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Published / 2022-02-25 15:24:48
चालीसा धर्म पत्र-2022 का थीम है : पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो...

टीम एबीएन, रांची। रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो एसजे तथा सहायक बिशप थियोडोर मसकरेन्हस एसएफएक्स ने शुक्रवार को संयुक्त रुप से ख्रीस्त विश्वासियों तथा धर्मसंघी भाईबहनों के लिए चालीसा धर्म पत्र-2022 जारी कर 02 मार्च को राख बुधवार (ऐेश वेडनेसडे) से शुरु होने वाले चालीसा (लेंट) महाउपवास काल के आध्यात्मिक गतिविधियों और तपस्या उपवास की जानकारी दी है। इस चालीसा घर्मपत्र का थीम पवित्र बाइबल से उद्धृत है:- पश्चाताप कर और सुसमाचार में विश्वास करो (मारकुस 1:15)। बिशपद्वय ने इस चालीसा धर्मपत्र को जारी करते हुए तमाम पुरोहितों को निदेश दिया है कि 02 मार्च से यह धर्मपत्र सभी पवित्र मिस्सा में विश्वासियों को पढ़कर सुनाया जाए और उन्हें चालीसा के प्रति आध्यात्मिक रुप से जागरुक व सक्रिय करें। महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो व बिशप थियोडोर मसकरेन्हस ने जारी चालीसा धर्म पत्र में संयुक्त रुप से पुरोहित भाईयों, धर्मसंघी भाईयों व बहनों तथा समस्त ख्रीस्त विश्वासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि दो मार्च से हम सभी पुन: एक और चालीसा का आरंभ कर रहे है। बिशपद्वय ने चालीसा की इस अवधि को आशा तथा ख्रीस्तीय जीवन पर मनन करने का समय बताया। कहा कि सभी ख्रीस्त विश्वासियों के लिए यह समय आध्यात्मिक नवीनीकरण का और व्यक्ति तथा कलीसिया के लिए ईश्वरीय कृपा का है। उन्होने कहा कि सि वर्ष जब धर्मसभा की प्रक्रिया प्रगति में है इस चालीसा काल को एसा समय बनाएं जहां हम एक दूसरे को विम्रतापूर्वक सुन सकें और ईश्वरीय प्रेम में एक साथ चल सकें। प्रार्थना करें कि चालीसे की इस अवधि में कृपा की नदी और बहुतायत से बहे और हम सभी इस नदी में अपने आप को धोकर साफ करे। जारी चालीसा धर्मपत्र में बिशपद्वय ने मसीहियों के ख्रीस्तीय और आध्यात्मिक जीवन के विकास के लिए चालीसा साधनाओं के पालन का सुझाव दिया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि चालीसा ईश्वर के राज्य की घोषणा है। जिसमें ख्रीस्त विश्वासियों को पवित्र बाईबल पढने के लिए आमंत्रण है। जिसमें खासकर रविवारीय पाठों को जरुरत पढें। इसक्रम में बिशपद्वय ने बताया कि हमारा रविवारीय प्रवचन हिंदी में और गाना के रुप में भजन स्तोत्र रांची महाधर्मप्रांतीय यू ट्यूूब चैनल में उपलब्ध है। इस चालीसे काल काल में हम लोग महाधर्माध्यक्ष फेलिक्सटोप्पो के द्वारा प्रत्येक दिन दैनिक पाठ पर आधारित संक्षिप्त मनन चिंतन अपलोड करेंगे। अगर इस चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आईकन को क्लीकि करेंगे तो जब भी नयी वीडियो अपलोग की जाएगी तो सब्सक्राइब करने वालों को तुरंत इसका संदेश मिल जाएगा। उक्त धर्मपत्र में यह भी उल्लेख है कि चालीसा उपवास करने का समय है। संत लियो ने लिखा है ख्रीस्तीयों कोजो काम सब समय करना है उसे उन्हें अभी और अधिक उत्साह के साथ करना चाहिए ताकि प्ररितो द्वारा चालीसा उपवास का जो आनंदि लिया गया था वह मात्र भोजन के त्याग से नहीं लेकिन पापों के परित्याग से पूरा हो सके। अपनी बुरी आदतों और घिनौने प्रवृतियों को उखाड़ फेंकने का प्रयास करे। खासकर आलस्य, निंदा, दूसरों के प्रति लंबे समय तक घृणा व क्रोध रखना, पूर्वाग्रह, झूठ बोलना और किसी भी प्रकार का आत्मसंयम रहित भोग बिलास का परित्याग करें। उक्त चालीसा धर्म पत्र से ख्रीस्त विश्वासियों को यह भी कहा गया है कि गत वर्ष की तरह इस साल भी हम यह सोचें कि प्राय: हम किन चीजों के लिे पैसे खर्च करते है। पूरे परिवार को आमंत्रित करते हैं कि वे एक साथ आकर कुछ आराम और सुख सु्विधाओं का त्याग कर बचत करे तथा भूखमरी से लड़ने के लिए आयोजित अभियान लिए उदारतापूर्वक सहयोग करें ताकि जरुरतमंद लोगों की मदद की जा सके। बिशपद्वय ने जारी धर्मपत्र के माध्यम से तमाम मसीही विश्वासियों से अनुरोध करते हुए कहा है कि अब आवाम साधारण जीवन की ओर वापस लौट रहे है। ऐेसे में आप सभी गिरजाघरों व संस्कारों की ओर वापस जाएं। चालीसा काल के साधनाओं विशेषकर दैनिक मिस्सा बलिदान, क्रूस रास्ता, रोजरी माला विनती, बाईबल पाठ और पुण्य सप्ताह की धर्मविधि के द्वारा अपने विश्वास को मजबूत करें। इस पुण्य अवधि में पापस्वीकार संस्कार ग्रहण करे और प्रत्येक पल्ली और धर्मसंघी संस्थाओं से निवेदन है कि वे विश्वासियों के लिए इस प्रकार के अवसर उपलब्ध कराएं। यह भी बताया कि पारंपरिक चालीसा की प्रार्थना, उपवास, दान जैसी साधनाएं मसीहियों के आाध्यात्मिक जीवन और आध्यात्मिक बंधन को मजबूत बनाती है। प्रार्थना को प्रत्त्यक दिन के लिए जीवन रेखा है, जो हमें हमारे सृष्टिकर्ता, मुक्तिदाता और ईश्वर जो हमें प्यार करता है से हमें जोड़े रखता है। उपवास रा मतलब अन्न जल त्याग कर भूखे रहने का नहीं बल्कि चालीसा में हमारी भूख भोजन से बढ़कर ईश्वर के वचन के लिए होनी चाहिए। इसमें दान देना भी हमारी मदद करता है। धर्मग्रंथ में यह भी उल्लेख है कि दान देने की प्रक्रिया हमारे पापों के लिए प्रायश्चित करता है। किसी भी प्रकार का पुण्य काम एक प्रकार कार दान है।

Published / 2022-02-25 07:51:57
हर आदमी की जेब पर असर डालेगा "रूस-यूक्रेन वार"

एबीएन डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी विवाद के कारण पहले से ही दुनियाभर के बाजारों में उथल-पुथल मची हुई थी, लेकिन गुरुवार को रूसी हमले के बाद तो जैसे हाहाकार मच गया। शेयर बाजार धड़ाम हो गया और कच्चे तेल के भाव आसमान पर जा पहुंचे। रूस-यूक्रेन भले ही भारत से हजारों मील दूर हों, लेकिन दोनों देशों के बीच ये युद्ध सीधे तौर पर भारतीयों की जेब पर असर डालेगा। यानी देशवासियों को महंगाई की मार के लिए तैयार रहना होगा। भारत का रूस-यूक्रेन के साथ व्यापार : भारत का यूक्रेन और रूस के साथ व्यापार अच्छे-खासे स्तर पर है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी युद्ध अगर लंबा होता है तो भारत में इसके प्रभाव कुछ जरूरी चीजों पर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकते हैं। बता दें कि भारत यूक्रेन से खाने के तेल से लेकर खाद और न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी चीजों की खरीदारी करता है। युद्ध होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार नहीं होगा और भारत के लिए परेशानी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के हालात में भारत को निर्यात का नुकसान होगा, वहीं जिन चीजों को भारत यूक्रेन से खरीदता है उन पर प्रतिबंध लगने से महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल का भाव बढ़ने से आयात का खर्चा बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। खाने का तेल-खाद के दाम बढ़ेंगे : अगर दो देशों के बीच यूद्ध होता है तो इसका बड़ा असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है और पहले से ही महंगाई से परेशान भारत के लिए तो ये दोहरी मार से कम नहीं होगा। बता दें कि देश में खाने के तेल का बड़े पैमाने पर यूक्रेन से आयात करता है। जी हां, यूक्रेन सूरजमुखी के तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत की बात करें तो यहां पिछले कुछ समय से खाने के तेल के दाम पहले से ही आसमान पर है और युद्ध के चलते सप्लाई रुकी तो इसकी कीमतों में और आग लगनी संभव है। इसके अलावा रूस भारत को खाद देता है और युद्ध के हालातों के बीच इसके आयात में भी रुकावट आ सकती है। देश में पहले से ही यूरिया संकट है तो हालात और खराब होंगे, इस समस्या का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर होगा प्रभावित : आपको बता दें कि देश का ऑटोमोबाइल सेक्टर सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में रूस और यूक्रेन की बीच जारी जंग का प्रभाव इस क्षेत्र पर पड़ना तय है। दरअसल, यूक्रेन ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रभावित करने वाला होगा। इसका कारण ये है कि यूक्रेन सेमीकंडक्टर की खास धातु पेलेडियम और नियोन का उत्पादन करता है। जंग के हालात में इन धातुओं का उत्पादन प्रभावित होगा और सेमीकंडक्टर की कमी का ये संकट और भी अधिक बढ़ जाएगा। खुदरा महंगाई में और होगा इजाफा : गौरतबल है देश में खुदरा महंगाई पहले से ही उच्च स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी इसमें और इजाफा करने वाली साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती होने वाली है। दरअसल, कच्चा तेल महंगा हुआ, तो देश में पेट्रोल-डीजल और गैस पर पड़ने वाला है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई पर खर्च बढ़ेगा और सब्जी-फल समेत रोजमर्रा के सामनों पर महंगाई बढ़ेगी जो कि आपकी जेब पर सीधा असर डालेगी। क्रूड ऑयल में तेजी का प्रभाव : विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध आगे बढ़ता है तो क्रूड ऑयल के दाम 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। यहां आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर का इजाफा होता है तो देश में पेट्रोल-डीजल का दाम 50 से 60 पैसे बढ़ जाता है। ऐसे में उत्पादन कम होने और सप्लाई में रुकावट के चलते इसके दाम में तेजी आना तय है और उम्मीद है कि कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपये तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। तेल-गैस सप्लाई में रुकावट संभव : गौरतलब है कि रूस नेचुरल गैस का सबसे बड़ा सप्लायर है जो वैश्विक मांग का लगभग 10 फीसदी उत्पादन करता है। दोनों देशों के बीच युद्ध के कारण जाहिर है कि नेचुरल गैस की सप्लाई पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और ईंधन की कीमतों में आग लग जाएगी। बता दें कि यूरोप की निर्भरता रूस पर अधिक है। यूरोप में 40 फीसदी से ज्यादा गैस रूस से ही आती है। इसका सीधा असर आम आदमी पर होगा। इसके अलावा रूस विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल उत्पादक है। यूरोप के देश 20 फीसदी से ज्यादा तेल रूस से ही लेते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल उत्पादन में विश्व का 10 फीसदी कॉपर और 10 फीसदी एल्युमीनियम रूस बनाता है।

Published / 2022-02-23 15:57:36
पलामू के किसानों ने बढ़ाया शुगर फ्री और चिप्स बनाने वाले आलू का उत्पादन

टीम एबीएन, पलामू। मन में कुछ नया और अलग करने की चाहत हो और मंजिल की ओर कदम बढ़े तो कामयाबी की राह आसान हो जाती है और कुछ यही हाल पलामू में भी देखने को मिल रही है। समय के साथ-साथ पलामू कृषि के क्षेत्र में उन्नति की ओर बढ़ रहा है। प्रशासनिक सहयोग से किसानों का आत्मबल मजबूत हुआ है। सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ किसानों को मिले, इसके लिए कृषि विभाग भी कटिबद्ध है। बीज विनिमय एवं वितरण योजना अंतर्गत 50 प्रतिशत अनुदान पर विभिन्न फसलों का उन्नत बीज उपलब्ध कराये जाते हैं एवं किसानों के हितार्थ अन्य लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। सरकार के विभिन्न योजनाओं की जानकारी हेतु कार्यशाला सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि कृषि योजनाओं का अधिकाधिक लाभ किसानों को मिल सके। किसानों में जागरूकता एवं उनकी द्दढ़ शक्ति का ही परिणाम है कि पलामू प्रमंडल के किसान फलदार पौधों के अलावा कभी औषधीय पौधे, तो कभी मौसमी सब्जियों की उन्नत खेती कर मिसाल कायम कर रहे हैं। अपनी खेत में खेती की बात हो या फिर लीज पर खेत लेकर खेती करने की। सीजन अनुरूप भिन्न-भिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन कर किसान अपनी आमदनी दोगुनी-तीगुनी करने का सपना साकार कर रहे हैं। आज हम बात कर रहे हैं झारखंड राज्य के पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतगर्त दंगवार एवं डुमरहाथा गांव के किसानों की। किसानों ने कृषि के क्षेत्र में अलग-अलग प्रयोग करते रहें हैं। कभी औषधीय पौधों की खेती, तो कभी काला धान एवं काला गेंहू की खेती कर चर्चा में रहते हैं। इस बार गांव के किसानों ने सुगर फ्री आलू एवं चिप्स बनाने वाली आलू की खेती की है। शुगर फ्री आलू की सोना फ्राई एवं चिप्स बनाने वाली कुफरी चिप्सोना-3 (चिप्सोना) प्रजाति को किसानों ने खेत में लगाया। फसल अच्छी थी, तो उत्पादन भी अच्छा ही हुआ। इसकी कोड़ाई कर खेत से निकाला गया, तो उत्पादन का आकलन भी सही निकला। दंगवार एवं डुमरहाथा के करीब आधा दजर्न से अधिक किसानों ने सामूहिक रूप से शुगर फ्री आलू तथा चिप्सोना प्रजाति के आलू लगाये। उत्तरप्रदेश के राजधानी लखनऊ स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र से प्रेरणा एवं मार्गदर्शन के बाद यहां के किसानों ने बीर कुंअर सिंह कृषक सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, डुमरहाथा की बैनर तले सेट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टिच्यूट, शिमला के कुफरी शाखा से बीज मंगाकर शुगर फ्री एवं चिप्स बनाने वाली आलू की खेती प्रारंभ की है।

Published / 2022-02-23 15:57:10
झारखंड : मेधा डेयरी ने बढ़ाई दूध की कीमत

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कृषि मंत्री बादल की किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों के प्रति सकारात्मक सोच अब आकार लेने लगी है। बीते 15 दिसंबर को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष मिनेश शाह के साथ कृषि मंत्री बादल और विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीकी की हुई बैठक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं जिसके तहत झारखंड दुग्ध महासंघ से जुड़े हुए किसानों द्वारा दिए गए दूध की कीमत में गुणवत्ता के आधार पर 2 से 3 की बढ़ोतरी की गई है। इस बारे में झारखंड दुग्ध महासंघ के प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार सिंह ने जानकारी दी कि 21 फरवरी 20-22 के प्रभाव से झारखंड के किसानों को बढ़ी हुई कीमत के साथ भुगतान किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी और उपभोक्ता पूर्वक पुरानी कीमतों में ही दुग्ध तथा अन्य उत्पाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषि मंत्री बादल कृषि के क्षेत्र में कई बदलाव कर चुके हैं साथ ही कृषक, दुग्ध उत्पादक और पशुपालकों के लिए के योजनाओं का शुभारंभ किया है। बता दें कि 1 अप्रैल 2021 को बादल ने दुग्ध उत्पादकों को एक रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी का लाभ भी दिया था। बादल ने राज्य के किसान परिवारों से कहा है कि ज्यादा से ज्यादा किसान मुख्यमंत्री पशुधन योजना से जुड़े। झारखंड दुग्ध महासंघ के प्रबंध निदेशक ने बताया कि दुग्ध उत्पादकों की कीमत में हुई इस बढ़ोतरी से प्रदेश के किसानों की आय में बढ़ोतरी तो होगी ही साथ ही झारखंड दुग्ध महासंघ किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में गोबर खाद प्रबंधन योजना, मधुमक्खी पालन योजना जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। दूध की कीमतों में हुई वृद्धि से किसानों के बीच खुशी का माहौल है।

Published / 2022-02-23 14:32:34
हमें स्वस्थ और रोगमुक्त रखेगा योग

टीम एबीएन, रांची। को आईपीएच नामकुम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग आयुष निदेशालय, राज्य योग केंद्र, रांची के तत्वावधान में किशोरों के लिए योग विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्घाटन डॉ फजलुश समी, (निदेशक आयुष) ने किया। मौके पर डॉ नुजहत सुलताना-उपनिदेशक युनानी, डॉ मुकुल कुमार दीक्षित- प्र. पदा. राज्य योग केन्द्र रांची, डॉ सच्चिदानन्द सिंह- जिला आयुष चि. पदा. रांची, डॉ अमरेन्द्र कुमार पाठक- आर्यु. चि. पदा. नामकुम, राहुल कुमार नोडल पदा., डॉ विवेक माहेश्वरी एसो. प्रोफेसर लाकुलिस योग वि. वि. अहमदाबाद, डॉ कामता प्रसाद साहु- असि. प्रोफेसर देव संस्कृति वि.वि. हरिद्वार, डॉ अर्चना कुमारी योग प्रशिक्षिका राज्य योग केन्द्र रांची एवं अवनीश कुमार योग प्रशिक्षक रांची उपस्थित थे। सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ विवेक माहेश्वरी एसो. प्रोफेसर लाकुलिस योग वि. वि. अहमदाबाद, डॉ कामता प्रसाद साहु- असि. प्रोफेसर देव संस्कृति वि.वि. हरिद्वार थे। डॉ कामता प्रसाद साहु ने अपने वक्तव्य में कहा कि भावनात्मक विक्षोभ का निवारण भावों की परिपक्वता से ही संभव है तथा वैचारिक विकृति ही तनाव का मुख्य कारण है जिसे सदविचारों द्वारा दुर किया जा सकता है। सेमिनार के दूसरे सत्र में अहमदाबाद के डॉ विवेक माहेश्वरी ने किशोरावस्था में होने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए तीन सूत्र दिये- 1. जागृत अवस्था में आंखें बंद करने का अभ्यास। 2. श्वांस पर सजगता एवं शरीर की स्थिरता का अभ्यास। 3. अवचेतन मन का प्रशिक्षण।  सेमिनार के अंतिम सत्र में अमीत एवं ग्रुप, हेमा एवं ग्रुप, विकास एवं ग्रुप द्वारा योग के विभिन्न आसनों का संगीतमय प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, बोकारो सहित विभिन्न जिलों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन श्री राहुल कुमार नोडल पदा. ने धन्यवाद ज्ञापित कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन अवनीश कुमार ने किया।

Published / 2022-02-22 17:30:28
साहित्य राजनीति को संभाल लेता है : डॉ जयंत कर शर्मा

टीम एबीएन, रांची। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली और राजेंद्र विश्वविद्यालय, बलांगीर (उडीसा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 8. दिवसीय नव लेखक शिविर में आज अष्टम दिवस (22.2.22) दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुए महिला कालेज संबलपुर के पूर्व हिंदी प्रो डॉ जे के शर्मा ने कहा कि इस शिविर के आयोजन से हिन्दी नव लेखकों को प्रेरणा मिली है। साहित्य संस्कार करता है और राजनीति को दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। उन्होंने पं. नेहरू और दिनकर के उस प्रसंग का उल्लेख जब राष्ट्र कवि दिनकर ने पं. नेहरू को संसद की सीढ़ियों से उतरते वक्त गिरने से बचा लिया था। पं. नेहरू ने कहा दिनकर जी यदि आप नहीं होते, तो आज मैं गिर गया होता।दिनकर ने कहा कि पंडित जी राजनीति जहां गिरने लगती है, साहित्य उसको संभाल लेता है।रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ जे बी पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी जन-मन की गंगा है। हिन्दी भारत मां की बिंदी है।यह हमारी अस्मिता का प्रतीक है।इस शिविर से नव-लेखक प्रेरित हुए हैं और उन्हें दिशा दृष्टि मिली है यही इस शिविर की सफलता है। डॉ सीमा असीम सक्सेना ने नव लेखन की कठिनाइयों की ओर प्रतिभागियों का ध्यान आकृष्ट किया। अध्यक्षता करते हुए डा दीप्ति मंजरी मेहर ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है और हमें अपनी हिंदी पर गर्व है। इस आयोजन के लिए उन्होंने केन्द्रीय हिंदी निदेशालय का आभार व्यक्त किया। डॉ सुजाता दास और आर के महापात्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। बीच में डॉ जे बी पाण्डेय निर्देशित ह और म की मुठभेड़ शीर्षक प्रहसन का प्रतिभागियों ने मंचन किया। जिसमें लाल मोहन महतो म की भूमिका में उमाशंकर महतो और गुरुजी की भूमिका में अशोक कुमार प्रमाणिक ने शानदार प्रस्तुति दी और अभिनय किया, जिसकी प्रशंसा सबो ने मुक्त कंठ से की।यह प्रहसन राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित था। समापन समारोह में प्रशिणार्थियों ने अपने अनुभव बताए और इस शिविर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिनमें अशोक कुमार प्रमाणिक, दयानंद राय, राम कुमार प्रसाद, लाल मोहन महतो, उमा शंकर महतो, अंगद प्रमाणिक, प्रियंका कुमारी, आरती कुमारी, स्वरूपा सिंह, क्षेत्र मणि बिभार डॉ नूतन सत्पथी, अभिषेक कुमार सिंह,भलटी खमारी, डॉ शिखा रानी त्रिपाठी, कुन्दन अग्रवाल, स्वरूप सिंह आदि प्रमुख हैं। डॉ शैलेश बिडालिया ने इस शिविर के स्वरूप और आवश्यकता पर प्रकाश डाला और नवांकुरों को लेखन के लिए प्रोत्साहित किया।सरस्वती वंदना सुश्री स्वरूपा सिंह ने भजन अशोक कुमार प्रमाणिक ने संचालन और आगत अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ संजय कुमार सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन श्री विनोद शर्मा जी ने किया। राष्ट्र गान से शिविर का समापन 4 बजे हुआ।

Published / 2022-02-22 13:03:55
सत्संग, स्वाध्याय और सेवा से बदल सकता है जीवन : संजय मिश्रा

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती के अवसर पर सामूहिक हवन किया गया, जिसमें विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मौके पर स्वामी श्रद्धानंद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्राचार्य श्री संजय कुमार मिश्रा सह सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं ने स्वामीजी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।महा हवन के उपरांत प्राचार्य ने स्वामी श्रद्धानंद को एक सच्चा साधक,देश भक्त और समाज सुधारक बताया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार सत्संग, स्वाध्याय और सेवा से जिंदगी बदल जाती है, इसे हम मुंशीराम के जीवन से सीख सकते हैं, जो महर्षि दयानंद के प्रभाव में आकर स्वामी श्रद्धानंद बन गए। उन्होंने समाज की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। तत्कालीन समाज में जो अंध विश्वास, ढोंग और पाखंड फैला था, ऊंच-नीच, छुआछूत की भावना फैली थी, स्वामीजी ने उसका पूर जोर विरोध किया। उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति, अपने धर्म से प्रेम करना सिखाया। अछूतोद्धार, विधवा विवाह, नारी शिक्षा आदि का प्रचार किया। उनके द्वारा स्थापित गुरुकुल कांगड़ी आज भी शिक्षा की क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। हम सबको उनसे प्रेरणा लेना और उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। शांति पाठ के साथ सभा समाप्त हुई।

Published / 2022-02-20 13:12:30
उचित मूल्य पर बेहतर परिधान उपलब्ध कराएगा पंकज सोनी क्लॉथ सेंटर : शालिनी गुप्ता

टीम एबीएन, कोडरमा। झुमरी तिलैया के रांची-पटना रोड स्थित सोनी कॉम्पलेक्स बिग बाजार के नजदीक में रविवार को पंकज सोनी क्लॉथ सेंटर का उदघाटन जिप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता ने किया। मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो राखी भदानी उपस्थित थी। मौके पर जिप प्रधान शालिनी गुप्ता ने कहा कि एक छत के नीचे सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्राहको को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस दुकान के खुलने से स्थानीय लोगों को काफी लाभ मिलेगा। वहीं दुकान के प्रोपराइटर पंकज सोनी ओर मो आसिफ ने कहा कि ग्राहकों को बेहतर सुविधा के साथ खरीदारी पर विशेष छूट दी जायेगी। मौके पर पंकज सोनी क्लाथ सेंटर के प्रोपराइटर पंकज सोनी, मो आशिक, काजू सोनी, वार्ड पार्षद मो मुस्लिम, मो नसीम, मनोज शर्मा, विनोद शर्मा, मो सलीम, मो अमजद, राजेश चंद्रवंशी, मो चांद, विशाल भदानी, मन्नु वर्णवाल समेत कई दुकानदार, राजेश वंद्रवंशी उपस्थित थे।

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