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Published / 2022-05-28 15:50:50
अब अमूल का आर्गेनिक गेहूं आटा खायेगा इंडिया...

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमूल ब्रांड के तहत प्रोडक्ट्स की पेशकश करने वाली डेयरी कंपनी गुजरात को-आपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडेरेशन लिमिटेड यानी जीसीएमएमएफ ने आर्गेनिक गेहूं आटा की पेशकश करते हुए शनिवार को आर्गेनिक फूड के बाजार में उतरने की घोषणा की। जल्द आएंगे ये प्रोडक्ट्स : जीसीएमएमएफ ने एक बयान में कहा कि इस कारोबार के तहत उतारा गया पहला प्रोडक्ट्स अमूल आर्गेनिक होल व्हीट आटा है। कंपनी आगे चलकर मूंग दाल, तुअर दाल, चना दाल और बासमती चावल जैसे उत्पाद भी बाजार में उतारेगी। आॅर्गेनिक खेती करने वाले किसानों की बढ़ेगी आय : कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस सोढी ने कहा कि आॅर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को एक साथ लाया जाएगा और दूध एकत्र करने के मॉडल को ही इस कारोबार में भी अपनाया जाएगा। इससे आॅर्गेनिक खेती करने वाले किसानों की आय बढ़ेगी और आॅर्गेनिक खाद्य उद्योग को अधिक लोकतांत्रिक बनाया जा सकेगा। किसानों का बाजार से जुड़ाव एक बड़ी चुनौती : बयान में कहा गया कि किसानों का बाजार से जुड़ाव एक बड़ी चुनौती है, वहीं आॅर्गेनिक जांच सुविधाएं भी महंगी हैं इसलिए अमूल आॅर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को बाजार से जोड़ने के अलावा देशभर में पांच स्थानों पर आॅर्गेनिक जांच प्रयोगशालाएं भी स्थापित करेगी। इस तरह की पहली प्रयोगशाला अहमदाबाद में अमूल फेड डेयरी में बनाई जा रही है। जून के पहले हफ्ते से मिलने लगेगा आटा : आॅर्गेनिक आटा जून के पहले हफ्ते से गुजरात में सभी अमूल पार्लरों और खुदरा दुकानों पर मिलने लगेगा। जून के बाद से गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे में भी आॅनलाइन आॅर्डर किया जा सकेगा। एक किलोग्राम आटे की कीमत 60 रुपये और पांच किलो आटा 290 रुपये का होगा।

Published / 2022-05-27 16:09:47
बड़ी कठिन डगर है केदारनाथ धाम तक रेल पहुंचाने की...

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (साई मनीष)। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) केदारनाथ धाम तक बड़ी रेल लाइन बिछाने के पक्ष में नहीं है। आरवीएनएल 73,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली चार धाम रेल परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी है। आठ साल तक इस क्षेत्र का सर्वेक्षण और अध्ययन करने के बाद आरवीएनएल ने एक आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि केदारनाथ तक रेल पटरी बिछाने में कुछ तकनीकी कठिनाइयां हैं और खर्च भी बहुत आएगा। इससे कोई सामरिक मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और भारतीय सेना की सामरिक जरूरतों को देखते हुए यह बड़ी रेल लाइन चार धाम रेल परियोजना के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। अप्रैल में सौंपी गई इस आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है, यह रेल पटरी सुदूर क्षेत्र में बिछाई जाएगी, जहां आबादी काफी कम है। इससे स्थानीय लोगों को भी लाभ नहीं होगा। इन बातों को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ धाम के लिए यह रेल लाइन फायदेमंद नहीं दिख रही है और इससे मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। चार धाम रेल परियोजना दुनिया की सबसे महत्त्वाकांक्षी एवं चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजना है। यह परियोजना शुरू करने का विचार 2014 में आया था। परियोजना के तहत 300 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना है। यह लाइन सुरंगों, पुलों और पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र ढाल से होते हुए यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को जोड़ेगी। ये सभी स्थान उत्तराखंड में हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री को देहरादून के निकट डोईवाला से जोड़ने की योजना थी। इसी तरह ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का विस्तार कर इसे भारतीय सेना के लिए सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण केदारनाथ और बदरीनाथ से जोड़ने की योजना थी। वर्ष 2014 में आरवीएनएल ने एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें चारों स्थानों को जोड़ने के लिए 30 मार्गों का अध्ययन किया था। इसके बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को चमोली जिले में सैकोट से जोड़ने की योजना पर अमल होता। सैकोट से दो रेल लाइन निकलतीं, जिनमें से एक केदारनाथ और दूसरी बदरीनाथ तक पहुंचती। केदारनाथ मार्ग पर सोनप्रयाग तक रेल लाइन बिछाने की योजना था। यह स्टेशन समुद्र तल से 1,654 मीटर ऊंचाई पर बनना था। सोनप्रयाग से केदारनाथ महज 13 किलोमीटर है मगर 3,553 मीटर ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ तक पहुंचने के लिए चढ़ाई काफी दुर्गम है। अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी तुर्की की एक कंपनी को 2018 में सौंपी गई थी। कंपनी ने इस पूरे क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट हाल में सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सैकोट के बाद एक लाइन केदारनाथ की तरफ मुड़ जाएगी और सोनप्रयाग तक जाकर रुक जाएगी। सोनप्रयाग रेलवे स्टेशन से केदारनाथ जाने के लिए 18 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी होती। मगर आरवीएनएल ने देखा कि सैकोट तक तो रेल लाइन आ सकती है मगर उससे आगे मक्कूमठ से सोनप्रयाग तक रेल मार्ग तैयार करना असंभव होगा। कंपनी ने कहा कि विभिन्न भूगर्भीय चुनौतियों और निर्माण से जुड़ी कठिनाइयों के कारण रेल लाइन बिछाना चुनौतीपूर्ण होता। आरवीएनएल ने अपनी आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि केदारनाथ रेल लाइन से कोई रणनीतिक लाभ नहीं मिलता और 214 किलोमीटर लंबाई के कारण ऋषिकेश से सोनप्रयाग तक यह रेल लाइन सड़क मार्ग से भी लंबी होगी। कंपनी ने कहा कि दोनों स्थानों के बीच हवाई सेवा (45 किलोमीटर) शुरू करना वित्तीय लिहाज से भी अधिक फायदेमंद रहेगा।

Published / 2022-05-27 13:07:59
दुखद... इस साल शुरू हुई चारधाम यात्रा से अब तक 91 तीर्थयात्रियों की मौत

एबीएन सोशल डेस्क। इस साल 3 मई को तीर्थयात्रा शुरू होने के बाद से अब तक कुल 91 तीर्थयात्रियों की जान चली गई है। साथ ही 26 मई को यात्रा के दौरान 16 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई थी। वहीं डीजी स्वास्थ्य डॉ शैलजा भट्ट ने इसकी पुष्टि की है। उत्तराखंड की महानिदेशक (डीजी) स्वास्थ्य शैलजा भट्ट ने शुक्रवार को हुई मौतों के पीछे प्राथमिक कारण दिल का दौरा बताया। उनका कहना है, ज्यादातर तीर्थयात्रियों की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। साथ ही, चारधाम में स्वास्थ्य सेवाओं को पहले की तुलना में मजबूत किया गया है। अतिरिक्त 169 डॉक्टरों को तैनात किया गया है। बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में अक्षय तृतीया के अवसर पर 3 मई को श्रद्धालुओं के लिए गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत हुई। इसके अतिरिक्त केदारनाथ के कपाट 6 मई को खुले, जबकि बद्रीनाथ के कपाट 8 मई को खुले।

Published / 2022-05-25 15:41:49
समुद्री तट पर सैकड़ों व्हेलों की मौत से बेपरवाह दुनिया...

एबीएन डेस्क (मनोज शर्मा)। आॅस्ट्रेलिया के वेस्ट कोस्ट तस्मानिया में मार्की हार्बर पर फंसी करीब 460 पायलट व्हेलों के पॉड में से ज्यादातर की मौत हो गई। छिछले तटों की ओर आकर फंसी केवल 50 व्हेलों की जान बचाई जा सकी। दक्षिणी आॅस्ट्रेलिया के तस्मानिया में मार्की हार्बर के पास के छिछले पानी में करीब 460 पायलट व्हेलों का समूह आ फंसा था। तमाम प्रयासों के बावजूद उनमें से केवल 50 व्हेलों को बचाया जा सका। इस पॉड यानि पायलट व्हेलों के समूह के ज्यादातर सदस्य हार्बर के छिछले पानी में थीं जबकि कुछ गहरे पानी की ओर बढ़ने में कामयाब हो गई थीं। पायलट व्हेलें महासागरीय डॉल्फिन की एक किस्म होती हैं, जिसके सदस्य 7 मीटर (23 फीट) तक लंबे और 3 टन तक भारी हो सकते हैं। कम गहरे पानी में जाकर फंस गई व्हेलों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए व्हेलों के पास भारी मात्रा में ठंडा पानी ले जाकर उन्हें एक झूले जैसी चीज पर टांगने की कोशिश की जाती है और इस तरह उन्हें धीरे धीरे गहरे पानी की ओर ले जाकर छोड़ दिया जाता है। तस्मानिया के पार्क्स और वाल्डलाइफ सर्विस के क्षेत्रीय प्रबंधक निक डेका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, हमने एक ऐसा तरीका आजमाने पर सहमति बनाई, जिसमें पहले एक झूले जैसी चीज को व्हेल के नीचे से गुजारा जाता है जो नाव से जुड़ा होता है। इसके अलावा गहरे पानी में भी क्रू मौजूद होता है। बचाव अभियान से जुड़े 60 से भी अधिक लोगों में स्थानीय मछुआरे, स्वयंसेवी और पेशेवर शामिल हैं। इस समय यहां पानी इतना ठंडा है कि खास वेटसूट पहन कर काम करने के बावजूद सभी बचावकर्मी छोटी शिफ्टों में काम कर रहे हैं ताकि ज्यादा ठंड लगने के कारण उन्हें हाइपोथर्मिया नाम की स्वास्थ्य परेशानी का सामना ना करना पड़े। वन्यजीव जीवविज्ञानी क्रिस कार्लयन ने बताया, हम बड़े और संकट में पड़े जानवरों से निपट रहे हैं। ना केवल इसमें कई कई दिन का समय लग जाता है बल्कि भावनात्मक रूप से भी यह काफी कठिन होता है। कार्लयन कहते हैं कि चूंकि यह एक प्राकृतिक घटना है इसलिए यह स्वीकार कर सकते हैं कि कुछ जानवरों की जान जा सकती है। वैज्ञानिकों को अब तक नहीं पता चला है कि हमेशा समूह में यात्रा करने वाली पायलट व्हेलें कभी कभी समुद्र तटों की ओर क्यों बढ़ जाती हैं। स्तनधारियों की यह प्रजाति आम तौर पर किसी नेता के नेतृत्व में चलती है और अपने पॉड में किसी के घायल हो जाने या परेशानी में पड़ने पर उसे अकेला नहीं छोड़तीं और उसके चारों ओर इकट्ठी हो जाती हैं। इस इलाके में अकसर व्हेलों को समुद्री तटों पर देखा जाता रहा है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में इन्हें कभी नहीं देखा गया था। इसके पहले सन 2009 में तस्मानिया के पास करीब 200 भटकी हुई व्हेलें दिखी थीं। आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के पास के इलाकों में कई किस्म की व्हेलें मिलती हैं। हर साल ये व्हेलें छोटे समूहों से लेकर 1,000 जैसी बड़ी तादाद में पॉड बना कर दूर दूर के पानी में माइग्रेट करती हैं। 2018 में भी न्यूजीलैंड में इसी तरह फंसने से एक ही हफ्ते के भीतर 200 से अधिक पायलट व्हेलों की मौत हो गई थी।

Published / 2022-05-24 07:32:37
चारधाम यात्रा : अब तक 65 यात्रियों की गयी जान, केदारनाथ में सबसे ज्यादा मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तराखंड स्थित पवित्र हिन्दू तीर्थ स्थल चारधाम की यात्रा में इस बार श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शनों को पहुंच रहे हैं। कोरोना के दौरान चार धाम यात्रा बंद दो साल तक बंद रही थी लेकिन इस साल यात्रा निर्धारित समय पर शुरू हुई तो हिंदू धर्म के लोगों में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा है। 63 श्रद्धालुओं की मौत : चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 63 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। बताया जाता है कि श्रद्धालुओं की मौत के सबसे अधिक मामले केदारनाथ यात्रा के दौरान दर्ज किए गए हैं। कुल 65 में से 30 मौतें सिर्फ केदारनाथ यात्रा के दौरान हुई हैं। यमुनोत्री में 19, बद्रीनाथ में 12 और गंगोत्री में 4 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। चारधाम यात्रा के दौरान हुई तीर्थयात्रियों की मौत के पीछे सबसे बड़ी वजह दिल का दौरा पड़ने को बताया जा रहा है। अब तक 12 लाख भक्त कर चुके हैं दर्शन : गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में सोमवार शाम तक कुल 12 लाख 1518 (12,01,518) भक्तों ने दर्शन लाभ प्राप्त किए हैं। बदरीनाथ धाम कपाट खुलने की तिथि आठ मई से 22 मई शाम तक कुल 2,81,584 और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 6 मई से 22 मई शाम तक 2,98,234 भक्तों ने दर्शन किए हैं। इस तरह कुल 5,79,818 भक्त यहां दर्शन कर चुके हैं। दूसरी ओर, उत्तरकाशी जनपदान्तर्गत, स्थित गंगोत्री मन्दिर समिति के प्रतिनिधि के अनुसार, 3 मई को कपाट खुलने के बाद सोमवार शाम चार बजे तक कुल 1,82,677 और इसी दिन यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद से आज शाम तक 1,32,870 श्रद्वालुओं ने दर्शन किए हैं। इस तरह इन दोनों धामों पर अभी तक कुल 3,20,947 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस तरह चारों धामों में कुल 12,01,518 ने दर्शन किए हैं। उल्लेखनीय है कि केदारनाथ-बदरीनाथ मंदिरों के आंकड़े नेटवर्क न होने के कारण लगभग एक दिन बाद उपलब्ध हो पाते हैं।

Published / 2022-05-23 13:03:42
21 जून 2022 को मैसूर में होगा अंतरराष्ट्रीय योग का मुख्य आयोजन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मौजूदा वर्ष का अंतराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन दक्षिण भारत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगर मैसूर में होगा जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए बताया कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैसूर में होगा। उन्होंने कहा कि आयोजन में भाग लेने के लिए सभी राज्य सरकारों को आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभागों के प्रतिनिधि भी आयोजन के भागीदार होेंगे। उन्होेंने कहा कि इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के वैश्विक आयोजन उगते हुए सूर्य के देश जापान से आरंभ होंगे और न्यूजीलैंड में संपन्न होंगे। इनका आयोजन संबंधित देश के भारतीय राजदूतावास करेंगे। श्री सोनोवाल ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 75 दिन पहले से योग के आयोजन का काउंटडाउन शुरू कर दिया गया था। इसके अंतर्गत 25वें काउंटडाउन में हैदराबाद में योगाभ्यास का आयोजन होगा जिसमें 10 हजार से अधिक लोग भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से 25 करोड़ से अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

Published / 2022-05-22 15:26:26
52 साल करियर में कुश्ती का एक भी मुकाबला नहीं हारे गामा पहलवान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पहलवान गुलाम मोहम्मद बख्श बट का आज जन्मदिन है। रुस्तम-ए-हिंद की उपाधि से नवाजे गए मोहम्मद बख्श बट गामा का जन्म 22 मई 1878 को अमृतसर में हुआ था और उन्हें द ग्रेट गामा के नाम से जाना जाता है। कुश्ती प्रतियोगिताओं में गामा की सफलता ने उन्हें पूरे भारत में प्रसिद्धि दिलाई। अपने 52 साल लंबे कुश्ती करियर में वह एक भी मुकाबला नहीं हारे। गूगल ने भी उनके जन्मदिन को डूडल से सजाया। 10 साल की उम्र से ही गामा ने अपने नियमति व्यायाम में 500 पुश-अप शामिल कर लिए थे। सन 1988 में गामा ने जोधपुर की एक व्यायाम प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिसमें देशभर से 400 पहलवान आए थे। अंतिम 15 में जगह बनाने के बाद गामा को जोधपुर के महाराज ने विजेता घोषित कर दिया। वहां से दतिया के महाराज ने उन्हें कुश्ती सिखाने की जिम्मेदारी ले ली। उन्होंने 15 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की और 1910 तक गामा ने तभी बड़े पहलवानों को हरा दिया था। वह राष्ट्रीय हीरो और विश्व चैम्पियन के रूप में अखबारों में छपने लगे थे। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई खिताब अर्जित किए, विशेष रूप से 1910 में विश्व हैवीवेट चैम्पियनशिप का भारतीय संस्करण और 1927 में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप, जहां उन्हें टूनार्मेंट के बाद टाइगर की उपाधि से सम्मानित किया गया। प्रिंस आॅफ वेल्स ने अपनी भारत यात्रा के दौरान गामा को सम्मानित करने के लिए उन्हें एक चांदी की गदा भी भेंट की थी। 1947 में बंटवारे के दौरान गामा को कई हिन्दुओं की जिन्दगी बचाने के लिए भी सराहा जाता है। बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए और 1960 में देहांत से पहले तक लाहौर में ही रहे।

Published / 2022-05-22 13:22:00
रघुनाथगंज मंदिर में हुआ नीतू नवगीत का शानदार अभिनंदन

टीम एबीएन, शकूराबाद। रामकथा का वैश्विक संदर्भ विषय पर मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेकर वापस आने वाली बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका और रघुनाथगंज सूर्य मंदिर समिति की अध्यक्ष डॉ नीतू कुमारी नवगीत का ग्रामवासियों ने हार्दिक अभिनंदन किया। रघुनाथगंज सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुष्पगुच्छ और अंग वस्त्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्थान मुंबई की सदस्य के रूप में नीतू नवगीत 1 सप्ताह की यात्रा पर मॉरीशस गई थी जहां उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने के अलावा अलग-अलग कार्यक्रमों में बिहार की खुशबू से लबरेज लोकगीतों की भी प्रस्तुति दी। रघुनाथ मंदिर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने लोकगीतों में प्रभु श्री राम और माता सीता विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया। यहां उन्होंने राम और सीता जी के जीवन से जुड़े लोक गीतों की प्रस्तुति भी की जिसे सभी द्वारा सराहा गया। विश्व हिंदी सचिवालय के अलावा उन्होंने हिंदी प्रचारिणी सभा मॉरीशस, रामायण सेंटर, मॉरीशस तथा पुरोहित संघ मंदिर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। मॉरीशस के विभिन्न केंद्रों पर उन्होंने देखकर रामजी को जनक नंदिनी बाग में बस खड़ी की खड़ी रह गई, जुग जुग जिया तू ललनवा, सिया धिया सुकुमारी, राम जी से पूछे जनकपुर के नारी बता द पहुना लोगवा देत काहे गारी, मिथिला नगरिया निहाल सखिया चारो दूल्हा में बड़का कमाल सखिया, राजा जनक जी के बाग में अलबेला रघुवर आयो जी, बता द पहुना मिथिले में रहू जवने सुखवा ससुरारी में तब ने सुखवा कहीं ना, धना धना भाग अयोध्या, सखी फूल लोर्ढै चलु फुलवरिया सीता के संग सहेलियां, शबरी प्रसंग रहिया निहारे रही कुटिया में सबरी श्री राम जी आएंगे, चित्रकूट के घाट घाट पर तुलसी देखे बाट राम मेरे आएंगे, मन में है विश्वास एक दिन पूरी होगी आस राम मेरे आएंगे, सीता के चढ़ेला हरदिया मनभावन लागे सहित अनेक लोक गीतों की प्रस्तुति दी। डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि मॉरीशस हिंद महासागर में बसा हुआ एक लघु भारत है जहां की मिश्रित संस्कृति में भारतीयता का भाव घुला मिला है। पोर्ट लुइस के समीप अवस्थित गंगा तालाब के पास भगवान शिव और दुर्गा माता की 33 मीटर ऊंची प्रतिमाएँ मॉरीशस में हैं। वर्तमान समय में वहां के प्रधान मंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ और राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन भारतीय मूल के ही हैं। मॉरीशस यात्रा के दौरान साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के सदस्यों की मुलाकात मॉरीशस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी हुई। अभिनंदन समारोह में रघुनाथगंज सूर्य मंदिर समिति के संरक्षक रविंद्र भगत, पंचायत समिति के सदस्य राजेश्वर प्रसाद, शंभू प्रसाद, सुनील प्रसाद, बबलू कुमार, मंटू कुमार, पंकज कुमार, सोनू कुमार, राहुल कुमार, अमन कुमार गुप्ता, भूषण प्रसाद, राजकुमार गुप्ता, सुनीता देवी, आदि उपस्थित रहे। मंच संचालन सुनील प्रसाद ने किया।

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