टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्रीराधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में 274 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवामहाप्रसाद का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर मंदिर में श्री राधा रानी जी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार आकर्षक आभूषणों एवं मनोहारी पुष्पों से किया गया, दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ महाप्रसाद का भोग लगाया। इसके पश्चात महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी,लीची जूस, एवं आलू चिप्स का पैकेट का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया।
मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग 2 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन संध्या कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों द्वारा सुमधुर एवं मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे तथा पूरा मंदिर परिसर राधे-कृष्ण एवं श्याम के जयकारों से कृष्णमय एवं भक्तिमय हो गया।
तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती का आयोजन किया गया, ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा लगभग 5 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान के दर्शन किये। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, विजय अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, संजय सर्राफ, सुरेश भगत, पवन पोद्दार, ज्ञान प्रकाश शर्मा सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली मानी जाती है। इस विशेष नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी साधना की जाती है।
इन विद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल है, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्र इस वर्ष 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। यह नौ दिवसीय पर्व देवी शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक साधना तथा तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
सामान्यत: चैत्र और शारदीय नवरात्र पूरे देश में व्यापक रूप से मनाए जाते हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इन दिनों में साधक, संत, योगी और तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले श्रद्धालु विशेष रूप से माँ आदिशक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्र का वर्णन विभिन्न पुराणों एवं तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है।
कथा के अनुसार, एक समय देवर्षि नारद ने भगवान से प्रश्न किया कि ऐसे गृहस्थ और साधक, जो गुप्त रूप से देवी की आराधना करना चाहते हैं, उनके लिए कौन-सा श्रेष्ठ समय है। तब देवी उपासना के लिए आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्र का महत्व बताया गया। माना जाता है कि इन दिनों में श्रद्धापूर्वक की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है तथा साधक को माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
गुप्त नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री-की विधिवत पूजा की जाती है। भक्त कलश स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र तथा मंत्र-जप के माध्यम से मां भगवती का आह्वान करते हैं। अनेक श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखकर सात्विक जीवन अपनाते हैं और सेवा, दान तथा संयम का पालन करते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्र का प्रमुख उद्देश्य मन, वचन और कर्म की शुद्धि, आत्मबल की वृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची साधना बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा में निहित है। इस अवधि में की गयी प्रार्थना, ध्यान और जप व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा मानसिक शांति का संचार करते हैं।
यह पर्व साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। आषाढ़ गुप्त नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला दिव्य अवसर है। यदि इन नौ दिनों में श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक माँ भगवती की उपासना की जाये, तो जीवन में सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी विशेषता और सार्थकता है।
एबीएन सोशल डेस्क। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 10 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी उत्सव अत्यंत धूमधाम एवम भग्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर रजनीगंधा, गुलाब, बेला, गैंदा, तुलसीदल की मालाओं से श्री श्याम प्रभु का श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवं बजरंगबली का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।
रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच पावन ज्योत प्रज्वलित की गयी। श्री श्याम तुम्हारे कदमों में हम नजर बिछाए बैठे हैं, हारे का सहारा है बाबा श्याम हमारा, अपने दिल का हाल सुनावन आयां हां, बस इतनी तमन्ना है हे श्याम तुम्हें देखूं... इत्यादि मधुर भजनों की लय पर भग्तगण श्री श्याम प्रभु को रिझाते रहे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया।
रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम में गोपी किशन ढांढनियां, ओम जोशी, रमेश सारस्वत, बालकिशन पररमपुरिया, नितेश लाखोटिया, चंद्र प्रकाश बगला, धीरज बंका, अभिषेक डालमिया, राजेश सारस्वत, विकास पाडिया का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में योगिनी एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं सेवा भाव के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।
पूरे दिन मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण, हरिनाम संकीर्तन एवं भगवान श्री राधा-कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान रहा। योगिनी एकादशी के अवसर पर श्री राधा रानी का नवीन दिव्य वस्त्रों एवं आकर्षक आभूषणों से भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं लोक-कल्याण की मंगलकामना की। दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लड्डू, फल, खिचड़ी एवं मेवा सहित विविध प्रकार के महाप्रसाद का विधिवत भोग भगवान को अर्पित किया। भोग के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना।
भजन- जागरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ट्रस्ट के भजन गायक मनीष सोनी ने श्री राधा-कृष्ण एवं प्रभु भक्ति पर आधारित सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके गाये भजनों में योगिनी एकादशी आई हरि नाम की ज्योत जगाई..,राधे राधे जपो निरंतर, मिट जाये हर संताप। एकादशी का पुण्य पाकर, भर जाए जीवन आप.., हरि नाम से बढ़कर जग में, कोई नहीं आधार। राधा कृष्ण कृपा बरसाएं, हो सब का उद्धार।
श्रद्धालु भजनों की मधुर धुनों पर भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते रहे। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता संजय सर्राफ ने योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि यह एकादशी पापों के क्षय, आत्मशुद्धि, ईश्वर भक्ति तथा सेवा-साधना का महान पर्व है।
उन्होंने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत एवं भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। संजय सर्राफ ने बताया कि योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर बेंगलुरु निवासी अनिष्क नारायण के सौजन्य से सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में रह रहे 50 से अधिक निराश्रितों को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया। ट्रस्ट ने इसे मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानने की प्रेरणादायी पहल बताया।
इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, सुरेश अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, संजय सर्राफ, अरविंद अग्रवाल, प्रभास गोयल, विशाल जालान, सुरेश चौधरी, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, सुरेश भगत, ज्ञान चंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, बरियातू/ रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वाल्मीकि नगर द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर एक विशेष युवा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पीएचईडी कॉलोनी स्थित आरटीसी हाई स्कूल (जैक बोर्ड) के परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के युवाओं और विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए वाल्मीकि नगर (बरियातू क्षेत्र) के सह नगर संघचालक अभिनव शाह ने कहा कि समाज और राष्ट्र में किसी भी बड़े और सकारात्मक बदलाव की शुरूआत हमेशा खुद से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, बड़े बदलाव के लिए हमें स्वयं से प्रारंभ करना होगा।
अपने ओजस्वी उद्बोधन में श्री शाह ने युवाओं को राष्ट्र के प्रति उनके नागरिक कर्तव्यों का बोध कराया।
उन्होंने वर्तमान समय में स्व आधारित जीवन (स्वदेशी, स्वावलंबन और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव) की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं होगा और अपने जीवन को स्व के गौरव से नहीं जोड़ेगा, तब तक परम वैभवशाली राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।
संघ शताब्दी वर्ष के माध्यम से समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं को इस विचार दर्शन से जोड़ने का संकल्प लिया गया है। इस कार्यक्रम के सफल संचालन और संयोजन में आयोजक मंडल के रूप में संघ के सह नगर कार्यवाह मनीष, रितेश कुमार, आदर्श कुमार एवं कृष्ण कुमार की प्रमुख भूमिका रही।
इसके साथ ही विद्यालय के शिक्षकगण और युवा प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति के संकल्प और सुमधुर वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ। उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वाल्मीकि नगर के प्रचार विभाग के संजीत कुमार ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के सत्र 2025झ्र27 की एकदिवसीय तृतीय कार्य समिति की बैठक आगामी 19 जुलाई को देवघर जिला मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में जैन मंदिर, देवघर में आयोजित की जायेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श किया जायेगा। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आये प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक की अध्यक्षता सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल करेंगे। संगठन की मजबूती, सेवा कार्यों के विस्तार तथा आगामी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के दौरान पिछली कार्य समिति की बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जायेगी। इसके साथ ही प्रांतीय महामंत्री द्वारा संगठन की गतिविधियों से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा।
बैठक में अंकेक्षित आय-व्यय का अनुमोदन भी किया जायेगा, जिससे संगठन की वित्तीय पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। इसके अतिरिक्त सम्मेलन के संविधान संशोधन से संबंधित प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिये जायेंगे। संगठन के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष अपने अनुभव एवं मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करेंगे तथा संगठन को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी देंगे।
बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य आगामी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना भी रहेगा। इस दौरान विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों, सुझावों एवं योजनाओं से कार्य समिति को अवगत कराएंगे, ताकि पूरे प्रदेश में सम्मेलन की गतिविधियों का प्रभावी विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।
प्रांतीय महामंत्री श्री जैन ने बताया कि इस बैठक में रांची से 20 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे, जबकि झारखंड के विभिन्न जिलों से भी 200 से भी अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। संगठन की भावी दिशा, सेवा कार्यों की गति तथा संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण के दृष्टिकोण से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी मानी जा रही है। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा की गई थी। इस दिवस को मनाने की प्रेरणा 11 जुलाई 1987 को मिली, जब विश्व की जनसंख्या पाँच अरब के आँकड़े तक पहुँच गई थी।
तब से यह दिन बढ़ती जनसंख्या, संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा सतत विकास के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी चुनौतियों, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, महिलाओं के सशक्तिकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
यह दिवस इस बात पर बल देता है कि जनसंख्या केवल संख्या नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता, अवसर और अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।वर्तमान समय में विश्व की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के कारण भोजन, पानी, ऊर्जा, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन तथा जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
भारत विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में शामिल है। ऐसे में परिवार नियोजन, छोटे परिवार का महत्व महिलाओं की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य, पोषण तथा जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। जब प्रत्येक परिवार शिक्षित, स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम होगा, तभी देश का समग्र और सतत विकास संभव हो सकेगा।
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वास्थ्य संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा संगोष्ठियाँ, जागरूकता रैलियाँ, स्वास्थ्य शिविर, पोस्टर प्रतियोगिताएँ तथा जनजागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों तथा जिम्मेदार अभिभावक बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।
विश्व जनसंख्या दिवस हमें यह संदेश देता है कि संतुलित जनसंख्या ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। यदि हम शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और परिवार नियोजन को प्राथमिकता दें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। यही इस दिवस का वास्तविक उद्देश्य और सबसे बड़ा संदेश है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में समाजसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से होती है और इसका जीवंत उदाहरण हैं समाजसेवी एवं बजरंग दल के पूर्व संयोजक उमेश सिंह वर्षों से निस्वार्थ भाव से मानव सेवा में जुटे उमेश सिंह ने एक बार फिर जरूरतमंद की मदद कर यह साबित कर दिया कि रक्तदान वास्तव में महादान है।
बुधवार को गढ़ा टोली निवासी प्रीति खालको को गर्भावस्था के दौरान ऑपरेशन के लिए चिकित्सकों ने एक यूनिट ओ पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता बताई थी।जैसे ही इसकी सूचना उमेश सिंह को मिली, वे बिना किसी देरी के सदर अस्पताल पहुंचे और रक्तदान कर प्रीति खालको की सहायता की।समय पर मिले रक्त से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली। उमेश सिंह अब तक सैकड़ों बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुके हैं।
उनकी पहचान ऐसे समाजसेवी के रूप में है जो दिन हो या रात, किसी भी जरूरतमंद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उन्होंने न केवल स्वयं अनेक बार रक्तदान किया है, बल्कि हजारों युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया है। उनके प्रयासों से कई लोगों की जान बच चुकी है और अनेक परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।
समाज में ऐसे लोग प्रेरणा के स्रोत होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के मानव सेवा को अपना धर्म मानते हैं। उमेश सिंह का यह सेवा भाव युवाओं के लिए अनुकरणीय है। यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करें,तो रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी।
उमेश सिंह ने सभी स्वस्थ लोगों से अपील की कि वे समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करें,क्योंकि आपका एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। उनका यह कार्य समाज के लिए प्रेरणा है और मानवता की सच्ची सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
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