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Published / 2022-02-02 16:40:31
सरकारी योजनाओं से आत्मनिर्भर हो रहीं राज्य की ग्रामीण महिलाएं

एबीएन डेस्क। झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन योजनाओं से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक हालत सुधारी, बल्कि गांव के लोगों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया। इन योजनाओं के तहत राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को मेट बनाने का भी कार्य कर रही है। ये मेट गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, उन योजनाओं से जोडने की पहल, गांव में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में संलग्न करते हुए उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान समेत अन्य कार्य करतीं हैं, जिसके एवज में राज्य सरकार उन्हें राशि का भुगतान करती है। अब ये मेट अपने आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करते हुए गांव के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं। लोहरदगा की 8वीं पास अवेदा खातून ने मेट बनने के बाद अपने अपने परिवार का भरण पोषण बेहतर ढंग से कर रही है। अवेदा कहती है मेट के रूप में उसका काम करने का अनुभव अच्छा रहा है। गरीब ग्रामीणों को कार्य देकर उन्हें समय पर भुगतान करा कर काफी खुशी होती है। अवेदा मेट के रूप में चयन होने से पहले खेती-मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी। अब मेट बनने के बाद उसका परिवार आर्थिक रूप से अच्छा हो गया है।

Published / 2022-01-31 17:38:33
झारखंड : रेशम की वैज्ञानिक खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

एबीएन डेस्क। झारखंड में चक्रधरपुर के मझगांव के सुदूरवर्ती गांव की निवासी इंदिरावती तिरिया रेशम के धागों को बनाने के लिए कोकून की टेस्टिंग माइक्रोस्कोप से कर अपने जीवन में चमक बिखेर रही है। इंदिरावती आज कहती हैं, मैंने तो कभी माइक्रोस्कोप का नाम भी नहीं सुना था। लेकिन आज मैं उसका बखूबी टेस्टिंग में इस्तेमाल कर लेती हूं। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। तसर खेती के अलावा हमारे परिवार के पास कमाई का और कोई साधन नहीं है। हम रेशम खेती पर ही पूरी तरह से निर्भर हैं। मुझे कभी लगा नहीं था कि तसर मेरे लिए इतना फायदेमंद साबित होगा। मुझे सरकार से प्रशिक्षण मिला। आज सालाना 1, 69,000 रुपये तक की आमदनी कर रही हूं। इंदिरावती जैसी करीब 18 हजार महिलाएं अब बदलते समय के साथ वैज्ञानिक तरीके से रेशम की खेती कर अपनी आजीविका को नया आयाम दे रही हैं। जेएसएलपीएस सीईओ नैन्सी सहाय ने सोमवार को बताया कि हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद राज्य के वनोपजों से आजीविका सशक्तिकरण के जरिए ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इस ओर कदम बढ़ाते हुए प्राकृतिक रूप से तसर की खेती के लिए उपयुक्त झारखंड में सखी मंडल की दीदियों के जरिए रेशम की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देकर सुदूर ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त किया जा रहा है। कभी रेशम की खेती में होने वाले घाटे से जो परिवार तसर की खेती करना छोड़ चुके थे, वेद आज वैज्ञानिक तरीके से तसर की खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं और दूसरों को भी इससे जोड़ रहे हैं। सहाय ने बताया कि झारखड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी द्वारा क्रियान्वित रेशम परियोजना के जरिए बदलाव की यह कहानी लिखी जा रही है। वनों से भरपूर झारखण्ड के सुदूर जंगली इलाकों में वनोपजों को ग्रामीण परिवार की आजीविका से जोड़ने की मुख्यमंत्री की यह पहल सफल साबित हो रही है।

Published / 2022-01-30 14:13:02
कल छात्राओं, महिला उद्यमियों और टीचरों को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग के 30वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग, राज्य सरकारों के महिला एवं बाल विभाग, विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों के शिक्षक, छात्र, स्वयंसेवी, महिला उद्यमी और व्यावसायिक सहयोगी हिस्सा लेंगे। PMO ने बताया कि मोदी आयोग के 30वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को सोमवार शाम साढ़े 4 बजे वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को उजागर करना है। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद होंगी।

Published / 2022-01-30 12:42:59
डॉ शकुंतला मिश्र और राम उचित सिंह को 2022 का प्रफुल्ल सम्मान

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 30 जनवरी 2022 को नागपुरी भाषा परिषद की ऑनलाइन मीटिंग आयोजित हुई। इस वर्चुअल मीटिंग में नागपुरी साहित्य के पुरोधा प्रफुल्ल कुमार राय की जयंती मनाने पर विचार विमर्श किया गया। प्रफुल्ल कुमार राय की जयंती 8 फरवरी को मनाई जाएगी। परिषद की ओर से इस बार नागपुरी भाषा साहित्य के लिए समर्पित डॉ शकुंतला मिश्र और नागपुरी लोक गायक एवं गीत रचयिता राम उचित सिंह को प्रफुल्ल सम्मान - 2022 देने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष डॉ राम प्रसाद, उपाध्यक्ष उमेश नंद तिवारी, महासचिव डॉ शकुंतला मिश्रा, डॉ सविता केसरी सहित अन्य साहित्य सेवियों ने भी मार्गदर्शन दिया। अध्यक्ष डॉक्टर राम प्रसाद ने कहा कि इस सम्मान से नागपुरी में सृजनात्मक कार्य को बढ़ावा मिलेगा। नागपुरी साहित्य को बढ़ावा देने में दोनों की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि डॉ शकुन्तला मिश्र की लिखित एवं संपादित 32 पुस्तकें हैं जिनमें से अधिकांश नागपुरी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में सम्मिलित हैं। साथ ही झारखण्ड झरोखा के माध्यम से नौ भाषाओं के पाठ्यक्रम की पुस्तकों का प्रकाशन करके उन्होंनेे सभी नौ जनजातीय एएवं क्षेत्रीय भाषा-साहित्य की महती सेवा की है।उपाध्यक्ष उमेश नंद तिवारी ने कहा कि प्रफुल्ल कुमार राय की नागपुरी साहित्य साधना आज के युवाओं और नागपुरी प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी है। कार्यक्रम का संचालन डॉ रामकुमार और धन्यवाद ज्ञापन ड कोरनेलियुस मिंज ने किया। वर्चुअल मीटिंग में परिषद के सक्रिय सदस्य शामिल हुए।

Published / 2022-01-29 17:43:42
राज्य के दुर्गम गांवों को रोशन कर रहे सोलर पावर प्लांट

टीम एबीएन, रांची। सौर ऊर्जा से झारखंड के सुदूर और दुर्गम स्थानों पर स्थित गांव अब रोशनी से जगमग हो रहे हैं। झारखंड राज्य के ये वैसे गांव हैं, जहां ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकरण संभव नहीं हो पाया था। अंतत: कुल 246 गांवों में सोलर पावर प्लॉट (मिनी और माइक्रो), सोलर स्टैण्ड एलोन सिस्टम से विद्युतीकरण किया गया है। वहीं वैसे अविद्युतीकृत घर, जिसके रहवासी विद्युत से वंचित रह गये थे, ऐसे 209 गांवों में क्रमश: 3494 एवं 4245 अविद्युतीकृत घरों अर्थात कुल 7740 घरों को सोलर स्टैण्ड ऍलोन सिस्टम से विद्युतीकृत किया गया है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा वैसे सुदूरवर्ती गांवों को चिह्नित किया गया, जहां अबतक पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत आपूर्ति या दुर्गम पहाड़यिों एवं वनों से आच्छादित होने के कारण पारंपरिक ऊर्जा स्रोत से विद्युत आपूर्ति बहाल करना वित्तीय एवं भौगोलिक दृष्टिकोण से व्यवहार्य नहीं था। ऐसी स्थिति में वैसे गांवों को सोलर एनर्जी के माध्यम से विद्युतीकृत किया गया, जिससेे न सिर्फ उक्त ग्रामों की ऊर्जा की आवश्यकता को पूर्ण किया जा सका, बल्कि ऐसे गांवों को आर्थिक रूप से सुद्दढ़ बनाने के लिए ग्रामीण औधोगिकीकरण की संभावनाओं को देखते हुए विद्युत की आवश्यकता को पूर्ण किया जा रहा है।

Published / 2022-01-29 09:16:22
मोबाइल रिचार्ज : अब साल में नहीं होंगे 13 महीने, 28 की जगह 30 दिनों की मिलेगी वैलिडिटी

एबीएन डेस्क। अगर आप भी कोई प्रीपेड मोबाइल प्लान रिचार्ज कराते वक्त ये सोचते हैं कि इस प्लान में 28 की जगह 30 दिन क्यों नहीं मिलते तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। अब आप जल्द ही 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्रीपेड प्लान से भी अपना मोबाइल रिचार्ज करा सकेंगे। RAI ने शुक्रवार को सभी टेलीकॉम कंपनियों को मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी 28 दिन की बजाय 30 दिन देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनी को अपने प्लान में अब एक स्पेशल वाउचर, एक कॉम्बो वाउचर पूरे महीने की वैलिडिटी के साथ रखना होगा। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों के मौजूदा प्लान में 28 दिन की वैलिडिटी होती है, जिसकी वजह से कस्टमर्स को एक साल में 13 बार मंथली रिचार्ज कराना होता है। ट्राई के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि ग्राहकों की ओर से एक साल में कराए गए रिचार्ज की संख्या में कमी आएगी। ऐसा होने से ग्राहकों के एक महीने के एक्स्ट्रा रीचार्ज के पैसे बचेंगे। इसके साथ ही ट्राई ने ये भी कहा कि कंपनियों को कम से कम एक ऐसा प्लान वाउचर, एक स्पेशल टैरिफ वाउचर और एक ऐसा कॉम्बो वाउचर जरूर ऑफर करना चाहिए जिन्हें हर महीने एक ही तारीख को रिन्यू कराया जा सके। ट्राई के इस नए बदलाव से यूज़र्स को काफी फायदा पहुंचेगा और उन्हें अपनी सहूलियत के हिसाब से सही वैलिडिटी वाले प्लान्स के ज्यादा ऑप्शन भी मिलेंगे। ट्राई ने कहा कि उसे यूजर्स से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें मंथली प्लान्स के लिए साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है और इससे उन्हें ठगा हुआ महसूस होता है। अब ट्राई के इस आदेश का टेलीकॉम कंपनियों ने विरोध किया है। वोडाफोन-आइडिया का कहना है कि 28 दिन, 54 दिन या 84 दिन की वैलिडिटी वाले किसी भी प्लान में बदलाव करने से बिल साइकिल में काफी गड़बड़ी आ जाएगी, इसके साथ ही कंपनी को कन्ज्यूमर अवेयरनेस और रिटेल चैनल एजुकेशन के लिए भी काफी मेहनत करनी पड़ेगी।

Published / 2022-01-27 07:39:19
ध्वजारोहण, झंडोत्तोलन और झंडा फहराने में क्या है फर्क...

एबीएन डेस्क। प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन राजपथ पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं। वहीं स्वतंत्रता दिवस इसी तरह 15 अगस्त को लाल किले पर मनाया जाता है लेकिन इन दोनों दिवस में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के तरीकों में अंतर है। 26 जनवरी को झंडा फहराया जाता है; लेकिन 15 अगस्त को ध्वजारोहण अथवा झंडोत्तोलन होता है। 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस वाले दिन राष्ट्रीय ध्वज को ऊपर खींचा जाता है और फिर फहराया जाता है। दरअसल जिस दिन भारत को आजादी मिली थी उस दिन ब्रिटिश गवर्नमेंट ने अपना झंडा उतारकर भारत के तिरंगे को ऊपर चढ़ाया था, इसलिए हर साल 15 अगस्त को तिरंगा ऊपर खींचा जाता है फिर फहराया जाता है। इस प्रक्रिया को ध्वजारोहण कहते हैं। वहीं, 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस वाले दिन राष्ट्रीय ध्वज ऊपर बंधा रहता है उसे केवल फहराया जाता है। यही वजह है कि उसे ध्वजारोहण नहीं बल्कि झंडा फहराना कहते हैं। 26 जनवरी को राष्ट्रपति ही क्यों फहराते हैं तिरंगा : प्रधानमंत्री देश का राजनीतिक प्रमुख होता है जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है। देश का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था। क्योंकि उससे पहले न देश में संविधान था और न राष्ट्रपति का पद। इसी वजह से हर साल 26 जनवरी को राष्ट्रपति ही राष्ट्रीय ध्वज "तिरंगा" फहराते हैं।

Published / 2022-01-27 04:47:14
चुनावी राज्यों में जोरों पर चल रहा दलबदल का कारोबार

एबीएन डेस्क। जहां-जहां इन दिनों चुनाव हैं, वहां-वहां दलबदल का कारोबार पूरे जोर-शोर से चल रहा है। जहां चुनाव नहीं हैं, वहां भी लोगों को राष्ट्रहित बहुत तेजी से याद आ रहा है। कई नेताओं को यह याद आ रहा है कि जिस पार्टी में वे हैं, उस पार्टी में रहकर देशसेवा और देश की तरक्की नहीं की जा सकती। इसका मतलब यह है कि हमारे देश के बहुत सारे नेता गलत पार्टियों में हैं, इसीलिए देश की तरक्की नहीं हो सकती। दलबदल करने वाले नेताओं की मानें, तो देश की सबसे बड़ी समस्या यही है कि जिसे भाजपा में होना चाहिए, वह कांग्रेस में है, और जिसे समाजवादी पार्टी में होना चाहिए, वह भाजपा में है। जिसे बसपा में होना चाहिए, वह किसी और पार्टी में है और जिसे किसी और पार्टी में होना चाहिए वह किसी अन्य पार्टी में है। इसका मतलब यह है कि जिसे जिस पार्टी में होना चाहिए, वह उसमें पहुंच जाए, तो अपने देश का कल्याण हो जाए। सवाल यह है कि ऐसे लोग हमारे नेता क्यों हैं, जिन्हें बरसों तक यही समझ में नहीं आता कि उन्हें किस सियासी पार्टी में होना चाहिए? जिन लोगों को 30-30 बरस तक यही पता नहीं चलता कि वे गलत पार्टी में हैं, वे अगर हमारा नेतृत्व करेंगे, तो यह कैसे मान लें कि वे हमें सही रास्ते पर ले जाएंगे? अगर कोई ड्राइवर दस घंटे बाद ही हमसे कहे कि मैं तो गलत रास्ते पर था, तो क्या हम उसे बर्दाश्त करेंगे? कई नेताओं में तो सही पार्टी चुनने की ऐसी लगन होती है कि वे जिंदगी भर खोजी नेता बने रहते हैं। वे पूरी जिंदगी एक पार्टी से दूसरी पार्टी में यह सूंघते हुए घूमते रहते हैं कि सही पार्टी कौन सी है और शायद जिंदगी के बाद भी वे स्वर्ग और नरक के बीच आवाजाही जारी रखते होंगे। उनकी वफादार जनता भी फुटबॉल की तरह उनके साथ-साथ यहां-वहां टकराती रहती है। गलत पार्टियों में रहने वाले नेता पाने के लिए हम इसीलिए अभिशप्त हैं कि हम सही नेता नहीं चुन सकते, गलती तो अपनी ही है।

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