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Published / 2022-06-12 04:33:30
झारखंड : ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में फिसला पैर, अपाहिज हो गई सोना मूनी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में यात्री दुर्घटनाएं देखने को मिल रही हैं। आए दिन देशभर में कहीं न कहीं ट्रेन से यात्रियों के गिरने, फिसलने की घटना सामने आती है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे लगातार जागरुकता कार्यक्रम भी चलाती है लेकिन यात्री फिर भी इससे सबक नहीं लेते। ऐसा एक मामला झारखंड के कोडरमा से सामने आया है, जहां रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या चार पर शनिवार दोपहर पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान 18 वर्षीय युवती का पैर असंतुलित होकर फिसल गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच गिर गई। यात्रियों के सहयोग से जबतक युवती को बाहर निकाला गया, ट्रेन की चपेट में आकर उसके दोनों पैर कट गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बिहार के जमुई निवासी फागू हेम्ब्रम अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ कोडरमा रेलवे स्टेशन पर जल्दीबाजी में पुरुषोत्म एक्सप्रेस में सवार हो रहे थे, उसी दौरान उनकी 18 वर्षीय बेटी सोना मूनी हेम्ब्रम का पैर फिसला और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच में फंस गई जिससे उसके दोनों पैर कट गए। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने तत्काल युवती को बाहर निकाला और उसे कोडरमा सदर अस्पताल में भर्ती कराया। युवती की हालत चिंताजनक बनी हुई है। कोडरमा के सिविल सर्जन ने बताया कि युवती की स्थित नाजुक बनी हुई है और अगर कल तक उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे किसी नजदीकी बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाएगा।

Published / 2022-06-09 15:26:23
रांची : भगवान जगन्नाथ का नया रथ पुराने से तीन गुना होगा भारी

टीम एबीएन, रांची। रांची के धुर्वा में भगवान जगन्नाथ के नये रथ का निर्माण जोरों पर है। ओडिशा के पुरी से आए कारीगर दिन रात मेहनत कर रथ का एक एक हिस्सा जोड़ने में जुटे हैं। भगवान जगन्नाथ के नए रथ के निर्माण की गूंज से पूरी रांची भक्ति से सराबोर नजर आ रही है। ओडिशा से पहुंचे कारीगरों की कारीगरी का अक्श नये रथ में नजर आ रहा है। करीब 40 लाख की लागत से बन रहा नया रथ पुराने रथ से तीन गुना भारी होगा। नए रथ के निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव बताते हैं कि 3 मई यानी अक्षय तृतीया के दिन से इस नए रथ के निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। कारीगरों के मुताबिक 15 जून के बाद से नये रथ की रंगाई पुताई का काम शुरू कर दिया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं इसके निर्माण को लेकर बकायदा जिला प्रशासन की ओर से एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। आइए जानते हैं भगवान जगन्नाथ का नया रथ पुराने रथ से कितना अलग होगा। आकर्षक होगा भगवान जगन्नाथ का नया रथ : नये रथ में 8 पहिये, चार फीट डायमीटर के होंगे। नये रथ की लंबाई चौड़ाई 26*26 फीट, पुराना रथ की 20*20। नये रथ की ऊंचाई 36 फीट, पुराने रथ की थी 25 फीट। नये रथ के सबसे उपर दो उल्टा सुग्गा आमने सामने होगा। लकड़ी और पीतल का अलग-अलग कलश होगा। रथ के सबसे ऊपर नीलचक्र होगा। रथ पर भगवान जगन्नाथ के सामने सुदर्शन चक्र होगा। नये रथ पर तीन स्तर पर बैठने की जगह होगी। रथ पर बने सबसे ऊंचे सिंहासन पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विराजमान होंगे। भगवान जगन्नाथ के सिंहासन के 1 फीट नीचे प्रथम सेवक और पुजारियों का सिंहासन होगा। नये पर चढ़ने के लिए चारों दिशाओं में अलग-अलग द्वार होंगे। भगवान जगन्नाथ के रथ में चार लकड़ी के घोड़े होंगे। करीब 40 लाख की लागत से रथ का हो रहा निर्माण।

Published / 2022-06-09 15:25:01
भारत विश्व गुरु था और अनवरत रहेगा : केशव राजू

टीम एबीएन, धनबाद। विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल झारखंड प्रांत का 10 एवं 07 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग सरस्वती विद्या मंदिर सिनिडीह, कतरास, धनबाद के परिसर में संपन्न हुई। समापन कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्र संगठन मंत्री आकारपू केशव राजू, प्रांत बजरंग दल क्षेत्र संयोजक जन्मेजय कुमार, धर्म प्रसार क्षेत्र प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा, प्रांत कार्याध्यक्ष तिलकराज मंगलम, प्रांत उपाध्यक्ष सुभाष नेत्रगावंकर, प्रांत मंत्री डॉबिरेन्द्र साहु,धनबाद महानगर अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद तिवारी, पूर्व अध्यक्ष रतनलाल अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं भगवान के चित्र पर पुष्प अर्पण करके किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आकारपु केशव राजू ने कहा भारत में विदेशी आक्रांताओं के द्वारा ही देश के हिंदुओं को बांटने का काम किया था। वे देशवासिओं को कहीं जाति, कहीं भाषा, कहीं क्षेत्र आादि में बांटते हुए धर्मांतरण का सदैव षड्यंत्र रचते रहें। उन्होंने कहा भारत हिंदू राष्ट्र रहा है और आज भी सनातनियों का ही देश है। सेकुलरवाद के कारण ही आज प्रांतीय विभेद उठा है तथा अलगाववाद फैला हुआ है। उन्हेंने कहां संस्कृत हमारी प्राचीन पुरातन भाषा है, जो संपूर्ण भाषा की जननी है। उन्होंने कहा बाबर, औरंगजेब जैसे अनेक आक्रांताओं के द्वारा देश के लाखों मानबिंदुओं को क्षति पहुंचाकर भारतीय संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया गया था। आज सभी मानबिंदुओं को उसे सम्मान पूर्वक वापस लेना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा भारत विश्व गुरु था और अनवरत रहेगा। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत कार्याध्यक्ष तिलकराज मंगलम ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि विश्व हिंदू परिषद के प्रशिक्षण वर्ग में 33 एवं बजरंग दल के प्रशिक्षण वर्ग में 131 कार्यकतार्ओं ने पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में 14 शिक्षकों के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा वर्ग में कार्यकर्ताओं ने नियूद्ध (कराटे), लक्ष्यभेद, दंड प्रहार, बाधा, समता, योग, व्यायाम, खेल आदि का प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रांतीय, क्षेत्रीय एवं केंद्रीय अधिकारियों के मार्गदर्शन का भी लाभ लिया। प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कार्यक्रम संचालन करते हुए कहा प्रशिक्षण से कार्यकर्ताओं की दक्षता बढ़ती है एवं समाज में ओजपूर्वक कार्य करते हैं। धनबाद महानगर के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद तिवारी अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर किया, साथ ही सभी प्रकार के सहयोग प्रात करने वालों पर कृतज्ञता प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रशिक्षण वर्ग की व्यवस्था में प्रांत गोरक्षा प्रमुख कमलेश सिंह, बोकारो महानगर अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद तिवारी, धनबाद विभाग बजरंग दल संयोजक रवि वर्मा, देवघर विभाग संयोजक सोनू पांडे, धनबाद बजरंग दल संयोजक नीरज कुमार, लल्लू झा, आनंद महतो, कमल कुमार, विवेक अग्रवाल, विष्णु प्रसाद, सोनू कुमार, भगीरथ पोद्दार, मनोज कुमार, सतीश गुप्ता आदि कार्यकर्ता थे। कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, सह मंत्री वीरेंद्र यादव व रंगनाथ महतो,बजरंग दल संयोजक दीपक ठाकुर, सामाजिक समरसता प्रांत प्रमुख मिथिलेश्वर मिश्र, धनबाद विभाग मंत्री विनय कुमार, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख अरविंद सिंह अर्चक पुरोहित प्रांत प्रमुख बलदेव आचार्य, मठ मंदिर प्रांत प्रमुख डॉ? कश्यप बालगोविंद, धर्मप्रसार प्रांत सहप्रमुख सच्चिदानंद, सत्संग प्रांत प्रमुख शंकर प्रसाद विद्यार्थी, भाजपा नेत्री रागिनी सिंह, विधायक ढुल्लू महतो, रांची महानगर अध्यक्ष कैलाश केसरी, रांची महानगर बजरंग दल संयोजक प्रकाश रंजन, रतन केसरी, कलेश्वर साहू, जगदीश मंडल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू (7033541040) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2022-06-08 05:42:46
ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले जज को मिली धमकी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश के वाराणसी ज्ञानवापी मामले की प्रारंभिक सुनवाई करने वाले न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर को अब तक अनजान एक मुस्लिम संगठन की ओर से मंगलवार को धमकी भरा पत्र मिला है। वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने इस पत्र के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को सूचित कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। दिवाकर ने हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन पूजन करने की अनुमति संबंधी अर्जी पर ज्ञानवापी मस्जिद के वीडियोग्राफी सर्वे का आदेश दिया था। सर्वे के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह मामला वाराणसी जिला जज को हस्तांतरित कर दिया गया था। दिवाकर की अदालत में हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर वजूखाने में एक कथित शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था जिसे इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने नकारते हुए कहा था कि यह फव्वारा है। दिवाकर ने पत्र लिखकर राज्य सरकार को बताया कि उन्हें 07 जून को इस्लामिक आगाज मूवमेंट नामक संगठन की ओर से धमकी भरा पत्र मिला है। दिवाकर ने इसे शासन के संज्ञान में लाते हुए इस पर उचित कारर्वाई करने का अनुरोध किया है। दिवाकर ने पत्र में बताया कि उक्त संगठन का खुद को अध्यक्ष बताते हुए काशिफ अहमद सिद्दिकी नामक व्यक्ति ने संगठन के लेटर पेड पर हाथ से लिखा पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के पते से चार जून को भेजे गये इस पत्र में आरोप लगाया गया है, वर्तमान विभाजित भारत की घृणा भरी राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक वातावरण में अब न्यायाधीश भी केसरिया भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनके तमाम संगठनों को प्रसन्न करने के लिये सुनाते हैं और ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। दिवाकर ने पत्र में कहा कि उक्त व्यक्ति ने उन्हें काफिर बुतपरस्त (मूर्तिपूजक) हिंदू न्यायाधीश करार देते हुए लिखा है कि कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू जज से मुसलमान सही फैसले की आशा नहीं कर सकते हैं। पत्र लिखने वाले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी उग्रवादी हिंदू संगठन बताते हुए आरोप लगाया है कि आरएसएस और उसके आनुषंगिक संगठन गुजरात की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में दंगा कराने की साजिश रच रहे हैं। दिवाकर ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को बताया कि ज्ञानवापी मामले से जुड़े मुकदमे, राखी सिंह आदि बनाम उप्र सरकार आदि की सुनवायी उन्होंने की है, अत: इस संबंध में उचित कार्रवाई करने का कष्ट करें। इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उप्र सरकार ने दिवाकर का पत्र मिलने के बाद उनकी सुरक्षा की समीक्षा प्रारंभ कर दी है। दिवाकर नौ पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा पहले ही मुहैया कराया जा चुका है।

Published / 2022-06-05 16:42:35
योग साधना मनुष्य को हीरा बनाने वाला है : स्वामी मुक्तरथ

टीम एबीएन, रांची। चिन्मय मिशन आश्रम में मासिक योग सत्र के कार्यक्रम में आचार्य मुक्तरथ ने ध्यान योग साधना का अभ्यास कराया। आचार्य मुक्तरथ एवं इनके सहयोगी रजनीश कुमार प्रातः 6:30 से 8 बजे तक योग, प्राणायाम, योगनिद्रा ध्यान एवं संकीर्तन का अभ्यास कराये। सैकड़ों लोग ध्यान का अभ्यास करके तरोताजा हुए। चिन्मय मिशन के संयोजक वेदप्रकाश बागला जी स्वामी मुक्तरथ जी को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किये तथा राजधानी में योग के विस्तार को लेकर चर्चा किये। स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि योग बहुत सरल है, पर हमलोगों का आलस्य साधना में बहुत बड़ा बाधक है। ध्यान करने और कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए शरीर का स्वस्थ व मजबूत होना बहुत आवश्यक है। साथ ही मन का भी सबल होना जरूरी है। स्वामी मुक्तरथ जी राजधानी के विभिन्न जगहों पर एक वर्ष तक लगातार प्रति सप्ताह योग सत्र का संचालन करेंगे।

Published / 2022-06-05 15:13:11
महाआरती के सहारे नदियों के संरक्षण का संकल्प

टीम एबीएन, रांची। नदियों के संरक्षण व संवर्द्धन के उद्देश्य से ‘नदी संरक्षण अभियान’ के बैनर तले विश्व पर्यावरण दिवस को रांची के चुटिया के स्वर्णरेखा तट स्थित इक्कीसों महादेव में महाआरती का आयोजन किया गया। हिंदू युवा संघ, स्वर्णरेखा उत्थान समिति, श्री राम सेना एवम अन्य कई संगठनों के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने स्वर्णरेखा नदी के चट्टानों में उत्कीर्ण नागवंशी कालीन 21 शिवलिंगों को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान करने की मांग के साथ ही राज्य की नदियों के संरक्षण के लिए जागरूकता प्रसार का संकल्प लिया। विदित हो कि नदी संरक्षण अभियान के बैनर तले राज्य की नदियों को बचाने की मुहिम छेड़ी गई है, जिसके अंतर्गत शहर के विभिन्न स्थानों से गुजरने वाली नदियों एवं नदी तटों पर स्थित मंदिर प्रांगण में महाआरती के आयोजन के साथ ही स्थानीय लोगों को नदियों के बचाने के लिए प्रेरित करना है। इस अभियान की शुरूआत आज विश्व पर्यावरण दिवस को सुबह स्वर्णरेखा नदी में सफाई अभियान और शाम को नदी की महाआरती कर की गई। आज के कार्यक्रम में वरिष्ठ पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी, सुधीर शर्मा, धीरेन्द्र कुमार, मोहित चोपड़ा, निशांत यादव, अतुल पांडेय, प्रह्लाद भगत, विक्की शर्मा, रोहित सिंह, रतन केसरी, ऋषि शाहदेव, संजीव वर्मा, सोनू मिश्रा, पुष्पा महली, ललिता ओझा, ममता देवी, पिंकी सिन्हा एवं अन्य कई लोग उपस्थित थे।

Published / 2022-06-05 08:08:26
कड़वा सच : देश में हर 36वें नवजात की एक साल के भीतर हो जाती है मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में जन्म लेने वाला हर 36वां बच्चा एक वर्ष की आयु तक भी जिंदा नहीं रह पाता है। एक साल से पहले ही किसी न किसी कारण उसकी मौत हो जाती है। यानी वह अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाता है। बहुत नवजात शिशुओं की तो 6 महीने और 3 महीने के अंदर ही जान चली जाती है। इसके पीछे कुपोषण और अन्य बीमारियों समेत कई कारण होते हैं। आधिकारिक आंकड़ों से यह पता चलता है कि पिछले कुछ दशकों में नवजात मृत्यु दर में कमी आई है। इसके बावजूद भारत में अभी भी प्रत्येक 36 में से एक शिशु की उसके जन्म के प्रथम वर्ष के अंदर मौत हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट इस दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंंत्रालय को और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पर बल डालते हैं। बता दें कि नवजात मृत्यु दर (IMR) को किसी देश या क्षेत्र के संपूर्ण स्वास्थ्य परिदृश्य के एक अहम संकेतक के तौर पर व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। किसी क्षेत्र में एक निर्धारित अवधि में प्रति एक हजार जन्म पर नवजातों की मृत्यु के रूप में आईएमआर को परिभाषित किया जाता है। यह मृत्यु शिशु के जन्म से एक साल से कम आयु तक की ली जाती है। 1971 में 1000 में 129 शिशुओं की हो जाती थी मौत : भारत के महापंजीयक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, आईएमआर का मौजूदा स्तर 1971 की तुलना में एक-चौथाई कम है। 1971 में जहां प्रति एक हजार जीवित शिशु पर 129 नवजात की मौत हो जाती थी, वहीं वर्ष 2020 के लिए यह आंकड़ा प्रति एक हजार जीवित शिशु पर 28 नवजात की मौत का है। पिछले 10 वर्षों में आईएमआर में करीब 36 प्रतिशत की कमी देखी गई है और अखिल भारतीय स्तर पर आईएमआर का स्तर पिछले दशक में 44 से गिर कर 28 हो गया। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में यह 48 से घट कर 31 हो गया और शहरी इलाकों में यह 29 से घट कर 19 हो गया। इस तरह क्रमश: करीब 35 प्रतिशत और 34 प्रतिशत दशकीय गिरावट प्रदर्शित होती है। जन्म दर में आई बहुत कमी कहा गया है कि पिछले दशकों में आईएमआर में गिरावट के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक 36 में एक नवजात की मृत्यु उसके जीवन के प्रथम वर्ष में हो गई। वर्ष 2020 में अधिकतम आईएमआर मध्यप्रदेश (43) में और न्यूनतम मिजोरम (तीन) में दर्ज की गई। बुलेटिन में कहा गया है कि पिछले पांच दशकों में अखिल भारतीय स्तर पर जन्म दर में काफी कमी आई है जो 1971 के 36.9 से घट कर 2020 में 19.5 हो गई। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में इसका अंतर भी इन वर्षों में कम हुआ है। हालांकि जन्म दर पिछले पांच दशकों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में गामीण इलाकों में अधिक बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में अंतर : पिछले दशक में जन्म दर करीब 11 प्रतिशत घटी है। यह 2011 के 21.8 से घट कर 2020 में 19.5 हो गयी। ग्रामीण इलाकों में इसमें करीब नौ प्रतिशत की कमी आई है, जो 23.3 से घट कर 21.1 हो गई। वहीं, शहरों इलाकों में यह 17.6 से घट कर 16.1 हो गई जो करीब नौ प्रतिशत की गिरावट है।

Published / 2022-06-04 13:25:32
मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को संवर्धित करता है योग : प्राचार्य एसके मिश्रा

टीम एबीएन, रांची। आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 के मद्देनजर एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में साप्ताहिक पाठ्य सहगामी / पाठ्येत्तर क्रियाओं का आयोजन किया गया, जिसमें योगाभ्यास के साथ - साथ कक्षा नवम से द्वादश तक के विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन तथा स्लोगन लेखन, कक्षा षष्ठ से अष्टम तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रांकन तथा पोस्टर निर्माण प्रतियोगियों का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन आयोजनों के दौरान सीबीएसई द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया। मौके पर प्राचार्य एसके मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए योग एवं प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘योग: कर्मसु कौशलम’ गीता वाणी का जिक्र करते हुए कहा कि योग मानवीय संवेदनाओं एवं मूल्यों का विकास करता है। प्राणायाम मानसिक संतुलन, एकाग्रता, बुद्धि एवं चातुर्य विकसित करता है। प्राचार्य के अनुसार आज के विद्यार्थी ही कल के भारत के कर्णधार हैं। उनकी शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति देश के नव निर्माण के साथ-साथ मानवता के विकास में भी सहायक सिद्ध होगी। डीएवी संस्थान बच्चों को मूल्यपरक शिक्षण देने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्प है। योग एवं प्राणायाम सत्र का संचालन विद्यालय के खेल शिक्षक सह योग प्रशिक्षक आशीष जायसवाल के निर्देशन में संपन्न हुआ। सप्ताह भर चले इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।

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