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Published / 2022-02-20 12:08:57
हिजाब प्रकरण : प्राचार्य को जान से मारने की धमकी, 58 सस्पेंड, 15 पर एफआईआर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में हिजाब विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिजाब वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं देने और घर वापस भेजने को पर एक जूनियर कॉलेज प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी गई है। मदिकेरी जिला पुलिस ने इस मामले में प्रिंसिपल विजय की शिकायत पर मोहम्मद तौसीफ नामक युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है। उधर, पुलिस और प्रशासन ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और प्रशासनिक समझाइश के बावजूद धरना-प्रदर्शन करने माहौल खराब करने वालों पर भी सख्ती शुरू कर दी है। जहां, तुमकुर में गुरुवार को प्रदर्शन में शामिल 15 छात्राओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, शिवमोग्गा जिले में एक प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की 58 छात्राओं को विरोध-प्रदर्शन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक पुलिस ने हिजाब को लेकर पारित अंतरिम आदेश और सीआरपीसी की धारा-144 के तहत जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में शनिवार को कम से कम 10 लड़कियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 145, 188 और 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। छात्राओं ने तुमकुर में गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज के बाहर गुरुवार, 17 फरवरी को प्रदर्शन किया था। इन छात्राओं पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। दक्षिण कन्नड़ जिले में स्कूल कॉलेजों के आसपास प्रतिबंध 26 तक बढ़ा : हालात को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने स्कूल व कॉलेजों के आस पास लगाए गए प्रतिबंध को 26 फरवरी तक बढ़ा दिया है। उपायुक्त केवी राजेंद्र ने कहा, हिजाब विवाद के तनाव को देखते हुए शनिवार शाम 6 बजे से 26 फरवरी शाम 6 बजे तक स्कूल कॉलेज के 200 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू रहेंगे। बाहरी लोग विवाद भड़का रहे: बोम्मई : मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने कहा, यह सारा विवाद बाहरी लोग भड़का रहे हैं। प्रधानाचार्य, छात्राओं और उनके अभिभावकों द्वारा इस मुद्दे का समाधान निकाल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि माहौल शांत रखा जाए। मगर कुछ लोग ऐसा होने नहीं दे रहे। छात्राओं ने रोक के बावजूद किया था प्रदर्शन : हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई अभी लंबित है और अंतरिम आदेश के अनुसार, कक्षाओं में छात्र-छात्राओं के हिजाब, बुर्का और भगवा गमछे आदि पहनने पर रोक लगी है। इसके बावजूद कई छात्राएं लगातार हिजाब पहनने पर अड़ी हुई हैं। गुरुवार को भी जब छात्राओं को हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिजाब नहीं उतारने पर कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया गया तो छात्राएं प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के बाहर ही धरने पर बैठ गई और रोक के बावजूद प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट में दलील- हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं : वहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि हिजाब इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा यानी अनिवार्य नहीं है और इसके उपयोग को रोकना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25, जो कि धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, का उल्लंघन नहीं करता है। वहीं, मुस्लिम लड़कियों की ओर से पेश वकील विनोद कुलकर्णी ने याचिका में कहा है कि हिजाब पर प्रतिबंध पवित्र कुरान पर प्रतिबंध लगाने जैसा है।

Published / 2022-02-20 06:53:01
मार्च में 13 दिन बंद रहेंगे बैंक, देखें पूरी लिस्ट...

एबीएन डेस्क। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च 2022 के लिए बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जारी कर दी है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप फरवरी के लिए छोड़े गए कामों के लिए ब्रांच जाने से पहले बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें। इस लिस्ट के मुताबिक मार्च 2022 में कुल 13 दिन बैंक बंद रहेंगे। मार्च में बैंकों की कुल 13 दिन की छुट्टियों में 4 छुट्टी रविवार के हैं। इनमें कई छुट्टियां लगातार भी पड़ने वाली है। बता दें कि पूरे देश में 13 दिन बैंक बंद नहीं रहेंगे। आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई अवकाश की सूची के मुताबिक, ये छुट्टियां अलग-अलग राज्यों में हैं। ये सभी छुट्टियां सभी राज्यो में लागू नहीं होंगी। वहीं, आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक रविवार के अलावा महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं। आइए जानते हैं कि फरवरी 2022 में किन राज्यों में कब-कब बैंक बंद रहेंगे? लिहाजा, अगले महीने छुट्टी की लिस्ट के आधार पर आप अपने बैंक से जुड़े कामकाज निपटा लें, जिससे आप बेवजह की दिक्कत से बच सकें। 1 मार्च (महाशिवरात्रि)- अगरतला, आइजोल, चेन्नई, गंगटोक, गुवाहाटी, इंफाल, कोलकाता, नई दिल्ली, पणजी, पटना और शिलांग को छोड़ अन्य स्थानों में बैंक बंद, 3 मार्च (लोसार)- गंगटोक में बैंक बंद, 4 मार्च (चपचार कुट)- आइजोल में बैंक बंद, 6 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 12 मार्च (शनिवार)- महीने का दूसरा शनिवार, 13 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 17 मार्च (होलिका दहन)- देहरादून, कानपुर, लखनऊ और रांची में बैंक बंद, 18 मार्च (होली/धुलेटी/डोल जात्रा)- बेंगलुरु, भुबनेश्वर, चेन्नई, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम को छोड़ अन्य स्थानों में बैंक बंद , 19 मार्च (होली/याओसांग का दूसरा दिन)- भुबनेश्वर, इंफाल और पटना में बैंक बंद, 20 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश, 22 मार्च (बिहार दिवस)- पटना में बैंक बंद, 26 मार्च (शनिवार)- महीने का चौथा शनिवार, 27 मार्च (रविवार)- साप्ताहिक अवकाश।

Published / 2022-02-19 18:10:14
हिजाब से ऊपर उठकर शिक्षा पर ध्यान दें : मुस्लिम राष्ट्रीय मंच

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने अल्पसंख्यक समुदाय से रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठने और प्रगतिशील विचारों को अपनाने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने से ज्यादा प्रगति के लिए शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। संगठन ने कहा कि भारत में मुसलमानों में निरक्षरता की दर सबसे अधिक 43 प्रतिशत है और समुदाय में बेरोजगारी की दर भी बहुत अधिक है। मुसलमान सोचें उनकी साक्षरता दर सबसे कम क्यों : एमआरएम के राष्ट्रीय संयोजक एवं प्रवक्ता शाहिद सईद ने कहा, मुसलमानों को सोचना चाहिए कि उनकी साक्षरता दर सबसे कम क्यों है। भारत के मुसलमानों को एक प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्हें यह समझना होगा कि उन्हें किताब की जरूरत है, न कि हिजाब की। उन्हें रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर शिक्षा और प्रगति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कुल मुस्लिम आबादी का केवल 2.75 प्रतिशत स्नातक या इस स्तर की शिक्षा से ऊपर है। इनमें महिलाओं का प्रतिशत मात्र 36.65 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों में स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर लड़कों की तुलना में अधिक है। सदियों पुरानी इस प्रथा के दर्द से मुक्त करवाया : उन्होंने कहा, हमें सोचना चाहिए कि हमारे पास स्नातकों का इतना कम प्रतिशत क्यों है जबकि देश में मुसलमानों की आबादी कम से कम 20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र, रोजगार में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। सईद ने कहा, और यह अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ किसी पूर्वाग्रह के कारण नहीं है। जब किसी समुदाय में स्नातकों का इतना कम प्रतिशत और स्कूल छोड़ने की दर अधिक होती है, तो यह स्पष्ट है कि इसके सदस्य पीछे रह जाएंगे। एमआरएम संयोजक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन के दौरान "तीन तलाक" को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को इस सदियों पुरानी प्रथा के दर्द से मुक्त कर दिया है। रूढ़िवाद और कट्टरता के बंधन में रहें : उन्होंने कहा, यह मुस्लिम महिलाओं के स्वाभिमान और गरिमा का कानून है। आज उनकी स्थिति में बहुत बदलाव आया है। कानून लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली है। लोग अपने परिवार को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम लड़कियां, युवा और महिलाएं आज प्रगतिशील हैं लेकिन कट्टरपंथी और तथाकथित धार्मिक नेता चाहते हैं कि वे रूढ़िवाद और कट्टरता के बंधन में रहें।

Published / 2022-02-19 17:39:04
पत्रकार, पत्रकार होता है... उसे इंसान समझने की भूल न करें : प्रकाश नारायण

एबीएन डेस्क (प्रकाश नारायण)। एक पत्रकार, पत्रकार होता है...। उसे केवल इंसान समझने की गलती तो बिल्कुल ही नहीं करनी चाहिए। उक्त बातें फ्रेंडस ऑफ झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश नारायण ने कही। वे झारखंड के पत्रकारों के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पत्रकार की शक्ल इंसान की जरूर होती है, मगर वो इंसान तो कम से कम नहीं होता...। ब्रेकिंग न्यूज के दौरान वो सुपर कमांडो ध्रुव की तेजी से खबर आप तक पहुंचाता है। खबर की जड़ तक शर्लाक होम्स बनकर जाता है। आपके खाने-पीने में कहां कितना जहर है, ये बताते वक्त वो फिजीशियन बन जाता है और मिसाइल लॉन्च की खबर लिखते हुए छोटा-मोटा वैज्ञानिक भी वही पत्रकार बनता है। राजनीति की हर रवायत को बारीकी से समझता है और आपको समझाता है। बिल्कुल प्राइमरी विद्यालय के मास्टर सिपाहीलाल की तरह...। आधी रात को जब आप स्वप्नलोक में विचरण कर रहे होते हैं, तो वो रातभर में देश दुनिया के घटनाक्रम को आप तक पहुंचाने के प्रयत्न में जार-जार हो रहा होता है। जब पूरी दुनिया काम पर निकलती है तो वो शोर-शराबे के बीच 1 घंटे सोने की जद्दोजहद में होता है। वो मंत्री, सांसद, विधायक, लेखपाल, तहसीलदार, थानेदार, हवलदार तक से गाली खाता है। उसकी पूरी कौम को कोई असामाजिक तत्व भी बिका हुआ और दलाल बड़ी आसानी से कह जाता है। दबंग उसका घर फूंक देते हैं। कई बार उसे ही फूंक डालते हैं और वो अपने मर चुके साथी की खबर भी उसी की बोर्ड पर टाइप करता है। जिस की-बोर्ड पर वो कटरीना और रणबीर की प्रेम कहानी लिखता है। पत्रकार लड़का-लड़की, महिला-पुरुष, नहीं होता वो केवल पत्रकार होता है। रंगहीन. गंधहीन.. संवेदनशील...। होली, दिवाली, ईद, बकरीद, ज्यादातर त्योहार वो न्यूजरूम या अपनी कलम के साथ टेबल पर खबर लिखते ही मनाता है। परिवार के बीच होने वाले 10 उत्सवों में से 8 में वो अक्सर नहीं पहुंच पाता। नाते रिश्तेदार उसके लिए दूरसंचार की दुनिया में सीमित होते हैं। एक बार घर से निकलते वक्त मां-बाप को सामने या फोन पर प्रणाम करता है और नौकरी खत्म करने के बाद यही औपचारिकता दोबारा करता है। दुनिया भर की तकलीफें आपतक पहुंचाता है। मगर अपना कष्ट कभी नहीं कहता। इन सबके बीच वो खुश रहता है। जानते हैं क्यों? क्योंकि पत्रकार, पत्रकार होता है। उसे केवल इंसान समझने की गलती तो बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। वो ईश्वरीय प्रेरणा से कार्य कर रहा समाज का हितैषी केवल और केवल पत्रकार होता है। सभी पत्रकार बन्धुओं को उनके इस सम्मानित, प्रतिष्ठित सेवा कार्य के लिये बहुत बहुत साधुवाद...

Published / 2022-02-19 13:41:29
विपिन मिश्रा के स्त्रोत गायन के साथ तीन दिवसीय इटखोरी महोत्सव का आगाज

चतरा। जिले के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मां भद्रकाली परिसर में में आयोजित तीन दिवसीय सांकेतिक राजकीय इटखोरी महोत्सव का शुभारंभ स्त्रोत गायक विपिन मिश्रा के गायन और डमरू वादन व शंखनाद के साथ हुआ। इसके पूर्व राजकीय महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अथिति श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह व सिमरिया विधायक किसुन कुमार दास, चतरा उपायुक्त अंजली यादव, पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान सभी अतिथियों को पुष्प एवं शॉल देकर स्वागत किया गया। चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने कहा कि इटखोरी राजकीय महोत्सव 19 फरवरी 2015 से शुरू हुआ था यह जारी रहेगा। इटखोरी महोत्सव राज्य की सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है। मंत्री ने कहा कि इटखोरी महोत्सव हमसब के लिए गर्व का महोत्सव है। हमसब सौभाग्यशाली हैं माँ भद्रकाली हमारे चतरा जिले की धरती पर विराजमान हैं। आनेवाले वर्षों में यह कार्यक्रम बहुत ही धूमधाम से मनाया जाएगा। सिमरिया विधायक किशुन कुमार दास ने कहा कि माता के दरबार में सभी लोग सम्मिलित होकर महोत्सव मना रहे हैं यह सब माता की ही कृपा है। संबोधन के पश्चात स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। अतिथियों ने किया पौधरोपण : उद्घाटन से पूर्व माता भद्रकाली मंदिर परिसर में मुख्य अतिथि राज्य के श्रम नियोजन मंत्री सत्यानन्द भोगता, सांसद सुनील कुमार सिंह, विधायक किशुन दास, उपायुक्त अंजली यादव, पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने पौधारोपण किया। इससे पूर्व उन्होंने मां भद्रकाली की पूजा अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित सांकेति महोत्सव के आयोजन को लेकर साधना चबुतरा के समीप बनाए गए स्टेज पर पहुंचकर महोत्सव का शुभारंभ किया। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान चतरा उपायुक्त अंजली यादव, पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी सह मंदिर प्रबंधन समिति अध्यक्ष मुमताज अंसारी, जिलाध्यक्ष नवलकिशोर यादव, जिलाध्यक्ष अशोक शर्मा, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों समेत सैकड़ों गणमान्य मौजूद रहे।

Published / 2022-02-19 08:46:01
तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी इन रहस्यमयी बातों से वैज्ञानिक भी नहीं उठा पाये पर्दा

एबीएन डेस्क। भारत में कई चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं जिसमें दक्षिण भारत में स्थित भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर भी शामिल है। भगवान तिरुपति बालाजी का चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर भारत समेत पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर भारतीय वास्तु कला और शिल्प कला का उत्कृष्ट उद्धरण है। तिरुपति बालाजी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित है और यह भारत के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक है। तिरुपति बालाजी का वास्तविक नाम श्री वेंकटेश्वर स्वामी है जो स्वयं भगवान विष्णु हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान वेंकटेश्वर के सामने प्रार्थना करते हैं, उनकी सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक, यहां आकर तिरुपति मंदिर में अपने बाल दान करते हैं। इस अलौकिक और चमत्कारिक मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में... कहा जाता है भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर बाल लगे हैं जो असली हैं। यह बाल कभी भी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम रहते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान खुद विराजमान हैं। जब मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करेंगे तो ऐसा लगेगा कि भगवान श्री वेंकेटेश्वर की मूर्ति गर्भ गृह के मध्य में है। लेकिन आप जैसे ही गर्भगृह के बाहर आएंगे तो चौक जाएंगे क्योंकि बाहर आकर ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान की प्रतिमा दाहिनी तरफ स्थित है। अब यह सिर्फ भ्रम है या कोई भगवान का चमत्कार इसका पता आज तक कोई नहीं लगा पाया है। मान्यता है कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं जिसकी वजह से श्री वेंकेटेश्वर स्वामी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की परम्परा है। तिरुपति बाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा अलौकिक है। यह विशेष पत्थर से बनी है। यह प्रतिमा इतनी जीवंत है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे भगवान विष्णु स्वयं यहां विराजमान हैं। भगवान की प्रतिमा को पसीना आता है, पसीने की बूंदें देखी जा सकती हैं। इसलिए मंदिर में तापमान कम रखा जाता है। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी के मंदिर से 23 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है जहां गांव वालों के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। इस गांव लोग बहुत ही अनुशासित हैं और नियमों का पालन कर जीवन व्यतीत करते हैं। मंदिर में चढ़ाया जाने वाला पदार्थ जैसे की फूल, फल, दही, घी, दूध, मक्खन आदि इसी गांव से आते हैं। गुरुवार को भगवान वेंकेटेश्वर को चंदन का लेप लगाया जाता है जिसके बाद अद्भुत रहस्य सामने आता है। भगवान का श्रृंगार हटाकर स्नान कराकर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब इस लेप को हटाया जाता है तो भगवान वेंकेटेश्वर के हृदय में माता लक्ष्मी जी की आकृति दिखाई देती है। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता। यहां तक कि यह भी पता नहीं है कि दीपक को सबसे पहले किसने और कब प्रज्वलित किया था। भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर पचाई कपूर लगाया जाता है। कहा जाता है कि यह कपूर किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो पत्थर में कुछ समय में दरारें पड़ जाती हैं। लेकिन भगवान बालाजी की प्रतिमा पर पचाई कपूर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे पर दाईं तरफ एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में मान्यता है कि बाल्यावस्था में इस छड़ी से ही भगवान वेंकेटेश्वर की पिटाई की गई थी जिसकी वजह से उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई थी। तब से आज तक उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है। ताकि उनका घाव भर जाए। भगवान वेंकेटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनें तो समुद्र की लहरों की ध्वनि सुनाई देती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान की प्रतिमा हमेशा नम रहती है।

Published / 2022-02-19 00:27:30
कोयला खदान में भड़की आग हुई और तेज, तीन बस्तियों में हजारों की आबादी को खतरा

टीम एबीएन सीसीएल के नॉर्थ कर्णपुरा एरिया अंतर्गत केडीएच प्रोजेक्ट के करकट्टा स्थित बंद पड़ी अंडरग्राउंड कोयला खदान में लगी आग गुरुवार को और तेज हो गई। आशंका जतायी जा रही है कि अगर आग पर काबू पाने के लिए तत्काल प्रभावी उपाय नहीं किये गये तो खदान के पास की तीन बस्तियों करकट्टा, विश्रामपुर और खिलान धौड़ा की बड़ा आबादी खतरे में पड़ सकती है। इन तीनों बस्तियों में लगभग दो हजार लोग रहते हैं। यहां धरती फटने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और अब खदान में लगी आग ने भू-धंसान के खतरे को और बढ़ा दिया है। इस बीच सीसीएल केडीएच प्रोजेक्ट के महाप्रबंधक संजय कुमार की अगुवाई में एक टीम ने गुरुवार को खदान में आग वाली जगहों का मुआयना किया। इस खदान में बुधवार दोपहर अचानक आग भड़क उठी। आग की ऊंची लपटों के साथउठता धुएं का गुबार धुआं करकट्टा, विश्रामपुर एवं आस-पास के इलाकों की आवासीय कॉलोनियों में भी फैलने लगे। बुधवार की रात लोगों ने दहशत के बीच गुजारी। खदान के पास की ही बस्ती में रहनेवाले जिला परिषद के सदस्य रतिया गंझू बताते हैं कि बंद भूमिगत खदान से महीनों पहले से धुआं निकलता रहता था। बुधवार को आग लगने के बाद अब पूरे इलाके में कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैस फैल रही है। उनका कहना है कि आग के मुहानों को तत्काल बंद भी किया गया तो इससे भूमिगत आग पूरी तरह नहीं बुझने वाली। एकमात्र उपाय यही है कि इन तीनों बस्तियों के लोगों को मुआवजा देकर जल्द से जल्द कहीं और बसाया जाये। आलम यह है कि हादसे के भय से लोग रात में चैन से सो नहीं पा रहे। बता दें कि कर्णपुरा-देवलखांड-हेसालौंग (केडीएच) स्थित यह कोयला खदान पहले आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा चलायी जाती थी। बाद में खनन विस्तार के लिए जमीन न मिलने की वजह से लगभग दो साल पहले इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद यहां अवैध तरीके से माइनिंग के कई मुहाने खुल गये। एक हफ्ता पहले सीसीएल के सुरक्षा विभाग और पुलिस ने अवैध माइनिंग के कई मुहानों की डोजरिंग कर उन्हें बंद कराया था। अब उन्हीं जगहों पर आग लग गई है। स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो आउटसोर्सिंग कंपनी ने काम बंद करने के बाद खदानों को उसी हाल में छोड़ दिया, जबकि कायदे से सुरक्षित तरीके से डोजरिंग कर इसे बंद किया जाना चाहिए था। खदान बंद होने के बाद यहां अवैध तरीके से माइनिंग का बदस्तूर सिलसिला शुरू हो गया। सीसीएल प्रबंधन ने कई बार इसे रोकने के लिए कार्रवाई की, लेकिन देखते-देखते कोयला खनन के लिए दर्जनों सुरंगें बना दी गईं। ऐसी सुरंगें अक्सर हादसों का कारण बनती रही हैं। पिछले साल ऐसी ही एक सुरंग के धंसने से दो लोगों की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि खदान के अंदर मिथेन गैस का रिसाव होने से आग लगातार तेज होती जा रही है। सीसीएल केडीएच एरिया के जीएम संजय कुमार का कहना है कि आग बंद भूमिगत खदान में अवैध खनन की वजह से लगी है। इसे कैसे नियंत्रित किया जाये, इसपर विचार-विमर्श चल रहा है। आग के मुहानों को डोजरिंग के जरिए बंद करने की कोशिश की जायेगी।

Published / 2022-02-18 17:34:52
सावधान : पान और गुटखा के मसाले में कत्था की जगह मिलाया जा रहा केमिकल "गैंबियर"

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पान मसाले में कई कंपनियां कत्था नहीं बल्कि चमड़े को रंगने वाले केमिकल गैंबियर मिला रही हैं। अलीगढ़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लिए गए शिखर, प्रधान व पानबहार मसालों के नमूनों की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। गैंबियर कानपुर की टेनरियों में चमड़े को रंगने में प्रयोग किया जाता है। पान मसाले के सेवन से कैंसर हो सकता है। इसके बावजूद लोग इसका सेवन करते हैं। जिस पानमसाले में कत्था, केसर सहित अन्य पदार्थों के मिलाने का दावा किया जाता है। उसको लेकर चौंकाने वाला खुलासा अलीगढ़ में एफडीए द्वारा अक्तूबर 2021 में लिए पान मसाले की नमूना रिपोर्ट में हुआ है। विभाग ने उदयसिंह जैन रोड स्थित वार्ष्णेय एजेंसीज के यहां से शिखर, प्रधान व पानबहार पान मसाले का नमूना भरकर लेब्रोट्ररी में जांच के लिए भेजा था। अब लैब से आई रिपोर्ट में पान मसाले में कत्थे का मिश्रण नहीं पाया गया है बल्कि उसमें चमड़े को रंगने में प्रयोग किए जाने वाले गैंबियर मिलाने की पुष्टि हुई है। मामले में कंपनियों को नोटिस जारी किया है।

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