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Published / 2026-05-13 22:12:30
श्री श्याम मन्दिर में धूमधाम से मनी अपरा एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 13 मई 2026 को अपरा एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भाव वातावरण में आयोजित किया गया। प्रातः से ही भक्तों की भारी भीड़ इस पावन दिवस पर श्री श्याम प्रभु का दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी।

इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को सुंदर नवीन वस्त्र ( बागा ) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर जूही , बेला , रजनीगंधा , गुलाब, एवम तुलसी दल की मालाओं से अत्यंत मनमोहक श्रृंगार किया गया साथ ही मन्दिर में विराजमान बजरंगबली एवम शिव परिवार का भी इस अवसर पर विषश श्रृंगार किया गया । रात्रि 9 बजे से श्री श्याम प्रभु के जयकारों की बीच पावन ज्योत प्रज्वलित कर श्री श्याम मण्डल के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण संकीर्तन प्रारम्भ किया गया । 

तुझको रिझाएंगे भजन तेरा सुनाएंगे, खूब सज्यों श्रृंगार खाटू वाले को, छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार ओ बाबा सात जन्म तक  हमें तो जी भी दिया श्याम बाबा ने दिया... इत्यादि भजनों की लय पर भक्तगण झूमते रहे । इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मेवा - फल - खीर चूरमा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया । रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में ओम जोशी , रमेश सारस्वत , चन्द्र प्रकाश बागला , धीरज बंका , मनोज ढांढणनीयां, गौरव परसरामपुरिया , नितेश केजरीवाल ,  नितेश लाखोटिया , विकाश पाडिया, प्रियांश पोद्दार का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मण्डल श्री श्याम मन्दिर, अग्रसेन पथ के रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ne दी।

Published / 2026-05-13 22:08:01
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी अपरा एकादशी

  • श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनी अपरा एकादशी

टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर परिसर में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा अपरा एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। संत शिरोमणि परमहंस स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हरि विष्णु एवं श्रीराधा-कृष्ण का स्मरण करते हुए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा।

इस अवसर पर श्री राधा रानी का विशेष एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। उन्हें सुंदर पोशाक एवं जड़ित आभूषणों से सुसज्जित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दिव्य श्रृंगार से सजे श्री राधा रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर की भव्य सजावट और भजन संकीर्तन से भक्तिमय माहौल ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई, उन्होंने भगवान को लड्डू, मेवा, फल एवं केसरिया दूध का विशेष भोग अर्पित किया‌।श्रद्धालुओं ने भी भगवान के चरणों में पुष्प एवं प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।पूजा-अर्चना के पश्चात सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया।

दीपों की जगमगाहट, घंटियों की मधुर ध्वनि और राधे-राधे एवं हरि बोल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा ।श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से आरती में भाग लिया तथा प्रभु कृपा प्राप्ति की प्रार्थना की।धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच वेजिटेबल खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। 

बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण के दौरान सेवा और समर्पण की भावना का सुंदर दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर  ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष महत्व है। 

यह एकादशी पापों का नाश करने वाली एवं मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इस दिन व्रत, पूजा, दान और भगवान विष्णु का स्मरण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति एवं अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि एकादशी का व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश भी देता है। 

ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं, प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि 16 मई को वट सावित्री पूजा के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

Published / 2026-05-13 21:10:42
अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करना सिखाती है भागवत कथा : श्री गौरव कृष्ण पाठक

  • अपने कर्तव्यों का दृढ़ता पूर्वक पालन करना सिखाती है भागवत कथा : श्री गौरव कृष्ण पाठक

एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। भंडरा के ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण में आयोजित भगवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन  भागवत कथा में महाराज जी ने  गोवर्धन पूजा और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।

गोवर्धन लीला को कहते हुए उन्होंने बताया कि कैसे सात वर्षीय कन्हैया ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर धारण किया और इंद्र का अभिमान नष्ट किया। साथ ही इंद्र को अपने कर्तव्य पालन करने की शिक्षा दी और कहा कि अपनी सीमा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। 

भक्ति का महत्व पर महाराज जी ने जोर दिया कि भगवान केवल प्रेम और निष्काम भक्ति के भूखे हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में युवाओं को सनातन संस्कृति से जुड़ने पर भी जोर दिया। महाराज श्री ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया और बताया कि कैसे भगवान इंद्र के अभिमान को तोड़कर भक्तों की रक्षा करते हैं।

गोवर्धन पूजन का आध्यात्मिक अर्थ अहंकार का त्याग, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और निस्वार्थ भक्ति है। ये कथा सिखाती है कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखने से विपत्तियां दूर होती हैं। प्रकृति का संरक्षण अनिवार्य है और गो-धन (गाय) की सेवा ही सच्चा धर्म है। यह आत्म-विश्वास और सामूहिक सामुदायिक भावना का प्रतीक है।

श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को कर्म में विश्वास करने और अपनी मेहनत से उपजे अन्न का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया न कि केवल इंद्र की पूजा पर निर्भर रहने के लिए। शरणागति का प्रतीक गोवर्धन पर्वत के नीचे आश्रय लेकर व्रजवासियों ने ईश्वर की शरण में जाने का आध्यात्मिक  संदेश दिया। भागवत कथा में हजारों महिला पुरुष शामिल हुए।

Published / 2026-05-11 20:39:37
भंडरा में निकली ठाकुर जी की भव्य शोभा यात्रा

जयकारों से गूंजा नगर 

भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। भंडरा में आयोजित सात दिवसीय भागवत प्रतिष्ठा सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन सोमवार को ठाकुर जी का भव्य नगर भ्रमण शोभा यात्रा निकाला गया। रथ पर सवार भगवान के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर हजारों भक्तों ने किया। कथा वाचक श्री गौरव कृष्ण शास्त्री जी के सानिध्य में शाम में ठाकुरबाड़ी परिसर से मनोहारी झांकी को फूलों से सुसज्जित रथ पर भगवान श्री कृष्ण को विराजमान कर शोभा यात्रा निकाला गया। 

ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे, शंख-ध्वनि और हरे राम हरे कृष्ण के संकीर्तन के साथ नगर भ्रमण पर निकलें हजारों भक्त झूमते हुए भगवान को नगर भ्रमण कराया। शोभा यात्रा ठाकुरबाड़ी परिसर से शुरू होकर मुख्य बाजार, थाना चौक, ब्लॉक रोड होते हुए पूरे भंडरा नगर का भ्रमण करते हुए पुन: कथा स्थल पहुंची। 

रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर और आरती उतारकर ठाकुर जी का स्वागत किया। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी भक्ति भाव में लीन होकर राधे-राधे और जय श्री कृष्ण के जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभा यात्रा के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए भंडरा थाना प्रभारी मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। 

स्वयंसेवकों ने भी भीड़ प्रबंधन में सहयोग किया। गर्मी को देखते हुए जगह-जगह शरबत और शीतल जल की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गयी थी। इस दौरान आयोजक राधा मोहन शर्मा, किशोरी मोहन शर्मा, ईश्वरी शर्मा, मोहन दुबे आदि उपस्थित थे।

Published / 2026-05-11 18:19:09
मानव तस्कर फ्रांसिस किसपोटा पर कानूनी कार्रवाई व कड़ाई से पालन हो झारखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2017 : विहिप

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानव तस्करों के कुकृत्यों का उजागर स्वाभाविक सा बनता चला जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि रांची के ही 51 वर्षीय मानव तस्कर फ्रांसिस किस्पोटा को बिहार के मोतिहारी में रेलवे सुरक्षा बल के द्वारा 21 बच्चों के साथ गिरफ्तार किया गया है। यह विषय अत्यंत ही निंदनीय है। 

डॉ साहु ने कहा- झारखंड धर्म स्वतंत्रय अधिनियम 2017 जैसे कानून होने के बाद भी झारखंड के ही गोड्डा एवं साहिबगंज सहित बिहार के भागलपुर से 5 से 12 वर्ष तक के बच्चों की तस्करी के ख्याल से शिक्षा के नाम पर मोतिहारी के चांदमारी मोहल्ले में रखा जाता है।

इसकी भनक तक राज्य सरकार को नहीं लगती है, जो चिंतनीय विषय है। 21 बच्चों में ज्यादातर जनजातीय परिवार के बच्चे हैं, जो दर्शाती है कि आज भी ईसाई मिशनरियों के द्वारा जनजातीय परिवार हीं धर्मांतरण व मानव तस्करी के लिए सबसे बड़ा लक्षित समाज है।

तस्करों द्वारा बच्चों को या तो उनके अंगों का व्यापार किया जाता है अथवा भीख मांगने अथवा नौकर-चाकर बनाकर रखने का कार्य कराया जाता है। बच्चों को अपने संरक्षण में रखकर उन्हें धर्मांतरित भी कर दिया जाता है, ऐसे में झारखंड का यह कानून किस काम का है? इस बात को सरकार व प्रशासन को सोचना चाहिए।

डॉ साहु ने कहा कि झारखंड सरकार मानव तस्कर फ्रांसिस किसपोटा पर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दे तथा झारखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2017 को कड़ाई से पालन करें। उक्त जानकारी विहिप झारखंड प्रांत के प्रचार-प्रसार सह प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने दी। 

Published / 2026-05-10 22:57:04
शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागर

  • शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागर
  • आठ लाख श्रद्धालुओं ने सुनी कथा
    पशुपति व्रत, एक लोटा जल एवं दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

टीम एबीएन, रांची। श्री शिव महापुराण कथा के दौरान आज कथा स्थल पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमानत: लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव की महिमा का रसपान किया। कथा स्थल हर हर महादेव एवं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से गूंजता रहा। पूज्य गुरुदेव के ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति गहराई से जोड़ दिया। आज की कथा में गुरुदेव ने विशेष रूप से पशुपति व्रत के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। 

उन्होंने कहा कि सच्चे भाव, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकता है। इसी क्रम में उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश एक लोटा जल सब समस्याओं का हल के माध्यम से कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाये। गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की मार्मिक कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी।

उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पशुपति व्रत का पालन किया तथा भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गयी। इस प्रसंग को सुनकर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा पंडाल बाबा भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही गुरुदेव ने दो युवतियों का प्रसंग भी सुनाया, जो पुलिस सेवा की तैयारी कर रही थीं। 

उन्होंने कहा कि जीवन में मेहनत आवश्यक है, लेकिन जब मेहनत के साथ भगवान शिव की कृपा जुड़ जाती है तो सफलता निश्चित हो जाती है। उन युवतियों ने कठिन परिश्रम के साथ शिव आराधना की और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। गुरुदेव ने युवाओं को संदेश दिया कि परिश्रम और प्रभु भक्ति दोनों का संतुलन जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।

आज की कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति का उल्लेख किया गया, जिन्हें विवाह के पच्चीस वर्षों बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दंपत्ति बाबा से मिलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने पहुंचे थे। इस प्रसंग ने कथा स्थल पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा।

अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और जीवन को शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता।

शिवलिंग पर चढ़ाये गये जल को लेकर उन्होंने कहा कि भगवान गणेश स्वयं उस भक्त की नैया पार लगाने का कार्य करते हैं, जो सच्चे भाव से भगवान शिव की आराधना करता है।
कथा के दौरान गुरुदेव ने दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया। 

उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद अत्यंत क्रोधित हो गया और देवताओं से प्रतिशोध लेने लगा। वह जानता था कि देवता यज्ञों के बल पर शक्तिशाली रहते हैं, इसलिए उसने ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया तथा धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया।

गुरुदेव ने कहा कि दैत्य दुंदुभी मायावी था और लोगों में भय फैलाने के लिए विभिन्न रूप धारण करता था। एक समय उसने बाघ का विकराल रूप धारण कर ब्राह्मणों पर आक्रमण किया। जब धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और उस बाघ रूपी दैत्य का संहार कर दिया।

कथा के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान शिव ने दुंदुभी निर्ह्राद का वध किया, वहां उसकी भीषण दहाड़ पूरी सृष्टि में गूंज उठी और बाद में वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना होने की मान्यता है। गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और भक्त कष्ट में होते हैं, तब-तब भगवान शिव उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।

पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु घंटों तक कथा में डूबे रहे और भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Published / 2026-05-10 22:43:04
शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागर

  • शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का महासागर
  • आठ लाख श्रद्धालुओं ने सुनी कथा
    पशुपति व्रत, एक लोटा जल एवं दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

टीम एबीएन, रांची। श्री शिव महापुराण कथा के दौरान आज कथा स्थल पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमानत: लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव की महिमा का रसपान किया। कथा स्थल हर हर महादेव एवं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से गूंजता रहा। पूज्य गुरुदेव के ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, आस्था और धर्म के प्रति गहराई से जोड़ दिया। आज की कथा में गुरुदेव ने विशेष रूप से पशुपति व्रत के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। 

उन्होंने कहा कि सच्चे भाव, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकता है। इसी क्रम में उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश एक लोटा जल सब समस्याओं का हल के माध्यम से कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाये। गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की मार्मिक कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी।

उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पशुपति व्रत का पालन किया तथा भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गयी। इस प्रसंग को सुनकर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और पूरा पंडाल बाबा भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही गुरुदेव ने दो युवतियों का प्रसंग भी सुनाया, जो पुलिस सेवा की तैयारी कर रही थीं। 

उन्होंने कहा कि जीवन में मेहनत आवश्यक है, लेकिन जब मेहनत के साथ भगवान शिव की कृपा जुड़ जाती है तो सफलता निश्चित हो जाती है। उन युवतियों ने कठिन परिश्रम के साथ शिव आराधना की और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। गुरुदेव ने युवाओं को संदेश दिया कि परिश्रम और प्रभु भक्ति दोनों का संतुलन जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।

आज की कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति का उल्लेख किया गया, जिन्हें विवाह के पच्चीस वर्षों बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दंपत्ति बाबा से मिलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने पहुंचे थे। इस प्रसंग ने कथा स्थल पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और वातावरण अत्यंत भावुक हो उठा।

अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और जीवन को शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता।

शिवलिंग पर चढ़ाये गये जल को लेकर उन्होंने कहा कि भगवान गणेश स्वयं उस भक्त की नैया पार लगाने का कार्य करते हैं, जो सच्चे भाव से भगवान शिव की आराधना करता है।
कथा के दौरान गुरुदेव ने दुंदुभी निर्ह्राद वध प्रसंग का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया। 

उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद अत्यंत क्रोधित हो गया और देवताओं से प्रतिशोध लेने लगा। वह जानता था कि देवता यज्ञों के बल पर शक्तिशाली रहते हैं, इसलिए उसने ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया तथा धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया।

गुरुदेव ने कहा कि दैत्य दुंदुभी मायावी था और लोगों में भय फैलाने के लिए विभिन्न रूप धारण करता था। एक समय उसने बाघ का विकराल रूप धारण कर ब्राह्मणों पर आक्रमण किया। जब धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और उस बाघ रूपी दैत्य का संहार कर दिया।

कथा के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान शिव ने दुंदुभी निर्ह्राद का वध किया, वहां उसकी भीषण दहाड़ पूरी सृष्टि में गूंज उठी और बाद में वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना होने की मान्यता है। गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और भक्त कष्ट में होते हैं, तब-तब भगवान शिव उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।

पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु घंटों तक कथा में डूबे रहे और भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Published / 2026-05-10 18:17:02
गायत्री परमात्मा की मूल और महत्वपूर्ण शक्ति है : सुलोचना शाहदेव

घर घर अलख जगायेंगे हम, शांतिकुञ्ज का संदेश जन-जन को पहुचायेंगे 

प्रज्ञागीत से 5 कुंडीय यज्ञ सोलल संपन्न 

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुञ्ज तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू के मार्गदर्शन में कांके प्रखंड समन्वय समिति के सान्निध्य में एक दिवसीय व 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ गुरु-ईश ध्यान वंदना, मंगलाचरण, पवित्रीकरण, न्यासकरण षटकर्म और मंगल कलश पूजन- अर्चन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान पाठ कर यज्ञीय अनुष्ठान एवं संध्या कालीन दीपयज्ञ से समापन हुआ। 

यह एक दिवसीय एवं 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम शांतिकुञ्ज मुख्यालय के निर्देशानुसार कई संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। इस बाबत प्रखंड समन्वियका रेणु श्रीवास्तव बहिन तथा जिला महिला युवा समन्वयियका सुलोचना शाहदेव बहिन की सदस्य टीम के सान्निध्य व सहयोग में संपन्न हुआ। 

दोनों ने विगत जनवरी 2026, बैरागी द्वीप वसंतोत्सव समारोह सम्मेलन में अपनी टीम की भागीदारी तथा उसमें लिये गये संकल्प तथा गत माह 22 अप्रैल शक्तिपीठ सेक्टर टू की विशेष संकल्प गोष्ठी की जानकारी यज्ञीय विधान के दौरान सबको बताया। गायत्री उपासना साधना का अर्थ, भावार्थ, व्याख्यान एवं चमत्कार अवर्णनीय है। हम आसानी से वर्णन नहीं कर सकते। 

परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ ने इस पर बहुत विशाल व विस्तार से हजारों पुस्तकें लिख डाली हैं। उनका कहना है कि मंत्रों का सूक्ष्म प्रभाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। उसमें भी गायत्री महामंत्र की महिमा, महत्ता तो और अधिक विलक्षण है। यह परमात्मा की मूल शक्ति और बहुत ही महत्वपूर्ण, मूल्यवान है। इस महाशक्ति का लाभ असंदिग्ध है, जिन्हें वह सुलभ हुआ, लाभ हुआ वो निहाल हुआ, धन्य हो गये।

परम पूज्य गुरुदेव और वं माता जी ने अपने युग के अपने दादा गुरुदेव जी के निदेर्शानुसार अपना तपोबल व संकल्प बल से इस वैदिक महामंत्र को सर्व सुलभ और स्वस्थ-सुखद बनाया। जन-जन के  तन-मन को लाभान्वित करने तथा जन-जन के जीवन के लिए घर-घर अलख जगाने के लिए सर्व सुलभ व सरल बना दिया। यह सर्वदा, सर्वथा सर्व हितकारी उपासना सबके लिए स्वस्थ-सुखद है। इससे अनेक कठिनाइयां हल होती हैं। 

नवरात्र अनुष्ठान काल में  इसकी सामूहिक जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की महत्ता और बढ़ जाती है। गायत्री महामंत्र संजीवनी विद्या एवं सरल यज्ञीय विधान महत्ता, आवश्यकता तथा इसकी अपेक्षित उपयोगिता पर प्रकाश डाल बताया कि यह 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ जन्म शताब्दी अनुयाज क्रम की एक कड़ी है। यज्ञीय विधान 3 पाली में हुआ। एक दर्जन दीक्षा संस्कार भी हुए। 

यह कार्यक्रम अब तेजी से  कांके प्रखंड के अनेकानेक पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन-जन के लिए  रोचक स्तर पर अनुभव कराना है और नयी पीढ़ी के बच्चों को यज्ञीय विधान से सुसंस्कारवान बनाना है। सुबह दोपहर यज्ञीय अनुष्ठान विधान से आहुतियां प्रदान की गई और सायंकालीन दीपयज्ञ में जन्म दिवस संस्कारोत्सव भी सोल्लास मनाये गये। सबकी मंगलमय कामना व शांति-पाठ कर कार्यक्रम संपन्न किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रेणु श्रीवास्तव, सुलोचना शाहदेव और जय नारायण प्रसाद ने दी।

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