भवनाथपुर। प्रखण्ड के बनसानी पंचायत के रोहिनिया गांव निवासी 80 वर्षीय प्रभु प्रसाद यादव ने मृत्यु के पश्चात अपना शरीर जन सेवा के लिए रांची रिम्स अस्पताल में दान कर भवनाथपुर प्रखण्ड ही नहीं सम्भवतः गढ़वा जिला में पहले व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि मेरी शिक्षा गांव में ही तीसरी क्लास तक हुई है। परन्तु मैंने जो अपने दुनियादारी देखी उसमें मानवता के नाते दूसरे मनुष्य को जीवन दान देने से बड़ा कोई भी सुख नहीं है। मैंने वर्ष 2017 में रेडियो के माध्यम से बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु से यह सुना था कि वे मृत्यु के पश्चात अपने अपना शरीर दान करेंगे। यह बात मेरे दिमाग में घर कर गया। मैंने भी पत्नी मानमति देवी व पुत्र श्याम बिहारी यादव की सलाह के बाद सहमति बनाकर वर्ष 2017 में रांची रिम्स में चिकित्सकों के परामर्श से अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य के लिए समाज के लोगों को आगे आना चाहिए।
कोडरमा (मनोज कुमार पांडेय)। टेलीविजन, एलईडी, एलसीडी और इंटरनेट के जमाने के लोग भले ही रेडियो को गुजरे जमाने की चीज समझें पर इसका क्रेज आज भी बरकरार है। ऐसा मानना है रेडियो प्रेमी चमन राम जी का। चमन राम के दैनिक जीवन की शुरुआत रेडियो से ही होती है। सुबह उठकर राम चरित मानस का पाठ सुनना उन्हें काफी भाता है। जहां एक ओर चमन के घर के अन्य लोग टीवी से चिपके रहते हैं वहीं दूसरी ओर रेडियो से जुडी पुरानी यादों को अपने सीने में समेटे चमन राम रेडियो को अपना सबसे बड़ा इंटरटेनर बताते हंै। चाहे विविध भारती के गीत हों या विनाका गीत माला के बड़े एंकर अमीन सायनी की आवाज या फिर आकाशवाणी पटना के उद्घोषक बद्री प्रसाद यादव की जादू भरी आवाज। रेडियो की पुरानी स्मृतियां आज भी ताजा हो उठती हो। ठुमरी हो, राग दादरी या लोक गीतों की गूंज। इन सबों को लोगों तक पहुचाने वाले रेडियो को लोग आज तक नहीं भूल पाये हैं। भारतीय संस्कृति से जुड़ी लोक गीतों की अनुगूंज टीवी नहीं बल्कि रेडियो पर ही सुनाई पड़ती है। फगुआ, चैतारी और भोजपुरी लोक गीत जिसमें भारतीय ग्रामीण संस्कृति के गुण हों, रेडियो इन सबों का संरक्षक और पोषक है। चमन राम आज भी रेडियो को समाचार और मनोरंजन का सबसे अच्छा साधन मानते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नया साल 2022 के पहले दिन ताजमहल पर रिकॉर्डतोड़ भीड़ उमड़ी। शनिवार को दिनभर में करीब 40 हजार पर्यटकों ने ताज का दीदार किया। सुबह से शाम तक स्मारक के दोनों प्रवेश द्वारों पर कतारें लगी रहीं। कई पर्यटक बिना मास्क के दिखे। आगरा किला समेत अन्य स्मारकों पर पर्यटकों की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रही। साल के पहले दिन सुबह से ही पर्यटकों की भीड़ ताज के दीदार के लिए पहुंचने लगी। सुबह नौ बजे से धूप निकल आने के बाद पर्यटकों की संख्या में और इजाफा हो गया। दोपहर दो बजे तक ताजमहल के पूर्वी और पश्चिमी दोनों गेटों पर पर्यटकों की लंबी लाइन लग गई। स्मारक में प्रवेश के लिए पर्यटकों को काफी इंतजार करना पड़ा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार एक जनवरी 2022 को 37 हजार से ज्यादा टिकट बिके। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास, वीआईपी मेहमानों, ग्रुप के आने के कारण दिनभर में करीब 40 हज़ार पर्यटकों ने ताजमहल को निहारा इनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या 250 के करीब रही। आगरा किला में साढ़े नौ हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। नए साल के पहले दिन फतेहपुर सीकरी स्मारक में भी पर्यटकों और जायरीनों का तांता लगा रहा। इसके चलते आगरा गेट और शाहकुली पर जाम की स्थिति बनी रही। सुबह से ही सैलानियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में भी दिनभर भीड़ रही। स्मारक में प्रवेश के लिए जोधाबाई और दीवाने आम की बुकिंग विंडो पर टिकट और प्रवेश के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। कुछ पर्यटक प्रतिबंधित स्मारक अनूप तालाब में बैरिकंडिंग लांघकर प्रवेश कर गए। बाद में सुरक्षा गार्डों ने उन्हें बाहर निकाला। वाहनों की पार्किंग में भी सैलानियों को परेशानी हुई।
एबीएन डेस्क। नए साल के पहले दिन कमर्शियल सिलिंडर के उपभोक्ताओं को तोहफा दिया है। इंडियन ऑयल ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इंडियन ऑयल ( IOCL) के अनुसार 1 जनवरी 2022 को दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 102 रुपये की कटौती की गई है। अब 19 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर दिल्ली में 1998.5 में मिलेगा। चेन्नई में उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए 2131 रुपये और मुंबई में 1948.50 रुपये देने होंगे। नए साल में कोलकाता में 19 किलोग्राम का गैस सिलेंडर 2076 रुपये में मिलेगा। गौरतलब है कि इससे पहले बीते दिसंबर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 100 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। घरेलू सिलेंडर की कीमत में इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले साल अक्टूबर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। इंडियन ऑयल के अनुसार, नए साल में भी दिल्ली और मुंबई में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 900 रुपये है। कोलकाता वालों को घरेलू सिलेंडर के लिए 926 रुपये और चेन्नई वालों को 916 रुपये चुकाने होंगे। लखनऊ में रसोई गैस 938 रुपये प्रति सिलेंडर मिलेगी। अभी कीमत के मामले में बिहार की राजधानी पटना में गैस महंगी है। वहां घरेलू सिलेंडर की कीमत 998 रुपये है। अहमदाबाद में रसोई गैस की कीमत 907 रुपये प्रति सिलेंडर है। भोपाल में रसोई गैस 906 रुपये में मिल रही है।
नई दिल्ली। नया साल शुरू हो रहा है और नया महीना भी। जनवरी, 2022 आ गया है। नया महीना शुरू होने से पहले ही खुद को इन बातों के लिए तैयार कर लेना चाहिए कि महीने में क्या बदलाव आने वाले हैं और अगर आपको बैंक से अक्सर काम पड़ता है तो ये भी जान लेना चाहिए कि नए महीने में बैंक कितने दिन बंद रहेंगे। ऐसे में हम एक बार इस पर नजर डाल रहे हैं कि जनवरी, 2022 में कितने दिन बैंकों का कामकाज प्रभावित रहेगा, बैंकों में कितने दिनों की छुट्टियां रहेंगी। अगर छुट्टियों की लिस्ट पर नजर डालें तो पता चलता है कि जनवरी में कुल 16 दिन बैंकों की छुट्टियां रहेंगी। इनमें से 10 राष्ट्रीय और कुछ राज्य स्तर पर मनाए जाने वाले त्योहार या तिथि हैं। वहीं, सात वीकेंड की छुट्टियां हैं। लेकिन जाहिर है कि भारत विविधताओं का देश है और जरूरी नहीं कि हर त्योहार या कोई विशेष तिथि हर राज्य में मनाई जाती हो।इसलिए ये सारी छुट्टियां देश के सभी बैंकों पर लागू नहीं होती हैं। छुट्टियों की लिस्ट : 1 जनवरी, 2022: नया साल (आइज़ोल, गंगटोक, चेन्नई, शिलॉन्ग), 3 जनवरी, 2022: नए साल का जश्न (सिक्किम में लोसूंग), 4 जनवरी, 2022: लोसूंग (गंगटोक, आइज़ोल), 11 जनवरी, 2022: मिशनरी दिवस (मिजोरम), 12 जनवरी, 2022: स्वामी विवेकानंद जयंती (कोलकाता), 14 जनवरी, 2022: मकर संक्रांति/पोंगल (तमिलनाडु, पुदुतच्चेरी, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्य), 15 जनवरी, 2022: उत्तरायण पुण्यकाल मकर संक्रांति/माघ संक्रांति/संक्रांति/पोंगल/तिरुवल्लुवर दिवस, 18 जनवरी, 2022: थाई पुसम (तमिलनाडु), 26 जनवरी, 2022: गणतंत्र दिवस। इसके अलावा जनवरी, 2022 में वीकेंड की कुल सात छुट्टियां भी पड़ रही हैं। बता दें कि महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। 2 जनवरी, 2022: रविवार, 8 जनवरी, 2022: दूसरा शनिवार, 9 जनवरी, 2022: रविवार, 16 जनवरी, 2022: रविवार, 22 जनवरी, 2022: चौथा शनिवार, 23 जनवरी, 2022: रविवार, 30 जनवरी, 2022: रविवार।
एबीएन डेस्क, रांची। पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड के बरदीकानपुर निवासी शोभा हांसदा को साहित्य अकादमी ने बाल साहित्य पुरस्कार के लिए चुना है। मिदनापुर बंगाल के निरंजन हांसदा को मोने रेयाक् आडांग लघु कथा संग्रह और मयूरभंज ओडिशा के कुना हांसदा को सगई गनाडे उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। शोभा हांसदा को यह सम्मान हली मोने कविता के लिए दिए जाने की घोषणा की गई है। शोभा हांसदा ने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि 10-12 वर्षों से लेखन कार्य शुरू किया। साहित्य पुरस्कार के बारे में सोचा भी नहीं था। सब कहते हैं कि अच्छा लिख रही हूं। इससे संतोष होता है। पुरस्कार की घोषणा से मनोबल बढ़ा है। वर्षों की मेहनत का फल मिला लगता है। इस सम्मान से आगे और लिखने की प्रेरणा मिलेगी। संताली भाषा, साहित्य, परंपरा, संस्कार, धर्म, जीवन शैली के बारे में लिखने की इच्छा है। साहित्य अकादमी ने गुरुवार को अपने प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार, युवा पुरस्कार और बाल साहित्य पुरस्कार की घोषणा की। हिंदी के लिए दया प्रकाश सिन्हा को उनके नाटक सम्राट अशोक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है। अंग्रेजी के लिए नमिता गोखले को थिंग्स टू लीव बिहाइंड तथा पंजाबी के लिए खालिद हुसैन को कहानी संग्रह सूलां दा सालण के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
इटखोरी। भद्रकाली मंदिर से कुछ ही दूरी पर उत्तर दिशा की ओर जंगल के बीच कलकल कर बहती मुहाने नदी की मनोरम वादियों में बसा हदहदवा सैलानियों को बरबस अपनी ओर खींचता है। नदी के चारों ओर पत्थर व घने जंगल से इस पर्यटक स्थल की शोभा और बढ़ जाती है। नव वर्ष 2022 का आगमन होने वाला है। नया साल आते ही लोगों में घूमने जाने की होड़ लग जाती है। लोग नए नए जगहों पर घूमने के साथ-साथ पिकनिक मनाने के लिये जगह तलाशने लगते हैं। इसी बीच हदहदवा का मनोरम वादियां इटखोरी समेत आसपास के लोगों के लिए एक अच्छा पिकनिक स्पॉट साबित हो रहा है। लोग यहां हर साल बड़ी संख्या में पिकनिक मनाने और घूमने के लिए पूरे परिवार के साथ आते हैं। चट्टानों से बहता कल-कल पानी और चारों ओर जंगल इस खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। यह स्थल पेड़-पौधों और चट्टानों को आगोश में लिए लोगों को आकर्षित करती है। यह स्थल काफी आकर्षक व मनोरम है। नदी का पानी जब चट्टानों के बीच से बहती है तो पूरे पानी का रंग नीला पन अपने आप में छंटा बिखेर देता है। साथ ही युवाओं के लिए यह सेल्फी प्वांइट भी बन गया है।
बेरमो। अन्य बड़े शहरों से अब आप बोकारो जिला को अलग नहीं कर सकते। आज के तारीख में बोकारो स्टील सिटी एजुकेशन हब के रूप में देखा जाता है। हालांकि अब बोकारो जिला में बेहतर शिक्षा का सफल रुझान आना भी शुरू हो गया है। इसी क्रम में देश के सबसे बड़े प्रयोगशाला इसरो में वैज्ञानिक के रूप में बोकारो के सागर अग्रवाल का चयन होने की खुशी में आज पूरा जिला वासी झुमते नजर आ रहे हैं। इस खुशी को अग्रवाल कल्याण महासभा ने अपने अंदाज से मनाया और उक्त मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल अग्रवाल संस्था के अन्य सदस्यों के साथ बोकारो स्थित उनके आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया। मिली जानकारी के अनुसार बोकारो स्टील सिटी के रहने वाले सागर अग्रवाल पिता निरंजन अग्रवाल के पुत्र का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन करफड में वैज्ञानिक के रुप में चयन हुआ है इसकी सूचना पाकर अखिल भारतीय अग्रवाल कल्याण महासभा की ओर से सागर अग्रवाल को अंगवस्त्र वा बुके देकर सम्मानित किया तथा उनके परिजन को बधाई दी और कहा कि सागर अग्रवाल अपने समाज और गांव की ही नहीं पूरे बोकारो और झारखंड का नाम रोशन किया है। इनके द्वारा किए गए सच्चे लगन का ही यह परिणाम जिस कारण इन्हे यह सफलता मिली है मैं और पूरी संस्था इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है। बताते चलें कि सेक्टर चार स्थित डीएवी से 2013 में साइंस में इंटरमीडिएट करने के बाद सागर अग्रवाल का चयन भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन इंस्ट्रीयुट आॅफ टेक्नोलॉजी में हुआ। जहां उन्होंने 2017 में इलेक्ट्रॉनिक से बीटेक करने के बाद आईएसएम आईआईटी धनबाद में एमटेक की पढ़ाई की। वे कानपुर स्थित पीएसआईटी कॉलेज में बीटेक के छात्र को पढ़ाने में लग गए फिर 2020 जनवरी में इसरो के साइंटिस्ट पद के लिए परीक्षा में भाग लिया कोरोना कॉल के कारण 2021 में साक्षात्कार हुआ। सागर अग्रवाल ने बताया कि मैट्रिक के पढ़ाई के वक्त से ही इसरो जैसे संस्थान में काम करने की इच्छा थी। उसी लक्ष्य को लेकर मैं आगे बढ़ता रहा और आज मुझे सफलता मिली। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि सफलता आपको उतना नहीं सिखाती है यह सिर्फ आप के आकार को बढ़ाता है। इसलिए कभी भी असफलता से घबराए नहीं। मौके पर विनोद गर्ग अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, राजू प्रसाद, अजय अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग, प्रवीण अग्रवाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
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