एबीएन, डेस्क। बॉलीवुड के जानेमाने फिल्मकार अनिल शर्मा, नाना पाटेकर को लेकर फिल्म जर्नी बनाने जा रहे हैं। गदर 2 की शानदार सफलता के बाद अनिल शर्मा ने अगली फिल्म का एलान कर दिया है। अनिल शर्मा ने ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की।
इस तस्वीर में नाना पाटेकर नजर आ रहे हैं। तस्वीर को शेयर करते हुए अनिल शर्मा ने लिखा कि गदर 2 के बाद काशी विश्वनाथ से नई जर्नी की शुरूआत हो रही है। फिल्म का नाम जर्नी है। अनिल शर्मा ने लिखा कि एक तीर्थ स्थान से घर तक की जर्नी है। तस्वीर देखकर यह अंदाजा भी लगाया जा रहा है कि फिल्म जर्नी में काशी विश्वनाथ की कुछ अहमियत हो सकती है।
एबीएन डेस्क। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार कमल हसन फिल्मकार मणिरत्नम की फिल्म ठग लाइफ में काम करते नजर आयेंगे। कमल हासन और मणि रत्नम 35 साल बाद साथ काम करने जा रहे हैं। इस फिल्म का टाइटल ठग लाइफ है।मेकर्स ने इसका एक अनाउंसमेंट वीडियो शेयर किया।
इस वीडियो में कमल एक ठग के गेट अप में जबरदस्त एक्शन करते हुए नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में कमल हसन के अलावा तृषा कृष्णन, दुलकर सलमान और जयम रवि जैसे कलाकार नजर आयेंगे। यह फिल्म अगले साल रिलीज होगी।
इस वीडियो में कमल कहते हैं, ऐसा लगता है जैसे इन्होंने मेरे जन्म के वक्त ही मेरे माथे पर लिख दिया था कि शक्तिवेल नायकर क्रिमिनल है, गुंडा है, यकूजा है। इस फिल्म को कमल हसन ने मणि रत्नम के साथ मिलकर प्रोड्यूस भी किया है। म्यूजिक एआर रहमान का होगा।
एबीएन डेस्क। अजय देवगन अपनी सुपरहिट फिल्म दीवानगी के सीक्वल में काम करते नजर आ सकते हैं। अनीस बज्मी के निर्देशन में बनी वर्ष 2002 में प्रदर्शित थ्रिलर फिल्म दीवानगी में अजय देवगन ने मुख्य भूमिका निभायी थी।
कहा जा रहा है कि अनीस बज्मी एक ऐसी स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं जो दीवानगी की कहानी को आगे ले जाये। फिल्म दीवानगी में अजय के किरदार तरंग के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक हत्या के लिए दोषी ठहराये जाने से बचने के लिए स्प्लिट पर्सनैलिटी डिसआर्डर होने का नाटक करता है। इस फिल्म में अक्षय खन्ना ने उनके वकील की भूमिका निभायी थी।
चर्चा है कि अजय देवगन ने ही अनीस बज्मी को दीवानगी फि दूसरी किस्त की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था।
एबीएन डेस्क। शाहरुख खान की बर्थडे पार्टी की काफी धूम रही। इस पार्टी में बॉलीवुड सेलिब्रीटीज ने अपनी अदाएं दिखाईं, लेकिन इस पार्टी में सारी लाइम लाइट लूट कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी ने अपने रॉकिंग अंदाज से। पार्टी की इनसाइड फोटोज काफई वायरल हो रही हैं।
शाहरुख खान के 58वें जन्मदिन पर खूब धमाका हुआ है।
फैंस से लेकर बॉलीवुड के सितारों ने एक्टर का बर्थडे शानदार तरीके से सेलिब्रेट किया है। एक ओर जहां शाहरुख ने फैंस संग बर्थडे मनाया। वहीं दूसरी ओर शाहरुख ने सेलिब्रिटीज के साथ भी अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया। शाहरुख के बर्थडे पर एक ग्रैंड पार्टी का आयोजन किया गया था।
इस पार्टी में बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर्स से लेकर क्रिकेट जगत के सितारे पहुंचे थे। इस पार्टी की इनसाइड तस्वीरें लीक हो गई हैं और अंदर किस-किस का जलवा रहा ये इन तस्वीरों में देखने को मिल रहा है।
इन तस्वीरों को देखकर साफ जाहिर हो रहा है कि सबसे ज्यादा डैशिंग और रॉकिंग अंदाज में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्ल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पहुंचे थे। महेंद्र सिंह धोनी का एकदम जुदा लुक सामने आया है। इतने ग्लैमरस अंदाज में धोनी को पहली बार ही देखा गया है। उनका स्टाइल इस बार सादगी से भरा नहीं, बल्कि फुल ऑफ स्टाइल है।
महेंद्र सिंह धोनी ने पार्टी में ब्लैक सूट कैरी किया था, जो उनके नये हेयरस्टाइल को कॉम्प्लीमेंट कर रहा है। एक्टर के अलावा पार्टी में कई बॉलीवुड सेलेब्स की भी धूम रही। दीपिका पादुको, रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, करीना कपूर, करिश्मा कपूर जैसे कई सेलेब्स पार्टी में पहुंचे थे।
एबीएन डेस्क। महानायक अमिताभ बच्चन का कहना है कि उनके फिल्मों में आने के पीछे उनके छोटे भाई अजिताभ बच्चन का हाथ है। अमिताभ बच्चन ने अपने सिने करियर की शुरुआत वर्ष 1969 में प्रदर्शित फिल्म सात हिंदुस्तानी से की थी।
अमिताभ बच्चन को फिल्म इंडस्ट्री में आये हुये पांच दशक हो गये हैं। अमिताभ इन दिनों रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति सीजन 15 होस्ट कर रहे हैं। शो के दौरान अमिताभ ने अपने फिल्मों में आने की वजह बतायी।
अमिताभ ने बताया- मेरा एक छोटा भाई भी है। हमारी उम्र में पांच-छह साल का अंतर है। मैं हमेशा उसकी सुरक्षा के बारे में सोचता था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह फिल्मों में मेरे प्रवेश का कारण है।
मेरे भाई ने ही सबसे पहले मुझसे कहा था कि तुम्हें फिल्मों में काम करना चाहिए। मैं कोलकाता में काम कर रहा था। उन्होंने बेहतरीन पोज के साथ मेरी तस्वीरें क्लिक की और भेज दीं। हालांकि, मुझे अस्वीकार कर दिया गया। लेकिन, उन्होंने ही वह विचार मेरे दिमाग में डाला, और मैंने यह करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
एबीएन डेस्क (हजारीबाग)। झारखंड में बनी फिल्म जगतगुरु श्रीरामकृष्ण बहुत जल्द सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को देखने से आपको मंनोरंजन मिल सकता है। लेकिन मनोरंजन के साथ- साथ आपको अच्छे विचार, अपने जीवन की समस्याओं का समाधान, जीवन जीने का नजरिया यदि किसी फिल्म में मिल सकता है तो वह फिल्म है जगतगुरू श्री रामकृष्ण।
इस फिल्म में आपके बच्चों को जीवन जीने की सही दिशा देने वाली बात हैं। स्वामी विवेकानंद किस प्रकार नरेन्द्र से विवेकानंद बनते हैं और किस प्रकार अपने जीवन को महान बनाते हैं, उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस उनको किस प्रकार से शिक्षा देते हैं, यह सब भी आप देखेंगे।
भजन सम्राट अनूप जलोटा, सुरेश वाडकर, महालक्ष्मी अय्यर ने अपनी मधुर गीत गाकर इस फिल्म को मनोरंजक और आकर्षक बना दिया है। हजारीबाग व झारखंड के कलाकारों ने बहुत ही सुंदर अभिनय द्वारा इस फिल्म को जीवंत कर दिया है।
जगतगुरू श्री रामकृष्ण परमहंस के जीवनी और शिक्षाओं पर आधारित फिल्म जगतगुरू श्री रामकृष्ण आपके नजदीकी सिनेमाघरों में जल्द ही रिलीज होगी। गीतकार डा हरेराम पांडेय ने बहुत ही सुन्दर गीत लिखा है, संगीत अजय मिश्रा जी ने दिया है और निर्देशक डा बिमल कुमार मिश्र ने इस फिल्म को ऊंचाई पर पहुंचाया है।
अभिनय का प्रदर्शन का कमाल दिखाया है अमरकांत राय, मुकेश राम प्रजापति, मनोज पांडेय, संजय तिवारी, चंदानी झा, श्रेष्ठा भट्टाचार्य, टोनी उर्फ प्रशांत कुमार पांडेय, इंद्रलाल सोनी, अजीत अरोरा, दीपक घोष, गजानंद पाठक, सुहान चंचला और अन्य कलाकारों ने।
अभिजित कुमार सोनू स्टूडियो हजारीबाग में वाइस डबिंग की गयी है। कुल मिलाकर यह फिल्म मनोरंजन और भक्ती श्रद्धा जगाने और ऊर्जा भरने वाली है। निर्माता गजानंद पाठक ने इस फिल्म की पटकथा लिखी लिखी है।
एबीएन डेस्क। महानायक अमिताभ बच्चन आज 81 वर्ष के हो गये। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में जन्मे अमिताभ बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत कोलकत्ता में बतौर सुपरवाइजर की, जहां उन्हें 800 रुपये मासिक वेतन मिला करता था।
वर्ष 1968 में कलकत्ता की नौकरी छोड़ने के बाद मुंबई आ गये। बचपन से ही अमिताभ बच्चन का झुकाव अभिनय की ओर था और दिलीप कुमार से प्रभावित रहने के कारण वह उन्हीं की तरह अभिनेता बनना चाहते थे।
वर्ष 1969 में अमिताभ बच्चन को पहली बार ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म सात हिंदुस्तानी में काम करने का मौका मिला।लेकिन इस फिल्म के असफल होने के कारण वह दर्शकों के बीच कुछ खास पहचान नहीं बना पाये।
वर्ष 1971 में अमिताभ बच्चन को राजेश खन्ना के साथ फिल्म आनंद में काम करने का मौका मिला। राजेश खन्ना जैसे सुपरस्टार के रहते हुए भी अमिताभ बच्चन दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।इस फिल्म के लिये उन्हें सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।
निर्माता प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर... अमिताभ बच्चन के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। फिल्म की सफलता के बाद बतौर अभिनेता अमिताभ बच्चन फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।
दिलचस्प तथ्य यह है कि फिल्म जंजीर... में अमिताभ बच्चन को काम करने का मौका सौभाग्य से ही मिला। वर्ष 1973 मे निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी जंजीर फिल्म के लिये अभिनेता की तलाश कर रहे थे।
पहले तो उन्होंने इस फिल्म के लिए देवानंद से गुजारिश की और बाद में अभिनेता राजकुमार से काम करने की पेशकश की लेकिन किसी कारणवश दोनों अभिनेताओं ने जंजीर में काम करने से इंकार कर दिया।
एबीएन डेस्क। लगभग छह दशक तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता-फिल्मकार देवानंद को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिये कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। पंजाब के गुरदासपुर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में 26 सितंबर 1923 को जन्मे धर्मदेव पिशोरीमल आनंद उर्फ देवानंद ने अंग्रेजी साहित्य में अपनी स्नातक की शिक्षा 1942 में लाहौर के मशहूर गवर्नमेंट कॉलेज से पूरी की।
देवानंद इसके आगे भी पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने साफ शब्दों में कह दिया कि उनके पास उन्हें पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं। और यदि वह आगे पढ़ना चाहते हैं, तो नौकरी कर लें। देवानंद ने निश्चय किया कि यदि नौकरी ही करनी है तो क्यों ना फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमायी जाये।
वर्ष 1943 में अपने सपनों को साकार करने के लिए जब वह मुंबई पहुंचे तब उनके पास मात्र 30 रुपये थे और रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। देवानंद ने यहां पहुंचकर रेलवे स्टेशन के समीप ही एक सस्ते से होटल में कमरा किराये पर लिया। उस कमरे में उनके साथ तीन अन्य लोग भी रहते थे, जो देवानंद की तरह ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
जब काफी दिन यूं ही गुजर गये तो देव आनंद ने सोचा कि यदि उन्हें मुंबई में रहना है तो जीवन यापन के लिए नौकरी करनी पड़ेगी। चाहे वह कैसी भी नौकरी क्यों न हो। अथक प्रयास के बाद उन्हें मिलिट्री सेंसर आॅफिस में लिपिक की नौकरी मिल गयी। यहां उन्हें सैनिकों की चिट्ठियों को उनके परिवार के लोगों को पढ़कर सुनाना होता था।
मिलिट्री सेंसर आफिस में देव आनंद को 165 रुपये मासिक वेतन मिलना था, जिसमें से 45 रुपये वह अपने परिवार के खर्च के लिए भेज देते थे। लगभग एक वर्ष तक मिलिट्री सेंसर में नौकरी करने के बाद वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास चले गये, जो उस समय भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से जुड़े हुए थे। उन्होंने देव आनंद को भी अपने साथ इप्टा में शामिल कर लिया। इस बीच देवानंद ने नाटकों में छोटे-मोटे रोल किये।
वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म हम एक हैं.. से बतौर अभिनेता देवानंद ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत की। वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म जिद्दी देव आनंद के फिल्मी कैरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई। इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया और नवकेतन बैनर की स्थापना की।
नवकेतन के बैनर तले देवानंद ने वर्ष 1950 में अपनी पहली फिल्म अफसर का निर्माण किया, जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने बड़े भाई चेतन आनंद को सौंपी। इसके बाद देवानंद ने अपने बैनर तले वर्ष 1951 में बाजी बनायी। गुरुदत्त के निर्देशन में बनी फिल्म बाजी की सफलता के बाद देवानंद फिल्म इंडस्ट्री मे एक अच्छे अभिनेता के रूप मे शुमार हो गये।
फिल्म अफसर के निर्माण के दौरान देवानंद का झुकाव फिल्म अभिनेत्री सुरैया की ओर हो गया था। एक गाने की शूटिंग के दौरान देवानंद और सुरैया की नाव पानी में पलट गयी। देवानंद ने सुरैया को डूबने से बचाया। इसके बाद सुरैया देवानंद से बेइंतहा मोहब्बत करने लगीं लेकिन सुरैया की नानी की इजाजत न मिलने पर यह जोड़ी परवान नहीं चढ़ सकी। वर्ष 1954 मे देवानंद ने उस जमाने की मशहूर अभिनेत्री कल्पना कार्तिक से शादी कर ली।
देवानंद प्रख्यात उपन्यासकार आरके नारायण से काफी प्रभावित रहा करते थे और उनके उपन्यास गाइड पर फिल्म बनाना चाहते थे। आरके नारायणन की स्वीकृति के बाद देवानंद ने हॉलीवुड के सहयोग से हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में फिल्म गाइड का निर्माण किया जो देवानंद के सिने कॅरियर की पहली रंगीन फिल्म थी। इस फिल्म में देवानंद को उनके जबरदस्त अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया।
बतौर निमार्ता देव आनंद ने कई फिल्में बनायी। इन फिल्मों में वर्ष 1950 में प्रदर्शित फिल्म अफसर के अलावा हमसफर, टैक्सी ड्राइवर हाउस नंबर 44, फंटूश, कालापानी, काला बाजार, हम दोनों, तेरे मेरे सपने, गाइड और ज्वेल थीफ आदि कई फिल्में शामिल हैं। वर्ष 1970 में फिल्म प्रेम पुजारी के साथ देवानंद ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया।
हालांकि यह फिल्म बॉक्स आफिस पर बुरी तरह से नकार दी गयी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद वर्ष 1971 में फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का भी निर्देशन किया, जिसकी कामयाबी के बाद उन्होंने हीरा पन्ना, देश परदेस, लूटमार, स्वामी दादा, सच्चे का बोलबाला और अव्वल नंबर समेत कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया।
देवानंद को सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिये दो बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2001 में एक ओर जहां देवानंद को भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 2002 में हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अपनी फिल्मों से दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाने वाले महान फिल्मकार देव आनंद 03 दिसंबर 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।
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