एबीएन सोशल डेस्क। 25 मई से सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो गया है, जो 2 जून तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में सूर्य की किरणें अत्यंत तीव्र होती हैं, जिससे धरती पर भीषण गर्मी पड़ती है तथा तापमान में लगातार वृद्धि होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस काल में लू एवं हीट वेव का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा जारी हीट वेव एडवाइजरी के अनुपालन हेतु झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं तथा बीमार व्यक्तियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं के संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।संजय सर्राफ ने कहा कि भारत सरकार एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर लोग स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि अत्यधिक आवश्यक होने पर ही दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढंककर रखें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए ओआरएस, नींबू पानी, छाछ, लस्सी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को धूप में खेलने से बचाना चाहिए तथा खुले स्थानों पर काम करने वाले मजदूरों एवं श्रमिकों को समय-समय पर विश्राम एवं पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। हल्के रंग के सूती एवं ढीले कपड़े पहनना गर्मी से बचाव में सहायक होता है। बासी भोजन एवं अत्यधिक मसालेदार खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
उन्होंने समाजसेवी संस्थाओं, विद्यालयों एवं आम नागरिकों से भी आग्रह किया कि वे जरूरतमंद लोगों को पानी, छाया एवं प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक जागरूकता एवं सावधानी से ही नौतपा और हीट वेव के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। जनता को सजग एवं सतर्क रहकर सुरक्षित रहने की आवश्यकता है।
एबीएन सोशल डेस्क। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा जारी नौतपा एवं हिट वेव एडवाइजरी के अनुपालन एवं हेतु अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय सचिव मनोज बजाज ने सम्पूर्ण भारत के अग्रवाल समाज से अपील की है कि भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं सलाहों की भीषण गर्मी एवं लू के प्रभाव से बचाव हेतु सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, होटल, मकानों एवं अन्य धार्मिक, सामाजिक संस्थानों को आवश्यक सावधानियाँ अपनानी चाहिए।
समाज मारवाड़ी समाज के सभी प्रतिष्ठानों में ठंडे पेयजल, ओआरएस, ग्लूकोज, नींबू पानी आदि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया ताकि श्रमिकों, कर्मचारियों एवं आमजनों को गर्मी से राहत मिल सके साथ ही अपने अपने क्षेत्रों के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक संगठनों से अपनी ओर से भी जन-जागरूकता हेतु अपील जारी करने का आग्रह किया।
विदित हो कि इस वर्ष नौतपा आज 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक रहेगा। भारतीय परंपरा और ज्योतिष में नौतपा को वर्ष का सबसे गर्म दौर माना जाता है, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है और धरती पर तेज गर्मी पड़ती है।
इन नौ दिनों में तापमान काफी बढ़ सकता है, जिससे लू और डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। इसलिए दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीते रहें, आम पानी, बेल शरबत, नारियल पानी, जूस का अधिक से अधिक सेवन और हल्का एवं पौष्टिक भोजन करें तथा बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
श्री मनोज बजाज ने सम्पूर्ण समाज से निवेदन किया है कि आपसब इस नौ दिन के नौ तपा मे कम से कम घर से बाहर निकले। इसी के साथ अपना और अपने परिवार का इस प्रचण्ड गर्मी से बचाव करते हुये उनका ख्याल रखे। इसके अतिरिक्त लू से प्रभावित व्यक्तियों के प्राथमिक उपचार एवं त्वरित चिकित्सा सहायता यथा संभव उपलब्ध कराने के उपायों के साथ स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियों का पालन करें।
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बसंत मित्तल ने कहा कि भीषण गर्मी एवं हिट वेव की स्थिति को देखते हुए सभी औद्योगिक एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सामाजिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कर्मचारियों, श्रमिकों एवं ग्राहकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। श्री मित्तल ने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज के बिना बिल्कुल अधूरा है।
अग्रवाल समाज की लोक गाथा गाई जाती हैं। आज राष्ट्रीय स्तर पर जितने भी धर्मशाला, पशालाएं, सराय, स्कूल, कॉलेज, मंदिर, देवरों, बाबरी अग्रवाल समाज की पहचान है। ऐसे में समाज आगे आकर इस जन सेवा संकल्प में अपनी महत्ती भूमिका दर्ज करें। उक्त जानकारी अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय सचिव मनोज बजाज ने दी।
टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में 267 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया।
दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया। इसके पश्चात महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, बोतल बंद जलजीरा शर्बत एवं आलू चिप्स का पैकेट का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 1500 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया।
भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों द्वारा सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया।
ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 4 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, उन्होंने बताया कि 25 मई दिन सोमवार को गंगा दशहरा के अवसर पर मंदिर एवं अपना घर आश्रम में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल,शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, विशाल जालान, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, अमिता जालान, संजय सर्राफ सहित अनेक श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एबीएन सोशल डेस्क । विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में पुरुषोत्तम अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष पद्मिनी एकादशी 27 मई दिन बुधवार को मनाई जाएगी। यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जाती है, क्योंकि यह केवल अधिक मास में ही आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने तथा व्रत रखने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का वर्णन पुराणों में मिलता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस एकादशी का नाम पद्मिनी इसलिए पड़ा क्योंकि यह माता लक्ष्मी के पद्म अर्थात कमल स्वरूप से जुड़ी हुई मानी जाती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावकारी माना गया है।धार्मिक दृष्टि से पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित करते हैं।
अनेक भक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखकर पूरे दिन भजन-कीर्तन एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कई गुना फल प्रदान करता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
पद्मिनी एकादशी का उद्देश्य केवल उपवास करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है। यह व्रत व्यक्ति को भौतिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित करता है। एकादशी का उपवास शरीर और मन दोनों को शुद्ध करने का माध्यम माना गया है। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आत्मबल में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक मास में आने वाली यह एकादशी साधना और तपस्या के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव का आगमन होता है। जिन लोगों के जीवन में आर्थिक, मानसिक या पारिवारिक कठिनाइयाँ होती हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
पद्मिनी एकादशी हमें धर्म, संयम, सेवा और सदाचार का संदेश देती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक परंपराओं को सशक्त बनाने का माध्यम है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पावन, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा।
मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप एवं पूजा-अर्चना कर अपने पापों से मुक्ति और जीवन मेंसुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं, किंतु उनके वेग को संभालना असंभव था।
तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया और पृथ्वी पर अवतरित किया। इसी दिव्य अवतरण की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि मानव जीवन में पवित्रता, सेवा, संयम और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है। दशहरा शब्द का अर्थ है दस प्रकार के पापों का नाश।
धार्मिक मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने एवं श्रद्धा भाव से पूजा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस दिन ओम नम: शिवाय तथा गंगे हरि मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर दीपदान करते हैं तथा गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल एवं जलदान करते हैं। गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है।
मां गंगा को केवल नदी नहीं बल्कि मोक्षदायिनी देवी माना गया है। भारतीय संस्कृति में गंगा जीवन, शुद्धता और आस्था की प्रतीक हैं। गंगा जल को पवित्र एवं अमृत समान माना जाता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हिंदू संस्कारों में गंगाजल का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था गंगा से जुड़ी हुई है। यह पर्व हमें जल संरक्षण और नदियों की स्वच्छता का संदेश भी देता है।
आज बढ़ते प्रदूषण के कारण नदियों का अस्तित्व संकट में है। ऐसे में गंगा दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण का भी प्रेरणादायक अवसर बन गया है। हमें मां गंगा सहित सभी नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाये रखने का संकल्प लेना चाहिए।
गंगा दशहरा भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और अध्यात्म का अनुपम संगम है। यह पर्व हमें भक्ति, सेवा, दान, सदाचार और प्रकृति के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है। मां गंगा की कृपा से मानव जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। इसलिए यह पर्व भारतीय जनमानस में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद्, चिंतक एवं आधुनिक भारतीय नवजागरण के जनक माने जाने वाले राजा राममोहन राय की जयंती प्रतिवर्ष 22 मई को मनाई जाती है।
उनका जन्म 22 मई 1772 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के राधानगर गांव में हुआ था। राजा राममोहन राय ने भारतीय समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों, अंधविश्वासों एवं सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा प्रदान की।
उनकी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को स्मरण करने का दिन नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, समानता और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देने का अवसर भी है।राजा राममोहन राय ने उस समय समाज सुधार का कार्य प्रारंभ किया,जब भारतीय समाज अनेक कुप्रथाओं से ग्रसित था।
उन्होंने विशेष रूप से सती प्रथा, बाल विवाह, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई। उनके अथक प्रयासों और संघर्ष के परिणाम स्वरुप वर्ष 1829 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया। यह भारतीय समाज सुधार के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है।राजा राममोहन राय आधुनिक शिक्षा के भी प्रबल समर्थक थे।
उनका मानना था कि समाज के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच और आधुनिक शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा, विज्ञान, गणित और आधुनिक विषयों के अध्ययन को बढ़ावा दिया। साथ ही भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को भी महत्व दिया। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता और आत्मविश्वास उत्पन्न करने का प्रयास किया।
उन्होंने वर्ष 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य धार्मिक आडंबरों, मूर्तिपूजा और अंधविश्वासों का विरोध करते हुए नैतिकता और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना था। ब्रह्म समाज ने भारतीय समाज में धार्मिक एवंसामाजिक चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।राजा राममोहन राय जयंती का मुख्य उद्देश्य समाज को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरित करना है।
यह दिवस हमें महिलाओं केसम्मान, शिक्षा के प्रसार, सामाजिक समानता, मानवाधिकार और सामाजिक सुधार के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं एवं विभिन्न संगठनों द्वारा इस अवसर पर संगोष्ठी, विचार गोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
राजा राममोहन राय भारतीय पत्रकारिता के भी अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन किया। उनके विचार आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे। उन्होंने भारतीय समाज को आधुनिकता, विवेकशीलता और सामाजिक न्याय की राह दिखाई।
आज आवश्यकता है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता, शिक्षा, नारी सम्मान और मानवता के मूल्यों को मजबूत करें। राजा राममोहन राय जयंती हमें यह संदेश देती है कि जागरूक नागरिक ही एक सशक्त और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद की प्रांत मातृशक्ति, प्रांत सामाजिक समरसता, प्रांत कार्यकारिणी एवं रांची महानगर के कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय बैठक आज हरमू रोड स्थित प्रांत कार्यालय, शक्ति आश्रम में संपन्न हुई। बैठक में विशेष रूप से विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन सहमहामंत्री विनायक राव देशपांडे उपस्थित थे।
बैठक में संगठनात्मक विषय के साथ-साथ आयाम के कार्यों पर योजना बनायी गयी। 24 से 31 मई तक चतरा में वार्षिक दुर्गा वाहिनी प्रशिक्षण वर्ग, 30 मई से 10 जून तक बोकारो में परिषद शिक्षा वर्ग, 2 जून से 10 जून तक बोकारो में बजरंग दल शौर्य प्रशिक्षण वर्ग तथा 20 से 23 अगस्त को मातृशक्ति प्रशिक्षण वर्ग चलेगा।
1 अक्टूबर 2026 को पूज्य अशोक सिंघल का जन्म शताब्दी एवं संत रविदास जी का 650 वीं जयंती प्रांत के प्रखंड स्तर तक बनाने का निर्णय लिया गया। जून, जुलाई व अगस्त में तीन दिवसीय जिला अभ्यास वर्ग के माध्यम से कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण दी जायेगी। 20 जनवरी से 6 दिसंबर तक त्रिवर्षीय हितचिंतक अभियान चलाया जायेगा, इस निमित्त आगामी अक्टूबर एवं नवंबर माह में प्रखंड स्तर पर व्यापक बैठक की जायेगी।
बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विहिप के केंद्रीय संगठन सहमहामंत्री विनायक राव देशपांडे ने कहा समाज के सभी घटकों के साथ संपर्क, संबंध, सेवा एवं संतों के प्रवास के द्वारा समरस बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा आज कुटुम्ब व्यवस्था में कई प्रकार की त्रुटियां हो रही है, जिससे परिवार के संस्कार प्रभावित हो रहे हैं इसके लिए हमें साप्ताहिक संस्कार केंद्र प्रत्येक गांव- मोहल्ले में चलना होगा।
गौसंरक्षण के लिए गौशाला संपर्क, पंचगव्य औषधि एवं वस्तु निर्माण, भारतीय नस्ल का गोपालन, जैविक खेती, किसान प्रशिक्षण पर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बहनों के कौशल विकास के लिये सिलाई प्रशिक्षण, मेहंदी लगाने का प्रशिक्षण, संस्कारशाला को बढ़ावा देना होगा। युवाओं के विकास के लिए कंप्यूटर शिक्षा प्रशिक्षण जैसे कौशल विकास पर भी ध्यान देना होगा।
बैठक में क्षेत्र मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद जी, प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, पद्मश्री महावीर नायक, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री रामनरेश सिंह, मनोज पोद्दार प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल प्रांत संयोजक कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख जुगल किशोर प्रसाद, सहप्रमुख अवतार सिंह गांधी, धर्म प्रसार प्रांतप्रमुख संजय चौरसिया, मातृशक्ति प्रमुख दीपा रानी कुंज, सह प्रमुख अनिमा पांडे, सविता सिंह, कुंती सिंह, प्रांत सेवा प्रमुख विनय कुमार, सह प्रमुख अशोक अग्रवाल, प्रांत विशेष संपर्क सह प्रमुख प्रिंस अजमानी, प्रांत सत्संग प्रमुख रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन, प्रांत समरसता सह प्रमुख मनोज चंद्रवंशी, दीपक कुमार महतो, मनोज प्रसाद, महेंद्र नाथ, केशव चंद्र साय, अनूप यादव, कुलदीप सिंह, जगदीश मंडल, रामप्रताप सिंह, कौलेश्वर टुडू, देवीलाल मुर्मू, दीपक मंडल, विजय यादव, सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।
टीम एबीएन, रांची। भीषण गर्मी में राहगीरों एवं जरूरतमंदों को शीतल जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा द्वारा संचालित तीसरे स्थायी प्याऊ का उद्घाटन समारोह हर्ष, उत्साह एवं सेवा भाव के साथ सम्पन्न हुआ। यह स्थायी प्याऊ हनुमान मंदिर, हरिहर सिंह रोड के सामने, टैगोर हिल लेन, मोराबादी, रांची में समाज को समर्पित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों एवं गणमान्य लोगों ने सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि प्यासे को पानी पिलाना केवल सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सबसे सुंदर समर्पण है। मंच द्वारा किया गया यह प्रयास समाज में सेवा, संस्कार एवं सामाजिक समर्पण का प्रेरणादायी संदेश देता है।
मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा द्वारा निरंतर जनसेवा के विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्थायी प्याऊ की यह पहल राहगीरों के लिए गर्मी में राहत का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
इस अवसर पर शाखा अध्यक्ष विकास अग्रवाल ने कहा भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को शुद्ध एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना सबसे बड़ा पुण्य एवं मानव सेवा है। मारवाड़ी युवा मंच रांची शाखा सदैव सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती रही है और आगे भी समाजहित के कार्य निरंतर जारी रखे जाएंगे। हमारा प्रयास है कि शहर के अधिक से अधिक क्षेत्रों तक यह सेवा पहुंचे, ताकि कोई भी व्यक्ति प्यासा न रहे। उन्होंने बताया की रांची में कुल 11 स्थायी प्याऊ क्षेत्रों में लगाये जा चुके हैं और आज के स्थायी प्याऊ सोनीत अग्रवाल के सहयोग से लगाया गया है।
शाखा सचिव मुकेश शर्मा ने कहा स्थायी प्याऊ एवं वाटर कूलर फ्रीजर की यह व्यवस्था राहगीरों, श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। मंच द्वारा बहुत जल्द शहर के अन्य विभिन्न क्षेत्रों में भी अतिरिक्त वाटर कूलर फ्रीजर लगाने की योजना बनायी गयी है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को गर्मी में राहत मिल सके।
कार्यक्रम में मंच के पदाधिकारीगण, सदस्यगण एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस सेवा कार्य को समाजहित में अत्यंत सराहनीय बताया तथा भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यों के लिए मंच को शुभकामनाएं दीं। जहां सेवा का भाव होता है, वहीं समाज में सम्मान और अपनापन स्वत: बढ़ता है। इस कार्यक्रम के संयोजक योगेश्वर अग्रवाल, संकेत सरावगी एवं गौतम अग्रवाल थे। उक्त जानकारी मंच के प्रवक्ता अमित शर्मा ने दी।
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