टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते 8 वर्ष में जांच एजेंसियों को राजनीतिक प्रतिशोध का एक उपकरण बना दिया है। 8 साल पूर्व देशवासियों ने इनकी इंटेग्रिटी व कार्यप्रणाली पर इस तरह के सवाल कभी नहीं उठाए थे। अभी हमारा सीबीआइ से विरोध इंस्टीच्यूशन से नहीं बल्कि इनकी राजनीति से प्रेरित कार्यप्रणाली से है। तेजस्वी यादव ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा कि जांच एजेंसियां केवल व केवल विपक्ष शासित राज्य और वहां के नेताओं पर ‘छापे मारकर’ अपने राजनीतिक मालिकों को प्रसन्न करने की कोशिश करती हैं। भाजपा के लगभग 300 से अधिक सांसद और 1000 से अधिक विधायकों पर इन एजेंसियों की आज तक कोई रेड नहीं पड़ी। इसलिए इनके राजनीतिक चेहरे से हमारा विरोध है। बीते 8 वर्षों में विपक्ष के कई नेताओं पर इसी आइटी/ ईडी/ सीबीआइ के माध्यम से छापे पड़े। ढेर सारे आरोप तय हुए, गोदी मीडिया के माध्यम से उनका चरित्रहनन हुआ लेकिन जैसे ही उन कथित भ्रष्ट विपक्षी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की वो पवित्रता का प्रमाण पत्र पा गए। कोई मंत्री बन गया तो कोई मुख्यमंत्री बन गया। वहीं डिप्टी सीएम ने कहा कि एजेन्सी के अधिकारियों से हमारा न कभी विरोध था और ना है। हम जानते हैं कि ये आदेश का अनुपालन कर रहे हैं। लेकिन उइक का इस्तेमाल राजनीतिक इंस्ट्रूमेंट की तरह जो हो रहा हैं उसका हम विरोध करते रहेंगे। हमारे यहां संविधान को मानने वाली न्यायप्रिय समाजवादी सरकार है, जहां हर कोई सुरक्षित है।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद आज कैबिनेट की पहली बैठक हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट मीटिंग में कुल 8 एजेंडों पर मुहर लगी। इस बैठक में सबसे अहम फैसला बालू घाटों की निलामी और शिक्षकों को लेकर लिया गया। नीतीश सरकार ने राज्य में बालू की बंदोबस्ती दर को दोगुना कर दिया है, जिससे बालू की कीमत बढ़नी तय मानी जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने शिक्षकों को बड़ी खुशखबरी दी है। शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए कैबिनेट में 9400 करोड़ की राशि की स्वीकृति दी गई है। इसमें बकाया वेतन भुगतान के लिए राशि भी शामिल है। इससे राज्य के 2.64 लाख शिक्षकों को फायदा होगा। इसके अलावा बिहार के अधीन अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रधानाध्यापक के पदों पर नियुक्ति, प्रोन्नति एवं अन्य सेवा शर्तों को विनियमित करने हेतु बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में शिक्षक (नियुक्ति, प्रोन्नति, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवा शर्त) नियमावली 2022 के गठन की स्वीकृति दी गई है। वहीं राज्य स्कीम मद से वित्तीय वर्ष 2022-23 में सब मिशन ऑन Agriculture Extension के कार्यान्वयन के लिए संविदा आधारित नियोजित कर्मियों के नियत मानदेय एवं ईपीएफ की राशि, बामेती परिसर का प्रबंधन, सुरक्षा एवं प्रसार कार्यक्रम हेतु कुल तैंतीस करोड़ बासठ लाख छियानवे हजार छः सौ अड़सठ रुपए की लागत पर योजना कार्यान्वयन तथा निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गयी।
टीम एबीएन, पटना/रांची। भाजपा के राज्यसभा सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के महागठबंधन की सरकार गिरने वाले बयान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटवार किया है। रविवार को गोपालगंज पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के इस संबंध में सवाल पूछने पर कहा कि अभी खाली हैं और उन्हें फिर कोई जगह मिल जाए इसलिए वसुशील मोदी ऐसा बोल रहे हैं। सीएम नीतीश ने कहा कि 2020 में जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी थी तो उन्हें कुछ नहीं बनाया गया, इसकी उन्हें बड़ी तकलीफ थी। अब बेचारे कुछ बोल रहे हैं, उन्हें रोज-रोज बोलना चाहिए, रोज बोलेंगे तो केंद्र वाले लोग कहीं फिर खुश हो जाएं तो बड़ी खुशी की बात होगी, इसलिए सुशील मोदी रोज बोलते रहें। मुख्यमंत्री यहां राज्य के पूर्व सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह के श्राद्धकर्म में शामिल होने पहुंचे थे। सदर प्रखंड के ख्वाजेपुर में आयोजित श्राद्ध कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सुभाष सिंह के निधन का व्यक्तिगत तौर पर मुझे दुख है। सुभाष सिंह से पुराना और व्यक्तिगत तौर पर गहरा संबंध था। कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गये। मौके पर उनके साथ राज्य के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी, मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार, जेडीयू के स्थानीय सांसद आलोक कुमार सुमन, जेडीयू के प्रवक्ता मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष आदित्य शंकर शाही आदि यहां मौजूद रहे।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार के लोगों को भारतीय रेलवे बड़ा तोहफा देने जा रही है। इस साल के आखिर तक देश के 27 मार्गों पर 18 वंदे मातरम चलाने की कवायद जारी है। पहले चरण में जिन रूटों का चयन हुआ है, उनमें पटना-वाराणसी-दिल्ली शामिल है। वंदे मातरम एक्सप्रेस के यात्री केवल चार से 5 घंटे में पटना से देश की राजधानी दिल्ली पहुंच जाएंगे। फिलहाल दिल्ली से पटना के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस को पटना से दिल्ली पहुंचने में 12 घंटे का वक्त लगता है। रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि दिल्ली पटना रेल मार्ग पर यात्रियों का काफी लोड है। फिलहाल इस रूट पर संपूर्ण क्रांति, राजधानी और तेजस जैसी ट्रेनों का संचालन हो रहा है। बेहतर सुविधा चाहने वाले पैसेंजर्स के लिए यह ट्रेन शानदार विकल्प होगा। इस ट्रेन में यात्रियों को कई तरह की खास सुविधा मिलेगी, लोगों का समय कम लगेगा। अधिकारियों ने किराए को लेकर कोई भी बात कहने से इनकार किया है। बता दें कि फिलहाल देश के कुछ चुनिंदा रुटों पर वंदे भारत ट्रेन चल रही है। पहली वंदे भारत ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच चली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे भारत एक्सप्रेस का शुभारंभ 15 फरवरी 2019 को किया था। ट्रेन का कमर्शियल परिचालन 17 फरवरी 2019 से शुरू हुआ। फिलहाल दिल्ली से जम्मू के बीच यह ट्रेन चल रही है। अंबाला रेल रूट पर ट्रायल चल रहा है। मुंबई और अहमदाबाद के बीच रेलवे ने यह ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक ट्रेन बुलेट ट्रेन को भी पीछे छोड़ देती है। महज कुछ सेकंड में ही ट्रेन 0 से 100 किलोमीटर की स्पीड पकड़ लेती है। यह ट्रेन बेहद ही अपग्रेडेड है। इसकी विशेषताओं के वजह से ट्रेन की स्पीड दूसरों से काफी तेज है। फिलहाल वंदे भारत ट्रेन की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे की है। चरणबद्ध ढंग से वर्ष 2025 तक अपडेटेड एडिशन 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। वंदे मातरम पूरी तरह से एसी ट्रेन है। अपडेटेड वर्जन में बोगियों को बैक्टीरिया की एयर कंडीशनिंग सिस्टम से लैस किया जाना है। इसमें यात्रियों के बैठने की सुविधा का विशेष ख्याल रखा जाएगा। हर बोगी में चार इमरजेंसी खिड़की होंगे, जिससे किसी भी इमरजेंसी स्थिति में पैसेंजर्स को जल्द से जल्द निकाला जा सके। ट्रेन में बिजली गुल होने पर लाइटिंग और वेंटिलेशन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। लगभग 3 घंटे का वेंटिलेशन मौजूद होगा। तमाम बोगियों में बड़ी-बड़ी लाइटें होंगी।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार में सीबीआई का छापा पूरे दिन सुर्खियों में रहा। एक साथ कई आरजेडी नेताओं के ठिकानों पर टीम ने दबिश दी। राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद केन्द्र सरकार बदले की भावना में कार्रवाई कर रही है। लेकिन सीबीआई के विश्वस सूत्रों की माने तो इन नेताओं के घर पर आकूत संपत्ति मिली है। बेनामी कागजात और भारी मात्रा में सोने के आभूषण बरामद किए गए। फिलहाल इसको लेकर सीबीआई की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी। राजद नेताओं के ठिकानों पर की गई छापेमारी में 200 से अधिक जमीन के डीड बरामद हुआ है। इसके अलावा 20 किलो से भी ज्यादा सोने की ज्वेलरी बरामद किए गए। यही नहीं राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह के ठिकानों से दिल्ली के गुड़गांव स्थित बन रहे मॉल का पेपर भी बरामद हुआ है। छापेमारी में भारी संख्या में नगद भी मिला है। इधर, छापे को लेकर बुधवार को दिन भर बिहार में गहमागहमी का माहौल बना रहा। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम पटना, कटिहार और मधुबनी में कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सीबीआई ने जिन आरजेडी नेताओं पर शिकंजा कसा है, उसमें राजद एमएलसी सुनील सिंह, पूर्व आरजेडी एमएलसी सुबोध राय, राज्यसभा सांसद अशफाक करीम और फैयाज अहमद शामिल हैं। इसके साथ ही सीबीआई ने गुरुग्राम के सेक्टर 71 में स्थित अर्बन क्यूबस मॉल में भी छापेमारी चल रही है। जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में सीबीआई ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि आगे भी यह कार्रवाई चलेगी कई और इसकी जद में राजद के कई नेता आ सकते हैं। राजद नेता सुनील कुमार सिंह के ठिकाने पर भी सीबीआई की छापेमारी हुई। सुनील कुमार सिंह पार्टी के कोषाध्यक्ष भी हैं। सुनील कुमार सिंह लालू परिवार के करीबी भी माने जाते हैं। सीबीआई ने यह रेड जेडी विमेंस कालेज के पास स्थित एक अपार्टमेंट में की है, जहां पर सुनील सिंह रहते हैं। सीबीआई की कार्रवाई की खबर सुनते ही सुनील कुमार के सैकड़ों समर्थक उनके घर के बाहर पहुंच गए हैं और सीबीआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर करने लगे।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार की राजधानी पटना से है जहां राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह के आवास पर CBI की छापेमारी हुई है। बुधवार की सुबह-सुबह ही CBI की एक टीम पटना में बिस्कोमान के अध्यक्ष और हाल में ही राजद के एमएलसी बने सुनील सिंह के आवास पर छापेमारी के लिए पहुंची है। सुनील सिंह लालू परिवार के के काफी करीबी माने जाते हैं और राबड़ी देवी के मुंह बोले भाई भी कहे जाते हैं। पटना में उनके आवास पर छापेमारी के लिए सीआरपीएफ की टुकड़ी को भी तैनात किया गया है। इस मामले में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार में एक बार फिर जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर बैठ गए हैं। इसके कारण भागलपुर और बेतिया के सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवा ठप्प हो गई है, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं डॉक्टरों के द्वारा 1 जनवरी 2020 से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की जा रही है। पटना के पीएमसीएच में एमबीबीएस के छात्रों ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर ओपीडी में बहाल सेवाओं का बहिष्कार किया है। जूनियर डॉक्टरों ने अधीक्षक कार्यालय और पीएमसीएच के प्रिंसिपल कार्यालय का घेराव किया। वे स्टाइपेंड बढ़ने की मांग कर रहे हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों से स्टाइपेंड बढ़ने की मांग कर रहे है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। बिहार को छोड़कर अन्य राज्यों में वेतन की राशि अच्छी है। जूनियर डॉक्टरों ने पीएमसीएच परिसर में पैदल मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण जहां एक तरफ पीएमसीएच में ओपीडी सेवा ठप्प हो गई है, वहीं दूसरी तरफ मायागंज अस्पताल में जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त बेतिया के सरकारी कॉलेज में भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर बैठे हैं।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार की राजधानी पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारकेड की गाड़ियों पर पथराव की घटना सामने आई है। राहत भरी बात ये है कि जिस वक्त ये हमला हुआ, नीतीश कुमार कारकेड में मौजूद नहीं थे। पथराव की वजह से सीएम के कारकेड की 3-4 गाड़ियों के शीशे टूट गये। जानकारी के मुताबिक ये घटना गौरीचक थाना के सोहगी गांव के पास की है। सोहगी गांव के पास ही लोगों ने सीएम के कारकेड पर पथराव किया। इस कारकेड में सिर्फ सुरक्षाकर्मी ही मौजूद थे। दरअसल, सोमवार को नीतीश कुमार गया जाने वाले हैं। वह गया में सूखे की स्थिति पर बैठक के साथ-साथ वहां बन रहे रबर डैम का निरीक्षण करेंगे। सीएम नीतीश कुमार हेलीकॉप्टर से गया जायेंगे लेकिन उनके हेलीपैड से दूसरे स्थानों पर जाने के लिए कारकेड को पटना से भेजा जा रहा था। पटना से गया के रास्ते में गौरीचक थाना क्षेत्र के सोहगी गांव के लोगों ने रोड जाम कर रखा था। दरअसल, सोहगी गांव का एक युवक 2-3 दिनों से लापता था। आज उसका शव बरामद हुआ है। युवक की हत्या के बाद नाराज लोग पटना-गया मेन रोड पर सोहगी मोड़ के पास शव रख कर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। लोगों के प्रदर्शन के दौरान ही कारकेड की गाड़ियां उस रास्ते से गुजरने लगी। गुस्साये ग्रामीणों ने काफिले पर पथराव शुरू दिया। इससे कई गाड़ियों के शीशे टूट गये। पथराव से कुछ लोगों को चोट लगने की भी खबर सामने आई है।
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