एबीएन डेस्क। नोरा फतेही ने अभिषेक बच्चन के साथ सुपरहिट गाना कजरा रे पर डांस किया है। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय पर सुपरहिट गाना कजरा रे फिल्माया गया था।
बंटी और बबली का यह गाना आज भी पार्टियों और शादियों का हिस्सा रहता है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें अभिषेक बच्चन कजरा रे गाने पर नोरा फतेही के साथ डांस करते दिख रहे हैं। इस दौरान दोनों ने ब्लैक आउटफिट में ट्विनिंग की है।
नोरा ने ब्लैक बैकलेस ड्रेस पहनी हुई है, जिसमें वह काफी ग्लैमरस लग रही हैं। वहीं अभिषेक बच्चन भी ऑल ब्लैक आउटफिट में नजर आ रहे हैं। नोरा फतेही ने यह डांस वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में शेयर किया है। इस वीडियो में नोरा और अभिषेक बच्चन कई अन्य लोगों के साथ पार्टी में झूमते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अभिषेक बच्चन और नोरा फतेही निर्देशक रेमो डिसूजा के एक डांस प्रोजेक्ट में साथ नजर आयेंगे।
एबीएन डेस्क। चंकी पांडे के भतीजे और अनन्या पांडे के चचेरे भाई अहान पांडे जल्द ही यशराज फिल्मस की फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर सकते हैं। चर्चा है कि अहान पांडे जल्द ही अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाले हैं। अहान पिछले तीन सालों से यश राज फिल्म्स के हेड आदित्य चोपड़ा के मार्गदर्शन में खुद को ग्रूम कर रहे हैं।
आदित्य चोपड़ा, अहान पर फोकस करना चाहते हैं। क्योंकि उनका मानना है कि अहान आने वाले दिनों में बॉलीवुड पर राज कर सकता है। आदित्य चोपड़ा, अहान को तैयार कर रहे हैं और उनकी फिल्म अगले साल की शुरुआत में फ्लोर पर जायेगी।
एबीएन डेस्क। अमिताभ बच्चन हर रविवार को अपने फैंस से नंगे पैर मिलते हैं। अमिताभ बच्चन 40 वर्षों से हर रविवार को अपने घर जलसा के बाहर फैंस से मुलाकात करते हैं। फैंस से मुलाकात के दौरान अमिताभ बच्चन को अक्सर नंगे पैर देखा गया है। अमिताभ ने बताया है कि आखिर क्यों को फैंस से नंगे पांव मिलने आते हैं।
अमिताभ बच्चन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने अपनी एक फोटो साझा की है, जिसमें वह बाहर जुटे प्रशंसकों का अभिवादन करते नजर आ रहे हैं।
अमिताभ बच्चन ने लिखा है, मुझसे हमेशा यह पूछा जाता है कि नंगे पैर प्रशंसकों से मिलने कौन जाता है? मैं उनसे कहता हूं- मैं जाता हूं। आप मंदिर नंगे पैर जाते हैं। रविवार को आने वाले मेरे शुभ चिंतक मेरे लिए मंदिर के समान हैं! आपको इससे कोई दिक्कत है क्या!
एबीएन डेस्क। सुष्मिता सेन ने अपनी आने वाली वेबसीरीज आर्या 3 की शूटिंग पूरी कर ली है। सुष्मिता सेन ने आर्या 3 की शूटिंग पूरी होने के बाद सेट से एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में सुष्मिता कुर्ता-पजामा और शॉल लपेटे नजर आ रही हैं। वह पहले सिकंदर खेर को गले लगाती हैं और फिर निर्देशक राम माधवानी के साथ डांस करती हैं।
वीडियो शेयर कर सुष्मिता सेन लिखा- आर्या 3 की शूटिंग पूरी हो चुकी है। बहुत ही बेहतरीन कास्ट और क्रू के साथ काम किया। थैंक यू आर्या फैमिली। दौलत बहुत प्यारा सा हग। आई लव यू।
गौरतलब है कि सुष्मिता सेन ने जनवरी से ही सीरीज आर्या 3 की शूटिंग शुरू की थी, लेकिन कुछ समय बाद ही सेट पर उन्हें हार्ट अटैक आ गया था। इसके चलते कुछ दिनों के लिए आर्या 3 की शूटिंग रुक गयी थी।
एबीएन डेस्क। आकृति एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित और हिट मशीन खेसारीलाल यादव द्वारा अभिनीत फिल्म मेरे नैना तेरे नैना 2 जून को रिलीज हो रही है। लाल विजय शाहदेव द्वारा निर्देशित यह फिल्म अवधि भाषा में बनी है, जिसे हिंदी के दर्शक भी आसानी से समझ पायेंगे।
खेसारीलाल यादव के साथ इस फिल्म में खुशबू शर्मा, कामाक्षी ठाकुर, रीतू शर्मा, नीना चीमा, निशिकांत दीक्षित और चुनु मेहरा के अलावा फिल्म में मेहमान कलाकार के रूप में रवि भाटिया भी एक अहम रोल में हैं, जिन्हें दर्शक चर्चित टी वी सीरीयल योद्धा अकबर में सलीम की भूमिका में देख चुके हैं। फिल्म के निमार्ता राकेश डांग और दीपक सिम्हल हैं।
फिल्म की कहानी को लेकर निर्देशक लाल विजय ने बताया कि यह 30 वर्षीय एक अनाथ लड़की, वासु और एक अनाथ लड़का माधव की अनोखी प्रेम कहानी की रहस्यमयी विषय पर आधारित फिल्म है। यह रूटीन फिल्मों से एकदम अलग है। इस रहस्यमयी कहानी को पूरी तरह से बता नहीं सकते और इसको जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हाल में ही इसका ट्रेलर रिलीज किया गया था और दर्शकों के साथ साथ फिल्म समीक्षकों ने इसे बहुत सराहा है। फिल्म के दो गाने फिल्म रिलीज के पहले ही दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है।
वहीं, उन्होंने अवधि भाषा में फिल्म बनाने की बात को लेकर कहा कि उनका लक्ष्य भारत के सभी मुख्य क्षेत्रीय भाषाओं पर फिल्म निर्माण कर एक नया कीर्तिमान बनाने का है। इस पर पिछले कई सालों से प्रयास जारी है। मालूम हो कि हिंदी फिल्मों के निर्माण के साथ लाल विजय ने क्षेत्रिय भाषाओं पर फिल्म बनाने को लेकर बहुत गम्भीर हैं।
पिछले दो दशक से ज्यादा समय से मुंबई में काम कर रहे लाल विजय ने बताया की क्षेत्रीय भाषाओं में उन्होंने सबसे पहले अपने प्रदेश झारखंड के नागपुरी भाषा पर फूलमनिया नामक फिल्म बनाया है, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा है। यह फिल्म झारखंड की ज्वलंत मुद्दे डायन प्रथा पर आधारित थी। और अब अवधि में फिल्म मेरे नैना तेरे नैना लेकर आये हैं।
वहीं फिल्म को लेकर खेसारीलाल यादव ने बताया कि इस फिल्म की कहानी और चरित्र को पहले ही बताना सही नहीं होगा। बस इतना ही कहूंगा कि पहली बार मैंने इतना संवेदनशील और कठिन रोल निभाया है। इस चरित्र को जीना मेरे लिए बहुत बडी चुनौती थी जिसे सफल बनाने में मैंने गम्भीर कोशिश की है। यह फिल्म सच में आम फिल्मों से अलग है।
फिल्म की नायिका खुशबू शर्मा ने बताया कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा चुनौती भरा चरित्र जीने का मौका मिलेगा। जब निर्देशक लाल विजय ने मुझे इस रोल के लिए चुना तो मुझे खुशी से ज्यादा आश्चर्य हुआ कि मैं यह रोल कर पाऊँगी या नहीं। निर्देशक लाल विजय ने बड़ी आसानी से फिल्म कब पूरी कर ली, मुझे पता भी नहीं चला।
फिल्म देखने के बाद मुझे लगा कि जिस मेहनत से मैंने काम किया वो सबको जरूर अच्छा लगेगा। फिल्म की दूसरी नायिका कामाक्षी ठाकुर ने बताया कि मेरा रोल छोटा जरूर है, पर मेरी एंट्री कहानी का टर्निंग पोईंट है। मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की है और आशा है सबको मेरा रोल अच्छा लगेगा।
विशेष अतिथि कलाकार की भूमिका निभाने वाले रवि भाटिया ने बताया कि फिल्म का निर्देशन लाल विजय कर रहे हों तो मैं कोई रोल मना नहीं कर सकता चाहे वो किसी भी भाषा में हो। इस फिल्म में मेरी भूमिका छोटी जरूर है पर एक छाप छोड़कर जाने वाला है। फिल्म के छायाकार अजित सिंह हैं और संगीत सूरज शर्मा का है।
एबीएन डेस्क। आमिर खान अभी फिल्मों में काम नहीं करना चाहते हैं। आमिर खान ने अपनी फिल्म लाल सिंह चड्ढा की असफलता के बाद से फिल्मों से ब्रेक ले लिया है। हाल ही में आमिर फिल्म कैरी आॅन जट्टा 3 की स्क्रीनिंग पर पहुंचे।
इस दौरान जब आमिर से फिल्मों में वापसी करने को लेकर सवाल किया गया तब आमिर ने बताया कि फिल्हाल वह किसी भी फिल्म के लिए तैयार नहीं हैं। आमिर खान ने कहा कि मैंने अभी तक कोई फिल्म करने का फैसला नहीं किया है।
मैं अभी अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहता हूं। मैं इसके बारे में अच्छा महसूस कर रहा हूं क्योंकि मैं अभी यही करना चाहता हूं। जब मैं भावनात्मक रूप से तैयार हो जाऊंगा, तो मैं निश्चित रूप से फिल्म करूंगा।
एबीएन डेस्क। रणबीर कपूर फिल्म चैंपियन्स में काम करते नजर आ सकते हैं। आमिर खान फिल्म चैंपियंस में काम करने वाले थे, लेकिन अब बतौर एक्टर वह इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं और बतौर निर्माता वह इस फिल्म के लिए अच्छे एक्टर की तलाश कर रहे हैं।
आमिर ने चैपियंस के लिए लीड रोल निभाने के लिए सलमान खान को अप्रोच किया था लेकिन बात नहीं बनी। आमिर की यह फिल्म वर्ष 2018 में प्रदर्शित कैंपियन्स का आफिशियल रीमेक है, जो कि एक कॉमेडी ड्रामा है। कहा जा रहा है कि सलमान के प्रोजेक्ट से बाहर होने के बाद अब आमिर ने रणबीर कपूर से कॉन्टैक्ट किया है।
कहा जा रहा है कि रणबीर को भी फिल्म का नैरेशन सुनने के बाद पसंद आया है, यदि सब कुछ ठीक रहता है तो रणबीर चैंपियन्स में लीड रोल निभाएंगे। इस फिल्म को आरएस प्रसन्ना निर्देशित करेंगे।
अजय कुमार शर्मा
एबीएन डेस्क। साल 1954 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देने शुरू किए थे। और इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रपति स्वर्ण कमल पुरस्कार मराठी फिल्म श्यामची आई को दिया गया था। मराठी पत्रकार/ लेखक साने गुरुजी की आत्मकथात्मक कहानी पर बनी इस फिल्म का निर्देशन पीके अत्रे ने किया था और निर्माण अभिनेत्री वनवाला ने।
उन्होंने इस फिल्म में स्वयं मां का यादगार अभिनय भी किया था। चालीस और पचास के दशक की मशहूर अभिनेत्री वनमाला (मूल नाम सुशीला पंवार ) की यह अंतिम फिल्म थी। अपने समय की सबसे सुशिक्षित, सुंदर और शालीन इस अभिनेत्री ने इसके बाद अपने पिता के कहने पर फिल्मों से संन्यास लेकर अध्यात्म की शरण ली थी।
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के नजदीकी कर्नल रायबहादुर बापूराव आनंदराव पंवार के घर 23 मई, 2015 को उज्जैन में जन्मी वनमाला का बचपन ग्वालियर में राजकुमारों के बीच गुजरा। उन्हें राजघराने के अनुरूप ही पढ़ाने और लिखाने के साथ ही घुड़सवारी, तीरंदाजी, तैराकी, पोलो और शिकार आदि का भी प्रशिक्षण दिया गया। वे कथक और कथकली और मणिपुरी नृत्य में भी पारंगत थी।
आगरा विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद बाद वह पढ़ाई के लिए बंबई गई। 1935 में अपनी मां की मृत्यु के बाद वे अपनी मौसी के पास पूना चली गईं जो वहां आचार्य अत्रे द्वारा स्थापित स्कूल की प्राचार्य थीं। वे इसी स्कूल में पढ़ाने लगीं। इस स्कूल में मराठी और हिंदी फिल्मों की नामी-गिरामी हस्तियों का आना जाना लगा रहता था। सब उनकी सुंदरता और शालीनता से प्रभावित थे और उन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहते थे लेकिन तब फिल्मों में काम करना बेहद घटिया समझा जाता था और उनका परिवार तो वैसे भी राजपरिवार का नजदीकी था। पर सबके समझाने पर आखिरकार 1936 में उन्होंने नवयुग चित्रपट द्वारा बनाई जा रही लपांडव (आंख-मिचौनी) फिल्म स्वीकार की।
इस फिल्म को देखते ही सोहराब मोदी ने तुरंत अपनी फिल्म सिकंदर की नायिका रुखसाना का रोल उन्हें दे दिया। इसके बाद तो सफल फिल्मों का सिलसिला चल पड़ा। चित्र मंदिर की वसंत सेना (शाहू मोडक) वी शांताराम की पर्वत पे अपना डेरा, इजरा मीर की बीते दिन ओर वाडिया ब्रदर्स की शरबती आंखें वनमाला के करिअर की अन्य उल्लेखनीय फिल्में हैं।
उन्हें उस दौर के तमाम नामी नायकों के साथ काम करने का मौका मिला। पहाड़ी सान्याल (कादंबरी), सुरेंद्र (परिंदे), और मोतीलाल ने फिल्म मुस्कराहट में उनके साथ काम किया। अपनी अंतिम फिल्म श्यामची आई जो कि नायिका प्रधान थी में उन्होंने एक ऐसी मां का रोल निभाया था, जिसका पति एक छोटा बेटा छोड़कर मर जाता है। वह सिलाई कढ़ाई जैसे घरेलू काम कर संघर्ष के साथ बेटे को शिक्षित कर एक बड़ा आदमी बनाने में सफल होती है।
पचास के दशक की इस आदर्शवादी फिल्म ने समाज को बहुत प्रेरित किया था और इसकी व्यापक चर्चा हुई थी। इस फिल्म के बाद वनमाला ने फिल्मों से ही नहीं बल्कि अपने जीवन में भी संन्यास ले लिया। बंबई से लौटकर वनमाला पुन: ग्वालियर अपने पिता के घर आकर रहने लगीं। उनके परिवार ने उन्हें माफ कर दिया। अध्यात्म की शरण में जाकर उन्होंने समाज सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया।
वृन्दावन में श्री स्वामी हरिदास कला संस्थान की नींव रखी। ब्रज कला केंद्र मथुरा की अध्यक्ष रहीं। अनेक ट्रस्टों की ट्रस्टी रहते हुए शैक्षणिक तथा समाज सुधार के अनेक कार्य किए। अपने संन्यासी जीवन में उनका नया नाम सुशीला बहन था। उम्र के आखिरी पड़ाव (92) तक समाज सेवा में धोखे खाने के बाद भी वे लगातार सक्रिय रहीं। एक समय सफलता और लोकप्रियता के चरम पर रही इस अभिनेत्री ने अपना अंतिम समय बेहद सादगी से बिताया। फिल्मी दुनिया के लिए अजूबा बनी रही यह अभिनेत्री 29 मई, 2007 को यह दुनिया छोड़कर चली गईं।
चलते-चलते
वनमाला के पिता उनके फिल्मों में जाने से बेहद नाराज थे और पूरे परिवार ने उनसे अपना नाता रिश्ता खत्म कर लिया था। कहा जाता है कि जब वे उनकी पहली फिल्म देखने ग्वालियर के रीगल सिनेमा घर में गए और पर्दे पर वनमाला दिखाई दीं तो उन्होंने गुस्से में अपने रिवाल्वर से पर्दे पर गोलियां चला दीं। पर्दा फट गया और हॉल में भगदड़ मच गयी। इतना ही नहीं उन्होंने ग्वालियर में उनकी लगने वाली सभी फिल्मों को बैन करवा दिया।
जब वनमाला ने परिवार में वापस आना चाहा तो उन्हें इस शर्त पर माफी मिली कि वे कभी फिल्मों में काम नहीं करेंगी। वनमाला ने यह शर्त तो मानी ही मानी बल्कि प्रायश्चित स्वरूप अपने पिता को चारधाम की यात्रा भी करायी। (लेखक, वरिष्ठ कला-साहित्य समीक्षक हैं।)
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