टीम एबीएन, रांची। बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान महिला डॉक्टर का नकाब हटाने को लेकर उठे विवाद पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने शनिवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने बिहार की उस महिला डॉक्टर को झारखंड आने का न्योता दिया है और 3 लाख रुपये मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट, मनचाही पोस्टिंग और पूर्ण सुरक्षा के साथ नौकरी का प्रस्ताव दिया है।
जामताड़ा में पत्रकारों से बातचीत में इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला डॉक्टर का नकाब हटाकर न सिर्फ एक महिला बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय और नकाब की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा, जिस तरह एक डॉक्टर और एक महिला के साथ नकाब खींचकर अभद्रता की गयी। वह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि मानव गरिमा, सम्मान और संविधान पर सीधा हमला है।
मामला उस समय सामने आया जब पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे थे। सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान जब एक महिला डॉक्टर नियुक्ति पत्र लेने मंच पर पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका नकाब देखकर कहा, यह क्या है? और इसके बाद कथित तौर पर उनका नकाब हटा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद सियासी घमासान शुरू हो गया।
इरफान अंसारी के इस आफर पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो बयान में पूर्व भवनाथपुर विधायक ने सवाल उठाया कि इरफान अंसारी किस नियुक्ति नीति के तहत बिहार की डॉक्टर को झारखंड में नौकरी देंगे।
भानु प्रताप शाही ने यह भी पूछा कि झारखंड में नौकरी देने के लिए क्या राज्य के बेटे-बेटियां नहीं हैं। उन्होंने कहा, यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। झारखंड झारखंडियों के लिए है। अपना फैसला वापस लीजिए। इस बीच, इस पूरे मामले को लेकर नीतीश कुमार की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है।
पुलिस अधिकारी ने शनिवार को बताया कि मोहम्मद मुर्तजा आलम ने कुछ ग्रामीणों के साथ गुरुवार को इटकी थाना में शिकायत दी है। इटकी थाना प्रभारी मनीष कुमार ने पीटीआई को बताया कि यह शिकायत उस वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज करायी गयी है, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिला डॉक्टर का नकाब हटाते नजर आ रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है।
टीम एबीएन, रांची। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा मंच पर हिजाब हटाने पर चर्चा में आयीं मुस्लिम महिला डॉक्टर नूसरत परवीन को झारखंड सरकार ने नौकरी का आफर दिया है। झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी ने उन्हें झारखंड स्वास्थ्य सेवा में 3 लाख रुपये मासिक वेतन, मनचाही पोस्टिंग, सरकारी आवास और पूर्ण सुरक्षा के साथ नौकरी का प्रस्ताव दिया है।
इरफान अंसारी ने कहा कि नियुक्ति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर करायी जायेगी, ताकि उन्हें सम्मान और सुरक्षा दोनों का भरोसा मिल सके। उन्होंने कहा कि बिहार की महिला चिकित्सक डॉ नूसरत परवीन के साथ हुई अमर्यादित, अमानवीय और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। जिस तरह एक डॉक्टर, एक बेटी और एक महिला के साथ अपमान, अभद्रता और हिजाब खींचने जैसी शर्मनाक हरकत की गयी, वह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि मानव गरिमा, इज्जत और संविधान पर सीधा प्रहार है।
मंत्री ने आगे कहा कि मैं पहले एक डॉक्टर हूं, फिर मंत्री। किसी डॉक्टर, बेटी या महिला के सम्मान से समझौता झारखंड में संभव नहीं है। एक डॉक्टर के साथ हुई यह अमर्यादित घटना हम सभी मेडिकल कर्मियों को गहराई से आहत करती है। हम महसूस कर सकते हैं कि उस बच्ची और उसके परिवार पर क्या बीत रही होगी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नए साल के मौके पर राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों को बड़ी राहत दी है। मंगलवार को हुई बैठक में महंगाई भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी। इस फैसले से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों के साथ-साथ पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने छठे केंद्रीय वेतनमान के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों, पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स के ऊअ में सुधार कर दिया है। अब 1 जुलाई 2025 से इनके महंगाई भत्ते को 252% से बढ़ाकर 257% कर दिया जायेगा।
वहीं पांचवें केंद्रीय वेतनमान के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और पेंशनधारियों को भी इस फैसले से राहत मिलेगी। सरकार ने इनके महंगाई भत्ते को 466% से बढ़ाकर 474% मंजूर किया है।
डीए बढ़ने से राज्यभर के लाखों कर्मचारियों, रिटायर्ड कर्मियों और पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वालों की आय में बढ़ोतरी होगी। सरकार का यह फैसला आर्थिक रूप से सभी के लिए राहतभरा माना जा रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विभागों के बंटवारे के एक दिन बाद, राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप जायसवाल और जदयू के अशोक चौधरी समेत कई मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों का कार्यभार संभाल लिया। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के दीपक प्रकाश, जो न तो एमएलए हैं और न ही विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं, ने भी पंचायती राज विभाग का कार्यभार संभाला।
जायसवाल ने उद्योग विभाग के मंत्री के तौर पर और चौधरी ने ग्रामीण निर्माण विभाग के मंत्री के तौर पर काम शुरू किया। जायसवाल और चौधरी दोनों राज्य में विधान परिषद के सदस्य हैं। जायसवाल ने कार्यभार संभालने के बाद कहा, उद्योग विभाग अगले दस दिनों में निवेश के लिए एक व्यापक रोडमैप लेकर आएगा।
एनडीए सरकार का फोकस अगले पांच सालों में बिहार को पूरी तरह से विकसित राज्य बनाना है। युवाओं के लिए, हमारा फोकस राज्य के भीतर ज्यादा से ज्यादा नौकरी के मौके पैदा करना है।
चौधरी ने कहा कि रूरल रोड्स स्ट्रेंथनिंग एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम और मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क समेत कई स्कीमों के जरिए, राज्य सरकार यह पक्का करने की कोशिश करेगी कि हर गांव तक पक्की सड़कें पहुंचें। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि सभी चल रहे प्रोजेक्ट समय पर पूरे हों।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार ने इस साल जुलाई में रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट के 21,406.36 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लॉन्च किए, जिससे राज्य में 11,346 सड़कों और 730 छोटे पुलों के बनने का रास्ता साफ हुआ। दूसरे नये शामिल मंत्रियों के सोमवार को अपने-अपने डिपार्टमेंट का चार्ज संभालने की उम्मीद है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के औपचारिक नतीजे सामने आने के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। देश के 175 प्रतिष्ठित नागरिक जिनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, पूर्व वरिष्ठ प्रशासक, अर्थशास्त्री, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं ने विपक्षी दलों को संबोधित एक खुला पत्र जारी कर चुनाव परिणामों को अविश्वसनीय और संदिग्ध बताया है। इस पत्र पर सबसे प्रमुख हस्ताक्षर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुदर्शन रेड्डी के हैं। इनके साथ कई पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने नाम दर्ज किये हैं।
पत्र में यह भी कहा गया कि मौजूदा परिस्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। हस्तियां लिखती हैं मतदाताओं को हटाना और चुनिंदा इलाकों में नये मतदाता जोड़ना, यह सब एक बड़े राजनीतिक उद्देश्य से किया गया प्रयास प्रतीत होता है।
देश के नागरिकों के रूप में हम इस चुनाव को निष्पक्ष नहीं मानते और ऐसे जनादेश को वैधता नहीं दे सकते। इन नागरिकों ने विपक्ष से स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि वह नतीजों को औपचारिक रूप से खारिज करे और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होकर आंदोलन करे।
खुले पत्र में यह भी उल्लेख है कि विपक्षी दलों ने नागरिक समाज और जमीनी अभियानों के साथ बेहतर तालमेल नहीं बनाया जबकि लाखों लोग मतदाता अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतर रहे थे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। आज बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ली। इसमें एक ऐसा नाम भी है जो बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बन गया। बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बिहार में अब नयी सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 27 मंत्रियों ने मंत्रिपद की शपथ ली है।
सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नीतीश कुमार के साथ जिन 26 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें से 14 भाजपा से, 9 जदयू से, 2 लोजपा से और एक-एक हम और रालोमो से हैं। एनडीए की इस कैबिनेट में नौ नए चेहरों को शामिल किया गया है।
इनमें लोजपा के संजय कुमार सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने महुआ विधानसभा सीट पर लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव को हराया था। 26 मंत्रियों में से सिर्फ़ एक मुस्लिम सदस्य है। इस कैबिनेट में एक नाम ऐसे भी है जिसे बिना चुनाव लड़े ही शपथ दिलायी गयी है। उस मंत्री का नाम है दीपक प्रकाश।
दीपक प्रकाश को एनडीए में शामिल रालोमो के नेता उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। रालोमो को एनडीए में चुनाव लड़ने के लिए छह सीट मिली थी जिसमें से वह चार सीट जीतने में सफल रहे। उपेंद्र कुशवाहा ने अपने विधायकों पर विश्वास न जताकर बेटे को मंत्री पद दिलवाया है।
दीपक प्रकाश ने बिहार चुनाव नहीं लड़ा है। वह कहीं से विधायक नहीं हैं। उन्हें मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा और विधान परिषद का सदस्य बनना होगा। 2019 में दीपक प्रकाश की शादी हुई थी।
दीपक प्रकाश इकलौते ऐसे मंत्री दिखे जो जींस-शर्ट पहनकर शपथ लेने पहुंचे। आमतौर पर मंत्री पद की शपथ लेने नेता कुर्ता पहनकर पहुंचते हैं। लेकिन उनके परिधान में युवा मंत्रिमंडल की छवि देखने को मिली।
सफेद रंग की शर्ट और नीले रंग की जींस पहनकर पहुंचे दीपक प्रकाश युवाओं के मंत्रिमंडल में शामिल होने का संदेश दे रहे थे। उनके माथे पर तिलक भी लगा हुआ था। इसके बाद वह प्रधानमंत्रा नरेंद्र मोदी से भी मिले।
रालोमो ने बिहार में 6 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें बाजपट्टी, मधुबनी, सासाराम, दिनारा, उजियारपुर और पारु शामिल हैं। इनमें से बाजपट्टी से रामेश्वर कुमार महतो, मधुबनी से माधव आनंद, सासाराम से स्नेहलता और दिनारा से आलोक कुमार सिंह ने जीत हासिल की। सासाराम से रालोमो की प्रत्याशी स्नेहलता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी है।
उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता पहली बार सासाराम ने विधायक चुनी गयी हैं। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सदस्य हैं। वह लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। 2000 में जंदाहा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। अब उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को राजनीति में प्रवेश कराया है। दीपक ने बिना चुनाव लड़े मंत्री पद की शपथ ली है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने आज (गुरुवार, 20 नवंबर) को दसवीं बार शपथ ली। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी।
उनके साथ भाजपा नेता सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय और जनता दल यूनाइटेड के विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार और बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत कुल 26 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। भाजपा कोटे से रामकृपाल यादव को भी मंत्री बनाया गया है। वह दानापुर विधानसभा सीट से राजद के रीतलाल यादव को हराकर विधायक बने हैं।
रामकृपाल 2014 में भाजपा में शामिल होने से पहले लालू यादव की राजद और उससे पहले जनता दल में थे। 1990 और 2000 के दशक में वह लालू के हनुमान कहे जाते रहे हैं। वह लालू के सबसे करीबी लोगों में थे, जो साए की तरह हमेशा उनके साथ रहा करते थे।
लालू-राबड़ी कार्यकाल में और बाद तक राम और श्याम (रामकृपाल यादव और श्याम रजक) की जोड़ी बिहार में चर्चित रही है। रामकृपाल करीब तीन दशकों तक लालू के सबसे भरोसेमंद सिपाही बने रहे लेकिन 2014 में दोनों की राहें जुदा हो गयीं।
दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनावों में जब लालू यादव ने पाटलीपुत्र संसदीय क्षेत्र से अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती को राजद का उम्मीदवार बनाया तो लालू के हनुमान और समाजवादी चेहरा रामकृपाल भाजपा के पाले में चले गये।
उनके इस कदम ने बिहार की राजनीति में एक नयी हलचल पैदा कर दी क्योंकि अब तक वह न सिर्फ लालू के भरोसेमंद सिपाही थे बल्कि उससे भी ज्यादा रणनीतिकार थे जो पार्टी में संगठन से लेकर सरकार तक लालू का संदेशवाहक के रूप में जाने जाते थे।
पटना में रेलवे जंक्शन से सटे गोरिया टोली के रहने वाले और 12 अक्टूबर 1951 को जन्मे रामकृपाल यादव ने अपनी राजनीतिक शुरुआत भी पटना के स्थानीय निकायों से ही की थी। वह पटना के मेयर बने फिर धीरे-धीरे जमीनी नेता बन गये और लालू की टीम का हिस्सा हो गये। राजद के टिकट पर वह तीन बार लोकसभा सांसद चुने गये थे।
2014 में जब उन्होंने राजद से नाता तोड़कर मीसा भारती के खिलाफ भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनाया। इस पर रहते हुए उन्होंने 2014 से 2019 तक ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, आवास और मनरेगा से जुड़े कई कार्यक्रमों पर कई काम किये।
2019 में वह फिर सांसद चुने गये लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में मीसा भारती के हाथों उनकी हार हुई। ऐसे में पार्टी ने उन्हें पटना से सटे दानापुर से विधानसभा का चुनाव लड़वाया और वे जीतकर नयी सरकार में मंत्री बने। बड़ी बात यह भी कि इनके खिलाफ चुनाव प्रचार करने खुद लालू यादव दानापुर गये थे लेकिन जीत रामकृपाल की हुई।
अब वह भाजपा कोटे से यादव मंत्री हैं। नीतीश कुमार की 10वीं सरकार में दो यादव मंत्री बनाये गये हैं। एक जदयू कोटे से और एक भाजपा कोटे से। जदयू से बिजेंद्र यादव फिर मंत्री बनाये गये हैं। वह हर बार नीतीश सरकार में मंत्री रहे हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। पटना में विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक हुई। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नवनिर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहे।
भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता चुने गये सम्राट चौधरी ने बुधवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा। सर्वसम्मति से, फिर से नीतीश कुमार का नारा लगाते हुए एनडीए विधायक दल ने कल के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी कर ली।
एबीएन बगैर किसी संशय के बार-बार यह बात सामने ला रहा था कि अगर एनडीए बहुमत में आता है तो ज्यादा विधायकों की स्थिति में भी भाजपा नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनायेगी।
वही बात आज साबित हुई। कल 10वीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने नीतीश कुमार गांधी मैदान पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शपथ ग्रहण समारोह होगा। सीएम नीतीश कुमार कुछ देर में राजभवन जायेंगे। वहां राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse