है। इससे पहले साल 2021 में समिति ने इंटरमीडिएट के मूल्यांकन शुरू होने की तारीख से सिर्फ 21 दिनों के भीतर रिजल्ट जारी किया था। इस साल भी बोर्ड ने नए सॉफ्टवेयर के जरिए रिजल्ट की प्रोसेसिंग की। बिहार बोर्ड का कहना है कि नए सॉफ्टवेयर की गति पिछले सॉफ्टवेयर की तुलना में 16 गुणा अधिक है। 2020 में तैयार हुआ था सॉफ्टवेयर : इस सॉफ्टवेयर को देश में पहली बार बिहार बोर्ड ने ही साल 2020 में तैयार किया था। बता दें बिहार बोर्ड का रिजल्ट बीएसईबी की वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in और biharboardonline.com पर अपलोड हुआ है। छात्र यहां जाकर इसे देख सकते हैं। इस साल 4,52,171 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में, 5,10,831 द्वितीय श्रेणी में और 99,550 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं। इंटरमीडिएट की इस परीक्षा में कुल 13,25,749 विद्यार्थी उपस्थित हुए थे, जिसमें 6,83,920 छात्र और 6,41,829 छात्राएं हैं।
टीम एबीएन, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा 157 साल पुराने अनुमंडल बाढ़ को जिला बनाए जाने की संभावना पर सरगर्मी बढ़ गई है। जिला बनाने के सवाल पर पिछले 30 सालों से राजनीतिक रस्साकशी चल रही है। कई बार भरोसा दिया गया लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा संकेत दिए जाने से जिला बनने की संभावना बढ़ गई है। बाढ़ को जिला बनाने के लिए पिछले तीन दशक से आंदोलन जारी है। 22 मार्च 91 को क्षेत्रीय जनता की मांग पर बाढ़ को संयुक्त बिहार का 51वां जिले का दर्जा बनाने की अधिसूचना राज्य सरकार द्वारा जारी की गई थी। 2 अप्रैल 91 को बाढ़ जिला का उद्घाटन आनन-फानन में कर दिया गया। नए जिले के पहले जिला अधिकारी के रूप में पटना के तत्कालीन जिला पदाधिकारी अरविंद प्रसाद ने अनुमंडल मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कामकाज की विधिवत शुरुआत की। इसी बीच राजनीतिक दांवपेच के कारण विरोध शुरू कर दिया गया। इस दौरान जिले के सभी सरकारी दफ्तरों को आदेश दिया गया था कि तत्काल प्रभाव से बाढ़ जिले का उल्लेख अपने कामकाज में करें। दूसरी तरफ तत्कालीन बाढ़ के विधायक और राजभाषा मंत्री विजय कृष्ण ने बाढ़ को जिला बनाने के मुद्दे पर हुए विरोधाभास के कारण इस्तीफा दे दिया था। स्थानीय सांसद नीतीश कुमार और विधायक विजय कृष्ण के बीच छत्तीस का आंकड़ा होने के कारण मामला तूल पकड़ लिया और महज 3 दिनों के भीतर अधिसूचना को राज्य सरकार के द्वारा स्थगित कर दिया गया। बाढ़ को जिला बनाने के लिए अधिवक्ता संघ ने भी हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन बात नहीं बनी। बाद में राज्य सरकार ने स्थगित अधिसूचना को हमेशा के लिए रद्द कर दिया था। प्रदेश जदयू उपाध्यक्ष विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा है कि बाढ़ के लोगों का दिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से जीत लिया। बाढ़ की जनता अब आजीवन नीतीश कुमार की आभारी रहेगी। 70 के दशक से लगातार बाढ़ को जिला बनाने मांग चल रही थी। लेकिन लालू यादव के शासनकाल में इसे कभी पूरा नहीं किया गया। जदयू नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बाढ़ के लोगों का मान-सम्मान-अभिमान को बरकरार रखते हुए यह घोषणा कर दी कि जल्द बाढ़ जिला बनेगा। बाढ़ को जिला बनाने का संघर्ष 70 के दशक में शुरू हुआ और 22 मार्च 1991 को संयुक्त बिहार का 51वां जिला बनाने की घोषणा हुई। 1 अप्रैल को इसका औपचारिक उद्घाटन तत्कालीन डीएम अरविंद प्रसाद ने किया। लेकिन, 2 अप्रैल 1991 को ही यह फैसला रद्द हो गया। तब से ये मांग जारी है।
टीम एबीएन पटना, बिहार के पशुपालन और मत्स्य संसाधन मंत्री सह विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। साहनी ने शनिवार को रांची में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली की तरह झारखंड-बिहार-उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को एसटी-एससी में शामिल कराना पार्टी का लक्ष्य हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बिहार और झारखंड की 134 लोकसभा सीटों पर पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी और इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को अगर हिम्मत है तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफा मांग कर दिखाएं क्योंकि नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने उत्तर प्रदेश और मिजोरम में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें कमजोर समझ कर इस्तीफा मांगा जाता है लेकिन हमारी पार्टी ने बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी और हमने अपने 4 विधायकों का समर्थन लिखकर राज्यपाल को दिया था। उन्होंने कहा कि हर पार्टी को कहीं से चुनाव लड़ने का हक है और उनकी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ कर अपना जनाधार बनाया है। कहा कि पार्टी निषाद समाज के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही है आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि वे झारखंड में सत्ता नहीं, बल्कि निषाद और अति पिछड़ों को हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने आए हैं।
टीम एबीएन, पटना। बिहार के गया में एक शख्स को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। यहां एक बोलेरो के अंदर शख्स को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। घटना अतरी थाना क्षेत्र के बेलदरिया मोड़ के पास की है। जहां अपराधियों ने बोलेरो सहित एक आदमी को जिंदा जला दिया। यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल है। घटना के बारे में लोगों को शुक्रवार सुबह तब जानकारी हुई, जब यहां लोगों की नजर जली हुए बोलेरो पर पड़ी। इसके बाद गाड़ी के पास लोग पहुंचे तो देखा कि एक जला हुआ कंकाल पड़ा है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। लेकिन पुलिस सूचना देने के घंटों बाद तक मौके पर नहीं पहुंची। घटना के बारे में लोगों ने बताया कि जहां पर जली हुई बोलेरो गाड़ी खड़ी है वह इलाका जंगल और पहाड़ से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र अतरी थाना क्षेत्र के सारसु पंचायत से करीब 60 किलोमीटर दूर है। शुक्रवार की सुबह जब स्थानीय लोग अपने काम धंधे और खेतों की तरफ जा रहे थे तो इस दौरान उन्हें जली हुई हालत में बोलेरो गाड़ी दिखी। गाड़ी को इस स्थिति में देख कर लोग हैरान हो गए। इसके बाद पास जाकर देखा तो उसके अंदर उन्हें सिर्फ एक कंकाल दिखा। मृतक की पहचान नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के अनैला गांव के रहने वाले सुबोध कुशवाहा के रूप में हुई है। शव की शिनाख्त मृतक के भाई ने की। तो वहीं गया जिले के इमामगंज प्रखंड के भगहर गांव में एक महादलित के घर में आग लगा देने की घटना सामने आई है। इस घटना में एक बच्चे की जल के मौत हो गई। मृतक के पिता ने बताया कि परिवार के सभी सदस्य गांव में सर्कस देखने गए थे। इस दौरान वहां गांव के ही कुछ लोगों से उनका झगड़ा हो गया। इसके बाद कुछ लोगों ने घर पर पहुंचकर घर को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान घर में सो रहे 10 साल के गोलू कुमार की आग में जलकर मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। इधर, गरीब परिवार होने की वजह से पीड़ित परिवार को रानीगंज बाजार के मनोज सोनार और संतोष कुमार ने आर्थिक मदद की, जिसके बाद बच्चे का दाह संस्कार कराया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार में एक के बाद एक अनेक स्थानों पर लगातार हो रहे बम विस्फोटों ने न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती खड़ी कर दी है अपितु शासन-प्रशासन वह सरकारी तंत्र की पोल भी खोल कर रख दी है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि दिनो-दिन बढ़ती राज्य की विस्फोटक स्थिति पर विराम लगाया जाना नितांत आवश्यक है। घटनाओं की समग्र रूप से एनआईए से जांच जरूरी है। बांका, अररिया, खगड़िया, सिवान, दरभंगा, भागलपुर और अब गोपालगंज अर्थात् गत 9 माह में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर हुईं बम विस्फोट की घटनाओं में दर्जनों लोग अभी तक मारे जा चुके हैं और अनेक भवन धरासाई हो चुके हैं। इन घटनाओं में जिहादी आतंक व बांग्लादेशी कनेक्शन की बू स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रही है। उन्होंने मांग की कि गत कुछ वर्षों में हुए अनेक विस्फोटों में पुलिस प्रशासन का रवैया लीपापोती का ही रहा है।भीषण बम विस्फोटों को पटाखे कह देना और आज तक किसी भी अन्वेषण के निष्कर्ष पर न पहुंच पाना, राज्य के लिए बेहद चिंताजनक बात है। श्री परांडे ने कहा कि बिहार के अनेक जिले पहले से ही मुस्लिम बाहुल्य हो चुके हैं और घुसपैठ की समस्याओं से पड़ोसी राज्य झारखंड के साहिबगंज और पाकुड़ जिले भी अछूते नहीं रहे। विदेशी घुसपैठिए बांग्लादेशी विद्यार्थी भी यहां बड़े पैमाने में रहते हैं। हिंदू, खासकर अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय की बेटियों को लव जिहादी लगातार अपना शिकार बना रहे हैं। दर्जनों घटनाएं इसकी गवाह हैं। अनेक हिंदू बेटियों को जबरन अपहृत कर बंगलादेश व नेपाल ले जा चुके हैं।इनकी शिकार पूर्णिया की मनीषा सिंह जैसी अनेक बेटियों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ा है। विहिप महा-सचिव ने मांग की है कि घटनाओं की निष्पक्ष, त्वरित व गहन जांच नितांत आवश्यक है। यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए द्वारा किए जाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। उन्होंने सरकार से मांग की जिहादियों व अपराधियों पर नियंत्रण, पीड़ितों को न्याय व उचित मुआवजे की व्यवस्था तुरंत करे। उक्त जानकारी विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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