टीम एबीएन, रांची। छोटानागपुर का मिनी बाबा के रुप में विख्यात बाबा आम्रेश्वर धाम न केवल हिंदुओं के आस्था का केंद्र है बल्कि भोले नाथ ने यहां एक महीने तक लगने वाला श्रावणी मेला में हजारों लोगों को रोजगार का साधन भी प्रदान किये हैं। धाम परिसर में सभी समुदाय के लोग भी दुकानें खोलकर जमे रहते हैं तथा हर किसी को रोजी-रोटी मिलती है। आम्रेश्वर धाम में पूजा की सामग्रियों के अलावे प्राय: सभी तरह की दुकानें सजी हुई हैं। मेले में डिजनीलैंड लग गया है जहां श्रद्धालु पूजा-पाठ करने के पश्चात मनोरंजन करते हैं। प्रबंधन समिति के मुताबिक, श्रावणी मेले में चार सौ दुकानें लग गयी हैं। धाम परिसर स्थित चिल्ड्रेन पार्क में मेले में अपने परिजनों के साथ आने वाले बच्चे भ्रमण कर मनोरंजन का लुत्फ उठाते हैं। आम्रेश्वर धाम प्रबंध समिति के अनुसार, पावन सावन माह के 15वें दिन आज लगभग 10,000 शिवभक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। धाम परिसर में जिला प्रशासन एवं प्रबंधन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है। लोगों की गतिविधियों की निगरानी हेतु धाम परिसर में जगह-जगह सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस पिकेट बनाया गया है। खोया-पाया केन्द्र स्थापित है। श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इस हेतु प्रबंध समिति के वोलेंटियर सक्रिय रहते हैं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, खूंटी द्वारा श्रावणी मेले में आयोजित प्रदर्शनी शिविर के माध्यम से लोगों को विविध सरकारी योजनाओं, विभिन्न पर्यटन स्थलों सहित मेला सबंधित जानकारी व सूचनाएं दी जा रही है। वहीं एलईडी वैनों के माध्यम से वीडियो का प्रदर्शन कर जिले के विविध पर्यटन स्थलों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 28 जुलाई को विद्या भारती मेमोरियल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी तुपुदाना में डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के सिविल डिपार्टमेंट के छात्रों को आचार्य मुक्तरथ जी ने प्राणायाम और मेडिटेशन का अभ्यास कराया। इन छात्रों को कपालभाति और नाड़ीशोधन के साइंटिफिक लाभ को बताया गया। कपालभाति की क्रिया में जब हम फोर्सफुल्ली श्वांस को छोड़ते हैं तो वह फ्रंटल मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है जिससे एकाग्रता बढ़ती है। पिट्यूटरी ग्रन्थि स्वस्थ बनता है स्मरण शक्ति तेज होती है और आज्ञा चक्र का जागरण होता है। वहीं अनुलोम-विलोम की क्रिया जिसे नाड़ीशोधन प्राणायाम कहा जाता है। इस क्रिया में जब हम होशपूर्वक बायें नाशिका से श्वांस लेकर दायें नाशिका से छोड़ते हैं और फिर दायें नाशिका से श्वांस लेकर बायें से छोड़ते हैं तो यह हमारे पूरे नाड़ीतंत्र पर प्रभाव डालता है और खास कर मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को स्वस्थ बनाता है, उसके तनाव को खत्म करता है जिससे कि मस्तिष्क की क्षमता में वृद्धि होती है। मन नियंत्रित होता है और सुषुम्ना नाड़ी में प्राण का प्रवाह तेज होता है। यह भी आज्ञा चक्र को जागृत करता है। दोनों ही प्राणायाम अवसाद को दूर करता है। चिंता और क्रोध को दूर करता है और मानसिक रोग से हमें सुरक्षित रखता है।
एबीएन सोशल डेस्क। वैसे तो संपूर्ण देश में अनेक प्राचीन शिव मंदिर हैं। परंतु जब बात प्राचीनतम शिव मंदिर की हो तो मगध के बराबर पहाड़ पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर का नाम सर्वप्रथम आता है। इसे सिद्धनाथ तीर्थ के रूप में भी जाना जाता है। महाभारत कालीन जीवंत कृतियों में से एक यह मंदिर आज भी पुरातन शिल्पकृतियों में महिमामंडित प्राचीन आदर्शों से युक्त पूजन परंपरा को जीवित रखे हुए है। बराबर पहाड़ के शिखर पर अवस्थित सिद्धेश्वरनाथ को नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम कहा जाता है। इनकी पूजन कथा शिवभक्त वाणासुर से संबंधित होने के कारण इसे ‘वाणेश्वर महादेव’ भी कहा जाता है। मंदिर तक जाने के लिए सीढीयां भी बनी हुई है। बराबर पर्वत भारतवर्ष के पुरातन ऐतिहासिक पर्वतों में एक है। 1100 फुट ऊंचे बराबर पर्वत को मगध का हिमालय भी कहा जाता है। यहां सात अदभुत गुफाएं भी बनी हुई है। जिनका पता अंग्रेजों के कार्यकाल में चला । इनमें से चार गुफाएं बराबर गुफाएं एवं बाकी तीन नागार्जुन गुफाएं कहलाती है। भारत में पहाड़ों को काट कर बनाई गयी ये सबसे प्राचीन गुफाएं है। पर्यटन के लिहाज से भी ये काफी उपयुक्त स्थान है। ये पर्वत सदाबहार सैरगाह के रूप में प्राचीन काल से ही चर्चित है। किंवदंतियों के अनुसार पर्वत पर बनी गुफाएं प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के ध्यान साधना लगाने हेतु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाई गई थी। गया-जहानाबाद सीमा पर अशोककालीन गुफाओं में कर्ण चैपर गुफा, सुदामा गुफा, लोमस ऋषि गुफा, नागार्जुन गुफा सहित सात गुफायें हैं। गौरतलब है कि कर्ण चैपर, सुदामा और लोमस ऋषि गुफा एक ही चट्टान को काटकर बनाई गई हैं। देखने में अद्भुत लगने वाली ये गुफाएं प्राचीन समय की कलाकारी को दशार्ती हैं। गुफा के भीतर तेज आवाज में चिल्लाने पर काफी देर तक प्रतिध्वनियों को सुनकर आने वाले पर्यटक काफी रोमांचित होते हैं। सुदामा गुफा : सुदामा गुफा का निर्माण सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के बारहवें वर्ष में आजीवक साधुओं के लिए बनवाया था। इस गुफा में एक आयताकार मण्डप के साथ वृत्तीय मेहराबदार कक्ष बना हुआ है। लोमस गुफा : लोमस ऋषि की विख्यात गुफा का निर्माण भी अशोक ने था। इन गुफाओं का निर्माण मिश्र शैली में किया गया है तथा उस समय के भारतीय कारीगरों के उत्कृष्ट कलाकारी एवं वास्तु विशेषज्ञता का परिचायक है। मेहराब की तरह के आकार वाली ऋषि गुफाएं लकड़ी की समकालीन वास्तुकला की नकल के रूप में हैं। द्वार के मार्ग पर हाथियों की एक पंक्ति स्तूप के स्वरूपों की ओर घुमावदार दरवाजे के ढांचों के साथ आगे बढ़ती है। यहां कई गुफाओं के अंदर भी गुफाएं है जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है। कर्ण चैपर गुफा : यहां मौजूद कर्ण चैपर गुफा को सुप्रिया गुफा भी कहा जाता था। अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 19वें वर्ष में इसका निर्माण कराया था। उस समय के लिखे गये शिलालेख आज भी यहां मौजूद हैं। शिलालेखों के अनुसार इस पहाड़ी को सलाटिका के नाम से भी जाना जाता था। इन गुफाओं का निर्माण भी मिश्र शैली से किया गया है। यहां चिकनी सतहों के साथ एक एकल आयातकार कमरे का रूप बना हुआ है। वापिक गुफा : पहाड़ के ऐतिहासिक सप्त गुफाओं में बनी वापिक गुफा में अंकित तथ्यों से ज्ञात होता है कि इसकी स्थापना योगानंद नामक ब्राह्मण ने की थी। मंदिर परिक्षेत्र में पाषाण खड़ों पर की गयी उत्कीर्ण कलाकृति इस पूरे क्षेत्र को प्राचीन शिव अराधना क्षेत्र के रूप में स्थापित करती है। एक अन्य मत के अनुसार आदिकाल में कौल संप्रदाय का मगध पर जो वर्चस्व था, उसका केन्द्र इसी पर्वत को बताया जाता है। इसकी उत्पत्ति ई।पू. 600 के लगभग मानी जाती है। इन्हें दशरथ द्वारा आजीविका के अनुयायियों को समर्पित किया गया था। विश्व जोपरी : विश्व जोपरी गुफा में दो आयातकार कमरे मौजूद हैं जहां चट्टानों को काटकर बनाई गई अशोका सीढियां द्वारा पहुंचा जा सकता है। नागाजुर्नी गुफाएं : नागार्जुन के आसपास की गुफाएं बराबर गुफाओं से छोटी एवं नयी है। गोपीका गुफा और वापिया का गुफा लगभग 232 ईसा पूर्व में राजा दशरथ द्वारा आजीविका संप्रदाय के अनुयायियों को समर्पित की गई थी। गोपिका गुफा : बारबर पहाड़ में अवस्थित इन गुफाओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। जिस विशाल चट्टान को खोदकर गुफाएं बनाई गई है उस पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। अक्सर पर्यटक यहां पिकनिक मनाने आते है। वैसे यहां सालों भी भक्तगण व पर्यटक आते रहते हैं लेकिन श्रावण मास, बसंत पंचमी एवं महाशिवरात्री अनंत चतुदर्शी में भक्तों व पर्यटकों का आगमन बड़ी संख्या में होता है।
एबीएन सोशल डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के झंडेवालान में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यलय को बम से उड़ाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस तुरंत वीएचपी कार्यालय पहुंची और आरोपी रामकुमार को हिरासत में ले लिया। सेंट्रल दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दोपहर 12:41 बजे सूचना मिली कि झंडेवालान मंदिर के द्वितीय तल पर स्थित विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों को किसी ने धमकी दी है कि वह विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय को बम से उड़ा देगा। उस स्थान पर पहुंचने पर रामकुमार पांडे नाम का व्यक्ति मिला, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसकी उम्र लगभग 26 साल है और वह मध्य प्रदेश के सीधी स्थित भटवाली गांव का रहना वाला है। उसने खुद को स्नातक तक पढ़ा हुआ बताया और उसके पिता सीधी के सरकारी अस्पताल में ड्राइवर हैं। पुलिस के मुताबिक, वह 22 जुलाई को अपनी मौसी के साथ दिल्ली आया था, जो फतेहपुर बेरी इलाके में रहती है। दिल्ली आने पर वह आरएसएस मुख्यालय पहुंचा और यहां वीएचपी दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी दी। उसे शिकायत थी कि उसके गांव के एक परिवार को ईसाई बना दिया गया, लेकिन कोई उनके लिए कुछ नहीं कर रहा है। इसी बात को लेकर उसे काफी गुस्सा था। पुलिस ने बताया कि वह आरएसएस समर्थक होने का दावा कर रहा है, लेकिन उससे शिकायत है कि आरएसएस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कुछ नहीं कर रहे हैं। उसने सिर्फ ध्यान आकर्षित करने के लिए आरएसएस पदाधिकारियों के सामने ये शब्द कहे। फिलहाल उससे स्पेशल सेल व स्पेशल ब्रांच के स्टाफ पूछताछ कर रहे हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। त्योहारों की खुशियां घरवालों के संग बांटने की उत्सुकता कहें या फिर कोरोना के खौफ को परास्त करने का विश्वास। दीपावली और छठ महापर्व पर अपने घर आने की बेकरारी चरम पर है। ट्रेनों की बुकिंग के रूप में लोगों का उत्साह साफ देखा जा सकता है। बड़े शहरों में रहनेवाले धनबाद के लोगों ने तीन महीने पहले ही धनबाद आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें बुक करा ली हैं। दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, गुजरात व पंजाब सहित अन्य राज्यों से धनबाद आनेवाली ट्रेनें दीपावली के पहले से छठ तक बुक हो चुकी हैं। सभी ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची के बोर्ड लहरा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से दीपावली और छठ महापर्व के उल्लास को कोरोना वायरस की नजर लग गई थी। इस वर्ष 24 अक्तूबर को दीपावली है, जबकि 28 अक्तूबर को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू हो रहा है। मेट्रो सिटी में रह कर कामकाज करने वाले धनबाद के लोगों ने 120 दिन पहले से ट्रेनों में बुकिंग शुरू कर दी थी। इसी का नतीजा है कि अक्तूबर में दिवाली से पहले धनबाद आनेवाली लंबी दूरी की अमूमन सभी ट्रेनें फुल हो चुकी हैं। कई ट्रेनों में शादी-विवाह के लग्न का असर नवंबर माह में भी देखा जा रहा है। दीपावली के बाद से छठ तक धनबाद से बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट बुक हो चुकी हैं। 17005 हैदराबाद- रक्सौल एक्सप्रेस में 22 और 29 अक्तूबर को चलेगी। दोनों दिन उत्तर बिहार जाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। इसी तरह 18105 राउरकेला-जयनगर एक्सप्रेस दीपावली के बाद 26 और 28 अक्तूबर को चलेगी। दोनों दिन इस ट्रेन में सीट खाली नहीं है। 17007 सिकंदराबाद- दरभंगा एक्सप्रेस 24 और 27 अक्तूबर को चलेगी। इसमें भी सभी श्रेणी में वेटिंग है। 15027 रांची-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस में 21 से 28 अक्तूबर तक जगह नहीं मिल रही है।
टीम एबीएन, रांची। सावन की दूसरी सोमवारी पर राजधानी के शिवालयों में भक्त सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा करने पहुंच रहे हैं। रांची के सुप्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। यहां सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों से भक्त पूजा करने पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि के लिए बाबा से प्रार्थना कर रहे हैं। रांची पहाड़ी मंदिर पहुंचे लोगों ने कहा कि निश्चित रूप से 2 वर्ष के बाद पूजा करने का मौका मिला है। कोरोना की वजह से लोगों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। अब मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मिली है, जिसको लेकर भक्तों में उत्साह है। जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के लोगों की तरफ से भी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। मंदिर में पूजा करने पहुंचीं नम्रता मिश्रा ने बताया कि मंदिर में बाबा का जलाभिषेक करने के बाद भक्तों में काफी खुशी है। वहीं व्यवस्था को लेकर उन्होंने बताया कि बेहतर इंतजाम की वजह से इस वर्ष भक्त आसानी से पूजा कर पा रहे हैं। मंदिर प्रबंधन के सदस्यों ने बताया कि कोरोना जांच की व्यवस्था जिला प्रशासन की तरफ से की गई थी, लेकिन मंदिर परिसर में बूस्टर डोज और जांच की व्यवस्था को शुरू नहीं की गयी है; क्योंकि इस वजह से भीड़ बढ़ती है जिसे नियंत्रित करना कभी कभी मुश्किल हो जाता है। पहाड़ी मंदिर के अलावा राजधानी के अन्य शिवालयों में भी जिला प्रशासन की तरफ से मेडिकल टीम की तैनाती की गई है ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में भक्तों को तत्काल मेडिकल सुविधा दी जा सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांवड़ यात्रा के दौरान तीन अलग-अलग दुर्घटनाओं में सात कांवड़ियों की मौत हो गई। रविवार तड़के बैरागी कैंप में डाक कांवड़ के वाहन ने जमीन पर सो रहे दो कांवड़ियों को कुचल दिया। इस दौरान गुस्साए कांवड़ियों ने जमकर हंगामा किया। वहीं प्रेमनगर आश्रम चौक के पास हुई दो दोपहिया वाहन की भिड़त में तीन कांवड़ियों की मौत हो गई, दो मृतकों की शिनाख्त नहीं हुई है। रुड़की-हरिद्वार हाईवे स्थित कोर कॉलेज के पास शनिवार देर रात कार की टक्कर से बाइक सवार दो कांवड़ियों की मौत हो गई। पहली दुर्घटना प्रेमनगर आश्रम चौक के पास घटित हुई। एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने की भिड़त हुई। कांवड़ियों को गंभीरावस्था में तुरंत आनन-फानन में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां एक कांवड़िए को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन कांवड़ियों को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। एसपी सिटी ने बताया कि एम्स में उपचार के दौरान दो कांवड़ियों की भी मौत हो गई जबकि एक कांवड़िए का इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में मृत घोषित हुए कांवड़िए की पहचान विनय पुत्र राम सुमेर निवासी गांव पासवाला चरोहा कौशांबी यूपी के रूप में हुई, जबकि एम्स में दम तोड़ने वाले कांवड़ियों की पहचान के प्रयास जारी है। वहीं, रविवार तड़के बैरागी कैंप में डाक कांवड़ वाहन निकाल रहे कांवड़ियों से भरा ट्रक नीचे जमीन पर सो रहे दो कांवड़ियों के ऊपर चढ़ गया। कांवड़ियों की चीख पुकार सुनकर उनके साथी कांवड़िये एकत्र हो गये, जिन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया। इधर, कांवड़ियों के कुचलने की सूचना पर पुलिस महकमे के हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन में सीओ अनुज कुमार अपना वाहन लेकर तुंरत मौके पर पहुंचे, जो तुरंत ही कांवड़ियों को अपने वाहन में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
टीम एबीएन, रांची। शिव के पुत्र गणेश कहे जाते हैं। हालांकि पार्वती के मैल से गणेश का सृजन हुआ था। गणेश शिव के पालक पुत्र तो कार्तिक शिव के औरस पुत्र हैं। कार्तिकेय भी पार्वती के पालक पुत्र हैं। यह शिव परिवार अनेकता में एकता, विभिन्नता में समता लिए हुए है। जीवन और पारिवारिक प्रबंधन को समझना है तो शिव से समझिए। गणेश एक कोशिकीय थे, तो सन्तान वर्धन में गणेश वंश को काफी मुश्किल होती है। सन्तान वर्धन में डीएनए अर्थात दो कोशिकीय होना जरूरी है। शिव ने हाथी का मस्तक जोड़कर कोशिकीय परिवर्तन किया। हालांकि कल्प भेद के अनुसार कथाएं अनन्त हैं। शनि की दृष्टि पड़ने से भी गणेश का मस्तक कटा तो कश्यप ऋषि के श्राप का भी प्रमाण है। अब गणेश का मस्तक बड़ा, पेट बड़ा, हाथी का मस्तक, तो मनुष्य का धड़ जिसे बेढब देखकर हंसने लगे। तो गणेश ने चन्द को श्राप दे दिया कि इस कालांतर में राजा दक्ष ने भी चन्द्र को भी श्राप दिया था कि चन्द्र को क्षय रोगी हो जाए। गणेश इस तरह दिव्यांग हो गये। पर गणेश मातृ भक्त और पितृ भक्त भी हुए। जब प्रथम पूजन के लिए स्पर्धा रखी गयी, तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर प्रथम आना था। जो देवता ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर रोकेगा वह प्रथम पूज्य होगा। गणेश का बड़ा माथा, बड़ा पेट, बड़ा हाथी कान और छोटा सवारी चूहा कैसे पृथ्वी परिक्रमा करें, तो गणेश ने मातृ-पितृ भक्ति की महिमा को साकार किया। माता-पिता ही स्वर्ग है। धर्म है, तप है और सभी देवता हैं। पहली ज्ञानदायनी मां है तो यही माता-पिता ब्रह्माण्ड स्वरूप है। गणेश ने एक बेलपत्र लिया। उसपर हल्दी से राम-राम लिखा और शिव पार्वती पर चढ़ा दिया तथा मूसा पर बैठकर माता पिता की एक परिक्रमा कर ली। यह ब्रह्माण्ड की परिक्रमा हो गयी। सभी देवताओं ने ब्रह्माण्ड की परिक्रमा करते भी गणेश को आगे-आगे देखा। तब से गणेश प्रथम पूज्य हुए और बेलपत्र पर हल्दी से राम-राम लिखने की प्रक्रिया शुरू हुई। शिव परिवार में इस तरह स्वयं शिव के साथ पार्वती, गणेश, कार्तिकेय के अलावा गणों में कुबेर, पुष्पदन्त आदि हैं। इसलिए अपने परिवार को शिव की तरह पूजनीय बनाने का प्रयास कीजिये। उक्त बातें राजधानी रांची के प्रख्यात ज्योतिर्विद पंडित रामदेव पांडेय ने कही। वे बरियातू डीएवी के सामने स्थित श्री राम जानकी मंदिर में आयोजित श्री शिवमहापुराण के प्रवचन मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के सुल्तानगंज एवं भागलपुर से गंगा जल लेकर पैदल कांवर यात्रा करने वाले लगभग 1.20 लाख श्रद्धालुओं ने श्रावणी मेला के नौवें दिन बाबा बासुकीनाथ धाम में जलाभिषेक किया और पूर्ण श्रद्धा भक्ति और "बोल बम" के जयघोष के साथ पूजा अर्चना की। बासुकीनाथ मेला प्रबंधन समिति के मुताबिक श्रावणी मेला के नौवें दिन बाबा बासुकीनाथ धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अहले पट खुलने के पहले से ही कांवर यात्रियों की लम्बी कतार लगी गयी जो देर शाम तक जारी है। आज जलार्पण काउंटर से 20497 और शीघ्र दर्शनम के कूपन की सुविधा के तहत 2500 श्रद्धालुओं समेत एक लाख 20 हजार 785 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। गेरुआ वस्त्र धारी कांवर यात्रियों के जयघोष से बासुकीनाथ बाबा का मंदिर परिसर गूंजायमान हो रहा है। समिति ने बताया कि शीघ्र दर्शनम के कूपन से 7 लाख 50 हज़ार रुपये प्राप्त हुए तथा चांदी के 10 ग्राम के 9 सिक्के की बिक्री हुई। इस तरह शुक्रवार को गोलक से 31780 दान पेटी से 1 लाख 50 हज़ार 770 तथा अन्य स्रोतों से 63,136 रुपये प्राप्त हुए। वहीं गोलक से 88 ग्राम चांदी प्राप्त हुए।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.