एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आपको भी जुलाई में बैंक जाने की जरूरत महसूस हो रही है तो अपने ब्रांच पर विजिट करने से पहले यह जान लें कि इस महीने बैंकों में कितने दिन की छुट्टियां रहेंगी। रिजर्व बैंक की ओर से जारी छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, जुलाई में कुल 14 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होंगे। दरअसल, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं का विस्तार होने के बाद ग्राहकों को काफी सहूलियत हो गई है और अब उन्हें हर छोटी-मोटी बात के लिए बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। हालांकि, अब भी चेक, पासबुक, ड्राफ्ट जैसी सेवाओं से जुडे़ कई ऐसे काम हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए आपको बैंक की ब्रांच तक जाना ही पड़ेगा। ऐसे में अगर आपको भी बैंक में कोई काम है तो वहां जाने से पहले यह जरूर देख लें कि कहीं बैंक में छुट्टियां तो नहीं हैं। रिजर्व बैंक तय करता है छुट्टियों की तिथि : रिजर्व बैंक हर कैलेंडर वर्ष में बैंकों में छुट्टियों की सूची जारी करता है। इसमें से कई अवकाश राष्ट्रीय स्तर के होते हैं, जिन अवसरों पर पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं बंद रहती हैं। वहीं, कुछ अवकास स्थानीय या क्षेत्रीय स्तर के होते हैं, जिनके अवसर पर उससे जुड़े राज्यों में ही बैंक शाखाएं बंद होती हैं। अलग-अलग राज्यों की छुट्टियों की लिस्ट भी अलग-अलग होती है। जुलाई में कब-कब बंद रहेंगे बैंक : 1 जुलाई : कांग (रथजात्रा)/ रथ यात्रा- भुवनेश्वर और इंफाल में बैंक बंद रहेंगे। 3 जुलाई : रविवार (साप्ताहिक अवकाश)। 7 जुलाई : खर्ची पूजा- अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 9 जुलाई : शनिवार (महीने का दूसरा शनिवार), ईद-उल-अधा (बकरीद)। 10 जुलाई : रविवार (साप्ताहिक अवकाश)। 11 जुलाई : ईज-उल-अजा- जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 13 जुलाई : भानू जयंती- गंगटोक में बैंक बंद रहेंगे। 14 जुलाई : बेन डिएनखलाम- शिलांग में बैंक बंद रहेंगे। 16 जुलाई : हरेला- देहरादून में बैंक बंद रहेंगे। 17 जुलाई : रविवार (साप्ताहिक अवकाश)। 23 जुलाई : शनिवार (महीने का चौथा शनिवार)। 24 जुलाई : रविवार (साप्ताहिक अवकाश)। 26 जुलाई : केर पूजा- अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 31 जुलाई : रविवार (साप्ताहिक अवकाश)।
टीम एबीएन, रांची। गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ नेत्रदान हुआ। भगवान के नेत्रदान के लिए मंदिर के गर्भ गृह से तीनों विग्रहो को बाहर लाया गया। इसके बाद मंगल आरती की गई। मंगल आरती करने के बाद जगन्नाथपुर मंदिर के प्रधान पुजारी की ओर से तीनों विग्रहों का विधिपूर्वक नेत्रदान किया गया। नेत्रदान के बाद भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कतारबद्ध होकर एक-एक श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के दर्शन किये। श्रद्धालु रात 9 बजे तक भगवान जगन्नाथ का दर्शन कर सकेंगे। रात दस बजे आरती के बाद भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के तीनों विग्रहों को गर्भगृह में रख दिया जाएगा। शुक्रवार की सुबह 4 बजे भगवान जगन्नाथ को दैनिक भोग लगाया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद सुबह 5 बजे से भगवान एक बार फिर से आम लोगों के दर्शन के लिए सुलभ हो जाएंगे। दर्शन का कार्यक्रम शुक्रवार की दोपहर 2 बजे तक चलेगा। दो बजे के बाद तीनों विग्रहों को रथ पर आसीन किया जायेगा। भगवान के लिए बनाए गए नये रथ में ही तीनों विग्रहों का श्रृंगार किया जायेगा। सिंगार के बाद सहस्रनाम का जाप किया जायेगा। इसके बाद भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर एक फिल्म बनायी जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर एक फिल्म बनायी जा रही है, जिसका टाइटल ‘मैं रहूं या न रहूं ये देश रहना चाहिए- अटल’ है। फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने इस फिल्म का मोशन पोस्टर रिलीज कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने यह बताया कि इस फिल्म को अगले साल अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती 25 दिसंबर के मौके पर रिलीज किया जाएगा। अटल के मोशन पोस्टर में अटल बिहारी वाजपेयी स्पीच सुनाई दे रही है। इसमें वह कह रहे हैं, सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी जाएंगी, पार्टियां बनेंगी बिगड़ेंगी। मगर ये देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए। अटल को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया है। यह फिल्म अटल बिहारी वाजपेयी पर लिखी गई किताब द अनटोल्ड वाजपेयी पर आधारित होगी। फिल्म को विनोद भानुशाली और संदीप सिंह प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है, जिसकी शूटिंग अगले साल की शुरूआत में शुरू की जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (ठऊअ) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। वह संभवत: देश की अगली राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। हालांकि, यह दुर्भाग्य है कि इतने बड़े पद पर पहुंचने के करीब होने के बाद भी आज उनके पैतृक गांव में बिजली उपलब्ध नहीं है। द्रौपदी मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले के ऊपरबेडा गांव में हुआ है। इस गांव की आबादी 3500 के करीब है और यहां दो टोले बड़ा शाही और डूंगरीशाही हैं। बड़ाशाही में तो फिर भी बिजली उपलब्ध है, लेकिन डूंगरीशाही में आज बिजली नहीं पहुंच चुकी है। यहां के लोग अंधेरे में केरोसीन तेल का इस्तेमाल करके काम चलाते हैं। जब से द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार के तौर पर उभरा है, तब से ही उनका गांव ऊपरबेडा भी काफी चर्चा में है। जब पत्रकारों को इस गांव में बिजली नहीं मिली तो उन्होंने इसको मुद्दा बनाया। आज आलम यह है कि यहां युद्ध स्तर पर बिजली पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा है, जहां राज्य सरकार की तरफ से आदिवासी बहुल इलाके में खंभे लगाने और ट्रांसफार्मर लगान का काम हो रहा है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए सामान्य लोगों ने भी दाखिल किए नामांकन पत्र : बता दें कि अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुछ सामान्य लोगों ने भी अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। इनमें मुंबई के एक झुग्गी निवासी, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के हमनाम, तमिलनाडु के एक सामाजिक कार्यकर्ता, दिल्ली के एक प्रोफेसर आदि शामिल हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा हैं। मुर्मू ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (इखढ) के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा आज राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। अब तक कम से कम 30 अन्य ने भी राज्यसभा महासचिव और चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के समक्ष अपना नामांकन दाखिल किया है। मुंबई के मुलुंड उपनगर में अमर नगर स्लम संख्या एक के निवासी संजय सावजी देशपांडे ने नौ जून को चुनाव की घोषणा के कुछ दिनों बाद अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। बिहार के सारण के रहने वाले लालू प्रसाद यादव, तमिलनाडु के नमक्कल जिले के एक सामाजिक कार्यकर्ता टी। रमेश और दिल्ली के तिमारपुर के प्रोफेसर दयाशंकर अग्रवाल उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। ज्यादातर नामांकन पत्रों में प्रस्तावकों के अनिवार्य नाम नहीं : ज्यादातर नामांकन पत्रों में प्रस्तावकों और अनुमोदकों के अनिवार्य नाम और साइन नहीं हैं या जमानत राशि के रूप में 15,000 रुपये का बैंक ड्राफ्ट नहीं है, इसलिए उन्हें खारिज कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति पद के लिए महाराष्ट्र से कुछ उम्मीदवारों ने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्थानीय सांसदों और विधायकों के नाम प्रस्तावक और अनुमोदकों के रूप में सूचीबद्ध किए हैं, लेकिन हस्ताक्षर वाला कॉलम खाली छोड़ दिया है।
टीम एबीएन, रांची। नारीनीति फाउंडेशन इंडिया द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित नेशनल अवार्ड समारोह का आयोजन नई दिल्ली संसद मार्ग स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब आॅफ इंडिया में किया गया जिसमें बिहार के प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत सहित पूरे देश की अनेक हस्तियों को अपने अपने क्षेत्र में बेहतरीन कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले अतिथियों में भूटान की मशहूर मॉडल पालजोर गायबेक, देश की मश्हूर फैशन डिजाइनर रीना ढाका, बैंगलोर की मशहूर एडुकेशनिस्ट प्रताप यादव, भाविका माहेश्वरी जिन्होंने 9 वर्ष की आयु में पूरा भागवत गीता कंठस्त याद है, गूगल बॉय के नाम से मशहूर कौटिल्य पंडित आदि शामिल रहे। पुरस्कार बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री अमीषा पटेल, प्रसिद्ध भोजपुरी गायक और अभिनेता एवं सांसद मनोज तिवारी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर नारी नीति फाउंडेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर शारदा, कोरियोग्राफर नीतिश चंद्रा, शिक्षाविद माया शंकर, गृह विभाग, बिहार सरकार के स्पेशल सेक्रेटरी आईपीएस विकास वैभव, दिल्ली मेट्रो के डीआईजी आईपीएस जितेंद्र राणा ,एडुकेशनिस्ट कुमार अरुणोदय, मशहूर पेजेंट ग्रूमर लेफ्टिनेंट रीटा गांगवानी (जिन्होंने मिस वर्ल्ड मानुषी चिल्लर को ग्रूम किया था), मिसेज इंडिया सह बिहार की जानी मानी गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर तारा श्वेता आर्या, मरवा स्टूडियो के संदीप मारवा , पूर्णिया सांसद संतोष कुशवाहा, हिंदी खबर नेशनल न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर अतुल अग्रवाल, जनतंत्र न्यूज के एडिटर इन चीफ आशित कुणाल आदि मौजूद रहे। समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए फिल्म अभिनेता सह सांसद मनोज तिवारी ने कहा नीतिश चंद्रा जी द्वारा यह आयोजन देश के युवाओं और देश को समर्पित है जिससे एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा। समारोह का आयोजन देश के मशहूर फैशन डिजाइनर सह मोटिवेशनल स्पीकर नीतिश चंद्रा जी ने किया। नीतीश चंद्र ने बताया कि यह आयोजन इस वर्ष देश के 6 राज्यों में किया जाएगा जिनमे दिल्ली के बाद बैंगलोर, मुम्बई, पटना, लखनऊ, रांची और सिलीगुड़ी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया की लगभग आधी से ज्यादा नदियां दवाओं के कारण दूषित हो रही हैं। नदियों में दवाइयों के कारण बढ़ रहा प्रदूषण भी डराने लगा है, क्योंकि यह प्रदूषण अप्रत्यक्ष तौर पर करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। जर्नल एनवायरमेंटल टॉक्सीकोलॉजी एंड केमिकल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन नदियों के जल का 43.5 प्रतिशत भाग दवाओं के कारण दूषित हो चुका है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ योर्क के शीर्ष अलेजांद्रा बुजस-मोनरॉय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 104 देशों में 1,052 नमूनों का विश्लेषण किया। इनमें सुरक्षित माने जाने वाले स्तरों से अधिक स्तरों पर 23 अलग-अलग दवाओं के मिश्रण मिले। भारत की स्थिति : इसी वर्ष फरवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जैसे निम्न मध्यम आय वाले देशों की नदियों में सबसे अधिक फार्मास्युटिकल प्रदूषण की मात्रा पाई गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली और हैदराबाद के वैज्ञानिकों सहित विल्किंसन और उनके सहयोगियों ने दिल्ली में यमुना नदी और हैदराबाद में कृष्णा और मुसी नदियों सहित 104 देशों में 258 नदियों के 1,052 नमूना स्थलों से नमूनों में दवाओं के अंश का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में चार दवाओं कैफीन, निकोटीन, पैरासिटामोल और निकोटिन का पता चला था। घातक सुपरबग के पनपने का खतरा : झील के अध्ययनों से पता चला है कि गर्भ निरोधक गोलियां व अन्य सिंथेटिक एस्ट्रोजेन हार्मोन जैसी दवाएं इसमें मौजूद पानी को उच्च स्तर तक दूषित करती हैं। वैज्ञानिकों को डर है कि पर्यावरण में रोगाणुरोधी यौगिकों की उपस्थिति दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के निर्माण में योगदान दे रही है, जिससे घातक सुपरबग के पनपने का भी खतरा है। तनाव, एलर्जी, दर्द निवारण और ताकत बढ़ाने वाली दवाइयों के मिले अंश : अध्ययन के दौरान नदी के पानी में तनाव, एलर्जी, मांसपेशियों में अकड़न, दर्द निवारक और ताकत बढ़ाने जैसी दवाइयों के अंश मिले हैं। ब्रिटिश नदियों के पानी में लगभग 70 प्रतिशत भाग में मिर्गी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा कार्बामाजेपिन, अकेले ब्रिटेन में 54 नमूनों की जांच में इस तरह की 50 दवाओं के अंश मिले। अध्ययन के अनुसार 43 प्रतिशत नदियों के नमूनों में केवल 23 प्रतिशत भाग ही सुरक्षित सैंपल का था।
एबीएन नॉलेज डेस्क। कोई इंसान कितनी लंबी आयु तक जिंदा रह सकता है? 100-125 साल तक। यही न! लेकिन दुनिया में जीवों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो सैकड़ों साल तक जिंदा रहती हैं। सबसे पहले आपके मन में कछुए का खयाल आया होगा! क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि कुछ जीव सैकड़ों साल तक कैसे जिंदा रह जाते हैं? शायद रीढ़ की हड्डी (कशेरुकी) वाले अन्य जानवरों के जीवनकाल को समझने से इस रहस्य का खुलासा होने में मदद मिल सकती है। आप भी कछुओं को एक लंबा और धीमा जीवन जीने वाले जीव के तौर पर जानते होंगे। 190 साल की उम्र में, सेशेल्स का जोनाथन नामक विशाल कछुआ भूमि का सबसे उम्रदराज प्राणी हो सकता है। लेकिन कुछ अन्य जीव भी हैं, जो दूसरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं। रिसर्च जर्नल साइंस में प्रकाशित फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर माइक गार्डनर और उनके अन्य साथी शोधकर्ताओं की एक शोध प्रकाशित हुआ है। यह शोध उन अलग-अलग कारणों की जांच करता है, जिनकी वजह से कुछ जीवों की उम्र बहुत लंबी होती है। यह रिसर्च सरीसृप और उभयचरों में दीर्घायु यानी लंबे जीवनकाल और उम्र बढ़ने को प्रभावित करने वाले कारकों की पड़ताल करता है। 77 प्रजातियों के जीवों पर हुई स्टडी : माइक गार्डनर लिखते हैं, हमने सरीसृपों और उभयचरों की 77 विभिन्न प्रजातियों (सभी ठंडे खून वाले जानवर) के दीर्घकालिक डेटा का उपयोग किया। हमारा काम 100 से अधिक वैज्ञानिकों के बीच एक सहयोग पर आधारित है जिसमें जानवरों पर 60 साल तक का डेटा है जिन्हें पकड़ा गया, चिह्नित किया गया, छोड़ दिया गया और फिर से पकड़ा गया। इन आंकड़ों की तुलना गर्म खून वाले जानवरों की मौजूदा जानकारी से की गई, और उम्र बढ़ने के बारे में कई अलग-अलग विचार सामने आए। 1. शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने इस लोकप्रिय विचार के साथ काम किया कि ठंडे खून वाले जानवर जैसे मेढक, सैलामैंडर और सरीसृप लंबे समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि उनकी उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी होती है। 2. इन जानवरों को अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए बाहरी तापमान पर निर्भर रहना पड़ता है। परिणामस्वरूप उनमें चयापचय प्रक्रिया धीमी होती है. चयापचय से मतलब है- जिस दर पर वे जो खाते हैं और पीते हैं उसे ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। 3. जानवर जो छोटे और गर्म खून वाले होते हैं, जैसे कि चूहे, छोटी उम्र के होते हैं क्योंकि उनका चयापचय तेज होता है और कछुए की उम्र धीरे बढ़ती है क्योंकि उनका चयापचय धीमा होता है। 4. इस तर्क से, ठंडे खून वाले जानवरों में समान आकार के गर्म खून वाले जीवों की तुलना में कम चयापचय होना चाहिए। हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि ठंडे खून वाले जानवर समान आकार के गर्म खून वाले जानवरों की तुलना में जल्दी बूढ़े नहीं होते हैं। 5. वास्तव में, शोधकर्ताओं ने जिन सरीसृपों और उभयचरों को देखा, उनमें उम्र बढ़ने की भिन्नता पहले की भविष्यवाणी की तुलना में बहुत अधिक थी। ऐसे में रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों की उम्र के कारणों का पता लगाना अधिक जटिल है। एक अन्य संबंधित सिद्धांत यह है कि पर्यावरणीय तापमान भी जीवों की बड़ी उम्र के लिए एक कारण हो सकता है। उदाहरण के लिए, ठंडे क्षेत्रों में जानवर अधिक धीरे-धीरे भोजन संसाधित करते हैं और उनमें निष्क्रियता की अवधि होती है, जैसे हाइबरनेशन में, जिससे जीवनकाल में समग्र वृद्धि होती है। इस परिदृश्य के तहत, ठंडे क्षेत्रों में ठंडे और गर्म रक्त वाले दोनों जानवर गर्म क्षेत्रों के जानवरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहेंगे। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह एक समूह के रूप में सरीसृपों के लिए सही था, लेकिन उभयचरों के लिए नहीं।
एबीएन सोशल डेस्क। दो साल के लंबे अंतराल के बाद झारखंड के देवघर में इस बार फिर से सावन मेला लगेगा। बाबा नगरी देवघर में इस बार श्रद्धालु भगवान शंकर का दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे। श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर देवघर समाहरणालय में समीक्षात्मक बैठक की गई। इस बैठक की अध्यक्षता देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने की। बैठक के बाद देवघर डीसी ने कहा कि श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर यह बैठक की गई थी। सभी विभागों को दिए गए कार्यों की आज समीक्षा की गई और समय रहते सभी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने बताया कि देवघर मंदिर सहित विभिन्न स्थलों का जायजा भी लिया गया है और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए गए हैं। देवघर बाबा मंदिर में शीघ्र दर्शन की नई व्यवस्था लागू की जाएगी वहीं कांवरिया पथ की तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। दूसरी तरफ कांवरिया पथ में बने होल्डिंग पॉइंट में श्रद्धालुओं को रोका जाएगा। इसके अलावा देवघर बाबा मंदिर के समीप क्यू कांप्लेक्स में भी तीन कमरों में बैरिकेटिंग की गई है। देवघर डीसी ने कहा कि सभी तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, इसके लिए विभिन्न जगह पर होल्डिंग पॉइंट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा देवघर नगर निगम और पेयजल स्वच्छता विभाग को पानी की समुचित व्यवस्था करने और निगम को समुचित सफाई की व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया गया है, जिसमें स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी। डीसी ने कहा कि सभी विभागों के टेंडर हो चुके हैं और सभी के कार्य सुनिश्चित कर इन्हें फील्ड में भी भेज दिया गया है। समय रहते सभी कार्य निष्पादित कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि 13 जुलाई से श्रावणी मेला की शुरुआत हो रही है। कोरोना महामारी के कारण 2 साल के अंतराल के बाद श्रावणी मेला का आयोजन हो रहा है, ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है। बैठक में देवघर एसपी, एसडीओ, डीडीसी सहित सभी विभागों के अभियंता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
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