एबीएन डेस्क। अप्रैल से शुरू होने जा रहे शादियों के सीजन में इस बार धूम धड़ाका देखने को मिलेगा। कोरोना काल में प्रतिबंधों के चलते सुस्त रहे शादियों के सीजन की भरपाई इस साल होने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि अप्रैल से जून तक देशभर में बंपर शादियों का अनुमान है। कहा जा रहा है कि 14 अप्रैल से शुरू होने जा रहे शादियों के सीजन में अगले तीन महीने तक देशभर में लगभग 40 लाख शादियां होंगी। अनुमान के अनुसार, अकेले दिल्ली अप्रैल से जुलाई तक देशभर में होंगी 40 लाख शादियां, अकेले दिल्ली में 3 लाख बारातों में बजेगा बैंड-बाजा) में ही करीब 3 लाख शादियां होंगी। बंपर शादियों के चलते दिल्ली सहित देश के बाजार पूरी तरह तैयार है और 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की संभावनाएं है। दरअसल, इस वर्ष होली के त्योहारी सीजन में लगभग 30 प्रतिशत व्यापार वृद्धि से हुए जोरदार व्यापार से उत्साहित होकर दिल्ली सहित देशभर के व्यापारी अब शादी के सीजन की बिक्री की तैयारियों में जुट गए हैं। 14 अप्रैल से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलने वाले इस शादी के सीजन में देशभर में लगभग 40 लाख शादियों होने का अनुमान है और इस सीजन में लगभग 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार होगा। व्यापारी नेता और कंफेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि अकेले दिल्ली में ही इस सीजन में लगभग 3 लाख से ज्यादा शादियों होने का अनुमान है, जिससे दिल्ली में ही लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की संभावना है। खंडेलवाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना के पूरे प्रतिबंध हटने के बाद अब यह पहला मौका है, जब दिल्ली सहित देश भर के व्यापारी कोरोना से हुए व्यापार के नुकसान की कुछ भरपाई होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बीते दो वर्षों में कोविड एवं शादियों के बेहद कम मुहूर्त के दिन होने तथा सरकार द्वारा लगाए अनेक प्रतिबंधों के चलते शादियां बहुत ही छोटे स्केल पर व कम संख्या में हुई थी। अब लंबे अर्से के बाद शादियों के सीजन में मुहूर्त के अनुसार 43 दिन का इस बार शादियों का मुहूर्त आया है। कैट की आध्यात्मिक एवं वैदिक ज्ञान कमेटी के चेयरमैन तथा आचार्य दुर्गेश तारे ने बताया कि सनातन धर्म में पुराणों के अनुसार, तारों की गणना के हिसाब से अप्रैल महीने में 14 ,15 ,16 , 17 , 19, 20 , 21, 22 , 23, 24 एवं 27 जबकि मई महीने में 2 , 3, 9, 10, 11, 12, 15, 17, 19, 20, 21, 26, 27 एवं 31 तथा जून महीने में 1, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 13, 17, 23, 24 एवं जुलाई में 4, 6, 7, 8 एवं 9 है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अलावा आर्य समाज, सिख समाज, पंजाबी बिरादरी, अन्य धर्मों सहित अन्य अनेक वर्ग हैं, जो मुहूर्त के बारे में विचार नहीं करते, लेकिन फिर भी इस सीजन में ही अन्य अनेक लोग भी शादी करेंगे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वनोपज को बाजार और इससे जुड़े लोगों की समृद्धि के प्रति संजीदा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रयास के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस सिलसिले को और कारगर बनाने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए लाह की खेती को राज्य सरकार बढ़ावा दे रही है। राज्य की ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर आमदनी बढ़ोतरी के प्रयासों को महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के ज़रिए अमली जामा पहनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के ये किसान लाह एवं लाह की खेती के ज़रिये बेहतर आजीविका की ओर अग्रसर हो रहे हैं। लाह की खेती से महिलाएं ना सिर्फ अपने गांव में रहकर ही अच्छी आमदनी कर रहीं हैं, बल्कि राज्य में लाह उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के ज़रिए सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़कर अत्याधुनिक प्रशिक्षण के जरिए आमदनी बढ़ोतरी के प्रयास हो रहे हैं। इस पहल से राज्य की 73 हजार से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें ज्यादातर अति गरीब एवं वनों के आस-पास रहने वाले ग्रामीण परिवार हैं। इस साल करीब 2000 मीट्रिक टन छिला लाह का उत्पादन इनके द्वारा किया गया है। पश्चिमी सिंहभूम के गोईलकेरा प्रखंड के रूमकूट गांव की रंजीता देवी लाह की खेती से सालाना 3 लाख रुपए तक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। रंजीता देवी विगत कुछ सालों से आधुनिक तकनीक के ज़रिये वैज्ञानिक विधि से बिहन लाह की खेती कर रही हैं। सखी मंडल से जुड़ने के बाद उन्हें लाह की उन्नत खेती करने का प्रशिक्षण मिला। रंजीता देवी बताती हैं, दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण हमारी आजीविका मुख्यत: जंगल और वनोपज पर निर्भर करती है। हमारे परिवार में पहले भी लाह की खेती का कार्य किया जाता था, लेकिन सखी मंडल से जुड़ने के बाद हमे 25 दिनों की सीआरपी ड्राइव के द्वारा वैज्ञानिक विधि से लाह की खेती करना सिखाया गया। इस प्रकार सखी मंडल के माध्यम से लाह की आधुनिक खेती से सम्बंधित प्रशिक्षण के साथ 5 किलो बिहन लाह (बीज के रूप में) प्राप्त हुआ। लाह की खेती में रंजीता देवी कम खर्च में कई गुना ज्यादा उपज एवं मुनाफा कमा रही हैं। पिछले साल रंजीता ने 300 किलो बिहन लाह बीज के रूप में लगाया, जिससे उन्हें 15 क्विंटल लाह की उपज प्राप्त। उससे उन्हें 3 लाख रुपए की आमदनी हुई। उनका कहना है, सखी मंडल के माध्यम से हमें अपने पारंपरिक पेशे में ही स्थानीय आजीविका के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
एबीएन डेस्क। नए महीने की शुरुआत होने वाली है। अप्रैल में बैंकों की लंबी छुट्टियां हैं। अप्रैल महीने में बैंक 15 दिन बंद रहेंगे। जी हां RBI द्वारा बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में आधे महीने यानी 15 दिन बैंकों के कामकाज प्रभावित होंगे, बैंकों की छुट्टियां रहेंगी। हालांकि आपको बता दें कि ये छुट्टियां हर राज्य के हर शहर के बैंकों में एक साथ नहीं होगी,बल्कि आरबीआई द्वारा जारी बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट राज्यों और शहरों के आधार पर होती है। अप्रैल 2022 में बैंकों की लंबी छुट्टियां होने वाली है। आरबीआई द्वारा जारी छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक बैंक 15 दिन के लिए बंद रहेंगे। इन छुट्टियों मंब शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टियां भी शामिल हैं। चैत्र नवरात्र, महावीर जयंती, बैसाखी, बिहू, गुड फ्राइडे जैसे त्योहारों के कारण बैंक 15 दिन बंद रहेंगे। आपको बता दें कि बैंकों की छुट्टियां किसी राज्य या क्षेत्र विशेष तक ही सीमित हैं। इसलिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में छुट्टियां भी अलग-अलग दिन हैं। RBI द्वारा जारी बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक इसकी शुरुआत 1 अप्रैल से हो रही है। 1 अप्रैल को एनुअल क्लोजिंग के कारण आइजोल, चंडीगढ़, शिलॉन्ग, शिमला को छोड़कर देश के अधिकांश शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 2 अप्रैल को बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू, मुंबई, नागपुर, पणजी, श्रीनगर में बैंकों की छुट्टी होगी। इन शहरों में गुडी पड़वा, उगाडी फेस्टिवल, तुलुगु न्यू ईयर ,साजीबू नॉन्गमापनबा के कारण बैंक बंद रहेंगे। 3 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 4 अप्रैल को सरहुल के कारण रांची में बैंक बंद रहेंगे। 5 अप्रैल को बाबू जगजीवन राम का जन्मदिवस के कारण हैदराबाद में बैंक बंद रहेंगे। 9 अप्रैल को महीने का दूसरा शनिवार हैं, जिसके कारण बैंकों की छुट्टी होगी। 10 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 14 अप्रैल को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती, बैसाखी, तमिल न्यू ईयर डे, बोहाग बिहू के कारण शिलॉन्ग और शिमला को छोड़कर देशभर के बैंकों में छुट्टी रहेगी। आरबीआई की लिस्ट के मुताबिक 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे,बंगाली न्यू ईयर डे के कारण जयपुर, जम्मू, श्रीनगर के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 16 अप्रैल को गुवाहाटी में बैंकों की छुट्टी होगी। 17 अप्रैल को रविवार की छुट्टी के कारण बैंक बंद रहेंगे। 21 अप्रैल को गारिया पूजा के कारण अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 23 अप्रैल को चौथे शनिवार के कारण बैंकों की छुट्टी होगी तो 24 अप्रैल को रविवार के कारण देशभर के बैंक बंद रहेंगे। 29 अप्रैल को शब ए कादर के कारण जम्मू, श्रीनगर में सभी बैंक बंद रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस बात का पता पहले से ही था कि जैसे ही विधानसभा चुनाव का खुमार उतरेगा, पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ेंगे। वैसे ही हुआ, चुनाव खत्म होते ही उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका जोर से लगा है। पहले पेट्रोल-डीजल के थोक मूल्यों में वृद्धि हुई, फिर फुटकर दामों में वृद्धि हुई और मंगलवार को रसोई गैस में भी पचास रुपये की वृद्धि कर दी गई है, जो तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गई है। सरकार कह रही है कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में महज अस्सी पैसे की वृद्धि हुई है। लेकिन सवाल उठता है कि थोक मूल्य में जो पच्चीस रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है क्या उससे सार्वजनिक परिवहन व माल ढुलाई महंगी नहीं होगी? देर-सवेर उसका भार आम आदमी पर तो पड़ेगा ही। सरकार की दलील है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 2008 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है। इसकी कीमतों में करीब चालीस फीसदी का इजाफा हुआ है। दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं में महंगाई मुद्दा न बने इसके चलते तेल कंपनियों ने सरकार के दबाव में दाम नहीं बढ़ाए थे। सवाल उठना स्वाभाविक है कि चुनाव व सरकार बनने के बीच कीमतें बढ़ाने का यह खेल लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनपक्षीय कहा जा सकता है? वैसे महंगाई केवल पेट्रोलियम पदार्थों की ही बढ़ी हो, ऐसा भी नहीं है। पिछले दिनों दूध, सीएनजी व मैगी की कीमतों में वृद्धि हुई है। विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सीएनजी की कीमतें बढ़ा दी गई थीं। इसी तरह ज्यादा उपयोग किये जाने वाले मशहूर कॉफी ब्रांडों व चायपत्ती के दामों में बढ़ोतरी हुई है। उसी तरह अमूल, मदर डेयरी, पराग व वेरका आदि सहकारी दूध संघों ने भी दूध के दामों में वृद्धि की है। बल्कि कई राज्यों में तो वृद्धि का प्रतिशत ज्यादा भी है। चिंता की बात यह भी है कि कोरोना संकट से उपजे हालात में आय के संकुचन के चलते महंगाई की मार दोहरी नजर आ रही है। कह सकते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी नजर आने लगा है। दरअसल, यह महंगाई केवल भारत में ही हो, ऐसा भी नहीं है। दुनिया के तमाम देश महंगाई की बड़ी डोज से जूझ रहे हैं। कोरोना संकट के चलते सरकारों ने महामारी से लड़ने के लिये जो अधिक मुद्रा बाजार में उतारी, वह भी महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह रही है। दुनिया के दूसरे बड़े तेल उत्पादक देश रूस व गैस आपूर्तिकर्ता यूक्रेन के युद्ध में उलझने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। आपूर्ति कम होने से दाम बढ़ने स्वाभाविक थे। यही वजह है कि देश में एलपीजी के दाम गत वर्ष अक्तूबर के बाद इस माह बढ़े हैं। वैसे ही डीजल व पेट्रोल के दाम भी करीब साढ़े चार माह बाद बढ़े हैं। विधानसभा चुनाव के चलते लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब फिर से दाम बढ़ने से लोग व्यथित हैं। देश के कई भागों में लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है। वैसे आशंका जतायी जा रही है कि आने वाले दिनों में पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में और वृद्धि हो सकती है। लेकिन इसके बावजूद सरकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कोरोना संकट से उपजे हालात में महंगाई के चलते तमाम जरूरी चीजें आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर निकल रही हैं। सरकार से संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद की जा रही थी क्योंकि कोरोना संकट के चलते लाखों लोगों की नौकरियां गई हैं और करोड़ों लोगों की आय का संकुचन हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की उम्मीद थी। बाजार में खाद्य तेल व अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुएं महंगाई के चलते आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। यह सवाल भी आम आदमी को मथ रहा है कि जब विश्व बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने का तुरंत लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिलता तो उसके महंगे होने पर तुरंत महंगा क्यों किया जाता है?
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भोले बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए खुशखबरी है। 2019 के तीन साल बाद अमरनाथ की यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है। अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी। इसके साथ ही रोजाना यात्रा का कोटा बढ़ाकर 15 से 20 हजार कर दिया गया है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अलग से होगी। माना जा रहा कि 42 दिन की इस यात्रा में श्रद्धालुओं की सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की बैठक रविवार को केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में श्री अमरनाथ की यात्रा को लेकर फैसला लिया गया। बता दें कि साल 2019 में आर्टिकल 370 हटने के कारण अमरनाथ यात्रा को मध्य में ही रोक दिया गया था। वहीं साल 2022-21 में कोरोना के कारण यात्रा नहीं हो पाई थी। अब जब कोरोना की रफ्तार थमने लगी है और सभी कोरोना पाबंदियां हटा ली गई हैं तो इस साल 2022 में अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है। इसी बीच आज हुई बैठक में यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को कायम रखने के लिए चर्चा की गई। साथ ही केंद्र सरकार से यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को यकीनी बनाने के लिए अपील की गई है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। सर्दियों का मौसम बीत चुका है और गर्मी का प्रवेश हो चुका है। इस बार मार्च के महीने में ही जम कर गर्मी पड़ रही है। अभी अप्रैल, मई और जून बाकी है। मौसम विभाग अभी से ही हीट वेव यानी लू की चेतावनी जारी करने लगा है। गर्मी आते ही हमारा सबसे प्राइमरी फ्रेंड होता है- पंखा। हम कहीं बाहर से घर में एंटर करते ही सबसे पहले पंखे का स्विच दबाते हैं। पिछले कुछ दशकों में भले ही कूलर और एसी आ गए हैं, लेकिन एक लंबे समय तक पंखा ही हमें गर्मी से राहत दिलाने का साधन हुआ करता था। आज भी देश की आबादी का एक बड़ा तबका गर्मियों में पंखे के सहारे ही राहत पाता है। जैसा कि आप जानते ही होंगे कि बिजली और बैट्री से चलने वाले पंखे से सदियों पहले हाथ से चलने वाले पंखे होते थे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पंखे की शुरुआत कैसे हुई? कैसे यह आधुनिक होता चला गया और वर्तमान स्वरूप में उपलब्ध हुआ? पेड़ के पत्ते के होते थे पंखे : आज भले ही बिजली से चलने वाले पंखे उपलब्ध हैं, लेकिन सदियों पहले पेड़ के पत्तों से पंखे बनाए जाते थे। करीब 4000 ईसा पूर्व इनका जिक्र आता है। ये पंखे, बड़े पेड़ के पत्ते होते थे, जिन्हे राजा-महाराजाओं के सेवक उन्हें हंकने यानी हवा करने के लिए इस्तेमाल किया करते थे। इसका पहला उदाहरण मिस्त्र में देखने को मिलता है। बहुत सारे लोग मानते हैं कि इंसानों द्वारा खुद से चलाए जाने वाले पंखे का आविष्कार चीन में हुआ था। फिर हमारे देश में भी हाथ से हंकने वाले पंखे का आविष्कार हुआ। अभी भी गांवों में ऐसे पंखे दिख जाते हैं, जिन्हें बड़े-बुजुर्ग हाथ से घुमाकर चलाया करते हैं। फिर आए बिजली वाले पंखे : बिजली के आविष्कार में माइकल फैराडे का अहम योगदान रहा है। इसके बाद थॉमस एडिसन और निकोला टेस्ला ने बिजली को आधुनिक और विस्तारित रूप देना शुरू किया। साल 1982 में शूयलर स्काट्स व्हीलर ने इंसान के बिना पंखे को मोड़ने के लिए बिजली का इस्तेमाल किया। तब बिजली के पंखे में सिर्फ दो ब्लेड हुआ करते थे। यह टेबल फैन की तरह हुआ करता था और उसमें किसी तरह की जाली नहीं लगी हुई थी। सीलिंग फैन का आगमन : साल 1889 में सीलिंग फैन यानी छत की सतह से लगने वाले पंखे अस्तित्व में आए। इसे फिलिम एच डाइहली ने पेटेंट करवाया था। इसमें लोहे की एक बड़ी मोटी रॉड हुआ करती थी और इसका वजन काफी ज्यादा हुआ करता था। शुरुआत में कई ऐसे पंखे दिखे, जिनमें 4 ब्लेड हुआ करती थीं। ये पंखे आज की तरह बहुत तेज नहीं चला करते थे। लेकिन धीरे चलने पर भी ये अच्छी हवा देते थे। साल 1902 में पंखे बनाने वाली कंपनियां बाजार में आईं. इसके बाद आम घरों में इस्तेमाल होने वाले पंखे बनाए जाने की शुरुआत हुई। पुराने पंखों की तुलना में ये पंखे कुछ सुगम थे, वजन में हल्के थे लेकिन बहुत आसानी से उपलब्ध नहीं थे। इसी साल AC यानी एयर कंडीशनर की भी खोज हुई थी। करीब 8 साल बाद कंपनियों की प्रतिस्पर्धा के बीच घरों में लगने वाले पंखे बिक्री के लिए बाजार में आसानी से उपलब्ध हो गए और इस तरह पंखे के एक नए युग की शुरुआत हुई। वर्ष 1932 में इमर्सन इलेक्ट्रिक ने मार्केट में पहला फ्लोर फैन उतारा। लोकप्रियता पर असर पर बना रहा बाजार : 1960 के दशक में एसी का मार्केट उभरने लगा था। बेहतर ठंडक के लिए एसी लोगों की पसंद बनने लगा। ऐसे में पंखों की लोकप्रियता पर असर हुआ। कंपनियों ने पंखे को अत्याधुनिक बनाने पर काम शुरू कर दिया। पंखे के डिजाइन, खूबसूरती, सुगमता पर काम करने के बाद कंपनियों ने ग्राहकों के सामने ढेर सारे विकल्प उपलब्ध कराए। एसी की सीमा यह थी और अब भी है कि यह बंद कमरों के लिए है, जबकि खुली जगहों पर आज भी पंखे ही ठंडक पहुंचाने का प्रमुख विकल्प हैं। दूसरी बड़ी बात इसकी प्राइस को लेकर है। पंखे की तुलना में एसी काफी महंगे आते हैं। ऐसे में पंखों का मार्केट बना रहा, जो आज भी बना हुआ है। एसी ने लोगों को मजे तो दिए लेकिन बिजली का बिल आज भी चिंता का विषय बना हुआ है। इसलिए बाजार में पंखों की मांग बनी हुई है। एक बड़े तबके के लिए पंखा ही गर्मी में राहत देता रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आस्था और भक्ति किसी धर्म की चौहद्दी की बंदिनी नहीं हो सकती। एक धर्म जब दूसरे धर्म को आत्मा से अपनाता है, तो किसी भी धर्म की हानि नहीं होती। वास्तव में इसी प्रकार की आस्था और भक्ति को महानता का प्रतिबिंब कहा जाता है और इसके उदाहरण हैं इश्तियाक अहमद खान। उन्होंने विराट रामायण मंदिर बनने के लिए ढाई करोड़ की 23 कट्ठा जमीन देकर इसी महानता का परिचय दिया है। इश्तियाक जमींदार परिवार से आते हैं। मुस्लिम परिवार से आते हुए भी उन्होंने पूरी आस्था के साथ जमीन दान में दी है। इश्तियाक गुवाहाटी में व्यवसायी हैं। इश्तियाक और उनके परिजनों ने बीते बुधवार को पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया निबंधन कार्यालय में 23 कट्ठा जमीन को विराट रामायण मंदिर के नाम निबंधित करा दिया। सरकारी मुआवजा के हिसाब से जमीन का मूल्य ढाई करोड़ से अधिक आंका गया है। 125 एकड़ जमीन पर बनेगा भव्य मंदिर : इश्तियाक अहमद खान ने 21 मार्च को पटना के महावीर मंदिर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। बताया कि हमने देखा कि विराट रामायण मंदिर का कार्य जमीन की वजह से रुक रहा है, तो हमने कमिटमेंट किया कि हम जमीन फ्री ऑफ कॉस्ट देंगे और हमने दिया। महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इसके पहले भी इश्तियाक अहमद खान के परिजनों ने विराट रामायण मंदिर लिए जमीन लेने में बहुत सहयोग किया है। महावीर मंदिर की इस अति महत्वपूर्ण परियोजना के लिए कैथवलिया में जमीन देने की शुरुआत भी खान परिवार ने ही की। विराट रामायण मंदिर के लिए अब तक एक सौ एकड़ जमीन मिल चुकी है। 25 एकड़ जमीन और मिलनी है। कुल 125 एकड़ जमीन पर संसार का सबसे ऊंचा और विशालतम मंदिरों में एक विराट रामायण मंदिर का निर्माण होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोदी ने उन 29 पुरावशेषों का निरीक्षण किया, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया से भारत वापस लाया गया है। थीम के मुताबिक, पुरावशेष 6 व्यापक श्रेणियों में हैं – शिव और उनके शिष्य, शक्ति की पूजा, भगवान विष्णु और उनके रूप, जैन परंपरा, चित्र और सजावटी वस्तुएं। पीएमओ ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि ये मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की सामग्री – बलुआ पत्थर, संगमरमर, कांस्य, पीतल, कागज में निष्पादित मूर्तियां और पेंटिंग हैं। भारत में एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए प्राचीन वस्तुएं राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से हैं। बता दें कि ये पुरावशेष अलग-अलग समय अवधि से आते हैं, जो 9-10 शताब्दी ईस्वी पूर्व के हैं भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर सम्मेलन आज : बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन आज यानी सोमवार को एक डिजिटल शिखर बैठक करेंगे, जिसमें व्यापार एवं निवेश के क्षेत्रों सहित दोनों पक्षों के बीच संपूर्ण व्यापक रणनीतिक संबंधों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है। मोदी और मॉरिसन के बीच जून 2020 में हुई पहली डिजिटल शिखर बैठक के बाद सोमवार को बैठक होने वाली है। उस वक्त भारत-आस्ट्रेलिया संबंध को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाया गया था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि मॉरिसन भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की एक निवेश योजना की घोषणा करेंगे। इसमें स्वच्छ प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के लिए 183 करोड़ रुपये तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में संबंध बढ़ाने के लिए 136 करोड़ रुपये शामिल हैं। बैठक में दोनों पक्षों के दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक विशेष घोषणा करने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया वैश्विक लिथियिम उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्पादित करता है और उसके पास विश्व के लिथियम भंडार का करीब 20 प्रतिशत है। 1500 करोड़ रुपये का निवेश द्विपक्षीय संबंध में किया गया सबसे बड़ा निवेश होगा : सूत्रों ने बताया कि 152 करोड़ रुपये का कुल पैकेज अलग से नए केंद्र स्थापित करने के लिए रखा जाएगा जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे, 97 करोड़ रुपये अलग से कौशल विकास के लिए और 136 करोड़ रुपये अंतरिक्ष में सहयोग बढ़ाने के लिए होगा। उन्होंने बताया कि 1500 करोड़ रुपये का निवेश ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंध में किया गया सबसे बड़ा निवेश होगा। सूत्रों ने बताया कि सम्मेलन में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच युवा रक्षा अधिकारियों के आदान-प्रदान के कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का नाम भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल विपिन रावत के नाम पर होने की संभावना है, जिनकी मौत पिछले साल दिसंबर में हेलीकॉप्ट दुर्घटना में हो गई थी।
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