एबीएन डेस्क। लोक आस्था का महापर्व छठ को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है। नहाय-खाय के साथ सोमवार से इस चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत हो गयी है। इसमें व्रतियां 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। दीपावली के बाद छठ पूजा, हिंदुओं का छठ सबसे बड़े त्योहार है। इस व्रत को छठ पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस बार छठ पूजा 8 से 11 नवंबर तक है। उत्तर भारत और खासतौर से बिहार, यूपी, झारखंड में इस त्योहार का बेहद खास महत्व होता है। 8 नवंबर को नहाय खाय : छठ पर्व के पहले दिन घर में जो भी छठ का व्रत करने का संकल्प लेता है, वह स्नान कर साफ या नए वस्त्र धारण करता है। फिर व्रती शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। आमतौर पर इस दिन कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। इस वर्ष नहाय-खाय 8 नवंबर ( सोमवार ) को है। इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 02 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 04 मिनट पर होगा। नहाय-खाय का विधि-विधान : सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर लें। किसी नदी-तालाब में नहाकर शुद्ध वस्त्र पहनें। नहाय-खाय पर भी गंगास्नान संभव हो तो करें। अगर गंगा स्नान सम्भव नहीं हो, तो अपने स्नान के जल में गंगाजल डाल लें। ऐसा करना शुभ माना जाता है। छठ करने वाली व्रती महिलाएं या पुरुष चने की दाल और लौकी की सब्जी बनाएं। खाने में सेंधा नमक का प्रयोग करें। भगवान गणेश और सूर्यनारायण को भोग लगाकर व्रती भोजन को प्रसाद के रुप में ग्रहण करें और घर के सभी सदस्य भी यही खाएं। नहाय-खाय और छठ पर्व के दौरान घर के सदस्य मांस-मदिरा का सेवन न करें। रात को भी घर के सदस्य छना हुआ खाना ही खाएं। व्रत रखने वाली महिला या पुरुष को जमीन पर सोना चाहिए। 9 नवंबर को खरना : खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है। इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 03 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 04 मिनट पर होगा। 10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य : बुधवार शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन सूर्यादय 6 बजकर 03 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 03 मिनट पर होगा। 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य : छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है। इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 04 मिनट पर और सूर्यास्त 5 बजकर 03 मिनट पर होगा। (नोट : सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पटना के अनुसार दिया गया है, शहर के अनुसार इसमें बदलाव सम्भव है।)
एबीएन डेस्क। दीपोत्सव पर राम नगरी अयोध्या रोशनी से पहले से ही नहायी हुई है। लेकिन आज रात एक साथ जलते हुए 12 लाख दीये अमावस्या की रात को चुनौती देते नजर आयेंगे। विकास के नये आयाम गढ़ने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीपावली पर भी रिकॉर्ड बनाने वाले हैं। आज छोटी दीवाली के मौके पर अयोध्या राम की पैड़ी पर 12 लाख दिये जलाए जलाकर योगी यह रिकॉर्ड बनाने वाले हैं। 12 लाख दीयों में 9 लाख दीये सरयू किनारे स्थित राम की पैड़ी और 3 लाख दीये अयोध्या के मठ मंदिरों को रोशन करेंगे। इस आयोजन का गवाह होगा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम अयोध्या नगरी में मौजूद रहेगी और विश्व रिकॉर्ड बनते हुए देखेगी। बता दें, विश्व रिकॉर्ड कायम करने के लिए मिट्टी के दीये को कम से कम 5 मिनट तक जलना होगा। अयोध्या में इस समय पांच दिवसीय दीपोत्सव कार्यक्रम चल रहा है। चूंकि राम मंदिर के कारण अयोध्या विशिष्ट नगरी में शुमार है, इसलिए यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात हैं। मुख्यमंत्री के आयोजन के कारण नया घाट से राम की पैड़ी तक जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। यहां दोनों तरफ बैरिकेडिंग लगाई गई है। सरयू पर बने पुराने पुल पर भी आवागमन बंद किया गया है।सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2017 में अयोध्या में पहली बार दीपोत्सव की शुरुआत की थी। सर्वप्रथम दीपोत्सव का आयोजन 51 हजार दीयों के साथ हुआ था। इसके बाद 2019 में 4 लाख मिट्टी के दीयों को रौशन कर दीपोत्सव मनाया गया था। वहीं 2020 में 6 लाख दीये सरयू के तट पर जलाये गये थे। अब एक बार फिर साल 2021 में योगी आदित्यनाथ सरकार विश्व रिकॉर्ड कायम करने के लिए दीपोत्सव में 12 लाख से ज्यादा दिये रोशन करने जा रही है।
एबीएन डेस्क। एक नंवबर 2021 से आपकी जिंदगी से जुड़े कई बड़े बदलाव होने वाले हैं। जिसका आपकी जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। ये बदलाव LPG, रेलवे और बैंक के अलावा कई चीज़ों से जुड़े हैं, जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि इन नियमों में बदलाव से आपकी जेब प्रभावित होगी। इसका प्रभाव आपके घर के बजट पर भी पड़ेगा। आइए इन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानते हैं। नवंबर के पहले सप्ताह में एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं, क्योंकि हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की नई कीमत जारी होती हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि नवंबर में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक एलपीजी के मामले में लागत से कम मूल्य पर बिक्री से होने वाला नुकसान (अंडररिकवरी) 100 रुपये प्रति सिलेंडर पर पहुंच चुका है। इस वजह से इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस समय दिल्ली और मुंबई में रसोई गैस सिलेंडर का दाम 899.50 रुपये है। अब बैंकों को अपना पैसा जमा करने और निकालने पर चार्ज देना होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने इसकी शुरुआत की है। अगले महीने से निर्धारित सीमा से अधिक बैंकिंग करने पर अलग से शुल्क लगेगा। 1 नवंबर से ग्राहकों को लोन खाते के लिए 150 रुपए चुकाने होंगे। खाताधारकों के लिए तीन बार तक जमा करना मुफ्त होगा, लेकिन अगर ग्राहक चौथी बार पैसा जमा करते हैं, तो उन्हें 40 रुपए का भुगतान करना होगा। वहीं जनधन खाताधारकों को इसमें कुछ राहत मिली है, उन्हें जमा करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा, बल्कि निकासी पर 100 रुपए देने होंगे। एक नवंबर से स्टेट बैंग ऑफ इंडिया (एसबीआई) एक नई सुविधा की शुरुआत करने जा रहा है। इसके तहत पेंशनर्स को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए बैंक नहीं जाना होगा। अब कोई भी पेंशनभोगी वीडियो कॉल के जरिए अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकेगा।बएक नवंबर से मैसेजिंग एप व्हाट्सएप कई स्मार्टफोन पर काम करना बंद कर देगा। अगर आपका फोन आउटडेटेड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहा है तो व्हाट्सऐप चलना बंद हो सकता है। इन फोन में Apple से सैमसंग और सोनी जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। अगर आप नवंबर महीने में बैंक से जुड़े कामकाज निपटाना चाहते हैं तो छुट्टियों का हिसाब-किताब समझना होगा। दरअसल, नवंबर में दिवाली, छठ आदि की वजह से देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 17 दिन बैंक नहीं खुलेंगे। दिवाली और छठ त्योहार को देखते हुए रेलवे ने कई नई स्पेशल ट्रेन शुरू की है। कुछ ट्रेनों का संचालन नवंबर महीने में अलग-अलग तारीखों पर शुरू होगा। ये ट्रेनें देश के अलग-अलग रूट से चलेंगी। इनका रूट मुख्य तौर पर बिहार और उत्तर प्रदेश केंद्रित होगा।
एबीएन डेस्क। देश के कई हिस्सों में आज यानी 24 अक्टूबर को करवा चौथ मनाया जा रहा है। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि यानि आज सुहागिनों ने सूर्योदय के साथ करवा चौथ के व्रत की शुरुआत की है। ये व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ये व्रत पूरा होता है। इसलिए चांद निकलने का व्रत रखने वाली सभी महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है। हालांकि इस साल चांद का दीदार पिछले साल की अपेक्षा थोड़ा जल्दी होगा। इस वर्ष करवा चौथ पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक रहेगा। वहीं करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 11 मिनट है, लेकिन अलग-अलग स्थानों के हिसाब से चंद्रोदय का समय भी भिन्न है। कुछ शहर में इसका दीदार पहले हो जाता है, तो कहीं पर ये थोड़ा वक्त लेता है।देखिए आपके शहर में चंद्रमा कितने बजे निकलेगा : दिल्ली: 08 बजकर 08 मिनट, मुंबई 08 बजकर 47 मिनट, बेंगलुरु 08 बजकर 39 मिनट, लखनऊ: 07 बजकर 56 मिनट, आगरा : 08 बजकर 07 मिनट, अलीगढ़: 08 बजकर 06 मिनट, मेरठ 08 बजकर 05 मिनट, नोएडा 08 बजकर 07 मिनट, गोरखपुर 07 बजकर 47 मिनट, मथुरा 08 बजकर 08 मिनट, सहारनपुर 08 बजकर 03 मिनट, बरेली: 07 बजकर 59 मिनट, रामपुर : 8 बजे, फर्रुखाबाद: 08 बजकर 1 मिनट, इटावा : 8 बजकर 05 मिनट, जौनपुर : 07 बजकर 52 मिनट, कोलकाता: 07 बजकर 36 मिनट, जयपुर: 08 बजकर 17 मिनट, देहरादून: 8 बजे, पटना: 07 बजकर 42 मिनट।
रांची (डॉ ललन शर्मा)। इस पंक्ति को हम सबने अपने पाठ्यक्रमों में जरूर पढ़ा होगा एवं बार-बार पढ़ कर गर्व की अनुभूति भी की होगी। परंतु शायद ही किसी को पता होगा कि 14-15वीं सदी में सुदूर जंगल क्षेत्र की एक आदिवासी राजकुमारी ने केवल महिलाओं को संगठित कर तुर्कों की एक बड़ी सेना को तीन-तीन बार पराजित किया था। भारत का आधुनिक इतिहास इन जैसी वीरांगनाओं को भले ही भूल जाए, पर वो समाज जिसके संपूर्ण अस्तित्व के रक्षण का काम ही जिसने किया हो, वह समाज उसे कैसे भूल सकता है! यही कारण रहा है कि आज भी संपूर्ण उरांव समाज चाहे वह भारत के किसी भी कोने में क्यों ना बसा हो हर 12 वर्ष पर उस उरांव राजकुमारी की वीरता को याद करने एवं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करने हेतु जनी शिकार का उत्सव मनाता है। महीने भर अपनी अपनी सुविधा से हर गांव की छोटी से बड़ी आयु की सभी स्त्रियां पुरुष वेश में जंगल को शिकार करने निकलती हैं, सब के हाथ में कोई ना कोई अस्त्र-शस्त्र यथा तीर-धनुष, कुल्हाड़ी, फरसी, दौवली, बलुआ, हँसुआ आदि अवश्य ही होता है। 14-15वीं शताब्दी के करीब रोहतासगढ़, जो वर्तमान में बिहार के सासाराम के करीब मौजूद है, वहां पर उस समय उरगन ठाकुर (रूईदास) नामक एक उरांव राजा हुआ करते थे, लोगों का मानना है कि वे लोग सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र के वंशज थे। सुरक्षा की दृष्टि से रोहतास गढ़ का किला घने जंगलों के बीच एक ऊंची पहाड़ी पर अवस्थित था परन्तु नीचे समीप में सोन नदी बहती थी इस कारण पशुपालन एवं खेती अच्छी थी, फलस्वरूप उस समय का उरांव साम्राज्य काफी समृद्ध था जिसकी ख्याति दूर दूर तक फैली हुई थी। तुर्कों की बुरी नजर तो उनके साम्राज्य पर बहुत पहले से थी, उन्होंने कई बार रोहतासगढ़ पर आक्रमण भी किया, पर राजा उरगन ठाकुर के कुशल नेतृत्व और सैन्य शक्ति के कारण तुर्कों को हर बार मूँह की खानी पड़ी। थक हार कर तुर्कों ने भेदनीति का सहारा लिया एवं लुन्दरी नामक एक महिला से, जो राजा के यहां दूध पहुंचाने जाती थी, के माध्यम से तुर्कों ने राज्य की कमजोरियों का भेद लिया। लुन्दरी ने तुर्कों को बताया कि बैसाख माह में हर वर्ष विशु सेंदरा का आयोजन होता है एवं उस दिन राज्य के राजा अपनी प्रजा और सैनिकों के साथ शिकार पर जाते हैं एवं खान-पान और नाच-गान के कार्यक्रम में व्यस्त रहतें हैं, तो यह एक सही मौका हो सकता है आक्रमण कर रोहतासगढ़ किले पर जीत हाशिल करने का। यह सुन कर तुर्कों ने रोहतासगढ़ किले पर आक्रमण करने की रणनीति बनाई एवं विशु सेंदरा के दिन अपने सैनिको के साथ हमला करने रोहतासगढ़ पहुंचे। जब तुर्क की सेना वहां पहुंची तो आश्वस्त थी कि वहां पर उनका सामना निहत्थे एवं विशु सेंदरा के उल्लास में नाचते-गाते-झूमते हुए सैनिको से होगा, पर वहां पहुंचने पर किले के अंदर से बड़े-बड़े पत्थरों एवम् तीर-धनुष से उनपर जोरदार आक्रमण हुआ। तुर्की सेना को इस तरह की किसी भी जवाबी कारवाई का जरा भी पूर्वाभास नहीं था, और इससे घबरा कर वे भाग खड़े हुए। इस प्रकार वे लगातार तीन बार मार खा - खा कर पराजित हुए। सिनगी दई के नेतृत्व में रोहतास गढ़ की सेना पहाड़ी से नीचे उतरकर सोन नदी के उसपार तक तुर्कों को खदेड़ चूकी थी, अबतक उनकी सेना की कमर टूट चूकी थी एवं हताश सैनिक वापसी की तैयारी करने लगे थे।
आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित कन्याका परमेश्वरी मंदिर को दशहरा के मौके पर 5 करोड़ 16 लाख रुपये मूल्य के नोटों से सजाया गया है। इस मंदिर में साल के अलग-अलग समय पर देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नौ दिवसीय नवरात्र-दशहरा समारोह के दौरान उन्हें धन की देवी धनलक्ष्मी के रूप में पहना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने मंदिर को सजाने के लिए लंबे समय तक काम किया। सजावट के लिए 2,000 रुपये, 500 रुपये, 200 रुपये, 100 रुपये, 50 रुपये और 10 रुपये के नोटों का इस्तेमाल किया गया है। चार साल पहले 11 करोड़ रुपये की लागत से पुराने कन्याका परमेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। तब से नवरात्रि दशहरा समारोह हर साल भव्य रूप से आयोजित किया जाता है। नेल्लोर शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मुक्कला द्वारकानाथ घटनाओं ने कहा कि 7 किलोग्राम सोना और 60 किलोग्राम चांदी देवी को सुशोभित करने के लिए उपयोग की जाती है।
एबीएन डेस्क। वाकई देश परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। 60 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला पेट्रोल आज 100 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। दशकों पहले एक कड़ी आवाज में कश्मीर को खाली करवाने वाले आज खुद को स्थापित करने में जुटे हैं। अब यह देश उन्हें असहिष्णु लग रहा है। हमेशा डरकर जीने वाले हिन्दू अब हिंदुत्व की आवाज बुलंद कर रहे हैं। ऐसे में हमारे देश के राजनेता आखिर क्यों पीछे रहें। वे भी अपनी डफली अपना राग अलापने में जुटे हुए हैं। भाजपा छोड़ में कांग्रेस में शामिल होने वाले दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू अब कांग्रेस के लिए किसी भष्मासुर से कम साबित नहीं हो रहे हैं। अब तो उनके सहयोगी जैसे कन्हैया कुमार और जिग्नेश जैसे साथी भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। ऐसे में सोशल मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि कचरा हमेशा कूड़ेदान में ही जाता है और अभी वर्तमान समय में कांग्रेस से बढ़िया कोई कूड़ेदान नहीं हो सकता।
जमशेदपुर। जमशेदपुर ने सौम्य रंजन की एक युवा प्रतिभा को देखा है, जो सिर्फ 13 साल की है और उसने 5 किताबें लिखी हैं। उनकी 2 किताबें भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में शुमार हैं। वह विद्या भारती चिन्मय विद्यालय में पढ़ता है जो जमशेदपुर के शीर्ष विद्यालय में से एक है। उनकी प्रिंसिपल सुश्री मीना विल्खु ने भी उनके काम की सराहना की वह कक्षा 8 में पढ़ता है। उसके पिता संजय कुमार टाटा मोटर्स के कर्मचारी हैं और माता सस्मिता दास एक शिक्षिका हैं। सौम्य रंजन अपनी बहन स्मृति और अपने दादाजी के भी आभारी हैं उन्होंने कक्षा छह से लिखना शुरू किया था और अब तक उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह तीरंदाजी भी सीखता है और खेल के प्रति भी जुनूनी है। उनकी किताबों को कई हॉलीवुड और बॉलीवुड सितारों ने सराहा है। वह मिशन लेट स्टार्ट नाम से अपना एनजीओ भी चलाते हैं जहां वह जानवरों की मदद करते हैं और युवा प्रतिभा को भी बढ़ावा देते हैं। वह टीम के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद भी करते हैं।उन्होंने कभी अपना समय बर्बाद नहीं किया बल्कि उन्होंने छह किताबें लिखीं और बच्चों के लिए एक प्रेरणा हैं उनकी नवीनतम पुस्तक सभी प्रमुख स्टोरों में बहुत कम कीमत पर उपलब्ध है। मेरी 6 पुस्तकें हैं नैतिकता का खजाना पाठकों की खुशी, सोने के समय की कहानियां‘ जो छोटे बच्चों के लिए हैं। द वाइटल ट्रूथ एक ऐसी किताब है जो आपके दिमाग को सकारात्मकता से भर देगी। लव अटैक एक ऐसी किताब है जिसमें उन्होंने एक प्रेम कहानी लिखी है जो बहुत ही दिल को छू लेने वाली और भावनात्मक है, और द भारत के राष्टÑीय बेस्टसेलर जहा पर शामिल थे रस्किन बन्ड, सुदीप नागरकर, अजिताभा बोस, अंशुमन भगत, स्तुति चांगल, रोहित दावेसर, हिमांशु राय, आदित्य निघोट, अजय के पांडे और देवांशी शर्मा जैसे 10 सबसे अधिक बिकने वाले लेखक हैं। इस पुस्तक को लिखने के पीछे मुख्य उद्देश्य लेखकों को देना आदर करना है और यह भी कि आप कुछ सीखें। सौम्य रंजनने बताया कि जो पैसा मैं इस किताब से कमाऊंगा वह मेरे एनजीओ में दान कर दिया जाएगा, जिसका इस्तेमाल आगे लोगों की मदद के लिए किया जाएगा। यह पुस्तक युवाओं के लिए एक प्रेरणा लेकर आई है क्योंकि लेखकों ने अपने अनुभव और अपनी यात्रा साझा की है जो निश्चित रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी यह पुस्तक आपको दृढ़ निश्चयी बनाएगी और किसी भी कार्य के प्रति आपकी इच्छा शक्ति को बढ़ाएगी।
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