टीम एबीएन, पटना। पटना के फुलवारी शरीफ टेरर मॉड्यूल मामले को लेकर एनआईए) की टीम ने बिहार के कई जिलों में एक साथ छापेमारी शुरू की है। सबसे पहले टीम सुबह-सुबह दरभंगा पहुंची, जहां सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में कई आरोपियों के घरों में छापेमारी जारी है। वहीं, नालंदा जिला के बिहारशरीफ के सोहसराय महुआ टोला, लहेरी थाना के नदी मोड़ और बिहार थाना के गढ़पर मोहल्ला में भी एनआईए की छापेमारी चल रही है। यहां भी भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं। इसके अलावा मोतिहारी और पटना में भी एनआईए आरोपी के घरों में जांच कर रही है। इस मामले में गृह मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद अब एनआईए ने इसकी जांच शिद्दत से शुरू कर दी है। एनआईए की टीम दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी मो जाकिर के पुत्र मुस्तकीम और उसी गांव के सनाउल्लाह उर्फ आकिब और नूरुद्दीन जंगी के घर पर छापेमारी कर रही है, तो पटना में आरोपी अतहर परवेज के घर पर जांच चल रही है। वहीं मोतिहारी के चकिया के कुअवां गांव स्थित पीएफआई के जेनरल सेक्रेटरी रियाज मॉरुफ उर्फ बब्लू के घर की तलाशी ली जा रही है। फुलवारी शरीफ थाने में दर्ज पीएफआई और गजवा ए हिंद जिहादी मॉड्यूल के दोनों मामले को एनआईए ने पूरी तरह से अपने हाथों में ले लिया है और यही वजह है कि टीम ने एक साथ तमाम आरोपियों को घरों की तालाशी शुरू कर दी है, ताकि इस मामले में अहम जानकारियां टीम के हाथ लग सकें। जिसके आलोक में वो जांच को आगे बढ़ायेगी। दरभंगा में एनआईए की 4 घंटे छापेमारी चली। जहां नूरूद्दीन जंगी की मां और भाई से एनआई ने गहन पूछताछ की और पूरे घर की तालाशी ली। हालांकि टीम ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि जंगी के घर कुछ दस्तावेज उनके हाथ लगे या नहीं, मीडिया वाले ने एनआईए से लगातार सवाल करते रहे, लेकिन टीम ने कोई जामकारी नहीं दी। एनआईए की टीम पूर्वी चंपारण जिला के चकिया के कुअवां गांव स्थित पीएफआई के जेनरल सेक्रेटरी रियाज मॉरुफ उर्फ बब्लू के पैतृक घर की एनआईए तलाशी ले रही है। चकिया के नगर पंचायत के वार्ड नंबर 13 में स्थित कुअवां गांव में लोग कुछ समझ पाते इससे पहले कई पुलिस की गाड़ियों के साथ एनआईए की टीम सुबह सवेरे ही वहां पहुंच गई और रियाज के घर में छापेमारी शुरू कर दी। रियाज के घर में उसकी बूढ़ी मां और छोटा भाई है। छोटा भाई गांव के हीं मदरसा में शिक्षक है। एनआईए की टीम रियाज के घर को खंगाल रही है। पटना में दर्ज एफआईआर में चकिया के रहने वाले पीएफआई के जेनरल सेक्रेटरी रियाज मॉरुफ उर्फ बब्लू का भी नाम सामने आया था। हालांकि रियाज अभी फरार है और एनआईए उसकी तलाश कर रही है। रियाज के घर से क्या-क्या बरामदगी हुई है, इसका पता अभी नहीं चल सका है।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। पटना में मंकीपॉक्स के पहले संदिग्ध मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। संदिग्ध महिला मरीज पटना सिटी के गुडहट्टा एरिया की बतायी जा रही है। मरीज का सैंपल जांच के लिए पटना मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। इधर केंद्र सरकार ने भी मंकीपॉक्स को लेकर बिहार सरकार को अलर्ट किया है। संभावित खतरे को लेकर बिहार सरकार भी तैयारियों में जुट गई है। हला संदिग्ध मरीज मिलने के बाद पूरे बिहार में अलर्ट जारी कर दिया गया है। पटना सिविल सर्जन ने जानकारी दी कि सस्पेक्ट महिला है। उसका सैंपल जांच के लिए 4 लोगों की टीम बनाकर कलेक्ट किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि बिहार सरकार पूरी तरह से तैयार है। इसको लेकर सभी उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं। बिहार में एक ओर कोरोनावायरस संक्रमण बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ मंकीपॉक्स के संभावित खतरे से लोग डरे सहमे हैं। केंद्र सरकार ने भी 3 दिन पहले बिहार सरकार को अलर्ट भेजा था। बिहार सरकार भी तैयारियों में जुटी है। राज्य में कोरोनावायरस का खतरा भी बरकरार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी संक्रमित हो गए हैं। मंगल पांडे ने कहा कि सभी जिलों के सिविल सर्जन और मेडिकल कॉलेजों के सुपरिटेंडेंट के साथ बैठक कर गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिया गया है।
टीम एबीएन, मुजफ्फरपुर/पटना। कहने को तो बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में शराब सप्लाई करने व अन्य नशीले पदार्थ पहुंचाने और इसके एवज में अवैध उगाही का मामला सामने आया है। यह गंभीर आरोप जेल अधीक्षक बृजेश कुमार और तत्कालीन उपाधीकक्ष सुनील कुमार मौर्य पर लगा है। जेल में सामग्रियों के आपूर्तिकर्ता (ठेकेदार) रहे संवेदक रमेश सिंह ने आरोप लगाया है कि यह दोनों जेल अधिकारी जेल में शराब पहुंचा कर कैदियों से वसूली करते रहे हैं। इस गलत काम के लिए अपराधियों का सहारा लिया जाता है। पॉक्सो एक्ट (Pocso Act) के एक बंदी को अपना खास शागिर्द बनाकर यह गोरखधंधा धड़ल्ले से होता था। इतना ही नहीं, वो बंदी पैसा न देने वाले कैदियों को दूसरे जेल में ट्रांसफर कराने का भय दिखा कर उनसे वसूली करता है। ठेकेदार ने यह भी आरोप लगाया कि मानक के विपरीत दोनों अधिकारी उस पर सामान आपूर्ति का दबाव बनाते हैं। इसी क्रम में एक संवेदक के द्वारा भेजी गई दूध की गाड़ी में जांच के दौरान भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया था। इस मामले में अरोपित संवेदक के प्रतिनिधि को छोड़ने के लिए दो लाख रुपये में सौदा किया गया था। ठेकेदार की शिकायत पर गृह विभाग के संयुक्त सचिव रजनीश कुमार सिंह ने कारा अधीक्षक बृजेश कुमार और तत्कालीन उपाधीक्षक सुनील कुमार मौर्य के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं।
टीम एबीएन, पटना। बिहार के छपरा में विस्फोट हुआ है। एक घर में पटाखे वाला बम बनाते समय धमाका हुआ है। जिला प्रशासन ने 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं इस धमाके से पूरा घर उड़ गया, जिसके मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। घटना जिले के खैरा इलाके के खुदाईबाग की है। हां पर जो घर था उसके परिवार के सदस्य ने बताया कि आगे रेडीमेड की दुकान थी और पीछे पटाखा बनाता था और बेचता था। इसी में आज आग लग गई और विस्फोट हुआ। इसी में पटाखे के साथ साथ सिलेंडर में भी विस्फोट हुआ होगा। क्योंकि पूरा का पूरा मकान जमींदोज हो गया है। धमाका पटाखा से हुआ या बम से हुआ इसकी भी जांच करवा रहे हैं। बम स्क्वॉड को मौके पर बुलवाया गया है। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया जा रहा है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। पुलिस पता लगा रही है कि ये पटाखा अवैध तरीके से बनाते थे या अनुज्ञप्तिधारी थे। सारण एसपी संतोष कुमार ने बताया कि इस बम धमाके की जांच फॉरेंसिक टीम और बम स्क्वॉड करेगी। धमाका इतना तेज था कि पूरा इलाका दहल गया। पूरा घर ध्वस्त हो गया और घर की छतें और दीवार कई मीटर दूर उछलकर मलबे में तब्दील हो गईं। घर के अंदर मौजूद एक शख्स के शरीर का हिस्सा लगभग 50 मीटर दूर छिटककर गिरा। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। चर्चा है कि पटाखे से इतना बड़ा धमाका कैसे हो सकता है। बम धमाके में अब तक मलबे से 6 शवों के निकाला जा चुका है। घर ध्वस्त होने के बाद भी लगातार धमाके होते रहे। एक धमाका ऐसा भी कैमरे में कैद हुआ कि लोग दहल गए। इस धमाके को वीडियो में भी देखा जा सकता है। बम धमाके की सूचना पाकर छपरा पुलिस प्रशासन के वरीय अधिकारी लगभग आधा दर्जन एंबुलेंस और राहत एवं बचाव दल के साथ खोदाईबाग के लिए रवाना हुए। मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का कार्य शुरू किया गया। गौरतलब है कि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पा रही है कि धमाका "बम विस्फोट" से हुआ है या आतिशबाजी बनाने के दौरान विस्फोट हुआ है। मलबे से प्रशासन ने एक बच्चे के शव समेत 6 लाशों को निकाला। धमाके में कई लोग जख्मी हुए हैं जिन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
टीम एबीएन, पटना। बिहार की राजधानी पटना में खून बेचने के अवैध कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के काली मंदिर रोड नंबर 1 के एक मकान पर छापेमारी की तो यहां से बड़ी संख्या में खून से भरे पैकेट बरामद हुए। दरअसल, कोतवाली थाना पुलिस ने शुक्रवार को लॉकेट (गले का चेन) काटने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया था। शनिवार को पुलिस काटे गए लॉकेट की तलाश में उसको उसके घर लेकर पहुंची थी, लेकिन यहां उसके कमरे में रखे फ्रिज के अंदर से 44 ब्लड के पैकेट, सैकड़ों सीरिंज व अन्य आपत्तिजनक चीजें बरामद की गई। पुलिस की टीम फ्रिज में इतनी संख्या में रखे ब्लड बैग को देख कर हैरान रह गयी। जब लॉकेट गिरोह के सरगना से पूछताछ की गई तो उसने एक अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारी का नाम बताया, जिसके बाद पुलिस ने उसको भी गिरफ्तार कर लिया है। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मानवजीत सिंह ढिल्लों ने जिलाधिकारी (डीएम) से इस मामले में कार्रवाई का अनुरोध किया। ड्रग डिपार्टमेंट को इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। पुलिस खून के अवैध कारोबार को बड़ा अपराध मान रही है। इसके विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। वहीं, ड्रग विभाग के अधिकारियों की मानें तो पटना के एक बड़े निजी अस्पताल के खून बेचने के अवैध कारोबार के तार जुड़े हैं। अस्पताल के कर्मी भी इस काले धंधे में शामिल हैं। विभाग ने इस पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम गठित की है। अधिकारियों के मुताबिक इस निजी अस्पताल के ब्लड बैंक के कर्मचारी संतोष कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। खून की दलाली में कंपनी के दो ब्लड बैंक मिले हैं। ब्लड बैंक से केवल लाइसेंसवाले सेंटर को ही बेचा जाता है, लेकिन इसके बावजूद एक घर से 44 ब्लड बैग का मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार के यातायात को बेहतर करने के लिए एक और फोर लेन का नाम जुड़ने जा रहा है। पटना औरंगाबाद के बीच एक शानदार हाईवे का निर्माण किया जाना है। इसके निर्माण के लिए डीपीआर बनाने हेतु टेंडर जारी कर दिया गया है। माना जा रहा है कि अगस्त महीने तक डीपीआर मंजूरी दे दी जाएगी। जिसके बाद फोरलेन का निर्माण शुरू हो जाएगा। बता दें कि डालटेनगंज औरंगाबाद-पटना हाईवे का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट टेंडर निकल चुका है। विभिन्न एजेंसियों से टेंडर आमंत्रित किया गया है। बता दें कि अगले माह 23 या 24 तारीख को टेंडर खोला जाना है। फिर एजेंसी को पटना के नौबतपुर से छतरपुर तक सड़कों का ट्रैफिक लोड, फ्लाई ओवर, अंडरपास, बाईपास एवं हर तकनीकी पहलुओं को समझेगी। डीपीआर में चार लाइन में आने वाले खर्च का बजट भी बनेगा। सड़क का ज्वाइन आदि बिंदुओं को केंद्रित किया जायेगा। औरंगाबाद-पटना हाईवे के फोरलेन होने पर सबसे अधिक औरंगाबाद के व्यवसायी, नौकरी-पेशा करने वाले और छात्रों को लाभ होगा। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। फिलहाल औरंगाबाद से पटना के लिए बस और ट्रैवल से लोग लगभग 4 घंटे में सफर तय करते हैं। जबकि आपने ही प्राइवेट वाहनों से इतनी दूरी तय करने में तीन से साढ़े तीन घंटे का वक्त लगता है। औरंगाबाद से पटना की दूरी 130 किलोमीटर है। फोरलेन बन जाने के बाद 60 की रफ्तार से भी गाड़ी चलती है तो 2 घंटा 10 मिनट में लोग सफर तय कर लेंगे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। गैर ब्रांडेड फूड आइटम पर जीएसटी लगाने की घोषणा के बाद बिहार में आटा, चावल और दाल की किल्लत हो गई। पटना के बाजार में आटा, चावल और दालों के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। महंगाई के इस झटके से आम जनता का हाल बेहाल हो गया है। रसोई का बजट बिगड़ गया है। कई छोटे ब्रांड के आटा पैकेट ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं। जीएसटी लागू होने से पहले बाजार में खाद्य पदार्थों की आवक 75 प्रतिशत तक कम हो गई है। बाजार से जुड़े कारोबारी कहते हैं कि गोदामों में मौजूद माल को बड़े कारोबारी फिलहाल निकालने में लगे हैं। बिहार राज्य खाद्यान्न व्यवसायी संघ के मंत्री ब्रजेश कुमार के मुताबिक थोक कारोबारी नया माल मंगाने के लिए 18 जुलाई का इंतजार कर रहे हैं। व्यवसायी संघ के महामंत्री नवीन कुमार ने बताया कि पटना की थोक मंडियों में आटा दो सौ टन प्रतिदिन आता था जो घटकर बमुश्किल 50 टन रह गया है। इसी तरह दाल की आवक भी प्रभावित हुई है। मंसूरगंज मंडी में जहां प्रतिदिन बीस ट्रक (25 टन/ट्रक) दाल की आवक थी, वहां अभी 5 ट्रक दाल भी नहीं पहुंच रही है। मंडी के अजय कुमार का कहना है कि 18 जुलाई के बाद उन्हें बचे हुए माल पर जीएसटी भरना होगा। इसलिए बड़े कारोबारी अपने गोदाम में मौजूद दाल को निकालने में लगे हैं। पटना की मंडियों में चावल की आवक भी बुरी तरह प्रभावित है। महाराजगंज मंडी के जितेन्द्र कुमार गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लगने के पहले मंडियों में चावल की आवक पर असर पड़ा है। चावल मिल से मंडियों के व्यापारियों को आपूर्ति नहीं हो रही है। मिल मालिक धान महंगा होने की बात कह रहे हैं। आवक कम होने से थोक मंडियों में ही चावल बढ़ी दर पर पहुंच रहा है। बोरा पर पांच सौ रुपये तक का इजाफा हो गया है। चूड़ा, मुरही, फरही भी महंगा : पटना में गैर ब्रांड वाले खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगने की घोषणा के बाद से ही पटनावासियों को महंगाई का झटका लगने लगा है। चूड़ा, मुरही, फरही आदि की कीमत में बीते दस दिनों से पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। बेऊर के खुदरा किराना दुकानदार मंटू कहते हैं कि दुकानों में आटा, चावल और दाल महंगे हो गए हैं। चावल की कीमत में दो से पांच रुपये किलोग्राम और दाल पांच रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई है।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार की 10 अहम सड़क परियोजनाओं का काम इस साल पूरा हो जाएगा। कुछ परियोजनाएं जून-जुलाई में पूरी हो जाएगी तो कुछ को इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। जिन परियोजनाओं का काम पूरा होगा, उसमें पटना-बख्तियारपुर सड़क के साथ ही अन्य सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इनके बनने से लोग कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान आ-जा सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार जून-जुलाई में पूरी होने वाली परियोजनाओं में फारबिसगंज-जोगबनी चार लेन सड़क शामिल है। 9.2 किमी लंबी इस सड़क के निर्माण पर 312 करोड़ खर्च हो रहे हैं। छपरा-सीवान-गोपालगंज दो लेन सड़क का काम अंतिम चरण में है। 94.2 किमी लंबी यह परियोजना 644 करोड़ की है। किशनगंज शहर में दो लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण हो रहा है। तीन किमी लंबी इस परियोजना की लागत 142 करोड़ है। पटना से बख्तियारपुर चार लेन सड़क निर्माण भी जारी है जो अंतिम चरण में है। 68.7 किमी लंबी यह परियोजना 687 करोड़ की है। जून-जुलाई में ही पूरी होने वाली अन्य परियोजनाओं में शिवहर-सीतामढ़ी-जयनगर-नरहिया दो लेन सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। 170 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 1217 करोड़ है। गया से दाउदनगर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर का काम चल रहा है। 64 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 268 करोड़ है। सहजीतपुर से मोहम्मदपुर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर का काम चल रहा है। 35 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 171 करोड़ है। वहीं आने वाले महीने में पूरी होने वाली परियोजनाएं कोईलवर से भोजपुर तक चार लेन सड़क है। 43 किमी लंबी इस परियोजना की लागत 825 करोड़ है। अक्टूबर 22 तक यह पूरा हो जाएगा। भोजपुर से बक्सर चार लेन सड़क 47.9 किमी लंबी है। 682 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 22 में पूरी हो जाएगी। जबकि सिमरिया-खगड़िया चार लेन सड़क 60.2 किमी लंबी है। 567 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 22 में पूरी हो जाएगी। वहीं अगले साल राज्य की अहम आठ परियोजनाएं पूरी होगी। गया, हिसुआ, राजगीर, नालंदा, बिहारशरीफ चार लेन सड़क 93 किमी लंबी है। 2,138 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। लंबे समय से अधर में लटकी हाजीपुर से मुजफ्फरपुर चार लेन सड़क 63 किमी लंबी है। 766 करोड़ की इस परियोजना को मार्च 23 में पूरा करने का लक्ष्य है। पटना-गया-डोभी चार लेन सड़क 127 किमी लंबी है। 1610 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी हो जाएगी। बख्तियारपुर-मोकामा चार लेन सड़क 44.6 किमी लंबी है। 837 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी हो जाएगी। नरेनपुर से पूर्णिया चार-लेन सड़क 49 किमी लंबी है। 1905 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। वीरपुर से बिहपुर तक दो लेन पेव्ड शोल्डर सड़क 106 किमी लंबी है। 781 करोड़ की यह परियोजना मार्च 23 में पूरी होगी। रजौली-बख्तियारपुर चार लेन सड़क 47 किमी लंबी है। 1065 करोड़ की यह परियोजना अप्रैल 23 में पूरी होगी। मझौली से चरौत दो व चार लेन बन रही है। 63 किमी लंबी यह परियोजना 537 करोड़ की है जो मई 23 में पूरी होगी। अररिया से गलगलिया तक चार लेन सड़क 98 किमी लंबी है। 2150 करोड़ की यह परियोजना दिसम्बर 23 में पूरी होगी। इस तरह अगले साल दिसम्बर तक 19 हजार करोड़ की लागत से बन रही 13 सौ किलोमीटर सड़क परियोजनाओं का काम पूरा हो जाएगा।
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