टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अगले पांच दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अभी चल रहे नवरात्र, रमजान और चैती छठ त्योहारों में गर्मी से राहत की संभावना नहीं है। आने वाले कुछ दिन तापमान में कोई बदलाव की संभावना नहीं देखी जा रही है। जैसा कि मौसम विज्ञान केंद्र का पूर्वानुमान था, पिछले 24 घंटों में राज्य का तापमान शुष्क रहा और और राज्य के पश्चिमी भाग में लू की स्थिति बनती हुई देखी गई। झारखंड में अधिकतम तापमान डाल्टनगंज में 42.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राज्य के मुख्य शहरों के तापमान में राजधानी रांची में 38.8 डिग्री सेल्सियस, जमशेदपुर में 41 डिग्री सेल्सियस, बोकारो थर्मल में 39.5 डिग्री सेल्सियस, चाईबासा में 40.6 डिग्री सेल्सियस, देवघर और गोड्डा में 42 डिग्री सेल्सियस और गिरिडीह में 39.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है।
टीम एबीएन, रांची। इस बार के विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम हमारा गृह हमारा स्वास्थ्य है। यह संदेश देता है कि हमें स्वस्थ्य रहना है तो अपने पर्यावरण को भी स्वस्थ्य रखना होगा। हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो हम भी स्वस्थ्य रहेंगे। ये बातें विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मेदांता अस्पताल रांची के इंटरनल मेडिसिन के डॉ नीलाभ सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बहुत सी बीमारियां इसलिए हो रहीं हैं कि ग्लोबल वार्मिंग बढ़ गयी है, प्रदूषण बढ़ा है। ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी बढ़ी है जिससे लू लगने से लेकर त्वचा से संबंधित बीमारियां तक हो रही हैं। इसके कारण ही अब अप्रैल में ही भीषण गर्मी होने लगी है। प्रदूषण बढ़ने से सांस एवं छाती से जुड़ी बीमारियां, पेट से जुड़ी बीमारियां काफी बढ़ी हैं। हम नदियों को प्रदूषित करते हैं और उसका पानी किसी न किसी रूप में मनुष्य फिर से इस्तेमाल करता है, जिससे बीमारियां हो रही है। इसके साथ ही हमारी जीवनशैली में आए बदलाव से डायबिटीज और हाइपर टेंशन जैसी बीमारी खूब हो रही हैं। कोरोना में भी वैसे लोगों की मौत ज्यादा हुई है जो सांस से जुड़ी बीमारियों, डायबिटीज आदि किसी बीमारी से ग्रसित थे। इस मौसम में लू से बचाव जरूरी : डॉ नीलाभ सिंह कहते हैं कि इन दिनों गर्मी और लू तेजी से बढ़ी है। लू लगने से मौत तक हो सकती है। ऐसे में इससे बचना जरूरी है। बचने के लिए पानी भरपूर मात्रा में पीयें। अनावश्यक रूप से धूप में न निकले। अगर लू लगने के बाद थकान जैसा महसूस होता है तो मेहनत वाला कोई काम नहीं करें और ठंडी जगह पर आराम करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से राहत मिलेगी। तबियत खराब लगे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज न करें : डॉ नीलाभ सिंह कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें संदेश देता है कि हम अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज नहीं करें। बीमारी होने पर बेहतर अस्पताल में इलाज करवाएं, इलाज में देरी न करें। समय पर इलाज से बीमारी जल्दी ठीक होती है। स्वास्थ्य के लिए अच्छी जीवनशैली अपनाएं। संतुलित आहार लें। अपने पर्यावरण को भी बचाने का प्रयास करें क्योंकि यह बचेगा तभी हम बचेंगे। मेदांता अस्पताल रांची में मिल रही है विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं : डॉ नीलाभ सिंह ने कहा कि आज मेदांता अस्पताल रांची में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां नवीनतम तकनीक से बेहतरीन चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता है। अस्पताल में पूरे झारखंड से मरीज बेहतर इलाज के लिए आते हैं। यह बताता है कि मेदांता अस्पताल रांची पर मरीजों कि विश्वास काफी ज्यादा है।
एबीएन डेस्क (नितिन देसाई)। एक अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण को असाधारण नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय, स्वच्छ जल और तटीय एवं खुले सागर के जलीय पारिस्थितिकीतंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। इन समस्याओं से निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर शुरू किया प्रयास आपूर्ति पक्ष में बदलाव लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इन बदलावों में कार्बन उत्सर्जन कम करने वाले उत्पादों पर जोर दिया जा रहा है। खासकर कम बिजली या ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाले उपकरणों के निर्माण एवं इनके उपयोग की विशेष हिमायत की जा रही है। जिस तेजी से जलवायु परिवर्तन का असर दिख रहा है उसे देखते हुए मांग के मोर्चे पर भी उतना ही ध्यान देने की की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन आॅन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) में शामिल पक्षों की ग्लासगो में हुई बैठक में पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अभियान में यही दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था। जीवन-शैली पर ध्यान इस पक्ष पर जोर देने का प्रयास है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन की समस्या का निवारण केवल आपूर्ति के मोर्चे पर तकनीकी बदलाव लाकर नहीं किया जा सकता है बल्कि मांग के स्तर पर भी व्यवहारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। हाल में चीन के एक शोध संगठन के अध्ययन में 116 देशों के लिए वस्तुवार उपभोग आंकड़ों का इस्तेमाल कर उपभोग से जुड़ी आदतों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव का अनुमान लगाया गया है। वैश्विक स्तर पर दुनिया की कुल आबादी में 10 प्रतिशत सबसे धनी लोग 47 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें भी सर्वाधिक धनी 1 प्रतिशत 15 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। बीच की 40 प्रतिशत आबादी 43 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है इसलिए इस समूह का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कमोबेश वैश्विक औसत जितना है। सर्वाधिक गरीब 50 प्रतिशत लोग केवल 10 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। लिहाजा यह कहा जा सकता है कि दुनिया की आबादी में सर्वाधिक धनाढ्य 1 प्रतिशत लोगों का प्रति व्यक्ति उपभोग सर्वाधिक 50 प्रतिशत गरीब लोगों के प्रति व्यक्ति उपभोग की तुलना में 75 प्रतिशत अधिक है। अमीर एवं गरीब लोगों के भौगोलिक वितरण में काफी असमानता है। सहारा मरुस्थलीय देशों में रहने वाली ज्यादातर आबादी सबसे कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली 50 प्रतिशत जनसंख्या में आती है। दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में आधी से अधिक आबादी कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली 50 प्रतिशत जनसंख्या में आती है। मगर पश्चिम देशों एवं सोवियत संघ के पूर्व देशों में 10 प्रतिशत से कम आबादी इस 50 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। इन देशों में अधिकांश आबादी बीच की 40 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी पश्चिमी देशों और अमेरिका में अधिक है। अमेरिका में करीब 60 प्रतिशत राष्ट्रीय आबादी सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली 10 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। प्रति डॉलर व्यय निम्नतम से उच्चतम आय वाले वर्गों में अलग-अलग है। ज्यादातर ऊंचे एवं मध्य-आय वाले देशों में कार्बन उत्सर्जन करने की रफ्तार उच्च आय समूह से निम्र आय वर्ग समूह में कम होती जाती है। भारत में इसका उलटा है। व्यय के लिहाज से कार्बन उत्सर्जन आय वर्गों के साथ बढ़ता जाता है और सबसे निचले आय वर्ग की तुलना में यह शीर्ष आय वर्ग में दोगुना है। इसका कारण यह है कि अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उत्पादों जैसे कार एवं वातानुकूलित मशीनों का इस्तेमाल ज्यादातर शीर्ष आय वर्ग वाले लोग करते हैं। ये आंकड़े इस ओर इशारा देते हैं कि जीवन शैली में बदलाव का अभियान दुनिया की 10 प्रतिशत सबसे धनी आबादी पर केंद्रित होना चाहिए। इनमें आधे लोग विकसित देशों में रहते हैं। ये आंकड़े यह भी बताते हैं कि कई देशों में एक असंतुलन की स्थिति जरूर बनेगी जब प्रति व्यक्ति धनाढ्य लोगों का कार्बन उत्सर्जन में कमी पर जोर दिया जाएगा और गरीब लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए उन्हें अधिक उत्सर्जन की इजाजत दी जाएगी। भारत इन्हीं देशों में एक है। क्या धनी देश इस बदलाव को स्वीकार करेंगे? 1992 में उपभोक्तावाद पर तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा था, अमेरिकी जीवन शैली पर किसी तरह का वाद-विवाद नहीं हो सकता। वास्तव में अमेरिका की जीवन शैली वैश्विक समस्या बन गई है। वहां की जीवन शैली के आधार पर ज्यादातर देशों में जीवन यापन मानक और उपभोक्ता व्यवहार तय हो रहे हैं। इस अंधाधुंध उपभोक्तावाद और मुनाफा कमाने की होड़ में बदलाव की जरूरत है। यह धनी देशों के साथ सभी देशों में होना चाहिए। 30 वर्ष पहले रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश व्यावहारिक एवं दीर्घ अवधि के लिए अनुकूल उपभोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए थे। इनमें लोगों एवं परिवारों के लिए पर्यावरण के अनुकूल उपभोग से जुड़े कदम उठाना शामिल था। यह यूनएनएफसीसीसी की आगामी बैठकों में इस लक्ष्य को साधने का एक शुरूआती बिंदु हो सकता है। अगर भारत को वैश्विक स्तर पर इस अभियान को आगे बढ़ाना है तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदमों का साक्ष्य पेश करना होगा। शुरूआत के तौर पर सरकार को उत्पाद एवं आय समूह के आधार पर श्रेणीबद्ध व्यय से उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन पर सर्वेक्षण शुरू करना चाहिए। यह व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक जीवनशैली तैयार करने का खाका उपलब्ध करा सकता है। कार्बन उत्सर्जन अधिक करने वाले उपकरणों पर कर लगाने के लिए जिंसों की कीमतें प्रभावित करना एक अच्छा कदम नहीं माना जा सकता है। इससे धनी एवं गरीब लोगों के उपभोग में थोड़ी असमानता लाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। उदाहरण के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल रोकने के लिए पेट्रोल के दाम बढ़ाने से धनी लोगों पर न्यूनतम प्रभाव होगा जबकि मध्यम वर्ग पर असर अधिक होगा। परिवहन के लिए सार्वजनक साधनों पर निर्भर रहने वाले कम आय वर्ग के लोगों पर असर सर्वाधिक होगा। सार्वजनिक सड़कों पर निजी कारों के इस्तेमाल की खुली छूट पर पाबंदी लगाना एक रास्ता हो सकता है। भारत में वर्तमान समय में पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली रखने के लिए कुछ खास उपायों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इनमें कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अनिवार्य उत्पादन मानक तय करना, पर्यावरण के अनुकूल सुरक्षित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद कार्यक्रम शुरू करना और कार्बन उत्सर्जन की मात्रा दिखाने के लिए उत्पादों पर लेबल लगाना आदि शामिल हैं। इनके अलावा सूचना तंत्र के माध्यम से उपभोक्ता का व्यवहार बदलना, अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन कम करना और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के कूड़े का अनिवार्य पुनर्चक्रीकरण आदि जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने के लिए धनी लोगों के उपभोग ढर्रों में बदलाव उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना आपूर्ति मोर्चे पर नए प्रयोग आवश्यक हैं। यह जलवायु परिवर्तन के विषय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी है और यूएनएफसीसीसी में यह लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कदम उठाना भारत के लिए बिल्कुल वाजिब है।
टीम एबीएन, रांची। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बुधवार यानी 6 अप्रैल को दक्षिणी अंडमान सागर के ऊपर ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव के कारण अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की दक्षिणपूर्व खाड़ी पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
टीम एबीएन, रांची। गरम पछुआ हवा के बहाव से झारखंड में लोग गर्मी से अभी ही बेहाल होने लगे हैं। राज्य के कई इलाके भीषण लू की चपेट में हैं। हाल यह है कि सूबे के सात जिलों में शनिवार को पारा 40 डिग्री के पार चला गया। राज्य में सबसे अधिक तापमान डालटनगंज में रिकॉर्ड किया गया। यहां तापमान 43.4 पर पहुंच गया है। यह सामान्य से 6.1 डिग्री ज्यादा है। इस वजह से आम लोगों की परेशानी बहुत बढ़ गयी है। वहीं अगले दो दिनों तक गढ़वा, डालटनगंज, लातेहार, चतरा, सिमडेगा और गिरिडीह में हीट वेब चलेगी। इसको लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही संताल व कोयलांचल इलाके में आज रविवार शाम से बादल छा सकते हैं। बादल छाने के बाद बारिश नहीं हुई तो परेशानी और ज्यादा बढ़ेगी। धनबाद, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहेबगंज और गिरिडीह में साइक्लोनिक सरकुलेशन के प्रभाव से कुछ स्थान पर आंशिक बादल छाने की संभावना है। इस दौरान राज्य के अन्य इलाके में मौसम साफ रहने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिक एससी मंडल कहते हैं कि झारखंड में पलामू के रास्ते गरम पछुआ हवा का बहाव हो रहा है। पलामू और आसपास के इलाकों में गर्मी का असर अधिक है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी से लोग परेशान होने लगे हैं। डाल्टनगंज में पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। 3 अप्रैल को तापमान में कुछ गिरावट आ सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने बुलेटिन जारी कर बताया कि उत्तर प्रदेश में एक साइक्लोनिक सरकुलेशन बन रहा जिसका टर्फलाइन झारखंड होते हुए तमिलनाडु तक जाएगा। इसके कारण 3 अप्रैल से झारखंड के उत्तर और उत्तर पूर्वी इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञान केंद्र रांची से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर पश्चिम में गर्म हवा चलने की वजह से झारखंड के तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। राज्य में अगले 5 दिन तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव की संभावना नहीं है। 3 अप्रैल को मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। जबकि राज्य के उत्तर पूर्वी भागों में कहीं-कहीं पर आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। जबकि शेष भागों में मुख्यता आसमान साफ रहेगा। पिछले 24 घंटों में झारखंड में मौसम शुष्क रहा। सबसे अधिक उच्चतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस डाल्टनगंज में रिकॉर्ड किया है। जबकि न्यूनतम तापमान गढ़वा में 20.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। गिरिडीह के अलावा उत्तर पश्चिम भागों में कई जगहों पर लू भी चली। रांची में अधिकतम तापमान 38.0, जमशेदपुर में 40.0, डाल्टनगंज 43.4, बोकारो 40.1, चाईबासा में 39.4, देवघर में 41.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो रांची में 22.2, जमशेदपुर में 25.9, डाल्टनगंज 22.5, बोकारो में 27.1, चाईबासा में 22.6 और देवघर में 26.0 रिकॉर्ड किया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है यहां तक कि कई जिलों में लू चलने की भी आशंका जताई गई है। रांची समेत पूरे जिले में तपती गर्मी ने सताना शुरू कर दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले 5 दिनों में रांची और राज्यभर का मौसम शुष्क रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि आने वाले 5 दिनों में रांची सहित अन्य जिलों के मौसम शुष्क रहेगा। वहीं 29 मार्च से 1 अप्रैल तक आसमान साफ रहने का अनुमान है। इस दौरान अधिकतम तापमान 38 डिग्री रिकॉर्ड किया जा सकता है। जबकि न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के आसपास हो सकता है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अगले 3 दिनों के दौरान दिन के तापमान में धीरे-धीरे दो से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। उसके बाद 2 दिनों में कोई बड़े बदलाव का अनुमान नहीं है। मौसम विभाग केंद्र रांची के अनुसार राज्य में अगले 3 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री वृद्धि की संभावना है। पिछले 24 घंटों में झारखंड में मौसम शुष्क रहा। सबसे अधिक तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस डाल्टनगंज में रिकॉर्ड किया है। जबकि सबसे कम तापमान गढ़वा में 16.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। रांची में अधिकतम तापमान 36.2 जमशेदपुर में 39.5 डाल्टनगंज 39.9 बोकारो 36.1 चाईबासा में 39.4 देवघर में 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। वहीं, न्यूनतम तापमान की बात करें तो रांची में 19.3 जमशेदपुर में 20.0 डाल्टनगंज 18.5 बोकारो में 18.0 चाईबासा में 20.4 और देवघर में 20.4 रिकॉर्ड किया गया है।
एबीएन डेस्क। पसीने छुड़ा रही गर्मी से फिलहाल राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को कहा कि भारत के कई हिस्सों में पहले से चल रही लू से कोई राहत नहीं मिलेगी। साथ ही इसने आगे और गर्म दिनों की भविष्यवाणी की है। विभाग ने 28 से 30 मार्च के दौरान पश्चिम राजस्थान में भीषण गर्मी की भविष्यवाणी की है। इसके अलावा 31 मार्च और 1 अप्रैल, 2022 को अलग-अलग राज्यों में हीट वेव की स्थिति की भविष्यवाणी की गई है। आईएमडी ने जम्मू संभाग और हिमाचल प्रदेश (28-29 मार्च), दक्षिण हरियाणा (29-30 मार्च), सौराष्ट्र-कच्छ, पूर्वी राजस्थान और पश्चिम मध्य प्रदेश (28 अप्रैल 1 अप्रैल) में भीषण गर्म हवाओं का भविष्यवाणी की है। इन राज्यों के अलावा विदर्भ, उत्तर मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा (29-31 मार्च), दक्षिण उत्तर प्रदेश (30-31 मार्च) और झारखंड और आंतरिक ओडिशा (मार्च 30 अप्रैल 1) में भी लू की स्थिति के लिए अलर्ट जारी किया गया है। अगले पांच दिनों के दौरान देश के बाकी हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव की भविष्यवाणी नहीं की गई है, सिवाय इसके कि महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। गुजरात और पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान दो-तीन दिनों के बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की संभावना है।
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