एबीएन सोशल डेस्क। वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा अर्चना के बाद आज सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। जिस वक्त कपाट खुले उस वक्त भक्तों की खुशी देखने लायक थी, बहुत सारे श्रद्धालु इस दौरान सेना बैंड की धुनों पर थिरकते नजर आए। कपाट खुलने के साथ ही अब भक्तगण चारों धामों के दर्शन कर पाएंगे। इससे पहले केदारनाथ, गंगोत्री औऱ यमुनोत्री के कपाट खुल चुके हैं। मालूम हो कि चारों धाम के दर्शन के लिए सरकार ने कुछ संख्या निर्धारित की है। जिसके अनुसार रोजाना गंगोत्री में 7000, यमुनोत्री में 4000, केदारनाथ में 12, 000 और बद्रीनाथ धाम में 15000 भक्त दर्शन कर सकते हैं। बता दें कि आस्था का मानक बद्री विशाल का ये मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। बद्री विशाल भगवान विष्णु के ही एक रूप हैं, जो कि मंदिर में 6 महीने में नींद में रहते हैं और छह महीने जागते हैं, इस मंदिर में एक अंखड जीप जलता रहता है, जिसे ज्ञानज्योति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि इस धाम के चौखट पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति का कष्ट दूर हो जाता है। बद्री विशाल का मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है इस धाम के बारे में कहा जाता है कि मां गंगे जब धरती पर अवतरित हुई थीं तो 12 धाराओं में बंट गई थीं, हर धारा का कुछ नाम है, बद्रीनाथ धाम की धारा को अलकनंदा कहते हैं। यह मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो कि शालग्रामशिला से बनी हुई है। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसका निर्माण कराया था। यहां हर साल मूर्ति मेला भी लगता है और आपको बता दें कि बर्दी विशाल के यहां आप पांच रूप देखने को मिलते हैं इसलिए इन्हें "पंच बद्री" भी कहा जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा यहां पर अन्य 4 स्वरूपों के मंदिर भी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश में काशी, प्रयागराज और बिठूर में गंगा नदी के तट पर हर शाम होने वाली गंगा आरती का दायरा बढ़ाकर अब गंगा की सहायक नदियों पर भी हर शाम गंगा आरती की शुरुआत होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल गंगा स्वच्छता अभियान को विस्तार देते हुए गंगा नदी के साथ उसकी सहायक नदियों को भी संरक्षित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इसके लिए "नमामि गंगे परियोजना" के तहत गंगा को स्वच्छ बनाने में जुटी योगी सरकार की नई योजना से सहायक नदियों के घाटों की भी सूरत बदली जाएगी। राज्य सरकार की ओर से गुरुवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा से मिलने वाली रामगंगा, बेतवा, घाघरा, सरयू, राप्ती, वरुणा, काली, यमुना, हिंडन, गर्गो, केन, गोमती और सई के किनारे घाटों की सूरत बदली जाएगी। इन्हीं नदियों के घाटों को गंगा आरती के व्यापक दायरे में शामिल किया जायेगा। इसके तहत नदी के किनारे बने पुराने घाटों को संवारने के साथ गंगा किनारे के गांवों में गंगा मेले जैसे आयोजन भी शुरू होंगे। इस संबंध में नमामि गंगे परियोजना से इन घाटों की सूरत बदलने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश अफसरों को दिये गये हैं। गंगा नदी के किनारे घाटों को सुंदर बनाने, नए घाटों को विकसित करने और नदी किनारे बसे गांव में गंगा मेला जैसे आयोजन की कार्ययोजना को तेजी से पूरा करने के लिये कहा गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में बिजनौर से शुरू होकर काशी, प्रयागराज, कानपुर के रास्ते बलिया होकर बिहार जाने वाली गंगा में गिरने वाले नालों को बड़े स्तर पर अभियान चलाकर राज्य सरकार ने या तो रोक दिया है या उनको टैप कर दिया गया है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यहां बड़े-बड़े एसटीपी बनाये गये हैं और कई जगह पर गंगा में गिरने वाले नालों को बंद करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार का ध्यान अब गंगा में मिलने वाली नदियों के प्रदूषण को रोकने पर है जिससे गंगा को और स्वच्छ बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि तय योजना के मुताबिक प्रदेश भर में गंगा में कही न कहीं मिलने वाली नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का बीड़ा उठाया गया है। इन नदियों में गिरने वाले सीवेज को चिन्हित करके उनको बंद करने के साथ नदी के दोनों किनारों पर बसे गांव, शहरों और कालोनियों के लोगों को जागरूक करने के प्रयास शुरू होंगे। नदियों के घाटों को सुंदर बनाकर स्थानीय लोगों को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक रूप से जोड़ने की अनूठी योजना भी बनाई गयी है।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस,हिंदी प्रचारिणी सभा, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था मुंबई के द्वारा श्रीराम कथा विश्व संदर्भ महाकोश के 55 खंडीय् परियोजना के अंतर्गत (इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण) से संबंधित शोध कार्य के लिए साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था,मुंबई के सचिव प्रोफेसर प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में 8 मई 2022 से 14 मई 2022 तक मॉरीशस में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है जिसमें हिंदी के वैश्विक प्रसार में रामकथा की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों द्वारा चर्चा की जाएगी। 4 दिनों तक चलने वाले इस सेमिनार में साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई के 28 सदस्य रिसोर्स पर्सन/ विषय-विशेषज्ञ/ वक्ता एवं प्रतिभागी के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी साहित्य, कला एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार है।
एबीएन सोशल डेस्क। आज भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम की जयंती है। माना जाता है कि मान्यता है कि भगवान परशुराम का अवतार पृथ्वी पर अन्याय के प्रति न्याय का प्रतिपादन, दुष्टों का नाश और धर्म राज्य की स्थापना करने के लिए हुआ था। वहीं, जब भी परशुराम जी की बात होती है तो उनके धरती को क्षत्रिय विहीन करने की कहानियां और उनके फरसे से जुड़ी कहानियां जरूर सुनाई जाती है। फरसे को परशुराम का हथियार माना जाता है और इस फरसे से ही उन्होंने दुष्टों का नाथ किया था। कहा जाता है कि परशुराम जी का ये ही फरसा झारखंड में रांची के पास एक गांव में गड़ा हुआ है। कहा जाता है कि झारखंड के रांची शहर से 150 किलोमीटर दूर घने जंगलों में परशुराम जी का फरसा आज भी गड़ा हुआ है। इस जगह का नाम है गुमला और इसे टांगीनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। इस जगह को परशुराम की तप स्थल माना जाता है। लोगों का कहना है कि हजारों साल से यह फरसा खुले आसमान के नीचे गड़ा है, लेकिन इस फरसे पर जंग नहीं लगी है। इस वजह से इस फरसे की काफी मान्यता है। टांगीनाथ कहे जाने की वजह बता दें कि फरसे को झारखंड की स्थानीय भाषा में टांगी कहा जाता है और इस वजह से टांगीनाथ धाम कहा जाता है। यह फरसा नाटकों या टीवी में दिखाए गए फरसे से थोड़ा अलग है और यह त्रिशूल के आकार का है। जंग न लगने को माना जाता है चमत्कार : टांगीनाथ में जिस फरसे को परशुराम जी का कहा जाता है, वो फरसा लोहे का है। कहा जाता है कि यह हजारों सालों से यहां जमीन में गड़ा है और खुले आसमान के नीचे है। यानी इस फरसे के ऊपर कोई शेल्टर आदि नहीं लगाया गया है और बारिश, धूप में यह ऐसे ही रहता है। इतने साल से खुले में रखे इस फरसे की खास बात ये ही मानी जाती है कि इसमें अभी तक जंग नहीं लगी है और इस परशुराम का चमत्कार माना जाता है। लोगों का मानना है कि पानी और हवा के संपर्क में आने से लोहे में जंग लगना काफी आम है, लेकिन इस फरसे के साथ ऐसा नहीं है और अभी तक जंग नहीं लगी है। हालांकि, कई जानकारों का कहना है कि कुछ खास तरह के लोहे के वजह से भी जंग नहीं लगती है। परशुराम जी ने की थी तपस्या परशुराम जी का फरसा गड़े होने की लोक कथा के साथ ही कहा जाता है कि इस जगह पर परशुराम जी ने कई सालों तक तपस्या की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार लोगों का मानना है कि पिता जमदग्नि के कहने पर परशुराम ने अपनी माता रेणुका का सिर धड़ से अलग कर दिया था। इसके बाद फिर पिता से मिले वरदान में उन्हें दोबारा जीवित भी करवाया, लेकिन मातृ हत्या के दोष से मुक्त होने के लिए उन्होंने टांगीनाथ में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और दोष मुक्त हुए। वहीं, कई लोग इस तपस्या को भगवान राम पर क्रोधित होने से जोड़ते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने रविवार को कहा कि देश के पास खाद्य तेलों का पर्याप्त भंडार है और वह इनके दामों एवं आपूर्ति संबंधी हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत के पास सभी खाद्य तेलों का पर्याप्त भंडार है। उद्योग के सूत्रों ने बताया कि देश में सभी खाद्य तेलों का वर्तमान भंडार लगभग 21 लाख टन है और करीब 12 लाख टन मई में आएगा। इसमें कहा गया कि इस तरह इंडोनेशिया द्वारा पाम तेल के निर्यात पर लगाई गई पाबंदी को भी देखते हुए देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश के कुल खाद्य तेल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी करीब 62 फीसदी है। बयान में कहा गया, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग कीमतों और उपलब्धता की स्थिति पर नजर रख रहा है। प्रमुख खाद्य तेल प्रसंस्करण संघों के साथ नियमित बैठकें हो रही हैं जिनमें घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में कमी लाने और उपभोक्ताओं के राहत देने पर बात होती है। इसमें कहा गया, खाद्य तलों के अंतरराष्ट्रीय मूल्य पर दबाव है क्योंकि वैश्विक उत्पादन घटा है और कई देशों में निर्यात कर बढ़ा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की उपराजधानी दुमका से बड़ी खबर है। जरमुंडी स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर में बड़ा हादसा होते-होते बचा। मंदिर के गर्भगृह में अचानक करंट दौड़ गई। इससे मंदिर में अफरा तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि एसी के तार में लीकेज की वजह से गर्भगृह की दीवार में करंट दौड़ गई। बाबा बासुकीनाथ मंदिर में नियमित दिनचर्या के अनुसार रविवार को भी मंदिर परिसर में पूजा अर्चना चल रही थी। इसी बीच अचानक गर्भगृह के अंदर करंट दौड़ गई। अंदर मौजूद एक श्रद्धालु ने करंट महसूस किया। शोर मचाने पर सभी लोग बाहर निकल गए। आनन-फानन में पूरे मंदिर परिसर की बिजली काट दी गयी। उसके बाद गर्भगृह के बिजली कनेक्शन को डिस्कनेक्ट करने के बाद मंदिर परिसर की बिजली चालू की गई। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन अभी भी कोई गर्भगृह के अंदर नहीं जा रहा है। बिजली विभाग के टेक्नीशियन वहां काम कर रहे हैं। इस बीच मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु बाहर से ही पूजा कर रहे हैं। जरमुंडी बीडीओ के नेतृत्व में बिजली विभाग की टीम मंदिर के बिजली कनेक्शन और वायरिंग की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि एसी के तार में लीकेज की वजह से दीवार में करंट आ गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि 2020 में भी एक बार ऐसी घटना हो चुकी है जिसमें एक पुरोहित की मौत हो गई थी और कई श्रद्धालु झुलस गए थे। मंदिर में बार-बार घट रही इस तरह की घटना से जिला प्रशासन व मंदिर पशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की चाल दुनियाभर के खगोल प्रेमियों को आज (30 अप्रैल) आंशिक सूर्यग्रहण का दृश्य दिखाएगी। हालांकि, उस वक्त भारत में रात होने के कारण देश में साल का यह पहला ग्रहण नजर नहीं आएगा। उज्जैन की प्रतिष्ठित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, भारतीय मानक समय के मुताबिक आंशिक सूर्यग्रहण की शुरुआत 30 अप्रैल और 1 मई के बीच रात 12 बजकर 15 मिनट और तीन सेकंड पर होगी और यह रात दो बजकर 11 मिनट व दो सेकंड पर अपने चरम पर पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि ग्रहण के चरम पर सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस तरह आ जाएगा कि पृथ्वीवासियों को सौरमंडल का मुखिया सूर्य 63.9 प्रतिशत ढंका नजर आएगा। श्री गुप्त ने बताया कि आंशिक सूर्यग्रहण भारतीय मानक समय के मुताबिक एक मई को तड़के चार बजकर सात मिनट व पांच सेकंड पर खत्म होगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह अद्भुत खगोलीय घटना दक्षिणी अमेरिका के दक्षिणी भाग, आंतरिक उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी प्रशांत महासागर और दक्षिणी अटलांटिक महासागर क्षेत्र में देखी जा सकेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की कर्ताधर्ता संस्था श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को रविवार को गंभीर हालत में लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेदांता अस्पताल से जारी बुलेटिन के मुताबिक 84 वर्षीय महंत नृत्य गोपाल दास को मूत्र नली में संक्रमण और गुर्दे की गंभीर समस्या के चलते रविवार दोपहर करीब 12 बजकर 30 मिनट पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद महंत नृत्य गोपाल दास का तुरंत इलाज शुरू किया गया। उन्हें क्रिटिकल केयर विभाग के चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। उनकी हालत गंभीर मगर स्थिर है। महंत नृत्य गोपाल दास अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन्हें नवंबर 2020 में भी सांस लेने में परेशानी थी। इसके बाद अक्टूबर 2021 में कोविड-19 संक्रमण से संक्रमित होने के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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