टीम एबीएन, हजारीबाग। राज्य सरकार के द्वारा दारू हड़िया, शराब आदि बेचकर जीवनयापन करने वाली महिलाओं को मुख्यधारा में लाकर सम्मानजनक जिन्दगी देने के उद्देश्य से संचालित फूलो-झानो अशीर्वाद योजना का असर दिखने लगा है। कटकमसांडी प्रखंड अन्तर्गत बरगड्डा पंचायत की दो महिलाओं को इस योजना से जोड़ते हुए 50-50 हजार रुपए का अनुदान राशि दी गई। गीता देवी पति लीला यादव एवं चिंता देवी पति फूलो यादव को प्रखण्ड प्रशासन के द्वारा बरगड्डा में सरकार के द्वारा आयोजित सरकार आपके द्वार शिविर में सहायता राशि का चेक प्रदान किया। गीता देवी एवं चिंता देवी ने बताया कि बताया कि सरकार की इस योजना की जानकारी स्थानीय सखी मंडल के द्वारा मिलने के बाद गांव के क्रमश: शांति महिला समूह वहीं खुशी महिला समूह ने समूह से जुड़ने एवं अपना सम्मानजनक व्यवसाय करने के लिए फूलो झानो आशीर्वाद योजना से लाभान्वित होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग अब सम्मानजनक व्यवसाय अपने गांव घर में ही करेंगे। पहले दारू/शराब बेचकर मजबूरन परिवार का भरण पोषण करना पड़ता है जिससे हमें अब छुटकारा मिलेगा। उन्होंने प्रशासन व सरकार के द्वारा हम मजबूर ग्रामीण महिलाओं की सुधी लेने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही दारू/हड़िया जैसे कार्य में लगे अन्य महिलाओं को भी सरकार की इस योजना से जुड़कर सम्मानजनक व्यवसाय क अपने परिवार के स्वस्थ्य माहौल बनाने व बच्चों के बेहतर शिक्षण के लिए प्रेरित किया।
टीम एबीएन, चरही (हजारीबाग)। टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा आयोजित अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए ट्रेड अप्रेंटिसशिप भर्ती अभियान 2022 के तहत प्रवेश परीक्षा में बहेरा पंचायत के फुसरी गांव निवासी जगदीश मांझी की पुत्री रीना हेंब्रम और मांझी टोला निवासी स्व कांदो मांझी के पुत्र रवि मुर्मू ने सफलता अर्जित की है। यह परीक्षा टाटा स्टील लिमिटेड ने 23 सितंबर को झारखंड के सभी जिलों के मैट्रिक पास अनुसूचित जनजाति के युवक-युवतियों के लिए अपने जिला मुख्यालय में आयोजित किया था। प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को 6 अक्तूबर और 7 अक्टूबर को टाटा स्टील लिमिटेड के हेड क्वार्टर जमशेदपुर में साक्षात्कार व मेडिकल के बाद चयनित किया गया। जिसके बाद चयनित उम्मीदवारों को दो साल के ट्रेनिंग के बाद टाटा स्टील लिमिटेड के किसी भी एरिया में प्लेसमेंट देकर जॉब दिया जाता है। दोनों चयनित उम्मीदवार ने बताया कि इस सफलता के पीछे माता-पिता और गुरुजनों का मार्गदर्शन प्राप्त है। गांव के रामकिशोर मुर्मू, मन्नू टुडू, यूवा पंचायत सेवी संजय मुर्मू, जगदीश मांझी, जेठूवा मांझी, मनोज टुडू, बढ़ो मांझी, ने दोनों सफल उम्मीदवार को शुभकामनाएं और बधाई दी है।
टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। जमशेदपुर की एक स्कूल छात्रा ने अपनी पॉकेट मनी का इस्तेमाल करके स्कूल में शौचालय बनाया। छात्रा मोनड्रिता चटर्जी ने बताया, 2014 में मुझे प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के भाषण से पता चला कि बहुत सारी लड़कियां स्कूल में शौचालय न होने की वजह से स्कूल छोड़ रही हैं। मोनड्रिता चटर्जी ने बताया कि मैंने 2014 से पॉकेट मनी बचाना शुरू की और 2016 तक मेरे पास 24,000 रुपये थे। मैंने अपने मम्मी-पापा को इसके बारे में बताया तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन से बात की और उन्होंने मदद की। हमने मिशन की शुरूआत एक गांव में 2 शौचालय बनाकर की। इस गांव में करीब 300-350 लोग रहते हैं।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, हजारीबाग विभाग अंतर्गत 4 जिले क्रमश: हजारीबाग, चतरा, कोडरमा एवं गिरिडीह की बैठक आज दिनांक12 अक्टूबर, 2022 को अपराह्न 11 बजे से दो सत्रों में हजारीबाग के बरही स्थित नगर भवन में संपन्न हुई। बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सहमंत्री एवं विशेष संपर्क सहप्रमुख अमरीश सिंह उपस्थित थे। मुख्य वक्ता अमरीश सिंह ने कहा विधमीर्यों ने श्रद्धा एवं आस्था को नष्ट करने के दृष्टि रखकर ही भारतवर्ष के लगभग 30,000 से अधिक मानबिंदुओं को नष्ट किया। उन्होंने कहा अयोध्या में भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम, मथुरा में श्री कृष्ण मंदिर एवं काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर को मात्र क्षति पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आस्था से विमुक्त करना था। हिंदू समाज के असीम आस्था के कारण ही भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर को प्राप्त करने के लिए 76 संघर्ष किए गए इसमें 4.50 लाख से अधिक हिंदुओं ने अपना बलिदान की है। आज हमारा संघर्ष का उत्कर्ष काल चल रहा है। हम अपनी आंखों से भव्य श्रीराम का मंदिर देखने वाले हैं। उन्होंने कहा मंदिर हमारा सामूहिक चेतना का केंद्र रहा है। हमें आज पुन: सत्संग एवं मिलन केंद्र के माध्यम से प्राचीन परंपरा को चलाते हुए हिंदू में नई चेतना का जागरण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा चेतना जागरण से ही गोरक्षा, हिंदू कन्या रक्षा, धर्मांतरण सहित अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक मानबिंदुओं को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रख सकते हैं। उन्होंने कहा वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए हिंदू शक्ति का बढ़ना आवश्यक है, इसलिए हम प्रत्येक गांव में विश्व हिंदू परिषद का हितचिंतक बनायेंगे। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू ने कहा 30 अक्टूबर एवं 2 नवंबर 2022 को हुतात्मा दिवस के अवसर पर सभी जिला केंद्रों में रक्तदान शिविर तथा 6 नवंबर से 20 नवंबर 2022 तक हितचिंतक अभियान पूरे प्रांत में चलाया जाएगा, यह अभियान प्रांत के सभी गांवों में चलेगा। हितचिंतक अभियान को सफल बनाने के लिए100 से अधिक कार्यकतार्ओं ने पूरे समय देने का संकल्प लिया। डॉ साहू ने कहा 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक शौर्य दिवस पर शौर्य संचलन, 23 दिसंबर को धर्म रक्षा दिवस तथा 15 जनवरी 2023 को समरसता दिवस के रूप में पूरे प्रांत में कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह ने कहा प्रत्येक इकाई में संगठन की समिति, प्रत्येक समिति का सत्संग एवं सेवा केंद्र से समाज में एक नई जागरण होगी। समाज के जागरण से ही सामाजिक कुरीतियां दूर हो सकती हैं। हितचिंतक अभियान को सफल बनाने के लिए जिला संयोजक एवं सहसंयोजकों की घोषणा की गई, जिसमें हजारीबाग जिला के लिए अरविंद मेहता को संयोजक एवं गुरुदेव गुप्ता व इंग्लिश सोनी को सहसंयोजक, कोडरमा जिला के लिए राजू यादव को संयोजक एवं पप्पू बरनवाल को सहसंयोजक, चतरा जिला के लिए भुनेश्वर साहू को संयोजक एवं राहुल कुमार को सहसंयोजक तथा गिरिडीह जिला के लिए रामकिशोर शरण को संयोजक एवं कृष्णदेव पांडे को सहसंयोजक घोषित किये गये। बैठक में प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, विशेष संपर्क प्रांत सहप्रमुख अरविंद सिंह, विभाग मंत्री मनोज चंद्रवंशी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी हजारीबाग विभाग झारखंड के विभाग मंत्री मनोज चंद्रवंशी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सोशल डेस्क। श्रीमद्भागवत गीता हिंदू धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है। कुरुक्षेत्र के मैदान में जब अर्जुन के मन में संशय आ गया था तो उस संशय को दूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता वेद व्यास रचित महाकाव्य महाभारत के भीष्म पर्व का एक हिस्सा है। भगवत गीता में एकेश्वरवाद, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग आदि की सुंदर ढंग से व्याख्या की गई है। जीवन के महायुद्ध में जब एक सामान्य मनुष्य तमाम प्रकार की समस्याओं से घिर जाने के बाद किंकर्तव्यविमुढ़ हो जाता है, तो उसे गीता के ज्ञान से प्रकाश प्राप्त होता है। गीता एक ऐसी ईश्वरीय वाणी है जिसमें जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों का सहज ढंग से भगवान श्री कृष्ण ने जवाब दिया है। अथाह ज्ञान का भंडार गीता में 700 श्लोक और 18 अध्याय हैं जिसकी व्याख्या अनेक विद्वानों ने की है। हिंदी जगत की चर्चित लेखिका ममता मेहरोत्रा ने गीता के ज्ञान को सहजता और सरलता से समझाने के लिए गीता प्रश्नोत्तरी पुस्तक में गीता से जुड़े प्रश्नों को अध्याय दर अध्याय प्रस्तुत किया है ताकि स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ-साथ बड़े और बुजुर्ग भी क्विज प्रतियोगिता तथा खेल-खेल में गीता में छुपे रहस्य और संदेशों के अमृत सागर को बूंद-बूंद कर प्राप्त कर सकें। स्व. प्रेम नाथ खन्ना को समर्पित गीता प्रश्नोत्तरी पुस्तक की भूमिका में लेखिका ममता मेहरोत्रा स्पष्ट रूप से कहती हैं कि अपने आप को भगवान के हवाले कर दो, वही सर्वोत्तम सहारा हैं। जिसने इस शस्त्रहीन सहारे को पहचान लिया है, वह भय,चिंता और दुखों से मुक्त हो जाता है। पुस्तक में अर्जुन विषाद योग, सांख्य योग, कर्मयोग, ज्ञान-कर्म-सन्यास योग, कर्म-सन्यास योग, आत्मसंयम योग, ज्ञान-विज्ञान योग, अक्षर ब्रह्म योग, राज विद्याराजगुह्य योग, विभूति योग, विश्वरूप दर्शन योग, भक्ति योग, क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग, गुणत्रय योग, पुरुषोत्तम योग, दैवसुर संपद्विभाग विभाग योग, श्रद्धात्रयविभाग योग और मोक्ष संन्यास योग अध्यायों में 30 से 50 तक प्रश्न रखे गए हैं और फिर उसके उत्तर भी दिए गए हैं। पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी है। साथ ही जो लोग खेल-खेल और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से गीता के विशाल सागर में ज्ञान के मोती चुनना चाहते हैं, उनके लिए भी उपयोगी है। समीक्षित पुस्तक : गीता प्रश्नोत्तरी, लेखिका ममता मेहरोत्रा, प्रकाशक प्रभात पेपरबैक्स, प्रभात प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, 4/19 आसफ अली रोड, नई दिल्ली-110002
टीम एबीएन, रांची (सुधीर शर्मा)। जब मन में हौसला और काम करने का जुनून हो तो जीवन में चुनौतियां भी आसान बन जाती है। रांची की सबिता कच्छप आज समाज के मिथक को तोड़ते हुए न केवल अपने परिवार का सहारा बनी है, बल्कि नौकरी के लिए संघर्ष करने वाले युवाओं के सामने एक आदर्श भी प्रस्तुत कर रही है। रांची के लालपुर की रहने वाली सबिता आज ई-कॉमर्स के पार्सल डिलीवरी का काम करती है। सामान्यतः डिलीवरी के काम में जो तस्वीर सामने उभर कर आती है, वो एक लड़के की होती है। आमतौर पर माना भी जाता है, कि यह काम केवल लड़कों का ही है। लेकिन सबिता ने इस मिथक को तोड़ते हुए चुनौती को स्वीकार किया और आज अपनी मेहनत से अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है। 2016 में ग्रेजुएशन करने वाली सबिता ने कई सपने बुने थे, लव मैरिज की, कुछ दिनों के बाद सबिता ने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन पति ने कुछ दिनों के बाद साथ छोड़ अपने घर से ही दूर चला गया। सबिता ने अपने बच्चे की देखभाल का जिम्मा उठाया और बिना हिचकिचाए अपनी साईकल से ही ई-कॉमर्स के पार्सलों की डिलीवरी शुरू की। पिछले 6 महीनों में पैसे जमा कर किश्तों में स्कूटी भी खरीद ली। अब सबिता पहले से ज्यादा पार्सल डिलीकर कर पाती है। सबिता आज अपने काम से काफी खुश है, वो कहती है, कोई भी काम छोटा नहीं होता। बेशक इस काम में काफी चुनौतियां थी, पहले कस्टमर को फोन करने पर ही चौंक जाते थे, कि एक लड़की पार्सल डिलीवर करने आई है, लेकिन अब सब सामान्य हो गया। सबिता बताती है, वो हर दिन 50 से 60 पार्सल डिलीवर करती है, ई कॉम एक्सप्रेस कंपनी के पे रोल पर है। डिलीवरी की टार्गेट भी होती है और कमीशन भी। वो बताती है कि बेटा साढ़े तीन साल का है उसेे घर में नानी संभालती है, सबिता बताती है कि कंपनी में भी सीनियर्स का बर्ताव काफी अच्छा है और काम के दौरान काफी सपोर्ट करते हैं। सबिता की इच्छा है कि वो अपने बेटे के लिए खूब काम करें, ताकि उसके लालन-पालन में कोई कमी नहीं रहे। आज सबिता को देखकर दूसरी लड़कियां भी इस काम में आ रही है। वो बताती है कि अब उसकी कंपनी में 5 लड़कियों ने यह काम करना शुरू किया है। नई लड़कियों को सबिता ही फील्ड में ट्रेन करती है। समाज के लिए आदर्श है सबिता, करेंगे सम्मानित : रोशनी खलखो- सबिता ने समाज की चुनौतियों को स्वीकार कर न केवल आदिवासी समाज बल्कि युवाओं के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। जब युवाओं की फौज सरकारी नौकरियों के पीछे भाग रही है, वैसे में सबिता ने जिस काम के माध्यम से अपनी जिम्मेदारियों को निभाया है, वह निश्चित रूप से अनुकरणीय है। सबिता के जज्बे को सलाम करते हुए वार्ड 19 की पार्षद रोशनी खलखो ने कहा कि सबिता को वह सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करेंगी, ताकि दूसरी लड़कियां भी सबिता से प्रेरणा ले।
एबीएन सोशल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उज्जैन में श्री महाकाल लोक का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उज्जैन के क्षण-क्षण में पल-पल में इतिहास सिमटा हुआ है। कण-कण में अध्यात्म समाया हुआ है। कोने-कोने में ईश्वरीय ऊर्जा संचारित हो रही है। यहां कालचक्र का 84 कल्पों का प्रतिनिधित्व करते 84 शिवलिंग हैं। यहां चार महावीर हैं। छह विनायक हैं। आठ भैरव हैं। अष्टमातृकाएं हैं। नवग्रह हैं। दस विष्णु हैं। ग्यारह रुद्र हैं। बारह आदित्य हैं। 24 देवियां हैं। 88 तीर्थ हैं। इन सबके केंद्र में राजाधिराज, कालाधिराज महाकाल विराजमान है। यानी एक तरह से हमारे पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा को हमारे ऋषियों ने उज्जैन में प्रत्येक स्वरूप में स्थापित किया है। इसलिए उज्जैन ने हजारों वर्षों तक भारत की संपन्नता और समृद्धि का, ज्ञआन और गरिमा का, सभ्यता और साहित्य का नेतृत्व किया है। इस नगरी का वास्तु कैसा था, वैभव कैसा था, शिल्प कैसा था, सौंदर्य कैसा था, इसके दर्शन हमें महाकवि कालिदास के मेघदूतम में होते हैं। मोदी ने कहा कि बाणभट्ट जैसे कवियों के काव्यों में आज भी हमें यहां की संस्कृति का चित्रण मिलता है। मध्य काल के लेखकों ने भी यहां के स्थापत्य और वैभव का गुणगान किया है। किसी राष्ट्र का वैभव तभी होता है, जब उसकी सफलता का परचम विश्व पटल पर लहरा रहा होता है और सफलता के शिखर तक पहुंचने के लिए यह जरूरी है कि राष्ट्र अपने सांस्कृतिक उत्कर्ष को छुए और अपनी पहचान के साथ गौरव के साथ सिर उठाकर खड़ा हो जाए। आजादी के अमृत काल में भारत ने गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व जैसे पंचप्राण का आहवान किया है। इस वजह से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरी गति से हो रह है। काशी में विश्वनाथ धाम भारत की सांस्कृतिक आध्यात्मिक राजधानी का केंद्र बन रहा है। चार धाम प्रोजेक्ट के जरिये हमारे चारों धाम ऑल वेदर रोड से जुड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, पहली बार करतारपुर साहिब कॉरिडोर खुला है। हेमकुंड साहिब रोपवे से जुड़ने जा रहा है। स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजना से हमारी अध्यात्मिक चेतना के ऐसे कितने ही केंद्रों का गौरव पुनः स्थापित हो रहा है। इसी कड़ी मे महाकाल लोक भी अतीत के गौरव के साथ भविष्य के स्वागत के लिए तैयार हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब हम उत्तर से दक्षिण तक, पूर्व से पश्चिम तक हमारे प्राचीन मंदिरों को देखते हैं तो उनका वास्तु, विशालता हमें आश्चर्य से भर देता है। कोणार्क का सूर्य मंदिर हो या एलोरा का कैलाश मंदिर... गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर भी है। जहां सूर्य की किरणें सीधे गर्भ गृह में प्रवेश करती है। तंजावुर में ब्रह्मदेवेश्वर मंदिर, कांचीपुरम में वरदराजा मंदिर, बेलुर का चन्नकेशवा मंदिर, मदुरै का मीनाक्षी मंदिर, तेलंगाना का रामपप्पा मंदिर, श्रीनगर में शंकराचार्य मंदिर... यह मंदिर बेजोड़ है। न भूतो न भविष्यती के उदाहरण है। जब हम देखते हैं तो सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि उस युग में, उस दौर में किस तकनीक से यह मंदिर बने होंगे। हमारे प्रश्नों के उत्तर भले ही न मिलते हो, पर इसके अध्यात्मिक संदेश हमें आज भी सुनाई देते हैं। जब पीढ़ियां इस विरासत को देखती है, उसके संदेशों को सुनती है, तब एक सभ्यता के रूप में, हमारी निरंतरता और अमरता का जरिया बन जाता है। महाकाल लोक में यह परंपरा उतने ही प्रभावी ढंग से कला और शिल्प के द्वारा उकेरी गई है। यह पूरा मंदिर प्रांगण शिवपुराण की कथाओं के आधार पर तैयार किया गया है। आप यहां आएंगे, महाकाल के दर्शन केसाथ ही आपको महाकाल की महिमा और महत्व के भी दर्शन होंगे। पंचमुखी शिव, उनके डमरू, सर्प, त्रिशुल, चंद्र और सप्तऋषि भी दिखेंगे। इनके भी भव्य स्वरूप यहां स्थापित है। यह वास्तु, उसमें ज्ञान का समावेश महाकाल लोक को सार्थकता को बढ़ाता है। मोदी ने कहा कि शास्त्रों में शिवम् ज्ञानम् ... इसका अर्थ है.. शिव ही ज्ञान है। और ज्ञान ही शिव है। शिव के दर्शन में ब्रह्मांड का सर्वोच्च दर्शन है। यह दर्शन ही शिव का दर्शन है। मैं मानता हूं कि हमारे ज्योतिर्लिंगों कोा विकास भारत के अध्यात्मिक ज्योति का विकास है। भारत का यह सांस्कृतिक दर्शन.. एक बार फिर शिखर पर चढ़कक शिव का मार्गदर्शन करने को तैयार हो रहा है। मोदी ने कहा कि भगवान महाकाल एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जो दक्षिण मुखी है। इसकी भस्मारती पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। हर भक्त भस्मारती जरूर करना चाहता है। भस्मारती का धार्मिक महत्व यहां उपस्थित संत गण ज्यादा अच्छे से बता सकेंगे। भारत की जीवटता और जीवंतता का दर्शन भी करता हूं। अपराजेयता को भी देखता हूं। जो शिव स्वयंभूति विभूषणा.. जो शिव खुद को भस्म को धारण करने वाले हैं, वह नश्वर और अविनाशी है। जहां महाकाल है, वहां काल खंडों की सीमाएं नहीं हैं. महाकाल की शरण में विष में भी स्पंदन होता है। पीएम मोदी बोले कि अतीत में हमने देखा है कि प्रयास हुए कि सत्ता बदले। भारत का शोषण हुआ। उज्जैन की ऊर्जा को भी नष्ट करने के प्रयास हुए। हमारे ऋषियों ने भी कहा कि महाकाल शिव की शरण में मृत्यु भी हमारा क्या कर लेगा। फिर पुनर्जीवित हुआ। फिर उठ खड़ा हुआ। हमने फिर अमरत्व की विश्वव्यापी घोषणा कर दी। भारत ने फिर महाकाल के आशीष पर काल के कपाल पर अस्तित्व का शिलालेख लिख दिया। आज एक बार फिर आजादी के अमृत काल में अमर अवंतिका भारत के सांस्कृतिक अमरत्व की घोषणा कर रही है।
टीम एबीएन, रांची। बिरला पब्लिक स्कूल (विद्या निकेतन) पिलानी राजस्थान 360 डिग्री होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ चाइल्ड को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी के लिए एक प्रेस वार्ता बुधवार दिनांक 12/10/2022 को शाम 4 बजे होटल लैंडमार्क लालपुर में रखा गया है। उक्त जानकारी संजय दलानिया (93344 54009) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय प्रांत मंत्री- सहमंत्री के चार दिवसीय (7से 10 अक्टूबर 2022) अभ्यास वर्ग का समापन आज 10 अक्टूबर 2022 को अपराह्न 1 बजे महाराष्ट्र के मुंबई स्थित लोनावला के महाराजा अग्रसेन भवन सभागार में हुई। समापन सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैया जी जोशी उपस्थित थे। भैया जी जोशी ने कहा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विश्वास के साथ कार्यकर्ता को निरंतर क्रियाशील रहना आवश्यक है। कार्यकर्ताओं के प्रगाढ़ विश्वास से किए गए कार्य के कारण ही हिंदू समाज में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। उन्होंने कहा श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य के निमित्त कई कठिनाइयां आई, परंतु अब मथुरा व काशी का मार्ग हमें आसान हो जायेगा। उन्होंने कहा ईश्वरीय कार्य सदैव पूर्ण होता है, परंतु इसके लिए भी पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। कार्यकतार्ओं का निस्वार्थ एवं प्रमाणिकता भरा कार्य से संगठन के प्रति समाज में विश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा सफलता भरा जीवन एवं सार्थक जीवन में अंतर है यदि कोई मनुष्य सफल हो जाता है तो उसका जीवन सार्थक हो गया ऐसा मानना ठीक नहीं रहेगा अर्थात एक व्यक्ति जिसे स्वयं पर विश्वास रखते हुए किसी विशेष कार्य को लक्ष्य तक पहुंचा देता है तभी उसका जीवन सार्थक होता है। उन्होंने कहा कार्यकर्ता को कार्य करने की प्रेरणा अंदर से आना चाहिए। हमें कार्यकतार्ओं की मन:स्थिति को जानकर तथा उनके उर्जा, रूचि एवं क्षमता को देखते हुए उन्हें दायित्व सौंपकर कार्य करने का प्रेरणा जगाना चाहिए। कार्यकर्ता के अंत:करण के प्रेरणा के कारण ही संगठन का विस्तार एवं समाज में एक नई जागरण को परिलक्षित करता है। उन्होंने कहा सामूहिकता, पारदर्शिता, विकासशीलता व चैतन्यशीलता संगठन के विकास के मूल मंत्र है। केंद्रीय प्रांत मंत्री अभ्यास वर्ग में 4 दिन तक पूरे भारत के लगभग 200 प्रतिनिधि के बीच आगामी 2024 में विश्व हिंदू परिषद के 60 वर्ष पूर्ण होने के निमित्त आगामी हितचिंतक अभियान, संगठन विस्तार, मठ मंदिरों की सुरक्षा एवं व्यवस्था सहित विविध आयामों के करणीय बिंदु पर गहन विचार विमर्श कर योजना बनाई गई। योजना के तहत आगामी 6 नवंबर से 20 नवंबर, 2022 तक हितचिंतक अभियान चलाया जाएगा जिसमें देश के सभी गांवों तक पहुंच कर विश्व हिंदू परिषद के हितचिंतक बनाने का लक्ष्य निर्धारण किया गया। साथ ही साथ परावर्तन (घरवापसी) का भी सभी प्रांतों ने अपना लक्ष्य निर्धारण किया। अभ्यास वर्ग में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद जी परांडे, केंद्रीय संगठन महामंत्री विनायकराव देशपांडे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय सदस्य सुरेश जी सोनी, पूर्व केंद्रीय संगठन महामंत्री दिनेशचंद्र जी, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा, केंद्रीय सहमंत्री अमरीश सिंह, केंद्रीय सह मंत्री राजेश तिवारी, केंद्रीय मंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केंद्रीय सह मंत्री गोपाल जी सहित कई केंद्रीय अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। केंद्रीय प्रांत मंत्री अभ्यास वर्ग में पटना क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, झारखंड प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार,सहमंत्री वीरेंद्र यादव, सहमंत्री रामनरेश सिंह, सहमंत्री रंगनाथ महतो झारखंड के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद के झारखंड प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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